Thursday, March 21, 2024
सरकारी अस्पताल में बंध्याकरण कराने पहुंची शोभा की स्थिति बिगड़ी, रिम्स में जिंदगी और मौत से लड़ रही है
Sunday, October 16, 2022
जरूरतमंद व्यक्तियों तक अच्छी और सक्षम विधिक सहायता पहुंचे: न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार सिंह
Wednesday, October 5, 2022
जमशेदपुर में दुर्गा पूजा पर शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला पुलिस को बधाई: सुधीर कुमार पप्पू
रावण की 10 खूबियां जो शायद आप नहीं जानते हों,तो आईए जानें...
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष को दशहरा आज, विजयादशमी का महत्व,आज का दिन अत्यंत शुभ
दशहरा पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है। यह पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इसी दिन पुरूषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध किया था। कुछ स्थानों पर यह त्यौहार विजयादशमी,के रूप में जाना जाता है। पौराणिक मान्यतानुसार यह उत्सव माता विजया के जीवन से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा कुछ लोग इस त्योहार को आयुध पूजा(शस्त्र पूजा) के रूप में मनाते हैं।
दशहरा मुहूर्त
1. दशहरा पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती।
2. यदि दशमी दो दिन हो और केवल दूसरे ही दिन अपराह्नकाल को व्याप्त करे तो विजयादशमी दूसरे दिन मनाई जाएगी।
3. यदि दशमी दो दिन के अपराह्न काल में हो तो दशहरा त्यौहार पहले दिन मनाया जाएगा।
4. इस वर्ष विजयादशमी पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 7.44 बजे से प्रातः 9.13 बजे तक, इसके बाद प्रात: 10. 41 बजे से दोपहर 2.09 बजे तक रहेगा। इसमें भी विजय मुहूर्त दोपहर 2.07 बजे से दोपहर 2.54 बजे तक रहेगा। हालांकि राहु काल दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक रहेगा। राहु काल में किए गए कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता, अतः राहुकाल में शुभकार्य नहीं करने चाहिए।
इस मंत्र का करें जाप
ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्
श्रवण नक्षत्र भी दशहरा के मुहूर्त को प्रभावित करता है जिसके तथ्य नीचे दिए जा रहे हैं:
1. यदि दशमी तिथि दो दिन पड़ती है (चाहे अपराह्ण काल में हो या ना) लेकिन श्रवण नक्षत्र पहले दिन के अपराह्न काल में पड़े तो विजयदशमी का त्यौहार प्रथम दिन में मनाया जाएगा।
2. यदि दशमी तिथि दो दिन पड़ती है (चाहे अपराह्न काल में हो या ना) लेकिन श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में पड़े तो विजयादशमी का त्यौहार दूसरे दिन मनाया जाएगा।
3. यदि दशमी तिथि दोनों दिन पड़े, लेकिन अपराह्ण काल केवल पहले दिन हो तो उस स्थिति में दूसरे दिन दशमी तिथि पहले तीन मुहूर्त तक विद्यमान रहेगी और श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में व्याप्त होगा तो दशहरा पर्व दूसरे दिन मनाया जाएगा।
4. यदि दशमी तिथि पहले दिन के अपराह्न काल में हो और दूसरे दिन तीन मुहूर्त से कम हो तो उस स्थिति में विजयादशी त्यौहार पहले दिन ही मनाया जाएगा। इसमें फिर श्रवण नक्षत्र की किसी भी परिस्थिति को ख़ारिज कर दिया जाएगा।
दशहरा पूजा एवं महोत्सव
अपराजिता पूजा अपराह्न काल में की जाती है। इस पूजा की विधि नीचे दी जा रही है:
1. घर से पूर्वोत्तर की दिशा में कोई पवित्र और शुभ स्थान को चिन्हित करें। यह स्थान किसी मंदिर, गार्डन आदि के आस-पास भी हो सकता है। अच्छा होगा यदि घर के सभी सदस्य पूजा में शामिल हों, हालाँकि यह पूजा व्यक्तिगत भी हो सकती है।
2. उस स्थान को स्वच्छ करें और चंदन के लेप के साथ अष्टदल चक्र (आठ कमल की पंखुडियाँ) बनाएँ।
3. अब यह संकल्प लें कि देवी अपराजिता की यह पूजा आप अपने या फिर परिवार के ख़ुशहाल जीवन के लिए कर रहे हैं।
4. उसके बाद अष्टदल चक्र के मध्य में अपराजिताय नमः मंत्र के साथ माँ देवी अपराजिता का आह्वान करें।
5. अब माँ जया को दायीं ओर क्रियाशक्त्यै नमः मंत्र के साथ आह्वान करे।
6. बायीं ओर माँ विजया का उमायै नमः मंत्र के साथ आह्वान करें।
