न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जज ने वकीलों को मीडिया और प्रेस की बहसों के दौरान जजों पर हमला किए जाने को लेकर फटकार लगाई है. उनका कहना है कि कोर्ट के फैसलों को राजनीतिक रंग देना कोर्ट की अवमानना का उग्र रूप है. राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जजों और न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगाया जा सकता है.जस्टिस मिश्रा का कहना है कि अगर कोर्ट का निर्णय किसी के प्रतिकूल नहीं आता है तो वह जज के खिलाफ किसी उचित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है. लेकिन प्रेस में उनपर हमला करना बिलकुल भी उचित नहीं है. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि वकीलों को प्रेस में बहस के माध्यम से निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आप
Tuesday, January 3, 2023
अभिव्यक्ति की आजादी: मंत्री के बयान के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं,सुप्रीम कोर्ट का फैसला
पांच जजों की बेंच में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने एक अलग निर्णय सुनाया है। उन्होंने कहा, बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक बहुत आवश्यक अधिकार है, जिससे नागरिकों को शासन के बारे में अच्छी तरह से सूचित और शिक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अभद्र भाषा समाज को असमान बनाकर मूलभूत मूल्यों पर प्रहार करती है और विशेष रूप से हमारे जैसे देश भारत में विविध पृष्ठभूमि के नागरिकों पर भी हमला करती है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, यह संसद के विवेक पर निर्भर है कि वह सार्वजनिक पदाधिकारियों को नागरिकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने के लिए एक कानून बनाए। उन्होंने कहा, यह राजनीतिक दलों के लिए है कि वे अपने मंत्रियों द्वारा दिए गए भाषणों को नियंत्रित करें जो एक आचार संहिता बनाकर किया जा सकता है। कोई भी नागरिक जो इस तरह के भाषणों या सार्वजनिक अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा से हमला महसूस करता है, वह अदालत का रुख कर सकता है।
Friday, December 30, 2022
पीएम मोदी की माता हीराबेन का निधन, पीएम ने दिया कंधा
अहमदाबाद के यूएन अस्पताल द्वारा जारी किए गए हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, हीराबेन मोदी का निधन बह करीब साढ़े तीन बजे हुआ।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मां के निधन की खबर के बाद राजधानी नई दिल्ली से गुजरात के लिए निकल गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी इससे पहले बुध वार को अपनी मां से मिलने के लिए अहमदाबाद गए थे। तब वह करीब 1 घंटे तक अस्पताल में रुके थे। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टर्स से अपनी मां की हेल्थ की जानकारी भी ली थी।
Sunday, January 30, 2022
बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर
Friday, August 13, 2021
स्वतंत्रता दिवस पर झारखंड के गोड्डा में शूट की गई फौजी मेरा भाई हुई रिलीज
गोड्डा।
Sunday, March 10, 2019
लोकसभा चुनाव के साथ 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए भी होंगे मतदान, अभी जम्मू कश्मीर में विधानसभा के लिए नहीं होंगे चुनावःCEC
कब-कब होंगे मतदान
पहला चरण- 11 अप्रैल- 91 सीटों- आंध्र प्रदेश (25 सीटें), अरुणाचल (2 सीटें) असम (5 सीटें) बिहार (4 सीटें) छत्तीसगढ़ (1 सीटें) जम्मू-कश्मीर (2 सीटें), महाराष्ट्र (1 सीट), मेघालय (1 सीट), मिजोरम (1 सीटें), ओडिशा (4 सीटें), सिक्किम (1 सीट), तेलंगाना (17 सीटें) त्रिपुरा (1 सीट), उत्तर प्रदेश (8 सीटें), उत्तराखंड (5 सीटें), पश्चिम बंगाल (2 सीटें), अंडमान निकोबार (1 सीट), लक्षद्वीप (1 सीट)
दूसरा चरण- 18 अप्रैल- 91 सीटें- असम 5, बिहार 5, छत्तीसगढ़ 3, जम्मू-कश्मीर-2, कर्नाटक-14, महाराष्ट्र-10, मणिपुर-1, ओडिशा-5, तमिलनाडु-39, त्रिपुरा-1, उत्तर प्रदेश-8, पश्चिम बंगाल-3, पुद्दुचेरी-1
तीसरा चरण- 23 अप्रैल- 115 सीटें- असम 4, बिहार 5, छत्तीसगढ़ 7, गुजरात 26, गोवा 2, जम्मू-कश्मीर-1, कर्नाटक-14, केरल-20, महाराष्ट्र-14, ओडिशा-6, उत्तर प्रदेश-10, पश्चिम बंगाल-5, दादर नागर हवेली-1, दमन दीव-1.
