झारखंड में पारा शिक्षकों को नियमित करने के फॉर्मूले पर लगभग सहमति बन गयी है. राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने आज पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल और उसके पहले वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की.
उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों की सेवा को नियमित करने पर एक हफ्ते के अंदर नियमावली तैयार की जायेगी. पारा शिक्षकों के संघ को भी नियमावली का प्रारूप दिया जायेगा. अगर उसके किसी बिंदू पर असहमति हुई तो सरकार उसमें जरूरी सुधार करेगी.
👉यह फॉर्मूला तैयार हुआ है
शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं लेने का निर्णय लिया गया है. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी पारा शिक्षकों के स्थायीकरण व वेतनमान के लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जायेगी.
टेट सफल को नहीं देनी होगी परीक्षा
राज्य में वर्तमान में लगभग 65 हजार पारा शिक्षक कार्यरत है. इनमें से 13 हजार शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल हैं. शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को अलग से परीक्षा नहीं देनी हाेगी. पात्रता परीक्षा सफल पारा शिक्षकों को सीधे वेतनमान दिया जायेगा.
शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं देंगे, इसकी जगह ली जायेगी सीमित आकलन परीक्षा
👉नियमावली में हो सकता है प्रावधान.
पारा शिक्षक 60 वर्ष तक नौकरी कर सकेंगे.
5200 से 20 हजार का वेतनमान मिलेगा, प्रति वर्ष वेतनमान में तीन फीसदी की बढ़ोतरी
सरकारी कर्मी के समान अवकाश
परीक्षा पास करने के लिए सामान्य वर्ग को 45% अंक लाना होगा
सामान्य वर्ग को छोड़ अन्य वर्ग को 40 फीसदी अंक. सीमित आकलन परीक्षा सौ अंकों की होगी.
पारा शिक्षकों के स्थायीकरण और वेतनमान को लेकर इससे पूर्व नौ जून 2020 को पारा शिक्षकों के साथ शिक्षा मंत्री की बैठक हुई थी. बैठक में सहमति बनी थी कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को वेतनमान दिया जायेगा. जिन शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा पास नहीं हैं, उनके लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जाये या शिक्षक पात्रता परीक्षा, इसके लिए विधि विभाग से राय मांगी थी.
विधि विभाग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा लेने का सुझाव दिया था और पारा शिक्षक इसका विरोध कर रहे थे. अब शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं लेने का निर्णय लिया गया है. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी पारा शिक्षकों के स्थायीकरण व वेतनमान के लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जायेगी।