7. इसके उपरांत अपराजिताय नमः, जयायै नमः, और विजयायै नमः मन्त्रों के साथ शोडषोपचार पूजा करें।
8. अब प्रार्थना करें, हे देवी माँ! मैनें यह पूजा अपनी क्षमता के अनुसार संपूर्ण की है। कृपया जाने से पूर्व मेरी यह पूजा स्वीकार करें।
9. पूजा संपन्न होने के बाद प्रणाम करें।
10. हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम। मंत्र के साथ पूजा का विसर्जन करें।
अपराजिता पूजा को विजयादशमी का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, हालाँकि इस दिन अन्य पूजाओं का भी प्रावधान है जो नीचे दी जा रही हैं:
1. जब सूर्यास्त होता है और आसमान में कुछ तारे दिखने लगते हैं तो यह अवधि विजय मुहूर्त कहलाती है।l
Tuesday, October 4, 2022
आज नवरात्र के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है: महत्व,मंत्र
माँ सिद्धिदात्री, माता के नवम स्वरूप सिद्धिदात्री का महत्व और शक्तियां
माँ सिद्धिदात्री (Maa Siddhidatri): माँ सिद्धिदात्री को माता दुर्गा के नौ रूपों में नौवां स्वरूप माना जाता है। इसलिए सिद्धिदात्री को नौवीं दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। इनका साधक, माँ की कृपा से, अनंत दुख रूपी संसार से विरक्त होकर, सभी सुखों का भोग करके, मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
माँ सिद्धिदात्री (Maa Siddhidatri), महत्व और शक्तियां

नवरात्रि का नवां दिन
इस दिन शास्त्र के अनुरूप पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से साधना करने पर साधक को शास्त्रों में वर्णित सम्पूर्ण सिद्धिया माँ की कृपा से प्राप्त हो जाती है, उसके लिए पुरे ब्रह्माण्ड में कुछ भी दुरूह नहीं रह जाता है।
माँ दुर्गा का, सिद्धिदात्री स्वरुप हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। कमलासन सिद्धिदात्री माता की चार भुजाएँ हैं जिनमें वे दाहिने हाथ में गदा और दूसरे दाहिने हाथ में एक चक्र और दोनों बाएँ हाथों में क्रमशः शंख और कमल है। वह सिंह की सवारी करती हैं।
किंवदंती
देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने प्रत्येक सिद्धिया इनकी कृपा से ही प्राप्त की थी। भगवान शिव के तप से देवी सिद्धिदात्री और शिव का आधा-आधा शरीर का एका हो गया। जिसके बाद शिव को अर्धनारीश्वर (अर्ध नारी अर्ध ईश्वर), शिव और शक्ति का सम्मिलित रूप कहा जाने लगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सिद्धिदात्री का केतु ग्रह पर नियंत्रण है, इसलिए उनकी पूजा करने से आप केतु ग्रह से संबंधित सभी दोषों को दूर कर सकते हैं।
महत्व
मां सिद्धिदात्री नवदुर्गाओं में अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं को शास्त्रीय अनुष्ठानों के अनुसार पूजा करते हुए, भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन सिद्धिदात्री मां पूजा में संलग्न होते हैं। उनकी पूजा पूरी करने के बाद भक्तों और साधकों की सभी प्रकार की लौकिक, पारलौकिक मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सिद्धिदात्री मां के भक्त में कोई ऐसी इच्छा नहीं बची होती है, जिसे वह पूरा करना चाहता हो।
ऐसा माना जाता है कि मां भगवती का स्मरण, ध्यान, आराधना हमें इस संसार की नश्वरता का बोध कराती है, जो हमें वास्तविक परम शांतिदायक अमृतपद की ओर ले जाने वाली है। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से भक्त को सभी सिद्धियां, अणिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वाकसिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि और नव निधियों की प्राप्ति होती है।
सिद्धिदात्री का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
अपने मन, वचन, कर्म और शरीर को निर्धारित विधि-व्यवस्था के अनुसार पूर्ण रूप से शुद्ध और पवित्र होकर माता सिद्धिदात्री की शरण में जाना चाहिए।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि | सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||
यह श्लोक सर्वसाधारण की पूजा करने के लिए सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बा की भक्ति प्राप्त करने के लिए नवरात्रि के नौवें दिन इसे कंठस्थ कर जप करना चाहिए।