चौथा चरण- 29 अप्रैल- 71 सीटें- बिहार 5, जम्मू-कश्मीर 1, झारखंड 3, मध्यप्रदेश 6, महाराष्ट्र 17, ओडिशा 6, राजस्थान 13, उत्तर प्रदेश 13, पश्चिम बंगाल 8
पांचवां चरण- 6 मई- 51 सीटें- बिहार 5, जम्मू कश्मीर 2, झारखंड 4, मध्यप्रदेश 7, राजस्थान 12, उत्तर प्रदेश 14, पश्चिम बंगाल 7
छठवां चरण- 12 मई- 59 सीटें- बिहार 8, हरियाणा 10, झारखंड 4, मध्यप्रदेश 8, उत्तर प्रदेश 14, पश्चिम बंगाल 8, दिल्ली 7
सातवां चरण- 19 मई- 59 सीटें- बिहार 8, झारखंड 3, मध्यप्रदेश 8, पंजाब 13, चंडीगढ़ 1, पश्चिम बंगाल 9, हिमाचल 4
Friday, March 8, 2019
विश्व महिला दिवस पर आएं, महिलाओं को उनके सम्मान व अधिकार वापस देने हेतु लें प्रण!
Saturday, March 2, 2019
अभिनंदन तो झांकी है,लेकिन आतंकवाद अभी बाकी है......
ये सही है कि भारत का जाबांज सही सलामत वापिस आ गया है, परंतु वह जिस मिशन के लिए काम कर रहा था, क्या वह खत्म हो गया है? नहीं! अभिनंदन साधन मात्र था जिसे साध्य पर चलाया गया था, परंतु पिछले दो तीन दिनों तक हमारा पूरा ध्यान साधन अर्थात अभिनंदन पर टिक गया था।
पाकिस्तान अपनी सोची समझी कुशल रणनीति के तहत भारतीय मानस को भावनात्मक रूप से दूसरी ओर मोड़ने में सफल रहा। हमारी भारतीय मीडिया भी हमें दिनभर वही परोसती रही जो पाकिस्तान चाहता था और आम जनता भी वह देखती रही।
पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाक अधिकृत कश्मीर तथा पाकिस्तान के जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी ठिकानों पर बम गिराए थे। उसके बाद से तो पाकिस्तान की ओर से सीजफायर के उल्लंघन का और भारत की जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चल ही रहा है। आज भी सीमा पर हमारे जवान शहीद हो ही रहे हैं।
भगवान की कृपा अभिनंदन पर थी और वे सही सलामत स्वदेश लौट आये हैं परंतु अब भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इसके बाद पाकिस्तान कुछ नहीं करेगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने आपको शांतिदूत साबित करने का जो नाटक किया है, वह कितने दिन चलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। परंतु भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा लक्ष्य अभिनंदन नहीं है। हमारा लक्ष्य आतंकवादी हैं।
डोजियर के डोज से सुधरेगा पाक?
