Saturday, July 13, 2019

अल्पवयस्क युवती का वैगन आर से अपहरण कर बलात्कार;एक युवक गिरफ्त में , पुलिस पीड़िता को मेडिकल हेतु भेजने की तैयारी में


डुमरी(गिरिडीह) :निमियाघाट थाना क्षेत्र में इसरी की एक नाबालिग युवती का अपहरण कर उसके साथ दो युवकों द्वारा दुष्कर्म करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। बताया जाता है कि शुक्रवार की रात्रि एक नाबालिग युवती को दो युवक जबरदस्ती एक वैगन आर कार में बैठाकर ग्राम करमाटोंगरी ले गए, जहां उन दोनों ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया ၊ हालांकि इसी बीच स्थानीय लोगों को इसकी भनक लग गई। ग्रामीणों ने युवती एवं एक युवक को धर दबोचा एवं पुलिस के हवाले कर दिया ၊ जबकि दूसरा युवक घटना स्थल से भागने में सफल रहा। शनिवार को युवती के पिता ने दोनों युवकों पर अपनी नाबालिग पुत्री का अपहरण कर ले जाने एवं दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने का आरोप लगाते हुए दो नामजद युवकों के विरूद्ध थाना में आवेदन दिया। पुलिस  मिले आवेदन के आधार पर दोनों युवकों के विरूद्ध पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जूट गई । धराए एक आरोपी थाना क्षेत्र का ही  बालुटूंडा ग्राम निवासी रोहित कुमार साव है जबकि दूसरे फरार आरोपी का नाम उसी गांव का बबलू साव है ၊ जिसकी तलाश पुलिस सरगर्मी से कर रही है। इधर युवती को पुलिस ने मेडिकल जांच हेतु गिरिडीह भेज दिया ।

पापा, मुझे माफ कर देना ,यह ९

बरेली के बिथरी चैनपुर सीट से विधायक राजेश मिश्रा उर्फ़ पप्पू भरतौल की बेटी साक्षी मिश्रा ने दलित युवक से शादी करने के बाद  बातचीत में कहा कि मैंने गलती तो की है, लेकिन ऐसे हालात हो गए थे. इसलिए मुझे ऐसा करना पड़ा. पापा मुझे माफ कर देना. बता दें कि साक्षी ने दलित युवक अजितेश कुमार से 4 जुलाई को प्रयागराज के राम जानकी मंदिर में लव मैरिज की है.



वहीं प्रयागराज के राम जानकी मंदिर के महंथ ने मीडिया से कहा कि हमारे यहां कोई शादी होती ही नहीं है, पता नहीं ये लोग कैसे और कहा से कह रहे हैं. इस पर साक्षी मिश्रा ने कहा कि हां ये पंडित उस वक्त मंदिर में नहीं थे, लेकिन हमने तो इनके मंदिर में ही शादी की है. इस पर अतिजेश ने कहा कि पंडित जी किसी दबाव में मत आइए ၊साक्षी मिश्रा अपने भाई विक्की भरतौल से कहा कि तुम मेरे लिए फेसबुक पर पोस्ट लिख रहें हो. उस पर मेरे लिए बहुत गंदे-गंदे बातें लिखे जाते है. चाहे कुछ भी हो जाए मैं तुम्हारी बहन हूं. तुम मेरे लिए क्या इतना भी नहीं कर सकते हो की उन लोगों को एक बार बोलो ၊

