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Wednesday, November 16, 2022

Shraddha murder case: ‘Muslim men trapping Hindu women has become culture’, says retired Jharkhand DGP




Hours after the story behind the brutal murder case of Shraddha Walker was uncovered, Nirmal Kaur, a 1983 batch IPS officer who retired as DGP in Jharkhand said that Muslim men deliberately entrap Hindu girls and they get huge funds for this purpose. She said that the Muslim men who kidnap Hindu girls are also provided with all the required legal support by their community.

Kaur stated her opinion while she was speaking during NDTV prime time debate on November 14. “The persons executing the entrapment of Hindu women are provided with motorcycles or heavy monetary assistance. These people are also provided with all the required legal assistance. Many similar cases are emerging these days. In a way, this is being supported by their sub-culture. Their community has started accepting and making their people believe that woman has no feelings, and no value in society. They see her as an object,” she said
Kaur who was in the Bureau of Police Research and Development (BPRD) till 2016 also said that these kinds of acts are usually executed by psychopaths who have no guilty feelings at all. “In the current case, I’ve seen some visuals of the accused and it broadly appears that he is not a psychopath but is highly influenced by their sub-culture where Hindu women or women, in particular, are seen as an object,” she noted.

She meanwhile also referred to the Jharkhand murder case where a minor girl was burnt alive by the accused named Shahrukh in Dumka and said that it was also a similar case. She further reiterated that the Muslim sub-culture supports these kinds of acts and their culture is quite widespread. She also said that Muslim boys were deliberately entrapping Hindu women and were being provided with monetary assistance for luring Hindu women.

Sunday, January 10, 2021

झारखंडी एकता संघ मुंबई द्वारा रांची के धुर्वा में प्रवासी मजदूरों के हितार्थ विशाल कार्यक्रम का आयोजन




झारखंडी एकता संघ, मुम्बई द्वारा झारखंड प्रवासी मज़दूरों ,एवं श्रमिको के समस्याओं औऱ समाधान एवं शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार पर मंथन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।यह कार्यक्रम आगामी 17 जनवरी रविवार को रांची के धुर्वा स्थित झारखंड विधान सभा हॉल में दोपहर 1:00 बजे आयोजित की जानी है।



  ज्ञात हो कि झारखंडी एकता संघ लगातार 15 वर्षों से प्रवासी मजदूरों, पिछड़ों, गरीबों, आदिवासियों और दबे कुचले लोगों का हक दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी सिलसिले में झारखंड प्रदेश विधानसभा हॉल धुर्वा, रांची में एक आम सभा का आयोजन झारखंडी एकता संघ, मुंबई के द्वारा किया जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों से इच्छुक समाज सेवकों अपने-अपने पंचायत, प्रखण्ड, जिला ,क्षेत्रों के प्रवासी मज़दूरों और श्रमिको को मदद करना चाहते हैं या *झारखंडी एकता संघ संस्था* से जुड़ना चाहते हैं। तो इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कृपया अपना-अपना नाम रजिस्टर करा सकते हैं। *पासपोर्ट साइज फोटो एवं मोबाइल नंबर* और *पता व्हाट्सएप* करें।
■ *झारखंडी एकता संघ हमेशा प्रवासी मजदूरों के दु:ख-दर्द में हमेशा सहयोग करती हैं।*
■ *अभी देश के विभिन्न राज्यों में आपातकालीन स्थिति लॉकडाउन में फसे प्रवासी मज़दूरों को 8,000 से अधिक राशन किट का वितरण किया गया।*
■ झारखंडी एकता संघ ,मुम्बई के द्वारा देश के विभिन्न राज्यों से झारखण्ड के प्रवासी मज़दूरों के 220 से अधिक मृत् शरीर (Dead Body) झारखंड अब तक भेज चुकी है और आगे भी संघ मदद करेगी।
■ *झारखंड से जो भी कैंसर मरीज या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग इलाज कराने मुंबई आते हैं उन्हें संस्था बढ़-चढ़कर मदद करती है, और दुख की घड़ी में संस्था के पदाधिकारी गण पीड़िता के साथ खड़े रहते हैं।*
■ *अब तक संस्था के माध्यम से 2,000 से अधिक कैंसर या गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों का मदद भी किया जा चुका है और संघ हमेशा मदद करने के लिए तत्पर रहेगी।*
अगर आप झारखंडी एकता संघ से जुड़ना चाहते हैं तो दिए गए नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं।
आपका
● *असलम अन्सारी*
राष्ट्रीय अध्यक्ष
*झारखंडी एकता संघ, मुम्बई*
*8850985564* *9004007295*
● *नौशाद अंसारी* *9835133353* *9934923068*
● *संतोष मंडल* *9431129111* *9661876433*
● *सुनील कुमार* *9199714960*
● *प्रवीन कुमार* *9065126937*
               

Sunday, November 15, 2020

Parul Yadav looking ravishing in a Royal blue and emerald green saree by Sobariko




Multi talented actor producer Parul Yadav Celebrated Diwali with her usual flair and panache this year as well.