पाकिस्तान लगातार यह कहता आया है कि वह आतंकवाद को पनाह नहीं दे रहा है और जिन जगहों पर भारत ने बम दागे हैं वहां जैश का कोई अड्डा नहीं था मात्र जंगल था। पाकिस्तान के द्वारा आतंकवादियों को बचाने की यह पहली कोशिश नहीं है। इसके पहले भी वह दाऊद, ओसामा बिन लादेन, मसूद अजहर, हाफ़िज़ सईद जैसे अन्य आतंकवादियों को बचाता आया है।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर जिस जगह पर मारा था वह जैश के उन ठिकानों से ज्यादा दूर नहीं है जहां भारत ने बम गिराए हैं।
ये सभी आतंकवादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी घोषित किये जा चुके हैं। सभी वांटेड लिस्ट में शामिल हैं, सभी पर ईनाम रखे गए हैं। परंतु फिर भी पाकिस्तान उन्हें शह दे रहा है। हाफिज सईद तो पाकिस्तान में चुनाव तक लड़ लेता है। पाकिस्तान का कहना है कि इनके खिलाफ अगर सबूत मिलते हैं तो वह कार्रवाई करेगा। भारत के द्वारा दिये गए डॉजियर में वे सारे सबूत शामिल हैं जिनसे यह साफ समझ में आता है कि ये आतंकवादी हैं। अब पाकिस्तान को इन सभी पर कार्रवाई करना आवश्यक होगा। परंतु अगर धीरे-धीरे उस पर से दबाव हटता रहा तो वह अपनी फितरत के अनुसार कार्रवाई करने से मुकर जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर पाक सेना और आई एस आई का भरपूर दबाव है। जिस तरह से कल विंग कमांडर अभिनंदन की भारत वापसी में देर की जा रही थी और अंतिम क्षण तक पाकिस्तान अपनी खुरापातों से बाज नहीं आया उसे देखकर यह समझ जाना चाहिए कि अभिनंदन को छोड़ने का फैसला केवल और केवल भारतीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण किया गया है।पाकिस्तान पर यह दबाव चारों ओर से बनाये रखना बहुत आवश्यक होगा।
भारत का एक वर्ग जो सोशल मीडिया पर #saynotowar चला रहा है और भारत सरकार और सेना से जवाब तलब कर रहा है ,वह देशद्रोह जितना ही बड़ा अपराध है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह से वह अलग थलग पड़ गया है ये भारत के लिए शुभ संकेत है। यही वह समय है जब उसे अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सैनिकी कार्रवाई करके चारों ओर से घेरा जा सकता है। अतः अब यह आवश्यक है कि अभिनंदन के घर वापस आने की खुशियां मनाने के साथ ही हम यह भी ध्यान रखें कि पाकिस्तान अब उस सांप की तरह हो गया है जिसकी पूंछ पर भारत ने पांव रखा है और वह हर हाल में भारत को डसने का प्रयत्न करेगा ही। इस समय हमारी सतर्कता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होगी क्योंकि अभिनंदन तो झांकी हैं पर आतंकवादी बाकी हैं…… (हिं.विवेक)
भारतीय पायलट अभिनंदन को छोड़ने को लेकर हुआ बड़ा चौंकाने वाला खुलासा
पाकिस्तान के एफ 16 लड़ाकू विमान का पीछा करके उसे मार गिराने वाले पायलट अभिनंदन वर्तमान को छोड़ने के पाकिस्तान के फैसले के पीछे की पूरी कहानी सामने आ रही है। भारती न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक इमरान खान के इस फैसले के पीछे जिनेवा संधि नहीं, बल्कि भारत के हमले का अल्टीमेटम था।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि पायलट के पाकिस्तान के कब्जे में होने की खबर के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बेहद नाराज थे और उन्होंने इसकी जवाबी कार्रवाई जल्द से जल्द करने का मन बना लिया था। इस दौरान भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को यह साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान ने 24 घंटे के अंदर विंग कमांडर अभिनंदन को वापस नहीं लौटाया तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए स्वतंत्र होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक जरियों से इस बात की जानकारी पाकिस्तानी सरकार को दी और कहा कि अगर वो गुरुवार शाम तक अभिनंदन को वापस करने का एलान नहीं करता है तो उसके बाद के घटनाक्रम की अमेरिका की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। खास बात यह रही कि चीन और सऊदी अरब के विदेश विभागों ने भी पाकिस्तान सरकार से साफ कर दिया कि पहले वो भारतीय पायलट को रिहा करे, वरना हालात हाथ से निकल सकते हैं।
गुरुवार रात तय था भारत का हमला
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने बुद्धवार और गुरूवार की रात को पाकिस्तान के खिलाफ सभी मोर्चों पर एक साथ जंग छेड़ने का फैसला कर लिया था। इनमें मिसाइलों से हमले की भी तैयारी थी।
पाकिस्तानी सेना और सरकार को जब इस बात की भनक लगी तो बुधवार की रात भर उनकी सांसें अटकी रहीं। पाकिस्तान को यह लगता रहा कि कहीं भारत बुधवार को ही हमला न कर दे। इस डर का इशारा इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में दिए अपने भाषण में भी किया है।
