गिरिडीह।
कहते हैं कि अयोग्य चिकित्सकों के कारण समाज के गरीब तबके ही अधिकतर शिकार होते हैं।ये कथित डॉक्टर अर्थिकोपार्जन की लालसा में मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते कहे जाता हैं।लेकिन जब सरकारी अस्पताल की स्थिति इतनी बद्तर हो जाएगी कि ऑपरेशन में किसी मरीज के इंटेस्टाइन जो मानव शरीर
के प्राकृतिक संरचना का मनुष्य के जीवंत रहने के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा है,उसे ही काट दिया जाए तो सहज ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मरीज की क्या हालत हो रही होगी।जी हां,ऐसा हुआ है और ये बिल्कुल सत्य है।मामला झारखंड के गिरिडीह जिले की है।
सरकार रेफरल अस्पताल डुमरी के एक चिकित्सक की लापरवाही के कारण अस्पताल में बंध्याकरण का आपरेशन कराने गई एक महिला रिम्स अस्पताल में जिदंगी और मौत से जूझ रही है।
महिला की बिगड़ती हालत को देखकर बुधवार को महिला के ससुराल और मायके वाले डुमरी रेफरल अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से इलाज के आस लगाए बैठे हैं। सूचना पर सूबे के पूर्व मंत्री लालचंद महतो डुमरी रेफरल अस्पताल पहुंचे और परिजनों से पूरी घटना की जानकारी लेते हुए अस्पताल प्रबंधक से मुआवजे को मांग करते हुए महिला का समुचित इलाज करवाने की बात कही।
बताया जाता है कि 16 फरवरी को प्रखंड के चैनपुर पंचायत के भेलावाटुगरी निवासी दुरलचंद महतो की पत्नी शोभा कुमारी गांव की सहिया बुधेश्वरी देवी के साथ बंध्याकरण का ऑपरेशन करवाने डुमरी रेफरल अस्पताल पहुंची थी। ऑपरेशन अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक आशीष कुमार ने किया। ऑपरेशन के बाद महिला अपने घर चली गई। लेकिन दो दिन के बाद महिला का पेट फूलने लगा। जिसे देख महिला के परिजन महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे। तब चिकित्सको की इस बात की जानकारी हुई कि ऑपरेशन के क्रम में महिला की लैट्रिन की नाली और पेशाब की नाली कट गए हैं। इस समय चिकित्सको ने महिला का सम्पूर्ण इलाज के करवाने की बात कहते हुए महिला को धनबाद के एसएनएम एमसीएच रेफर कर दिया।महिला की स्थिति बिगड़ती देखकर धनबाद से उसे रिम्स रेफर कर दिया गया।
जहां महिला जिंदगी और मौत से लड़ रही है। महिला के परिवार की स्थिति दयनीय होने के कारण महिला के परिवार वाले बुधवार को डुमरी रेफरल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगते हुए महिला के समुचित इलाज की मांग करने लगे। इसके बाद अस्पताल पहुंचे पूर्व मंत्री श्री महतो ने भी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगते हुए कहा कि विगत एक माह पूर्व अस्पताल के सर्जन के द्वारा बाध्यकरण कर दौरान महिला का पेशाब और लेट्रिन का नस काट दिया गया था। जिस कारण आज महिला अपने जीवन और मौत की लड़ाई से रोज रुबरु हो रही है। उसकी स्थिति दयनीय बन गई है।
पूर्व ऊर्जा मंत्री ने अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक प्रभारी राजेश महतो से बात कर महिला का समुचित उपचार करवाने की मांग करते हुए उसके बच्चो का इंसुरेस करवाने सहित बच्चे के खान पान में होने वाले खर्च को वहन दोषी डॉक्टर को उठाने की मांग की।पूर्व मंत्री ने बताया कि अस्पताल के चिकित्सक प्रभारी ने स्वीकारा कि ऑपरेशन के दौरान गलती हुई है। जिसके लिए हम सभी महिला का इलाज करवाने के लिए कुछ सहयोग राशि देंगे। इसके अलावा सरकारी प्रवधान के तहत जो भी मुआवजा होगा उसे महिला को दिलाया जायेगा। इन सभी बातों के बाद महिला के परिजन और नेता अस्पताल से चले गए।
बताया जाता है कि महिला के तीन छोटे छोटे बच्चे हैं और उसका पति मजदूरी का काम करता है। परिवार वालो का कहना था कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वो पीड़िता का इलाज करवाने में सक्षम नहीं है, डॉक्टर ने गलती के बाद कहा था कि इलाज के दौरान होने वाले खर्च को वहन किया जाएगा। लेकिन आज तक डॉक्टरों ने किसी तरह का खर्च नही दिया। आज पीड़िता रिम्स में मौत की सैया पर पड़ी है, महिला का पेट पूरी तरह से खुल गया है, अब महिला के बच्चे और परिवार इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधक की ओर आस लगाए हुए हैं।




