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Tuesday, September 27, 2022

बिहार में वन देवी मानकर लोग कर रहे एटलस मॉथ की पूजा



बिहार के बगहा इलाके में दुनिया की सबसे बड़ी तितली एटलस मॉथ मिली है। जानकारी के मुताबिक, तितली हरनाटांड़ के गांव काला बैरिया में बैठी दिखी। इसके पंखों परसांप जैसी आकृति देख ग्रामीणों ने इसे नवरात्रि में वनदेवी मां समझ इसकी पूजा करनी शुरू कर दी। पहले तो ग्रामीण इसे सांप समझ कर डरे। मगर कुछ ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर इसे पास जाकर देखा तो उन्हें इसका आकार व रंग रूप कुछ अलग दिखाई दिया। हालांकि एक बार तो गांव में डर का माहौल हो गया। मगर बाद में बारीकी से जांच की तो लोगों को ये देवी का अवतार लगी। इसके बाद गांव के लोगों ने इसकी पूजा शुरू कर दी। इसके आगे ग्रामीणों ने घी के दीपक जलाए तो कुछ ने अगरबत्तियां जलानी शुरू कर दी। हालांकि कुछ लोग इसे प्रेत मान रहे थे।
दुर्लभ प्रजाति की तितली है एटलस मॉथ
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट कमलेश मौर्य के मुताबिक, एटलस प्रजाति की यह तितली दुर्लभ है। इनमें एक खास बात ये होती है कि, अन्य जीवों के उलट फिमेल एटलस मेल से बड़ी होती है व सुंदर भी। इसके पंखों का फैलाव करीब 24 सेमी होता है। ये लॉयल होते हैं। फिमेल और मेल अंडे देने के बाद उनमें से प्यूपा निकलने के बाद एक साथ मौत का इंतजार करते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ मौर्य के मुताबिक, इसका दिखना एक सुखद संकेत है। मतलब कि, कोविड काल के दौरान प्रकृति ने खुद को रिपेयर किया है तो कई जीवों की दुर्लभ प्रजातियां फिर से पनपने लगी हैं।

Sunday, February 6, 2022

लता मंगेशकर पर विशेष;लता : भूतो न भविष्यति....



 

( राजेश झा,विश्व संवाद केंद्र मुंबई) 
लता दीदी के जीवन पर प्रकाश डालना सूरज को दीपक दिखाना है। माना जाता हैं कि लीजेंड पैदा नही होते अवतरित होते हैं। लता दीदी पृथ्वी पर भारत की पुण्य भूमि में अवतरित ही हुई थी। 

लता दीदी के निजी जीवन में पोलिटिकल करेक्टनेस की बीमारी उन्हें कभी छू भी नही पाई थी।

वीर सावरकर देश की आजादी के बाद जब जेल से छूटे तो लता दीदी उनके स्वागत में उनको पिक करने पहुँची थी।

लता दीदी ने जिस दौर में भाजपा को एक वर्ग अछूत समझता था या खुले मंच पर चुप रहने का ढोंग करता था, उस दौर में लता दीदी बोली थी कि मैं चाहती हूँ कि अटल भाई प्रधानमंत्री बने, इसके पीछे जनसंघ/भाजपा से लगाये अटल भाई का पचास साल का तप भी हैं। 

नरेंद्र मोदी के लिये भी उन्होंने चुप्पी तोड़ी थी। 

हाँ गैर राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण किसी सरकार या व्यक्ति को कभी इन्होंने असहज नही किया था। हाँ, पर अपना अनुराग भी इन्होंने कभी छिपाया नही था।

लता दीदी का व्यक्तित्व ऐसा था कि इन्हें सभी प्यार करते हैं। 

लालकिला पर एक बार पंडित प्रदीप के लिखे गीत को लता दीदी की आवाज में सुनकर पण्डित नेहरू भी रोने लगे थे। भावुक होकर बोले थे कि ऐसे गीत भी  सिनेमा जगत में लिखे गाये जाते हैं क्या ? 

लता दीदी से सभी प्यार करता हैं। कोई किसी भी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा, बोली, आदि से सम्बंधित हो... किसी भी फील्ड या पेशे में हो... लता दीदी के आभामंडल से वशीभूत रहता ही हैं। 

कभी कोई पद या सम्मान किसी को मिलता हैं तो उस व्यक्ति का कद बढ़ता हैं। लता मंगेशकर दीदी उन विरले लोगो मे हैं, जिन्हें भारत रत्न मिला था तो भारत रत्न का सम्मान बढ़ा हैं।  
विनम्र श्रद्धांजलि ....