इमरान ने पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हमें डर था कि भारत कहीं मिसाइल हमला ना कर दे इसलिए पूरा देश अलर्ट पर रखा गया था। हवाई सेवाएं रोक दी थी और सेना को किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने कहा था।’ बुधवार की रात बीतने पर पूरे पाकिस्तान ने चैन की सांस ली।
सुबह से ही इमरान खान और सेना के बड़े अफसरों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका था। इस दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बार फिर से दोपहर 12 बजे के आसपास पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को फोन करके याद दिलाया कि समय बीता जा रहा है।
सौदेबाजी की कोशिश में था पाकिस्तान
भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने पायलट अभिनंदन के बदले सौदेबाजी की कोशिश भी शुरू कर दी थी। इसी के तहत पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने वहां के टीवी चैनल जियो न्यूज़ को फोन पर इंटरव्यू में कहा कि अगर भारतीय सेनाएं पीछे हट जाएं तो वो अभिनंदन को छोड़ने को तैयार हैं। लेकिन विदेश विभाग ने इस पेशकश का जवाब यह दिया कि ‘पाकिस्तान से कोई सौदेबाजी नहीं होगी और अगर उसने विंग कमांडर अभिनंदन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं।’
गुरुवार दोपहर 2 बजे के आसपास भारतीय टीवी चैनलों पर विदेश मंत्रालय के ऐसे सख्त तेवरों की खबर आने के बाद पाकिस्तान समझ गया कि सौदेबाजी की कोशिशें उसे महंगी पड़ सकती हैं। पाकिस्तानी सेना से हरी-झंडी मिलने के बाद इमरान खान ने आनन-फानन में संसद में रिहाई का एलान करने का फैसला किया।
इस ऐलान से पहले अमेरिकी सरकार और इस्लामाबाद में भारतीय राजदूत को फोन पर यह जानकारी दे दी गई थी कि रिहाई का थोड़ी देर में ऐलान होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस वक्त वियतनाम के हनोई में उत्तर कोरिया के किम जोंग उन से मिलने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वहां पर मीडिया को यह जानकारी दी कि थोड़ी देर में कुछ अच्छा होने वाला है। उनका इशारा इसी बात की तरफ था।
आतंक से लड़ाई में अब आगे क्या होगा?
हमारे सूत्र ने बताया कि भारत ने पूरे विश्व समुदाय को जता दिया है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क के सफाये के बिना वो अब चुप नहीं बैठेगा। भारत ने कहा है कि या तो पाकिस्तान खुद इन ठिकानों को खत्म करे या भारत को यह काम करना पड़ेगा।
साफ है कि भारत ने जता दिया है कि वो आगे फिर से पाकिस्तान के अंदर हमले करेगा। इस बात की भी जानकारी भी अमेरिका से लेकर चीन और सऊदी अरब जैसे पाकिस्तान के हितैषी देशों को दे दी गई है। भारत सरकार ने यह शर्त भी रखी है कि पाकिस्तान हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकवादियों को उसे सौंपे।
पूरी दुनिया इस बात को समझ रही है कि भारत इस मामले में अब झुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में आगे भी पाकिस्तान को ही झुकना होगा, जिसकी शुरुआत इमरान खान ने कर दी है।
Friday, March 1, 2019
अभिनंदन की वापसी पर दुनिया भर की मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी को ऐसे सराहा
भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान आज वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लेकर आएंगे। भारतीय सेना के पराक्रम और सरकार के कूटनीतिक चक्रव्यूह के आगे पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए। भारत ने दो टूक कहा था हर हाल में अभिनंदन की बिना शर्त सकुशल रिहाई चाहता है। दबाव रंग लाया और गुरुवार को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अभिनंदन की रिहाई का एलान कर दिया। भारत की इस कामयाबी को कूटनीतिक जीत बताया जा रहा है। दुनिया भर की मीडिया ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
14 फरवरी को पुलवामा में हुए एक आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके 12 दिनों बाद 26 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी प्रशिक्षण शिविर पर हमला कर 325 आतंकवादी और आतंकियों के ट्रेनर का सफाया कर दिया था।
इनमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को तुरंत फैसला लेने वाले नेता के रूप में पेश किया। वहीं पाकिस्तान के सामने अपनी रणनीति तय करने की चुनौती है।
द गार्जियन
