Wednesday, November 16, 2022
Shraddha murder case: ‘Muslim men trapping Hindu women has become culture’, says retired Jharkhand DGP
Sunday, January 10, 2021
झारखंडी एकता संघ मुंबई द्वारा रांची के धुर्वा में प्रवासी मजदूरों के हितार्थ विशाल कार्यक्रम का आयोजन
झारखंडी एकता संघ, मुम्बई द्वारा झारखंड प्रवासी मज़दूरों ,एवं श्रमिको के समस्याओं औऱ समाधान एवं शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार पर मंथन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।यह कार्यक्रम आगामी 17 जनवरी रविवार को रांची के धुर्वा स्थित झारखंड विधान सभा हॉल में दोपहर 1:00 बजे आयोजित की जानी है।
Sunday, November 15, 2020
Parul Yadav looking ravishing in a Royal blue and emerald green saree by Sobariko

Friday, October 30, 2020
Geetu Mohandas’ atmospheric crime drama Moothon to be the closing film at IFFM 2020
Tuesday, March 19, 2019
मुंब्रा में फिर दिखे राजू पाटिल,उड़ी शिवसेना के श्रीकांत सिंदे की निंद
होर्डिंगें दिखी। अब फिर सांसद का चुनाव आ गया है, अभी तो वह नहीं दिखे लेकिन "होली मुबारक" हो की उनकी होर्डिंगें
मुंंब्रा-कौसा में दिखाई दे रही है। सुत्रों के मुताबिक मुंंब्रा कौसा में राजू पाटिल की होली की हार्दिक शुभकामनाओं की लगी इन दर्जनों होर्डिंगों से शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे और पालक मंत्री एकनाथ शिंदे के समर्थकों में खलबली मच गई है। क्योंकि जिस दबंगई से राजू पाटिल ने पिछला लोकसभा चुनाव मुंंब्रा कौसा में लडा था, वह अपने आप में एक मिसाल है।
इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि श्रीकांत शिंदे के लिए आगे की राह आसान नहीं है। अभी तक ऐसा माना जा रहा था कि एनसीपी के नगरसेवक बाबाजी पाटिल को प्रोजेक्ट करके एनसीपी के स्थानीय नेता शिवसेना से 20-20 का मैच खेलना चाह रहे थे, लेकिन राजू पाटिल कि मुंंब्रा कौसा में होर्डिंगें लगने से मुकाबला वंडे मैच का हो सकता है। वहीं अगर मनसे और एनसीपी का कल्याण लोकसभा क्षेत्र के लिए गठबंधन होता है तो, यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पार्टियां उत्तर भारतीय मतदाताओं को कैसे संभालती है। जबकि विरोध कि आसंका बनी रहेगी।वहीं मुस्लिम लीग ने भी मुंंब्रा से एक ताकतवर उत्तर भारतीय नेता को मैदान में उतारने की पुरी तैयारी कर ली है, इससे अब मुकाबला त्रिकोणा हो सकता है।
Friday, March 15, 2019
मुंबई में सीएसटी स्टेशन के पास गिरा फुट ओवर ब्रिज, पांच की मौत, 30 से ज्यादा लोग घायल, सीएम ने जताया दुःख
मुंबई :- महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार शाम छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन के पास एक बड़ा हादसा हुआ है। शुरुआती जानकारी के अनुसार मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर एक फुट ओवर ब्रिज गिरने के कारण 5 लोगों की मौत हुई है। वहीं इस घटना में 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इन घायलों में 4-5 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और इन्हें गहन चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, गुरुवार शाम मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के प्लैटफॉर्म नंबर 1 पर बना ब्रिज अचानक गिर गया है। पुलिस के मुताबिक सीएसटी स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 1 और बीटी लेन के बीच बना एक फुटओवर ब्रिज अचानक गिर गया। इस ब्रिज के गिरने के बाद कई लोग इसकी चपेट में आकर मलबे में दब गए।
सीएसटी पर तबाही के बाद इसी पुल पर खड़े होकर अजमल कसाब ने बरसाई थीं गोलियां, फेंके थे हथगोले
मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यानी CST रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार को जो फुटओवर ब्रिज गिरा है. ये वहीं पुल है जिसके जरिए मुंबई हमले के दौरान आतंकी अजमल कसाब सीएसटी से मोकामा की तरफ गया था. यह ब्रिज दो इलाकों को जोड़ने का काम करता था। 26\11 के मुंबई हमले के दौरान आतंकी कसाब की तस्वीरें कैमरे में कैद करने वाले फोटो जर्नलिस्ट श्रीराम वर्नेकर ने इस मामले की सुनवाई के दौरान अपना बयान दर्ज कराया था.