भारतरत्न सुश्री लता मंगेशकर देश की सबसे लोकप्रिय एवं आदरणीय गायिका थीं।  प्रारंभिक काल में उन्होने कुछ मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय तथा फिल्मोद्योग में पैर सुदृढ़ता से जम जाने पर कुछ मराठी फिल्मों व हिंदी फिल्मों का निर्माण भी किया।पांच फिल्मों का संगीतनिर्देशन भी किया। जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्याधुनिक अस्पताल भी उन्होने बनवाये।  लेकिन उनकी पहचान "भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका  " के रूप में ही की जाती है।उन्होने हिंदी, मराठी एवं बांग्ला सहित 36 से अधिक भाषाओं में फिल्मी तथा गैर-फिल्मी गाने गाये हैं।उनकी मनमोहिनी आवाज में ऐसा जादू है जो हर सुननेवाले को मंत्रमुग्ध कर देती है।लता की जादुई आवाज़ के भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है। उनको संगीत  के क्षेत्र में अनुपम योगदान के लिए 'पद्मभूषण' , 'पद्मविभूषण' तथा  'भारत रत्न' ,दादा साहेब फाल्के चारों  नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया गया। 

पुरा नाम- लता दीनानाथ मंगेशकर
जन्म- 28 सितंबर, 1929
स्थान- मध्य प्रदेश, इन्दौर
पिता- दीनानाथ मंगेशकर
माता- शेवंती मंगेशकर  
मृत्यु -६ फरवरी २०२२

प्रारंंभिक जीवन

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को भारत स्थित मध्य प्रदेश जिला के इन्दौर में हुआ था। वे पंडित दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती की बड़ी बेटी थीं। लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे जबकि माँ गुजराती थी और शेवंती उनकी दूसरी पत्नी थी। उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था, जिसकी मृत्यु के बाद दीनानाथ ने नर्मदा की छोटी बहन शेवंती को अपनी जीवन संगिनी बनाया।गोआ में मंगेशी के मूल निवासी होने के कारण पंडित दीनानाथ हार्डीकर ने अपना उपनाम ( सरनेम )बदलकर उन्होंने मंगेशकर कर लिया। उनकी और शेवंती की पहली संतान थीं हेमा थीं जिसे बदलकर लता कर दिया गया। यह नाम दीनानाथ को अपने नाटक ‘भावबंधन’ के एक महिला किरदार लतिका के नाम से मिला। लता के बाद मीना, आशा और हृदयनाथ का जन्म हुआ। बचपन से ही लता को घर में गीत-संगीत और कला का वातावरण मिला और वे स्वभावतः  उसी की तरफ आकर्षित हुई।लता मंगेशकर ने अपना कला क्षेत्र का पहला पाठ अपने पिता से सीखा था। पाँच साल की उम्र में लता  ने अपने पिता के म्यूजिकल नाटक के लिये एक्ट्रेस का काम करना शुरू किया था । स्कूल के पहले दिन से ही उन्होंने बच्चो को गाने सिखाने शुरू कर दिये थे। जब शिक्षको ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वह बहुत गुस्सा हो गयी थी , लेकिन अपनी छोटी बहन आशा को भी स्कूल ले जाने पर  जब शिक्षको ने उन्हें बैठने की अनुमति नहीं दी तो इससे लता को बहुत दुःख हुआ  और उन्होने भी स्कूल जाना ही छोड़ दिया । दीनानाथ मंगेशकर की मृत्यु 1942 में हो गई तब लता मात्र 13 साल की थीं। वे अपने सभी भाई और बहनों में सबसे बड़ी थीं  तो उनपर घर का आर्थिक दायित्व आ गया और उन्होने अभिनय तथा गायन दोनों के द्वारा धनार्जन प्रारम्भ कर दिया। एक मराठी फिल्म के लिए उनकी आवाज में एक गाना रिकॉर्ड किया गया , लेकिन जब  फिल्म रिलीज हुई तो उसमें लता का गाया गाना नहीं था। इस बात से लता  बहुत आहत हुई।दीनानाथ के अच्छे मित्र विनायक दामोदर एक फिल्म कंपनी के मालिक थे, जिन्होने दीनानाथ  की मृत्यु के बाद लता जी के परिवार को बहुत सहारा दिया।