ब्रिटेन के अखबार द गार्जियन ने लिखा है कि इमरान खान का भारतीय पायलट अभिनंदन वर्तमान को रिहा करने का एलान काफी आश्चर्यजनक है। जिसके बाद पाकिस्तान भारत पर दबाव बनाएगा जिससे तनाव कम हो। लेकिन जब तक पाकिस्तान यह स्वीकार नहीं कर लेता कि वह अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी संगठनों पर कार्रवाई कर रहा है, तब तक भारत अपनी कार्रवाई जारी रख सकता है। यही वह मुद्दा है जिसके चलते बीते दो दिन में परमाणु शक्ति से लैस दोनों देश युद्ध की कगार पर खड़े हो गए हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि अधिकतर भारतीय खास तौर पर पीएम मोदी के रूढ़िवादी हिंदू राजनीतिक समर्थक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के दूसरे प्रस्ताव को मानने में के पक्ष में नहीं थे। इमरान के इस प्रस्ताव का उद्देश्य मोदी को तनाव कम करने के लिए वार्ता करने के लिए रजामंद करना था।
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की सीनियर फैलो एलिसा आयर्स का कहना है, "बीते कई दशकों से पाकिस्तान के साथ चल रही बातचीत की प्रक्रिया थका देने वाली है। पाकिस्तान में मौजूद आतंकी समूहों पर कार्रवाई नहीं करने से भारत थका हुआ महसूस करने लगा है। भारतीयों को लगता है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं हो सकती है।"
ज्यादातर लोगों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान की की अर्थव्यवस्था बिगड़ी हुई है और उसकी स्थिति युद्ध लड़ने की नहीं है। चीन समेत कई देश अब पाकिस्तान पर आतंकी समूहों पर कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे हैं।
येदुरप्पा के बयान ने आखिर हिला दी भाजपा की चूलें, सरकार पशोपेश में
अभी-अभी: PAK में रची जा रही है अभिनंदन को रोकने की साजिश,कोर्ट में कहा-अभिनंदन को नहीं भेज सकते
New Delhi : आज पूरे देश की निगाहें वाघा बॉर्डर पर हैं। हिंदुस्तान का जांबाज पायलट विंग कमांडर अभिनंदन आने वाला है। भारत ने ऐसा कड़ा रुख अख्तियार किया कि इस्लामाबाद की एक नहीं चली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को खुद अभिनंदन को रिहा करने का ऐलान करना पड़ा।
वहीं पाकिस्तान में अभिनंदन को रोकने की साजिश रची जा रही है। इस्लामाबाद के एक स्थानीय एक्टिविस्ट ने कोर्ट में अभिनंनदन की रिहाई के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अभिनंदन को सरकार ऐसे वापस नहीं भेज सकती।
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत वायुसेना के बड़े अधिकारी और मोदी सरकार के कई मंत्री भी बाघा बॉर्डर पर अभिनंदन का स्वागत करेंगे। इससे पहले अमरिंदर सिंह ने ट्विटर पर लिखा, मैं पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर रहा हूं और मैं वर्तमान में अमृतसर में हूं। पता चला कि पाकिस्तान सरकार ने वाघा से अभिनंदन को भेजने का फैसला किया है। यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं उसके स्वागत में वहां रहूं और उसे रिसीव करूं, क्योंकि वह और उसके पिता एनडीए के पूर्व छात्र हैं।
भारत ने ऐसा सख्त रुख अपनाया कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को 30 घंटे के भीतर ही ऐलान करना पड़ा कि भारतीय पायलट को बिना शर्त रिहा किया जाएगा। आज विंग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी हो रही है, तो पूरा देश अभिनंदन – अभिनंदन कर रहा है। जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को साफ कर दिया था कि बगैर किसी चोट के पायलट की जल्द रिहाई होनी चाहिए, सौदेबाजी का तो सवाल ही नहीं उठता है।
भारत कांसुलर एक्सेस की मांग नहीं कर रहा बल्कि फौरन रिहाई की मांग कर रहा है। पाकिस्तान को चेतावनी भरे लहजे भारत ने कहा था कि अगर पायलट को कुछ हुआ, तो वो एक्शन के लिए तैयार रहे। भारत के लिए खुशी की बात है कि पायलट अभिनंदन आज सकुशल स्वदेश लौट आएंगे।
हालांकि, विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का एलान करने से पहले पाकिस्तान ने जमकर सौदेबाजी का संकेत दिया था। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉक्टर मुहम्मद फैजल ने कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे में भारतीय पायलट सुरक्षित और स्वस्थ है। भारत ने हमसे पायलट का मुद्दा उठाया था। कुछ दिनों में हम फैसला करेंगे कि कौन सी संधि उस पर लागू होगी और भारतीय पॉयलट को युद्धबंदी दर्जा दिया जाए या नहीं।
इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल से कहा था कि अगर पायलट की रिहाई से डि-एस्केलेशन होता है यानी तनाव घटता है तो पाकिस्तान पायलट को भी लौटने के लिए तैयार है। कुरैशी ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान पीएम इमरान खान, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को फोन करने को तैयार हैं।
Wednesday, February 20, 2019
नहीं रहे भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह
आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.