Friday, July 12, 2019

इसरी बाजार के मोना शू स्टोर में लगी आग , बारह लाख की सामग्री हुए स्वाहा

 
डुमरी(गिरिडीह) : निमियाघाट थाना क्षेत्र के इसरी बाजार स्टेशन रोड स्थित मोना शू स्टोर 
नामक जूता चप्पल की दुकान में आग लग जाने से दुकान में रखे सारी सामग्री जलकर राख हो गई।अगलगी में दुकान संचालक
लगभग दस से बारह लाख रूपए की नुकसान होने की बात कह रहा है। बताया जाता है कि रात्रि में पहरा देने वाले
एक व्यक्ति ने देखा कि दुकान के अंदर से धुआं निकल रहा है।धुआं निकलता देख वह रात्रि प्रहरी आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी जिसके बाद लोगों ने  इसकी जानकारी दुकान मालिक नारायण पंडित को दिया।सूचना मिलते ही दुकान मालिक एवं स्थानीय पुलिस घटना स्थल पर पहुंच दुकान के दरवाजा खोला।इस दौरान आग ने पूरे दुकान को अपने चपेट में ले लिया और
देखते ही देखते पूरा दुकान जल कर खाक हो गया। स्थानीय लोगों और पुलिस के द्वारा आग पर काबू करने की कोशिश में लगे रहे लेकिन आग पर काबू नहीं पा गए।आग बढ़ते देख इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई।दमकल के पहुंचने पर लगभग तीन घंटों की कड़ी 
मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। बताते चलें कि जिस दुकान में आग लगी थी उसके अगल बगल में भी दर्जनों दुकानें हैं और ऊपर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी स्थित है। गनीमत की बात यह रही कि समय रहते दमकल की गाड़ी, स्थानीय लोग और प्रशासन की मदद से आग पर काबू पा लिया गया और आसपास के दुकानों को जलने से बचा लिया गया।फिलहाल आग लगने का कारण शॉर्टसर्किट बताया जा रहा है।

Thursday, July 11, 2019

बिहार : शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और ट्रक से कुचलकर 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई


 
navbharat times
सांकेतिक तस्वीर
  • बिहार के लखीसराय में बुधवार देर रात शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और ट्रक से कुचलकर 8 लोगों की मौत हो गई
  • हादसे में 6 लोग घायल भी हो गए, घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम लगाया
  • इन लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया ၊
लखीसराय
बिहार के लखीसराय में बुधवार देर रात शादी की खुशियां मातम में बदल गईं और ट्रक से कुचलकर 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में 6 लोग घायल भी हो गए। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग एक बेकाबू ट्रक की चपेट में आ गए। इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम लगा दिया और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इलाके में पुलिसबल तैनात किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, लखीसराय के हलसी बाजार में एक शादी चल रही थी, जहां के लिए थाना क्षेत्र के गढ़ी विशनपुर गांव से बारात आई थी। इसी शादी में मौत बनकर आए एक अनियंत्रित ट्रक ने कुछ लोगों को कुचल दिया।
कई की हालत गंभीर
ट्रक पहले बिजली के खंभे से जा भिड़ा, उसके बाद कई लोगों को कुचलता चला गया। इससे 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में 6 लोग जख्मी हो गए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर वहां से फरार हो गया

मुंबई: यहाँ के सैकड़ों नालों में से गोरेगांव नाले में गिरा 2 साल का बच्चा, सर्च ऑपरेशन जारी




मुंबई के गोरेगांव इलाके में बुधवार देर रात एक बच्चा खुले नाले में गिरकर पानी में बह गया. बच्चे का नाम दिव्यांशु और उसकी उम्र करीब 2 साल बताई गई है. हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और बीएमसी की टीमें मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने बच्चे की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया. हांलाकि, अभी तक बच्चे का कुछ पता नहीं चला सका है. बच्चे के नाले में गिरने की पूरी घटना वहां पास ही लगे सीसीटीवी में कैद हो गई.

खुले नाले में गिरता दिखा बच्चा

दिव्यांशु के नाले में गिरने के सीसीटीवी में वीडियो में साफ देता है कि मुंबई के गोरेगांव इलाके में चहलकदमी हो रही है. तभी दिव्यांशु अपने घर से खेलता हुआ सड़क पर आ जाता है, लेकिन जैसे ही वो वापस जाने की लिए मुड़ता है, उसका पैर फिसल जाता है और वो खुले नाले में गिर जाता है. दिव्यांशु पानी  के तेज बहाव में बह जाता है जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त कोई मौजूद नहीं था.

घटना के महज 20 से 30 सेकंड बाद दिव्यांशु की मां उसे ढूंढते हुए आती है, लेकिन उसके बेटे का कुछ पता नहीं चलता है. जब पास की मस्जिद में लगे सीसीटीवी को देखा गया तो दिव्यांशु खुले मैनहॉल में गिरता हुआ दिखाई देता है. इसे देख सबके होश उड़ गए. दिव्यांशु के मां-बाप का रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं पुलिस और बीएमसी की टीम बच्चे की तलाश में जुटी हुई हैं.