1945 में लता मंगेशकर जी मुंबई आ गई और इसके बाद उनका करियर धीरे -धीरे आकार लेने लगा।लता मंगेशकर ने संगीत की शिक्षा  उस्ताद अमानत अली खान से संगीत की शिक्षा लेना शूरू कर दिया। वर्ष 1947 में विभाजन के बाद उस्ताद अमानत अली खान पाकिस्तान चले गये इसलिए वो भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत सीखने लगीं।   1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर उनके संगीत गुरु बने। लता मंगेशकर ने  विनायक  दामोदर की दूसरी हिंदी फिल्म सुभद्रा , फिर  फिल्म "बड़ी माँ" (1945) में भजन गाये। उनके गाए भजन ‘माता तेरे चरणों में’ 1946 में रिलीज हुई। वर्ष 1947 में हिंदी फिल्म ‘आप की सेवा में’ के लिए भी एक गाना गया, लेकिन सफलता लता से अब भी बहुत दूर थी । गुलाम हैदर ने लता मंगेशकर की मुलाकात शशधर मुखर्जी से कराई जो उन दिनों फिल्म "शहीद" पर काम कर रहे थे। लेकिन मुखर्जी ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी आवाज पतली है।उस समय गायिका नूरजहाँ,शमशाद बेगम, जोह्राबाई अम्बलेवाली का दबदबा था,  उनकी आवाज भारी व अलग थी, उनके सामने लता की आवाज काफी पतली और दबी हुई लगती थी।उसके बाद गुलाम हैदर  ने लता जी को फिल्म " मजबूर" में मौका दिया जिसमे उन्होंने “दिल मेरा तोडा ,मुझे कही का न छोड़ा ” गाना गाया जो उनके जीवन का पहला हिट गाना बना यही कारण है कि लता जी गुलाम हैदर साहब को ही अपना गॉडफादर मानती थी। समय बदला , 1949 में लता जी ने लगातार 4 हिट फिल्मों में गाने गए और सभी गानें बहुत पसंद किये गए ' बरसात', 'दुलारी', 'अंदाज' व 'महल' फिल्में हिट थी, इसमें से 'महल' फिल्म का गाना ‘आएगा आनेवाला’ सुपर हिट हुआ और लता के पैर हिंदी सिनेमा जगत जम गए ।


लता मंगेशकर ने उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया। अनिल बिस्वास, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन, नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र इत्यादि सभी संगीतकारों ने इनकी प्रतिभा का लोहा माना। लता ने 'दो आँखें बारह हाथ', 'दो बीघा जमीन',' मदर इंडिया', 'मुगल ए आजम' आदि महान फिल्मों में गाने गाये। “एक थी लड़की”, “बड़ी बहन” आदि फिल्मों की  लोकप्रियता लता के गाये गीतों ने  चार चाँद लगाए। इस दौरान आपके कुछ प्रसिद्ध गीत थे “ओ सजना बरखा बहार आई” (परख-1960), “आजा रे परदेसी” (मधुमती-1958), “इतना ना मुझसे तू प्यार बढा़” (छाया- 1961), “अल्ला तेरो नाम”, (हम दोनों -1961), “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, (जंगली-1961), “ये समां” (जब जब फूल खिले-1965) इत्यादि।
बाद के वर्षों में उन्होंने संगीत के हर क्षेत्र में अपनी कला ऐसी बिखेरी जैसे कि गीत, गजल, भजन सब विधा में उनका वर्चस्व बढ़ने लगा। गीत चाहे शास्त्रीय संगीत पर आधारित हो, पाश्चात्य धुन पर हो या फिर लोकधुन की खुशबू से सराबोर हो-हर गीत को लता ने ऐसे जीवंत रूप में पेश किया कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाय । उन्होने मन्ना डे , मुहम्मद रफी, किशोर कुमार, महेंद्र कपूर आदि के साथ-साथ दिग्गज शास्त्रीय गायकों पं भीमसेन जोशी, पं जसराज इत्यादि के साथ भी मनोहारी युगल-गीत गाए। गजल के बादशाह जगजीत सिंह के साथ एलबम “सजदा” ने लता को अद्वितीय , अतुलनीय बना दिया। 


लता मंगेशकर ने 1953 में सबसे पहले मराठी फिल्म ‘वाडई‘ बनाई फिर  इसी वर्ष उन्होंने संगीतकार सी. रामचंद्र के साथ मिलकर हिंदी फिल्म ‘झांझर‘ का निर्माण किया था। तत्पश्चात 1955 में हिंदी फिल्म ‘कंचन‘ बनाई। उपरोक्त तीनों औसत फिल्में थीं। 1990 में उनकी फिल्म ‘लेकिन‘ हिट होने के बाद लता जी ने पांच फिल्मों में संगीत निर्देशन दिया था। सभी फिल्में मराठी थीं और 1960 से 1969 के बीच बनी थीं। बतौर संगीत -निर्देशक उनकी पहली फिल्म राम और पाव्हना (1960) थी। अन्य फिल्में मराठा टिटुका मेलेवा (1962), साहित्यांजी मंजुला (1963), साधु मानसे (1955) व तबाड़ी मार्ग (1969) थीं।

लता मंगेशकर की शादी नहीं हो पाई। बचपन से ही परिवार का बोझ उन्हें उठाना पड़ा। इस दुनियादारी में वे इतना उलझ गईं कि शादी के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली। बताया जाता है कि संगीतकार सी. रामचंद्र ने लता मंगेशकर के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लता जी ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि लता ने इस बारे में कभी खुल कर नहीं कहा, परंतु बताया जाता है कि सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं। सी. रामचंद्र ने कहा था कि लता उनसे शादी करना चाहती थीं, परंतु उन्होंने इंकार कर दिया क्योंकि वह पहले से शादीशुदा थे।