नई दिल्ली. हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना की विधा के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार देर रात दिल्ली के AIIMS में उन्होंने आखिरी सांस ली. नामवर सिंह पिछले एक महीने से एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती थे. ब्रेन हैमरेज की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. 92 साल के नामवर सिंह को डॉक्टर लंबे समय से ठीक करने की कोशिश कर रहे थे.
इससे पहले जनवरी में भी तबीयत होने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया था, कुछ दिन के इलाज के बाद उनकी सेहत ठीक हो गई थी इसके बाद उन्हें आईसीयू से हटा लिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक नामवर सिंह अपने कमरे में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. हालांकि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई.
उनके पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी घाट पर किया गया.
डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक है. साहित्य और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है.
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि वे एक नायाब आलोचक और साहित्य में दूसरी परंपरा के अन्वेषी थे. उन्होंने ट्वी किया, "हिंदी में फिर सन्नाटे की ख़बर. नायाब आलोचक, साहित्य में दूसरी परम्परा के अन्वेषी, डॉ नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार को आधी रात होते-न-होते उन्होंने आख़िरी सांस ली. कुछ समय से एम्स में भरती थे. 26 जुलाई को वे 93 के हो जाते. उन्होंने अच्छा जीवन जिया, बड़ा जीवन पाया, नतशीश नमन."
बता दें कि आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.
नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर (अब चंदौली) वाराणसी में हुआ था. उन्होंने अधिकतर आलोचना, साक्षात्कार इत्यादि विधाओं में सृजन किया. उन्होंने आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई ऊंचाई दी. नामवर सिंह ने साहित्य में काशी विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की. इसके बाद वे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रहे. उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें चर्चित हैं.
इनकी मुख्य रचनाएं:
इनकी मुख्य रचनाओं में बकलम खुद, हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां, छायावाद, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद जैसी आलोचना और कहना न होगा जैसे साक्षात्कार जैसी रचनाएं प्रमुख हैं.
Friday, February 15, 2019
पुलवामा हमला: शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा, RDX से नहीं किया गया था धमाका
पुलवामा हमले की शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. इस हमले में RDX का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि कश्मीर के पत्थर के खदानों में इस्तेमाल किए जाने वाला बहुत अच्छी गुणवत्ता वाले यूरिया अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था. आदिल ने इसे दो-तीन जगहों से इकट्ठा किया था.
हमले की जांच कर रही एनआईए, एनएसजी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मानें तो शुरुआती जांच में RDX के इस्तेमाल न किए जाने की रिपोर्ट आई है. फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, अभी यह प्रतीत होता है कि खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया है. बता दें, अमोनियम नाइट्रेट एक अकार्बनिक यौगिक है. यह साधारण ताप व दाब पर सफेद रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होता है. कृषि में इसका उपयोग उच्च-नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक के रूप में तथा विस्फोटकों में ऑक्सीकारक के रूप में होता है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विस्फोटक बनाने में प्रयुक्त सामग्री पंजाब या हरियाणा के स्थानीय डीलरों से खरीदी गई हो सकती है. जांच के पहले चरण में हमले में RDX का इस्तेमाल न होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है. RDX का इस्तेमाल कश्मीर में एक दशक से अधिक समय से नहीं किया गया है. बीते सालों में कश्मीर में आतंकी अमोनियम नाइट्रेट आधारित विस्फोटकों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. गंभीर चिंता का यह एक और कारण है क्योंकि आरडीएक्स की तुलना में अमोनियम नाइट्रेट बनाना काफी आसान है.
हालांकि, अगर आगे की जांच में RDX के इस्तेमाल की बात आती है तो एजेंसियों के लिए यह एक और बड़ी चुनौती होगी. सबसे पहले उन्हें पता करना होगा कि RDX कश्मीर में कैसे आता है? क्या इसकी तस्करी की गई थी या इसे स्थानीय स्तर पर बनाया गया था? यदि स्थानीय स्तर पर बनाया जाता है, तो कच्चे माल की खरीद कैसे की गई? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर जांच करने वाली एजेंसियों को विचार करना होगा. बता दें, RDX एक कार्बनिक यौगिक है, जो बिना गंध या स्वाद के एक सफेद ठोस होता है, व्यापक रूप से एक विस्फोटक के रूप में उपयोग किया जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान RDX का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया था.