Thursday, March 14, 2019
सोनी राज़दान की नो फ़ादर्स इन कश्मीर आख़िरकार 5 अप्रैल को रिलीज के लिए तैयार है
मुंबई ၊
_ऑस्कर® के लिए नामांकित और दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार के विजेता निर्देशक, अश्विन कुमार की ओर से इस फ़िल्म का पहला पोस्टर पेश किया गया।_
सेंसर बोर्ड के द्वारा 8 महीनों के लंबे वक़्त तक रोक लगाए जाने के बाद, अब पूरे देश के दर्शकों को 2019 की सबसे ज़्यादा इंतज़ार की जानेवाली एक फ़िल्म देखने को मिलेगी। यह फ़िल्म इस हफ़्ते की शुरुआत में सुर्ख़ियों में रही थी, जब इसकी पिछले कुछ महीनों से चल रही लड़ाई ख़त्म हुई और आखिरकार न्याय और यूए सर्टिफिकेट मिला।
अश्विन कुमार, जिन्होंने इस फ़िल्म का निर्देशन किया है उन्हें पहले एक बार उनकी एक शॉर्ट फ़िल्म, लिटिल टेररिस्ट के लिए ऑस्कर® के लिए नामांकित किया जा चुका है और कश्मीर की सच्चाई बयां करनेवाली फ़िल्मों - इंशाल्लाह फुटबॉल और इंशाल्लाह कश्मीर के लिए वे दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। नो फ़ादर्स इन कश्मीर, उनकी 'कश्मीर की तिगड़ी' की तीसरी फ़िल्म है। उम्मीद, शांति, और मानवता जैसे मुद्दे उनकी अब तक की हर फिल्म में ख़ास तौर पर नज़र आते हैं और नो फ़ादर्स इन कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही जज़्बातों को दिखाया गया है।
इस फ़िल्म के लेखक और निर्देशक होने के अलावा, अश्विन फिल्म के मुख्य क़िरदारों में से भी एक हैं जिनके साथ इसमें सोनी राजदान, कुलभूषण खरबंदा, अंशुमान झा और माया सराओ भी शामिल हैं और यह फ़िल्म पूरे हिंदुस्तान के सिनेमाघरों में 05 अप्रैल 2019 को रिलीज़ होने वाली है।
फ़िल्म के निर्माताओं ने अब फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज़ किया है जिसमें एक फोन की टूटी हुई स्क्रीन दिखाई दे रही है जिसके पीछे दो आकर्षक नीली आँखों वाले, 16 साल के बच्चे खड़े नज़र आ रहे हैं। यह कहानी एक 16 साल की ब्रिटिश कश्मीरी लड़की, नूर पर आधारित है, जो अपने पिता की तलाश में अपनी जड़ों को ढूँढने निकलती है। तब उसकी मुलाकात माजिद से होती है, जो वहीँ का एक लड़का होता है और उसपर फ़िदा हो जाता है, वो उसे भारत-पाक सीमा के पास एक ख़तरनाक से इलाक़े में ले जाता है जहाँ जाना मना होता है। वहाँ उन्हें किसी रहस्य का पता चलता है और बात तब बिगड़ जाती है जब उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। नूर को जल्दी ही छोड़ दिया जाता है जबकि माजिद को नहीं छोड़ा जाता। उसकी वजह से मुसीबत में पड़े माजिद को रिहा कराने के लिए नूर किस हद तक जायेगी। और क्या इन दोनों के बीच पहले जैसा प्यार हो सकेगा?