घटना के तुरंत बाद ही लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी. रात भर आस-पास के सभी नाले को खोलकर दिव्यांसु की तलाश की जा रही है ၊ लेकिन दिव्यांशु का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इस घटना के लिए पूरी तरह बीएमसी जिम्मेदार है. अगर बीएमसी खुले गटर को ढक कर रखती तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता, फिलहाल तलाशी का अभियान चल रहा है.

Wednesday, July 10, 2019

सम्पूर्ण झारखंड में निजी विद्यालयों द्वारा चरण वद्ध आंदोलन किया जाएगा -राम रंजन सिंह


संपूर्ण झारखंड में निजी विद्यालय चरण वद्ध आंदोलन करेगा  -राम रंजन सिंह

सरकार ने कभी छोटे निजी विद्यालयों को सहयोग नहीं किया
न्यूज डेस्क ၊
पाकुड़ ၊ झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, राँची निजी विद्यालयों के मान्यता के लिए राज्य भर में चरणबद्ध आंदोलन करेगा । उपयुक्त बाते झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन रांची  के महासचिव राम रंजन सिंह ने योग भवन प्रशाल में झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन जिला इकाई पाकुर की बैठक में कहीं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश महासचिव राम रंजन कुमार सिंह न कहा कि झारखंड सरकार द्वारा झारखंड निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली 2011 की नियम 22(5) के अधीन प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियमावली 2011 में  पत्रांक 629 दिनांक 25.04.2019 के द्वारा संशोधन किया गया । जिसे प्रदेश में लागू किया गया है , उक्त आदेश के अनुसार निजी विद्यालयों को मान्यता का मिलना कठिन ही नहीं , असंभव है, परिणाम स्वरूप 90% से अधिक विद्यालय बंद होने के कगार पर खड़े हो जायेंगे । 
       
ज्ञात हो प्रदेश में आरटीई 2011 में लागू किया गया तब से मान- मानक को पूर्ण करते हुए प्रदेश के सभी जिलों के निजी विद्यालयों ने प्रपत्र 1 में मान्यता के लिए आवेदन जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में समर्पित किया था और अद्यतन समस्त प्रक्रिया को पूर्ण किया । लेकिन आज तक मान्यता के नाम पर सिर्फ भया दोहन और शोषण ही किया जाता रहा । वर्तमान समयानुसार शिक्षा का संपूर्ण दायित्व निजी विद्यालय के कंधों पर है । जबकि निजी विद्यालय सरकार से एक भी पैसा नहीं लेती है और ना ही सरकार से किसी प्रकार का सहयोग ही प्राप्त करती है । निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे हमारे देश ,प्रांत और समाज के ही हैं फिर इनके साथ सौतेला व्यवहार क्यों  ? सरकारी विद्यालय में सरकार के द्वारा शिक्षा को छोड़कर हर सुविधा दी जाती है ,लेकिन निजी विद्यालय के बच्चों को  कोई सुविधा नहीं ।  बड़े ब्रांड के निजी विद्यालय के द्वारा किए गए कार्यों का खामियाजा मध्यम और निम्न स्तर की विद्यालय को भोगना पड़ता है ।* 
       