 Parul looked stunning & Dazzling in a Royal blue and emerald green saree by Sobariko, 
she spent the day decorating the home and performing pujas.


Wearing  - @sobariko
Styled by-@pavithrareddy
Jewellery -@rentingstoli
Belt-@louis Vuitton
Potli -@good earth
Footwear-@karl lagerfeld

Friday, October 30, 2020

Geetu Mohandas’ atmospheric crime drama Moothon to be the closing film at IFFM 2020



 
The Indian Film Festival of Melbourne (IFFM) 2020 that went virtual this year owing to the ongoing pandemic, officially closed its special eleventh  edition with the screening of Geetu Mohandas’ visceral and imaginative film Moothon that stars Malayalam actor Nivin Pauly in lead, along with Shashank Arora, Sobhita Dhulipala, Roshan Matthew amongst others. 
 


The film that is co-written by Anurag Kashyap along with Sreeja Sreedharan and Geetu herself has been lauded widely for the novelty of its idea and Rajeev Rai’s brilliant cinematography. Geetu’s last outing Liar’s Dice was celebrated and even became India’s entry to Oscar that year. 
 


Moothon, however, is the story of a young boy who swims across the ocean from Lakshadweep to Mumbai in search of his elder brother. The city’s grime entraps him and he ends up in Kamathipura. The plot examines a host of ideas starting with cross-dressing, gender, identity, and the prevalent notion of destiny. Balancing realism and symbolism effectively, Mohandas tells a potent tale of love, loss, identity, and a sense of belonging. 
 


Festival director, Mitu Bhowmick Lange said, “It’s a poignant film that speaks to you at a very human level. At its core is a tender same-sex love story, which touched our hearts. Yearning for your loved ones and feeling the pangs of separation has been a lingering mood this year. There’s no better time to watch Moothon. We are elated to have the movie be the finale film at the Festival because of its distinct voice and the narrative itself encapsulates the vibe of diversity which is so precious to us.” 
 
Like every year, the festival this year too, IFFM  offered over 60 films in 17 languages including shorts, feature films, and documentaries made locally and worldwide.

Tuesday, March 19, 2019

मुंब्रा में फिर दिखे राजू पाटिल,उड़ी शिवसेना के श्रीकांत सिंदे की निंद

मुंंब्रा। नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमोद राजू पाटिल लगभग पांच साल पहले कल्याण लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लडे तो वह उस समय दिखे और उनकी होर्डिंगे दिखाई दी थी, लेकिन उसके बाद न तो राजू पाटिल दिखे और न ही उनकी 
होर्डिंगें दिखी। अब फिर सांसद का चुनाव आ गया है, अभी तो वह नहीं दिखे लेकिन "होली मुबारक" हो की उनकी होर्डिंगें
मुंंब्रा-कौसा में दिखाई दे रही है। सुत्रों के मुताबिक मुंंब्रा कौसा में राजू पाटिल की होली की हार्दिक शुभकामनाओं की लगी इन दर्जनों होर्डिंगों से शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे और पालक मंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थकों में खलबली मच गई है। क्योंकि जिस दबंगई से राजू पाटिल ने पिछला लोकसभा चुनाव मुंंब्रा कौसा में लडा था, वह अपने आप में एक मिसाल है।
इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि श्रीकांत शिंदे के लिए आगे की राह आसान नहीं है। अभी तक ऐसा माना जा रहा था कि एनसीपी के नगरसेवक बाबाजी पाटिल को प्रोजेक्ट करके एनसीपी के स्थानीय नेता शिवसेना से 20-20 का मैच खेलना चाह रहे थे, लेकिन राजू पाटिल कि मुंंब्रा कौसा में होर्डिंगें लगने से मुकाबला वंडे मैच का हो सकता है। वहीं अगर मनसे और एनसीपी का कल्याण लोकसभा क्षेत्र के लिए गठबंधन होता है तो, यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पार्टियां उत्तर भारतीय मतदाताओं को कैसे संभालती है। जबकि विरोध कि आसंका बनी रहेगी।वहीं मुस्लिम लीग ने भी मुंंब्रा से एक ताकतवर उत्तर भारतीय नेता को मैदान में उतारने की पुरी तैयारी कर ली है, इससे अब मुकाबला त्रिकोणा हो सकता है।

Friday, March 15, 2019

मुंबई में सीएसटी स्टेशन के पास गिरा फुट ओवर ब्रिज, पांच की मौत, 30 से ज्यादा लोग घायल, सीएम ने जताया दुःख