एक बेबाक़ टैगलाइन "हर कोई सोचता है कि वो कश्मीर को समझता हैं" के साथ इस फ़िल्म के निर्माता साफ़-साफ़ इस फ़िल्म और इसकी कहानी से की जा रही उम्मीद की ओर इशारा कर रहे हैं।
Sunday, March 3, 2019
विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नौशेरवान जी टाटा के जन्म दिवस पर विशेष
सर जमशेदजी टाटा (जन्म ३ मार्च,१८३९ - मृत्यु १९ मई,१९०४) वर्तमान में भारत के विश्वप्रसिद्ध औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे।धोपावकर बंधू-भगिनी एवम परिवार अहमदनगर की ओर से जमशेदजी टाटा के महान कार्य को कोटि कोटि सादर प्रणाम।
जमशेदजी का जन्म सन १८३९ में गुजरात के एक छोटे से कस्बे नवसेरी में हुआ था।उनके पिता जी का नाम नुसीरवानजी था व उनकी माता जी का नाम जीवनबाई टाटा था । पारसी पादरियों के अपने खानदान में नुसीरवानजी पहले व्यवसायी थे । भाग्य उन्हें बंबई ले आया जहाँ उन्होने व्यवसाय ( धंधे ) में कदम रखा । जमशेदजी 14 साल की नाज़ुक उम्र में ही उनका साथ देने लगे । जमशेदजी ने एल्फिंस्टन कालेज (Elphinstone College) में प्रवेश लिया और अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने हीरा बाई दबू से विवाह कर लिया था । वे 1858 में स्नातक हुए और अपने पिता के व्यवसाय से पूरी तरह जुड़ गए।
'' उद्योग का आरम्भ '':- वह दौर बहुत कठिन था। अंग्रेज़ अत्यंत बर्बरता से 1857 की क्रान्ति को कुचलने में सफल हुए थे। जमशेदजी 29 साल की उमर तक अपने पिताजी के साथ ही काम करते रहे । 1868 में उन्होने 21000 रुपयों के साथ अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया । सबसे पहले उन्होने एक दिवालिया तेल कारखाना ख़रीदा और उसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम बदल कर रखा - एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill) ! दो साल बाद उन्होने इसे खासे मुनाफे के साथ बेच दिया । इस पैसे के साथ उन्होंने नागपुर में 1874 में एक रुई का कारखाना लगाया । महारानी विक्टोरिया ने उन्ही दिनों भारत की रानी का खिताब हासिल किया था और जमशेदजी ने भी वक़्त को समझते हुए कारखाने का नाम इम्प्रेस्स मिल(Empress Mill) (Empress का मतलब ‘महारानी’ ) रखा ।
''महान दूरदर्शी''::-जमशेदजी एक अलग ही व्यक्तित्व के मालिक थे । उन्होंने ना केवल कपड़ा बनाने के नए नए तरीक़े ही अपनाए बल्कि अपने कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों का भी खूब ध्यान रखा। उनके भले के लिए जमशेदजी ने अनेक नई व बेहतर श्रम-नीतियाँ अपनाई। इस नज़र से भी वे अपने समय से कहीँ आगे थे । सफलता को कभी केवल अपनी जागीर नही समझा, बल्कि उनके लिए उनकी सफलता उन सब की थी जो उनके लिए काम करते थे। जमशेदजी के अनेक राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी नेताओं से नजदीकी संबंध थे,इन में प्रमुख थे,दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता । जमशेदजी पर और उनकी सोच पर इनका काफी प्रभाव था। उनका मानना था कि आर्थिक स्वतंत्रता ही राजनीतिक स्वतंत्रता का आधार है। जमशेद जी के दिमाग में तीन बडे विचार थे -1)अपनी लोहा व स्टील कंपनी खोलना;2)एक जगत प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित करना;3)एक जलविद्युत परियोजना (Hydro-electric plant) लगाना । दुर्भाग्यवश उनके जीवन काल में तीनों में से कोई भी सपना पूरा ना हो सका । पर वे बीज तो बो ही चुके थे, एक ऐसा बीज जिसकी जड़ें उनकी आने वाली पीढ़ी ने अनेक देशों में फैलायीं । जो एक मात्र सपना वे पूरा होता देख सके वह था होटल ताज महल। यह दिसंबर 1903 में 4,21,00,000 रुपये के शाही खर्च से तैयार हुआ। इसमे भी उन्होने अपनी राष्ट्रवादी सोच को दिखाया था। उन दिनों स्थानीय भारतीयों को बेहतरीन यूरोपियन होटलों में घुसने नही दिया जाता था । ताजमहल होटल इस दमनकारी नीति का करारा जवाब था। 1904 में जर्मनी में उन्होने अपनी आख़िरी सांस ली ।
बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका
चौंकाने वाली खबर 🚨 बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...
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Nationalism is a political, social, and economic ideology and movement characterized by the promotion of the interests of a particular nati...
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एक बुराई आपकी सारी अच्छाइयों पर पानी फेर देती है और आप देवताओं की नजरों में भी नीचे गिर जाते हैं। विद्वान और प्रकांड पंडित होने से आप अच्छे...
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लोहरदगा में सुरक्षाबलों को सर्च ऑपरेशन में 200 आईइडी मिले लोहरदगा के कोरगो जंगल में माओवादी दस्ते के साथ मुठभेड़ के बाद सर्च अभियान में सुर...