अब वर्तमान नियमानुसार मान्यता की प्रक्रिया पूर्व से कठिन बना दिया गया है तर्क दिया गया कि निजी विद्यालय  आर.टी.ई. 2009 की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं , इसलिए मान्यता नहीं दी जा रही है । जिले में सरकारी विद्यालय में आरटीई का अनुपालन नहीं होती है शिक्षा नहीं दी जा रही है , निजी विद्यालय में छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक क्षेत्र में नींव डालने का कार्य निजी विद्यालय करते हैं और नाम शोहरत सरकारी विद्यालय कमाते हैं । किसी भी सरकारी प्राथमिक मध्य विद्यालयों में प्रयोगशाला, खेल का मैदान , विद्यालय के लिए मान मानक के आधार पर जमीन उपलब्ध नहीं है , फिर भी वहां सरकार का लेबल लगा है तो आरटीई की कोई पूछ नहीं होती इससे स्पष्ट है कि सरकार को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं, वह सिर्फ मध्यम और छोटे विद्यालयों को बंद करवा कर पूंजीपतियों के हाथों बड़े स्कूलों को सौंपना चाहती है ।*
         *आप गौर करें कि प्रदेश में मध्यम एवं निजी विद्यालयों की कुल संख्या लगभग 15000 , उक्त विद्यालयों में शिक्षक शिक्षकों की संख्या लगभग तीन लाख , विद्यालयों में सेवक सेविकाओं ,वाहन चालक की संख्या लगभग एक लाख से अधिक हैं। ये सभी प्रदेश सरकार की नई शिक्षा नीति के कारण बेरोजगार हो जाएंगे , जिसकी संपूर्ण जवाब देगी प्रदेश सरकार की होगी । ये सभी शिक्षित बेरोजगार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे , केंद्र सरकार भी शिक्षित बेरोजगार को रोजगार से जोड़ने पर बल देती है, लेकिन प्रदेश सरकार रोजगार तो देती नहीं, स्वयं के बलबूते पर रोजगार खड़ा करने वाले निजी विद्यालय के शिक्षित बेरोजगार को और बेरोजगार बना देना चाहती है । 
         एसोसिएशन सरकार से मांग करती है कि-
1. जमीन संबंधी बाध्यता को समाप्त कर विद्यालय की यथास्थिति पर मान्यता प्रदान करें ।*
*2. शिक्षा लेना और देना प्रत्येक भारतवासी का जन्मसिद्ध अधिकार है , इस अधिकार से किसी निजी विद्यालय को वंचित नहीं किया जाए।*
*3. मान्यता के लिए नियम को सरल बनाते हुए शिक्षा को व्यवसायीकरण होने से बचाया जाए ।*
*4. सरकार निजी विद्यालयों को जमीन उपलब्ध करा दें, विद्यालय प्रबंधन समिति ईंट और गाड़े की व्यवस्था कर स्वंय विद्यालय का निर्माण करा लेगी ।*
5.  निजी विद्यालयों को निरीक्षण शुल्क और सावधि जमा राशि से मुक्त किया  जाए ।
6. विद्यालयों की मान्यता पर विचार जिला प्रारंभिक समिति का आकार छोटा किया जाए और एसोसिएशन के अध्यक्ष , सचिव को भी इस समिति में शामिल किया जाए ।
7.अग्निशमन से एनओसी लेना काफी कठिन बना दिया गया है,इसे भी लचीला बनाया जाय ।
8.  न्यास/ सोसायटी एवं  विद्यालय प्रबंधन समिति के द्वारा संचालित विद्यालयों को मान्यता दी जाए। मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष जे दत्ता सचिव राजकुमार भगत कोषाध्यक्ष मनोज कुमार भगत उपाध्यक्ष जवाई रियल मुर्मू प्राचार्य कुश जी, फेकरूल शेख रफीकुल आलम रविंद्र पाल साधना ओझा मुकेश कुमार कोलियस मुर्मू अन्य 60 विद्यालयों के प्राचार्य एवं संचालक में उपस्थित थे।

Tuesday, July 9, 2019

सरकारी स्कूलों की शिक्षा को रसातल में पहुँचाकर अब प्राईवेट स्कूलों की गुणवत शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़