Monday, October 3, 2022
नवरात्र के आठवें दिन माता गौरी की पूजा की जाती है,विधि विधान व मंत्र
माता महागौरी - या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है। पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए ये महागौरी कहलाईं।
महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं। ये अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
रूप:- इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए इनको वृषारूढ़ा भी कहा गया है| इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बाँये हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है।
श्रृंगार:- माँ महागौरी को श्वेत चमकदार वस्त्र अर्पित करें उन्हें लाल सफ़ेद फूलों की माला भी अर्पित करें|
पूजा:- महागौरी के आगे घी का दीपक लगाएं| षोडशोपचार पूजन करें| अगर आपके घर अष्टमी पूजी जाती है तो आप पूजा के बाद कन्याओं को भोजन भी करा सकते हैं।
कथा:- हिमालय पुत्री देवी उमा ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए बड़ा ही कठोर तप किया था| उस कठोर तप की वजह से देवी उमा का शरीर काला पड़ गया था जब उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी को दर्शन दिए और उनकी मनोकामना के बारे में पुछा तो देवी ने कहा की प्रभु मैं आपको पति रूप में पाना चाहती हूँ|
भगवान शिव ने उनकी मांग को सहर्ष स्वीकार कर लिया और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में साथ ले जाने का वचन दिया| उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी को गौर वर्ण प्रदान किया जिसकी वजह से देवी उमा को गौरी के नाम से भी जाना जाता है| महादेव की अर्धांगिनी होने की वजह से देवी गौरी का नाम महागौरी पड़ा क्योंकि महादेव के बिना गौरी और गौरी के बिना महादेव अधूरे है| महागौरी का नाम लेने से ही भगवान शिव और देवी पार्वती दोनों की आराधना हो जाती है|
देवी महागौरी का वाहन वृषभ और सिंह दोनों ही हैं|सिंह के देवी का वाहन बनने की कथा बड़ी ही मजेदार है एक बार की बात है जिस वन में देवी तपस्या कर रही थी उसी वन में एक सिंह भी रहता था| एक दिन सिंह भोजन की तलाश में निकला परन्तु शाम होने तक उसे कोई शिकार नहीं मिला भूख से व्याकुल सिंह वापस अपनी गुफा की ओर लौट रहा था| तभी उसकी नज़र तपस्या में लीन देवी उमा पर पड़ी उन्हें देखते ही उसके मुह से लार टपकना शुरू हो गया| परन्तु देवी के तपस्या में लीन होने की वजह से सिंह उनके सामने बैठ गया और देवी की तपस्या के पूर्ण होने का इन्तेजार करने लगा|
तपस्या पूर्ण होने पर देवी ने देखा की सिंह की स्थिति बड़ी जर्जर हो चुकी थी अतः उन्होंने प्रेम पूर्वक उसे अपना वाहन बना लिया| सिंह ने भी तपस्या की थी अतः तपस्या के फलस्वरूप उसे भी देवी के साथ पूजा जाने लगा|
उपासना मन्त्र:- श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददा ||
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
भोग:- माँ महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है| इस से घर में सुख समृद्धि बानी रहती है|
आरती:- जय महागौरी जगत की माया
जय उमा भवानी जय महामाया
हरिद्वार कनखल के पासा
महागौरी तेरा वहा निवास
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा
सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता
' भक्त ' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो
बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका
चौंकाने वाली खबर 🚨 बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...
-
Nationalism is a political, social, and economic ideology and movement characterized by the promotion of the interests of a particular nati...
-
एक बुराई आपकी सारी अच्छाइयों पर पानी फेर देती है और आप देवताओं की नजरों में भी नीचे गिर जाते हैं। विद्वान और प्रकांड पंडित होने से आप अच्छे...
-
लोहरदगा में सुरक्षाबलों को सर्च ऑपरेशन में 200 आईइडी मिले लोहरदगा के कोरगो जंगल में माओवादी दस्ते के साथ मुठभेड़ के बाद सर्च अभियान में सुर...