मुंबई :- महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार शाम छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा हुआ है। शुरुआती जानकारी के अनुसार मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर एक फुट ओवर ब्रिज गिरने के कारण 5 लोगों की मौत हुई है। वहीं इस घटना में 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन घायलों में 4-5 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और इन्हें गहन चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, गुरुवार शाम मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के प्लैटफॉर्म नंबर 1 पर बना ब्रिज अचानक गिर गया है। पुलिस के मुताबिक सीएसटी स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 1 और बीटी लेन के बीच बना एक फुटओवर ब्रिज अचानक गिर गया। इस ब्रिज के गिरने के बाद कई लोग इसकी चपेट में आकर मलबे में दब गए। 

सीएसटी पर तबाही के बाद इसी पुल पर खड़े होकर अजमल कसाब ने बरसाई थीं गोलियां, फेंके थे हथगोले

मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यानी CST रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार को जो फुटओवर ब्रिज गिरा है. ये वहीं पुल है जिसके जरिए मुंबई हमले के दौरान आतंकी अजमल कसाब सीएसटी से मोकामा की तरफ गया था. यह ब्रिज दो इलाकों को जोड़ने का काम करता था।  26\11 के मुंबई हमले के दौरान आतंकी कसाब की तस्वीरें कैमरे में कैद करने वाले फोटो जर्नलिस्ट श्रीराम वर्नेकर ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अपना बयान दर्ज कराया था.

Thursday, March 14, 2019

सोनी राज़दान की नो फ़ादर्स इन कश्मीर आख़िरकार 5 अप्रैल को रिलीज के लिए तैयार है

मुंबई ၊

_ऑस्कर® के लिए नामांकित और दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार के विजेता निर्देशक, अश्विन कुमार की ओर से इस फ़िल्म का पहला पोस्टर पेश किया गया।_


सेंसर बोर्ड के द्वारा 8 महीनों के लंबे वक़्त तक रोक लगाए जाने के बाद, अब पूरे देश के दर्शकों को 2019 की सबसे ज़्यादा इंतज़ार की जानेवाली एक फ़िल्म देखने को मिलेगी। यह फ़िल्म इस हफ़्ते की शुरुआत में सुर्ख़ियों में रही थी, जब इसकी पिछले कुछ महीनों से चल रही लड़ाई ख़त्म हुई और आखिरकार न्याय और यूए सर्टिफिकेट मिला।


अश्विन कुमार, जिन्होंने इस फ़िल्म का निर्देशन किया है उन्हें पहले एक बार उनकी एक शॉर्ट फ़िल्म, लिटिल टेररिस्ट के लिए ऑस्कर® के लिए नामांकित किया जा चुका है और कश्मीर की सच्चाई बयां करनेवाली फ़िल्मों - इंशाल्लाह फुटबॉल और इंशाल्लाह कश्मीर के लिए वे दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। नो फ़ादर्स इन कश्मीर, उनकी 'कश्मीर की तिगड़ी' की तीसरी फ़िल्म है। उम्मीद, शांति, और मानवता जैसे मुद्दे उनकी अब तक की हर फिल्म में ख़ास तौर पर नज़र आते हैं और नो फ़ादर्स इन कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही जज़्बातों को दिखाया गया है।


इस फ़िल्म के लेखक और निर्देशक होने के अलावा, अश्विन फिल्म के मुख्य क़िरदारों में से भी एक हैं जिनके साथ इसमें सोनी राजदान, कुलभूषण खरबंदा, अंशुमान झा और माया सराओ भी शामिल हैं और यह फ़िल्म पूरे हिंदुस्तान के सिनेमाघरों में 05 अप्रैल 2019 को रिलीज़ होने वाली है।


फ़िल्म के निर्माताओं ने अब फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज़ किया है जिसमें एक फोन की टूटी हुई स्क्रीन दिखाई दे रही है जिसके पीछे दो आकर्षक नीली आँखों वाले, 16 साल के बच्चे खड़े नज़र आ रहे हैं। यह कहानी एक 16 साल की ब्रिटिश कश्मीरी लड़की, नूर पर आधारित है, जो अपने पिता की तलाश में अपनी जड़ों को ढूँढने निकलती है। तब उसकी मुलाकात माजिद से होती है, जो वहीँ का एक लड़का होता है और उसपर फ़िदा हो जाता है, वो उसे भारत-पाक सीमा के पास एक ख़तरनाक से इलाक़े में ले जाता है जहाँ जाना मना होता है। वहाँ उन्हें किसी रहस्य का पता चलता है और बात तब बिगड़ जाती है जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। नूर को जल्दी ही छोड़ दिया जाता है जबकि माजिद को नहीं छोड़ा जाता। उसकी वजह से मुसीबत में पड़े माजिद को रिहा कराने के लिए नूर किस हद तक जायेगी। और क्या इन दोनों के बीच पहले जैसा प्यार हो सकेगा?