 
न्यूज डेस्क ၊ एक समय था जब सरकारी स्कूलों का स्तर अच्छा होता था। आजादी के बाद की दो पीढिय़ों ने सरकारी स्कूलों से पढ़कर ही अपना स्वर्णिम भविष्य निर्माण किया। किन्तु बढ़ते राजनैतिक दखल, तंत्र में अच्छे शिक्षकों की अनदेखी, शीर्ष स्तर पर शिक्षाविदों के स्थान पर नौकरशाहों के आगमन, स्थानीय स्तर पर कामचोरों को राजनैतिक संरक्षण एवं भ्रष्ट तथा विवेक शून्य शिक्षा अधिकारियों की फौज ने सरकारी विद्यालयों को रसातल में पहुंचा दिया। जनता के हजारों करोड़ रुपये के खर्च से जो तंत्र चलता है और जिनके आधार पर उनकी रोजी-रोटी और शान-शौकत चलती हैं उनमें अपने बच्चों को भेजने के बारे में यह वर्ग सोच भी नहीं सकता।
 आज विचारणीय प्रश्न यह है कि जिन प्रवृत्तियों के चलते सरकारी शिक्षा रसातल में गई, वही प्रवृत्तियां आज प्राइवेट विद्यालयों को डंस रही हैं। प्रखण्ड व जिला स्तरों के कार्यालयों में बैठे शिक्षा अधिकारियों एवं राजधानी के निदेशालय में बैठे नौकरशाहों को यह बात हजम नहीं हो रही कि प्राइवेट स्कूलों का प्रशासन उनके इशारों पर क्यों नहीं नाचता। बस यही बात उन्हे घुन की तरह खाए जाती है और इसी कारण पिछले आठ वर्षों से प्राइवेट स्कूलों में सरकार की दखलअंदाजी बढ़ती जा रही है। सिफारिशों से दाखिले, सिफारिशों से नियुक्तियां, सरकारी कार्यक्रमों में मनमाने ढंग से छात्रों, अध्यापकों का समय बर्बाद करना, स्कूलों के भवनों, वाहनों का मनमाने तरीके से अधिग्रहण इस दखलअंदाजी के जीवंत नमूने हैं। नम्बर एक और नम्बर दो की खातिरदारी इससे अलग है।
उनके मुताबिक रही सही कसर धारा 134ए ने पूरी कर दी है। गरीब बच्चों के दाखिले के नाम पर तथाकथित शिक्षा अधिकारियों के हाथ में स्कूलों को हड़काने का चाबुक थमा दिया गया है। मनमर्जी से शिक्षा अधिकारी स्कूलों में घूम-घूम कर नया इंस्पैक्ट्री राज कायम करने में मशगूल है। अभी देखते जाइए जैसे-जैसे मई में तापमान बढता है, सरकारी मास्टर स्कूलों की छुट्टी की बाट जोहने लगेंगे और जैसे ही विभाग की घोषणा होगी तमाम शिक्षा अधिकारी घूम-घूम कर इस हुक्म की तामील में जुट जाएंगे और पक्का बंदोबस्त करेंगे कि कोई प्राइवेट स्कूल बच्चों को पढ़ाने की हिमाकत न कर पाए।
 कैसा दुर्भाग्य है कि सरकारी स्कूलों की दुर्दशा बयान करती नसीहत को कोई नहीं सुन रहा और शिक्षा प्रेमी होने का दंभ भरने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्राईवेट स्कूलों को बर्बाद करने का लाईसैंस भ्रष्ट शिक्षा अधिकारियों के हाथ में सौंप दिया है। अब तो प्राईवेट स्कूलों का भगवान ही मालिक है।

Monday, July 8, 2019

मुजफ्फरपुर बिहार की अध्यापिका कृष्णा रानी, नहीं है किसी सेलेब्रिटी से कम यह महादेव भक्त


तहलका न्यूज डेस्क ၊ मुजफ्फरपुर बिहार की अध्यापिका कृष्णा रानी जो  सावन के प्रत्येक रविवार को सुल्तानगंज बिहार से जल उठा कर 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को जलार्पण करती हैं।
         सावन भर चलने वाले कांवड़ यात्रा में एक डाक बम का भी नियम होता है। डाक बम का मतलब होता है जल उठाने से 24 घंटा के अंदर बिना रुके जल चढ़ाना। कृष्णा रानी जिन्हें अब कृष्णा बम के नाम से प्रसिद्धि मिली है वे प्रत्येक रविवार को जल उठाती हैं और 16 से 18 घंटे के बीच में देवघर पहुंचकर जल चढ़ा देती है।
68 वर्षीय कृष्णा बम का यह कार्य पिछले कई वर्षों से अनवरत चलता आ रहा है लेकिन बहुत कम लोगों को जानकारी थी।इधर चार-पांच वर्षों से अन्य कांवड़िए और श्रद्धालु यात्रा में उनकी एक झलक पाने के लिए व्याकुल रहते हैं और जो जहां से देख लेता है वहीं से नमन करते हुए आशीर्वाद लेता है। पहले यह अकेले चलती थी, कोई जान नहीं पाता था ၊ लेकिन अब पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन ने इनके सुरक्षा में पुलिस कर्मियों को लगा दिया है ၊ सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी भी परेशान हो जाते हैं। क्योंकि कृष्णा बम जब जल को उठा लेती हैं तो अपने वेग को कम नहीं होने देती हैं ၊ उनका कदम सीधे देवघर स्थित अपने अराध्‍य भोले शंकर के दरबार बैजनाथ मंदिर में ही रुकता है।