बता दें, पुलवामा हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. हमले को आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया. उसने विस्फोटकों से भरी अपनी एसयूवी से सीआरपीएफ की बस को टक्कर मार दिया था. इसके बाद धमाका हुआ था. धमाके में सीआरपीएफ के करीब 40 जवान शहीद हो गए.
Wednesday, February 13, 2019
राफेल डील- बढती जा रही है मोदी सरकार की मुश्किलें
मोदी सरकार फ़्रांस से 36 रफ़ायल लड़ाकू विमानों के सौदे में अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के आरोपों में दिन प्रतिदिन घिरती जा रही है।
इस सौदे के संबंध में एक नया रहस्योद्घाटन यह हुआ है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2015 में फ्रांस से 36 रफ़ायल लड़ाकू विमानों के सौदे की घोषणा किए जाने से लगभग 15 दिन पहले अनिल अंबानी पेरिस में फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां वेस ले द्रिआन के दफ़्तर पहुंचे थे, जहां उन्होंने फ्रांसीसी रक्षा मंत्री के शीर्ष सलाहकारों से मुलाक़ात की थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बैठक में ले द्रिआन के विशेष सलाहकार ज्यां-क्लॉड मलाट, औद्योगिक सलाहकार क्रिस्टोफ सालोमन और औद्योगिक मामलों के उनके तकनीकी सलाहकार ज्योफ़री बॉट शामिल हुए थे।
सालोमन ने एक यूरोपीय डिफेंस कंपनी के शीर्ष अधिकारी से कहा था कि यह ‘बेहद शॉर्ट नोटिस पर हुई एक गोपनीय मुलाकात थी।’
एक अधिकारी के अनुसार, बैठक में अनिल अंबानी ने सलाहकारों से कहा था कि वे व्यावसायिक और डिफेंस हेलीकॉप्टरों के निर्माण के लिए उनके साथ काम करने की इच्छा रखते हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि अंबानी ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की बात भी कही थी।
इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबानी के ‘बिचौलिए’ की तरह काम करने और सरकारी गोपनीयता क़ानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जो किया है वो ‘देशद्रोह’ है।
Friday, February 8, 2019
मायावती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, CJI बोले- हाथियों और अपनी मूर्तियों पर खर्च पैसे लौटाएं
लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों को झटके पर झटके लगने आरम्भ हो गए हैं . इस क्रम में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि BSP सुप्रीमो मायावती ने अपनी और हाथियों की मूर्तियां बनाने में जितना जनता का पैसा खर्च किया है, उसे वापस करना चाहिए. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे थे. इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में दायर रविकांत और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मायावती को मूर्तियों पर खर्च सभी पैसों को सरकारी खजाने में जमा कराना चाहिए. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मायावती के वकील को कहा कि अपने क्लाइंट को कह दीजिए कि सबसे वह मूर्तियों पर खर्च हुए पैसों को सरकारी खजाने में जमा कराएं.
आपको बता दें कि मायावती के द्वारा उत्तर प्रदेश में बसपा शासनकाल में कई पार्कों का निर्माण करवाया गया. इन पार्कों में बसपा संस्थापक कांशीराम, मायावती और हाथियों की मूर्तियां लगवाई गई थीं. ये मुद्दा इससे पहले भी चुनावों में उठता रहता है और विपक्षी इस मुद्दे पर निशाना साधते हैं. बसपा शासनकाल में ये पार्क लखनऊ, नोएडा समेत अन्य शहरों में बनवाए गए थे.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 2015 में उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्क और मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी. उत्तर प्रदेश में पूर्व की समाजवादी पार्टी सरकार इस मुद्दे पर बसपा को घेरते रहे हैं.
खर्च हुए थे करीब 6000 करोड़
उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान लखनऊ विकास प्राधिरकरण (LDA) के रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों पर कुल 5,919 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे.
रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल पर BSP के चुनाव चिन्ह हाथी की पत्थर की 30 मूर्तियां जबकि कांसे की 22 प्रतिमाएं लगवाई गईं थी. इसमें 685 करोड़ का खर्च आया था. इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन पार्कों और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी बहाल किए गए थे.