एक बेबाक़ टैगलाइन "हर कोई सोचता है कि वो कश्मीर को समझता हैं" के साथ इस फ़िल्म के निर्माता साफ़-साफ़ इस फ़िल्म और इसकी कहानी से की जा रही उम्मीद की ओर इशारा कर रहे हैं।



Sunday, March 3, 2019

विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नौशेरवान जी टाटा के जन्म दिवस पर विशेष

सर जमशेदजी टाटा (जन्म ३ मार्च,१८३९ - मृत्यु १९ मई,१९०४) वर्तमान में भारत के विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे।धोपावकर बंधू-भगिनी एवम परिवार अहमदनगर की ओर से जमशेदजी टाटा के महान कार्य को कोटि कोटि सादर प्रणाम।

जमशेदजी का जन्म सन १८३९ में गुजरात के एक छोटे से कस्बे नवसेरी में हुआ था।उनके पिता जी का नाम नुसीरवानजी था व उनकी माता जी का नाम जीवनबाई टाटा था । पारसी पादरियों के अपने खानदान में नुसीरवानजी पहले व्यवसायी थे । भाग्य उन्हें बंबई ले आया जहाँ उन्होने व्यवसाय ( धंधे ) में कदम रखा । जमशेदजी 14 साल की नाज़ुक उम्र में ही उनका साथ देने लगे । जमशेदजी ने एल्फिंस्टन कालेज (Elphinstone College) में प्रवेश लिया और अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने हीरा बाई दबू से विवाह कर लिया था । वे 1858 में स्नातक हुए और अपने पिता के व्यवसाय से पूरी तरह जुड़ गए।

'' उद्योग का आरम्भ '':- वह दौर बहुत कठिन था। अंग्रेज़ अत्यंत बर्बरता से 1857 की क्रान्ति को कुचलने में सफल हुए थे। जमशेदजी 29 साल की उमर तक अपने पिताजी के साथ ही काम करते रहे । 1868 में उन्होने 21000 रुपयों के साथ अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया । सबसे पहले उन्होने एक दिवालिया तेल कारखाना ख़रीदा और उसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम बदल कर रखा - एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill) ! दो साल बाद उन्होने इसे खासे मुनाफे के साथ बेच दिया । इस पैसे के साथ उन्होंने नागपुर में 1874 में एक रुई का कारखाना लगाया । महारानी विक्टोरिया ने उन्ही दिनों भारत की रानी का खिताब हासिल किया था और जमशेदजी ने भी वक़्त को समझते हुए कारखाने का नाम इम्प्रेस्स मिल(Empress Mill) (Empress का मतलब ‘महारानी’ ) रखा ।

''महान दूरदर्शी''::-जमशेदजी एक अलग ही व्यक्तित्व के मालिक थे । उन्होंने ना केवल कपड़ा बनाने के नए नए तरीक़े ही अपनाए बल्कि अपने कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों का भी खूब ध्यान रखा। उनके भले के लिए जमशेदजी ने अनेक नई व बेहतर श्रम-नीतियाँ अपनाई। इस नज़र से भी वे अपने समय से कहीँ आगे थे । सफलता को कभी केवल अपनी जागीर नही समझा, बल्कि उनके लिए उनकी सफलता उन सब की थी जो उनके लिए काम करते थे। जमशेदजी के अनेक राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी नेताओं से नजदीकी संबंध थे,इन में प्रमुख थे,दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता । जमशेदजी पर और उनकी सोच पर इनका काफी प्रभाव था। उनका मानना था कि आर्थिक स्वतंत्रता ही राजनीतिक स्वतंत्रता का आधार है। जमशेद जी के दिमाग में तीन बडे विचार थे -1)अपनी लोहा व स्टील कंपनी खोलना;2)एक जगत प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित करना;3)एक जलविद्युत परियोजना (Hydro-electric plant) लगाना । दुर्भाग्यवश उनके जीवन काल में तीनों में से कोई भी सपना पूरा ना हो सका । पर वे बीज तो बो ही चुके थे, एक ऐसा बीज जिसकी जड़ें उनकी आने वाली पीढ़ी ने अनेक देशों में फैलायीं । जो एक मात्र सपना वे पूरा होता देख सके वह था होटल ताज महल। यह दिसंबर 1903 में 4,21,00,000 रुपये के शाही खर्च से तैयार हुआ। इसमे भी उन्होने अपनी राष्ट्रवादी सोच को दिखाया था। उन दिनों स्थानीय भारतीयों को बेहतरीन यूरोपियन होटलों में घुसने नही दिया जाता था । ताजमहल होटल इस दमनकारी नीति का करारा जवाब था। 1904 में जर्मनी में उन्होने अपनी आख़िरी सांस ली ।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...