ब्रिटिशर मैकाले ने हमें अशिक्षित माना था,पर यह भी तय है कि उसने हमें शिक्षित करने का ईमानदार प्रयास किया था


  न्यूज डेस्क ၊ इतना तो तय है कि लॉर्ड थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने हमें अशिक्षित माना था. पर यह भी तय है कि उसने हमें शिक्षित करने का ईमानदार प्रयास किया था.                     ब्रिटिश सरकार ने उस वक़्त ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में शिक्षा के लिए एक लाख रुपये आवंटित करने का हुक्म दिया था, उस समय यह बहस उठी था कि किस माध्यम से पढ़ाया जाएगा. देशज या कुछ और?                                                                   इंग्लैड के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में बोलते हुए मैकाले ने कहा था, ‘ये हम पर निर्भर करता है कि हम भारतीयों के साथ किस प्रकार बर्ताव करना चाहते हैं. क्या हम उन्हें अधीन बनाये रखना चाहते हैं? क्या हम समझते हैं कि हम भारतीयों में जाग्रति पैदा किये बगैर उन्हें ज्ञान दे सकते हैं? क्या हम उनमें महत्वाकांक्षा तो भर दें पर उसे बाहर निकालने का रास्ता न सुझाएं? बहुत संभव है कि भारतीय जनमानस हमारे द्वारा बनाई गई प्रणाली से पढ़ता हुआ  उस प्रणाली से आगे निकल जाए: बेहतर सरकार देकर हम उनमें अच्छी सरकार बनाने की प्रेरणा दें. हमारी प्रणाली से पढ़कर संभव है, कि एक दिन वे यूरोप के जैसे संस्थान बनाने की इच्छा करें. क्या ऐसा दिन भारत में आएगा? मैं नहीं जानता. हां, पर ये ज़रूर जानता हूं कि मैं वो शख्स नहीं जो भारतीयों को पीछे धकेल दूं. या उस दिन को आने से रोक दूं. और कभी ऐसा दिन आया, तो इंग्लैंड के इतिहास में वो सबसे गौरवशाली क्षण होगा.’
मिनट ऑफ़ एजुकेशन’ पर बोलते हुए उसने आगे कहा, ‘हम अंग्रेज़ी बोलने वालों का एक ऐसा वर्ग तैयार करें जो हमारे और शासित लोगों के बीच पुल का काम करें. उनका रंग और खून तो भारतीय हो, पर सोच, नैतिकता और बुद्धिमता अंग्रेजों के मुक़ाबिल हो.’
मैकाले का यह भी मानना था कि अंग्रेज़ अपने सीमित साधनों से इस महासागर को शिक्षित नहीं कर पाएंगे. लिहाज़ा, उसने सुझाव दिया कि अंग्रेजी बोलने वाले भारतीयों को यह काम दिया जाये कि वे हिंदुस्तान की बोलियों और भाषाओं के भीतर पश्चिम के वैज्ञानिक तथ्य और जानकारी मिलाकर यहां के लोगों को पढ़ाएं.
यह बात अपने आप में मौलिक प्रतीत होती है. मैकाले समझता था कि अंग्रेजी और यहां की भाषाएं मिलकर ही भारतीयों का ज्ञान बढ़ा सकती हैं. अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का आधार बनाने पर आज बहस होती है, पर उसने इसी भाषा में हमे पढ़ाने का प्रयास किया. उसके मुताबिक हिंदुस्तानियों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी अंग्रेजों की है, पर उन्हें मातृभाषा में नहीं पढ़ाया जा सकता. ऐसे में अंग्रेजी, जो यूरोप की सर्वश्रेठ भाषा है और भारतीय श्रेष्ठि वर्ग इसको समझता है, लिहाज़ा, यह एक बेहतर माध्यम है. उसने आगे कहा, ‘पश्चिम यूरोप ने रूस को सभ्य बनाया और कोई शक नहीं है कि हिंदुओं को हम सभ्य बनायेंगे.’