गौरतलब है कि 2012 विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था. तब अखिलेश ने मायावती पर 40 हजार करोड़ के मूर्ति घोटाले का आरोप लगाया था.
Friday, February 1, 2019
वर्तमान राजनीति में राजनेताओं से नैतिकता और पवित्रता की उम्मीद करना बेमानी!!
हालांकि देश की वर्तमान राजनीति में राजनेताओं ने नैतिकता और पवित्रता की उम्मीद करना बेमानी है, लेकिन जो राजनेता देश चलाने और संभालने की बात करते हैं उन्हें तो अपना आचरण नैतिक और पवित्र ही रखना चाहिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी यदि शब्दों का घालमेल कर राजनीति करेंगे तो फिर दूसरे नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है। राहुल गांधी 29 जनवरी को अपनी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी के साथ गोवा के दौरे पर थे, तभी राहुल गांधी गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। चूंकि पर्रिकर इन दिनों जानलेवा रोग कैंसर से संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए राहुल की इस मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात माना गया। स्वाभाविक है कि दोनों के बीच कोई राजनीतिक संवाद नहीं हुआ होगा। लेकिन 30 जनवरी को राहुल गांधी ने बीमार पर्रिकर से हुई मुलाकात को राजनीति से जोड़ दिया। राहुल ने एक सार्वजनिक समारोह में कहा कि 29 जनवरी को उन्होंने पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात की। पर्रिकर ने भी कहा था कि राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री ने रक्षामंत्री से कोई बात नहीं की। राहुल ने शब्दों का ऐसा घालमेल किया, जिससे लगा कि 29 जनवरी की मुलाकात में पर्रिकर ने राफेल पर राहुल से बात की है। यह माना कि राफेल विमान सौदे पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते, लेकिन राहुल को कम से कम बीमार पर्रिकर के कंधे पर बंदूक रख कर नहीं चलानी चाहिए। राहुल के बयान के बाद पर्रिकर को अपनी सफाई में पत्र भी लिखना पड़ा। स्वाभाविक है कि इससे पर्रिकर के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा होगा। ऐसे में यदि पर्रिकर के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो कौन जिम्मेदार होगा? क्या राजनीति करने का मतलब किसी की जान लेना है? राहुल गांधी भी जानते हैं कि मनोहर पर्रिकर देश के चुनिंदा ईमानदार नेताओं में से एक है। पर्रिकर की ईमानदारी की वजह से ही उन्हें गोवा के सीएम के पद से हटा कर देश का रक्षामंत्री बनाया गया था। राहुल गांधी को कम से कम पर्रिकर जैसे राजनेता को तो बख्शना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राफेल विमान सौदे पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करें, यह उनकी राजनीति हो सकती है, लेकिन किसी बीमार व्यक्ति को टारगेट करना उचित नहीं माना जा सकता। यह माना कि तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनने से राहुल गांधी बेहद उत्साहित हैं और उन्हें लगता है कि अब लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी और भाजपा को हटा देंगे। लेकिन ऐसे अति उत्साह में राजनीति की नैतिकता और पवित्रता का तो ख्याल रखना ही चाहिए। (एसपी मित्तल)
Wednesday, January 30, 2019
प्रतिकूल फैसलों पर जजों पर हमले उचित नहीं
जस्टिस मिश्रा का कहना है कि अगर कोर्ट का निर्णय किसी के प्रतिकूल नहीं आता है तो वह जज के खिलाफ किसी उचित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता
न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के जज ने वकीलों को मीडिया और प्रेस की बहसों के दौरान जजों पर हमला किए जाने को लेकर फटकार लगाई है. उनका कहना है कि कोर्ट के फैसलों को राजनीतिक रंग देना कोर्ट की अवमानना का उग्र रूप है. राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जजों और न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगाया जा सकता है.जस्टिस मिश्रा का कहना है कि अगर कोर्ट का निर्णय किसी के प्रतिकूल नहीं आता है तो वह जज के खिलाफ किसी उचित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है. लेकिन प्रेस में उनपर हमला करना बिलकुल भी उचित नहीं है. कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि वकीलों को प्रेस में बहस के माध्यम से निर्णयों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आप
Tuesday, January 29, 2019
भारत के पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीज (George Fernandes) का 89 साल की उम्र में सुबह छह बजे निधन
#Visuals from outside #GeorgeFernandes's residence in Delhi. He passed away today morning at the age of 88; Social activist & former Samata Party president Jaya Jaitly present at the residence.
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