Sunday, July 7, 2019

क्या 134 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी पर अपनी पकड़ छोड़ देगा गांधी परिवार!


 राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सक्रिय रहेंगे, जिसे कांग्रेस के नए अध्यक्ष को ध्यान रखना चाहिए. इन सबसे ऊपर यह परिवार के हिसाब से ठीक नहीं होगा कि गांधी परिवार के वफादार के अलावा कोई और राहुल गांधी की जगह ले ले ၊
 क्या गांधी परिवार 134 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी पर अपनी पकड़ छोड़ देगा? ऐसा नहीं लगता क्योंकि परिवार के लिए यह बड़ा दांव है, जो कई दशकों से इसका संचालन कर रहा है. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार,अध्यक्ष पद से इस्तीफे को लेकर राहुल गांधी के अड़ियल रुख से सोनिया गांधी खुश नहीं हैं. उन्होंने 1998 से यह पद अपने बेटे के लिए ही संभाले रखा और दिसंबर 2017 में जब उन्हें कांग्रेस की गद्दी सौंपी गई तो वह भी खुश थी. हालांकि अब राहुल के इस्तीफे ने पार्टी को अजीब संकट में डाल दिया.

 राहुल गांधी के इस्तीफे को लेकर काफी कुछ कहा जा चुका है, अब चीजों को वैसे देखने की जरूरत है, जैसी कि वे वर्तमान में हैं. एक पखवाड़ा पहले सोनिया गांधी को दोनों सदनों के नेताओं ने कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना था. यह 2019 के चुनाव परिणामों के बाद हुआ. प्रियंका गांधी वाड्रा, जिन्हें जनवरी कांग्रेस महासचिव चुना गया था, वह अब भी अपने पद पर हैं जबकि वह अमेठी में परिणाम देने में विफल रहीं और राहुल गांधी अपने परिवार के गढ़ में स्मृति ईरानी के हाथों पराजित हो गए.

राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पार्टी में सक्रिय रहेंगे, जिसे कांग्रेस के नए अध्यक्ष को ध्यान रखना चाहिए. इन सबसे ऊपर यह परिवार के हिसाब से ठीक नहीं होगा कि गांधी परिवार के वफादार के अलावा कोई और राहुल गांधी की जगह ले.

वर्ष 2004 और 2009 में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाकर सोनिया ने अपने प्रयोग से महसूस किया कि सत्ता का आनंद लेने का सबसे अच्छा तरीका बाहर रहकर डमी के जरिए शासन करना है. किसी भी स्थिति में गांधी परिवार के दो सदस्य- सोनिया और प्रियंका- पद पर बने रहते हैं. इसलिए पार्टी अब भी परिवार के हाथों में है.

ये भी पढ़ें: कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस में सबसे आगे इन नेताओं का नाम



पार्टी पर पकड़ क्यों रखेंगे?

गांधी परिवार, पार्टी पर पकड़ क्यों बनाकर रखेगा? पहली बात- वह पार्टी पर दशकों से राज कर रहे हैं और दूसरी बात परिवार पार्टी में एकता बनाए रखता है. कई कांग्रेस नेता प्रतिद्वंदिता के कारण अपने बीच से एक के बजाय गांधी परिवार को स्वीकार करेंगे. यहां तक कि 1991-98 के बीच सात सालों के दौरान भी जब सोनिया राजनीति में नहीं थीं, तब कई कांग्रेस नेता उनके संपर्क में रहते थे.

नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी दोनों ने इस बात को अनुभव किया कि किसी गैर-गांधी के लिए कांग्रेस का नेतृत्व करना कितना मुश्किल था. चाहे सत्ता में हो या सत्ता से बाहर गांधी परिवार पार्टी पर पकड़ रखता है. राव जब 1991-96 तक पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने पाया कि सोनिया गांधी के वफादार हमेशा 10 जनपथ की ओर भागते थे, जिसे एक विरोधी सत्ता केंद्र के तौर पर देखा जाता था.

 गांधी परिवार की मंजूरी जरूरी

अंदरूनी लोग बताते हैं कि अर्जुन सिंह और एनडी तिवारी ने सोनिया गांधी के आशीर्वाद से ही कांग्रेस टी की स्थापना की थी. राव के बाद पार्टी अध्यक्ष बने सीताराम केसरी, जिन्हे कि सोनिया गांधी के 1998 में पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद उनके वफादारों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया, ने भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना किया. ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, जिसके बारे में उन्होंने 10 जनपथ को बताया था. 1999 में सोनिया गांधी ने जब शरद पवार द्वारा उनके विदेशी मूल पर सवाल खड़े करने को लेकर इस्तीफा दिया तो केवल पवार और उनके समर्थकों को बाहर निकाला गाय, जिसके बाद सोनिया ने अपना इस्तीफा वापस लिया. इस दौरान पार्टी मजबूती से सोनिया गांधी के साथ खड़ी रही.

दूसरा बटुए की डोर परिवार के साथ बनी रही सकती है. नए पार्टी अध्यक्ष को एक-एक दिन पार्टी चलाने के लिए गांधी परिवार पर निर्भर रहना पड़ सकता है. कांग्रेस इस वक्त केवल आधा दर्जन राज्यों में सत्ता में है, पार्टी को पर्याप्त फंड नहीं मिल रहा है. हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के चुनावों के चलते नए अध्यक्ष का काम अवांछनीय है.


 नहीं उठी राहुल के खिलाफ एक भी आवाज  
तीसरा, पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को अहसास है कि परिवार पार्टी पर अपनी पकड़ नहीं छोड़ेगा. जबकि दूसरे नेताओं सहित इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी को चुनौती मिली थी, लेकिन एक भी नेता ने, जूनियर या सीनियर, पार्टी की लगातार हार के बावजूद राहुल गांधी के खिलाफ आवाज नहीं उठाई.

पुराने नेताओं को राहुल गांधी की कार्यशैली और जमीन पर उनकी पकड़ न होने से मोहभंग हो सकता है, लेकिन उनमें से किसी ने भी खुले तौर पर उन्हें चुनौती नहीं दी. राहुल गांधी को पिछले साल कांग्रेस वर्किंग कमेटी का अध्यक्ष चुना गया था, यहीं निकाय पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव करेगा. यहीं कारण है कि नए अध्यक्ष के लिए सुशील कुमार शिंदे और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे गांधी परिवार के वफादार नेताओं का नाम सामने आ रहा है.

गांधी के लौटने तक रहेगा नया अध्यक्ष

पार्टी के अंदरूनी नेताओं का दावा है कि नया अध्यक्ष उसी वक्त तक सीट पर रहेगा जब तक कि गांधी फिर से अध्यक्ष बनने के लिए तैयार नहीं हो जाते. जिस वक्त नया अध्यक्ष स्वतंत्र होने की कोशिश करेगा उसे उसी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा जैसे 1998 में केसरी को दिखाया गया था.

केसरी तब हक्का-बक्का रह गए थे जब उन्होंन देखा कि उनको हटाने के कुछ ही देर बाद एआईसीसी में उनकी नेमप्लेट की जगह सोनिया गांधी की चमचमाती नेम प्लेट लगा दी गई थी.

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी वंशवाद के आलोचक हैं, लेकिन जहां तक कांग्रेस की बात है तो इसे वंशवाद से दूर नहीं किया जा सकता है. कहानी का सार ये है कि कांग्रेस परिवार के बिना नहीं चल सकती है और परिवार पार्टी को नहीं छोड़ सकता है.

(लेखक राजनीतिक विशेषज्ञ है. लेख में प्रकाशित विचार उनके निजी हैं)

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