देश-भक्ति गीत

        1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। इस समारोह में लता जी के द्वारा गाए गये गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे। पं नेहरू की आँखें भी भर आईं थीं। ऐसा था आपका भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी स्वर। आज भी जब देश-भक्ति के गीतों की बात चलती है तो सब से पहले इसी गीत का उदाहरण दिया जाता है। लता मंगेशकर के कौन से गीत पसंद किए गए या लोकप्रिय रहे, इसकी सूची बहुत लंबी है।लता के गाये यादगार गीतों में इन फिल्मों के नाम विशेष उल्लेखनीय है – अनारकली, मुगले आजम अमर प्रेम, गाइड, आशा, प्रेमरोग, सत्यम् शिवम् सुन्दरम्।  उम्र बढ़ने के बाद भी लता की आवाज पहले की तरह न केवल सुरीली रही, बल्कि उसमे और भी निखार आ गया था, जैसे हिना, रामलखन, आदि ।एक समय उनके गीत ‘बरसात’, ‘नागिन’, एवं ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में भी लता ने ढेर सारे गाने गाए। जिनमें से अधिकांश पसंद किए गए। किसी को मदन मोहन के संगीत में लता की गायकी पसंद आई तो किसी को नौशाद के संगीत में। सब की अपनी-अपनी पसंद रही। लता  का कहना था कि मैं नहीं जानती कि उन्होंने कितने गाने गाए क्योंकि उन्होंने कोई रिकॉर्ड नहीं रखा। गिनीज बुक में भी उनका नाम शामिल किया गया था, लेकिन इसको लेकर खासा विवाद है। लगभग 6 से 7 हजार गीतों को लता ने अपनी आवाज दी है, ऐसा माना जाता है।

पुरस्कार और सम्मान
लता मंगेशकर को ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिले। जितने मिले उससे ज्यादा के लिए उन्होंने मना कर दिया। 1970 के बाद उन्होंने फिल्मफेअर को कह दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नहीं लेंगी और उनकी बजाय नए गायकों को यह दिया जाना चाहिए। लता को मिले प्रमुख सम्मान और पुरस्कार इस तरह से हैं।


पुरस्कार:

1. फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
2. राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)
3. महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)
4. 1969 - पद्म भूषण
5. 1974 - दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड
6. 1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार
7. 1993 - फिल्म फेयर  पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
8. 1996 - स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
9. 1997 - राजीव गान्धी पुरस्कार
10. 1999 - एन.टी.आर. पुरस्कार
11. 1999 - पद्म विभूषण
12. 1999 - ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
13. 2000 - आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
14. 2001 - स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
15. 2001 - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न"
16. 2001 - नूरजहाँ पुरस्कार
17. 2001 - महाराष्ट्र भूषण  1. फिल्म फेर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
 
1972 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-परी)
1974 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-कोरा कागज)
1990 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-लेकिन)
1959 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आजा रे परदेसी’ (फिल्म-मधुमती)
1963 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘काहे दीप जले कही दिल (फिल्म-बीस साल बाद)
1966 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा’ (फिल्म-खानदान)
1970 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आप मुझसे अच्छे लगने लगे’ (फिल्म-जीने की राह से)

1994 – विशेष पुरस्कार ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ (फिल्म-हम आपके हैं कौन)
2004 – फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड 50 साल पूरे करने पर
इसके साथ ही भारत में अनेक राज्यों द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त किया।

Wednesday, November 24, 2021

अब तो अपने क्रिप्टो कॉइंस को जानें: सार्वजनिक(PUBLIC) बनाम निजी(PRIVATE)क्रिप्टोकरेंसी





हालांकि इनमें से कई क्रिप्टो कोइंस विभिन्न तरीकों से एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन ये सभी समान नहीं हैं। 
गोपनीयता के संबंध में, वे आम तौर पर दो मुख्य श्रेणियों में आते हैं: 

PUBLIC (सार्वजनिक) और PRIVATE (निजी)। 

सार्वजनिक सिक्के गुमनामी की डिग्री प्रदान करते हैं लेकिन अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अन्य लोग गोपनीयता को सबसे पहले रखते हैं।

गुमनामी बनाम गोपनीयता

विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी के विवरण में जाने से पहले, आइए विचार करें कि ब्लॉकचेन दुनिया में गुमनामी और गोपनीयता(security) कैसे काम करती है।


सभी ब्लॉकचेन-आधारित क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ हद तक गुमनामी की पेशकश करते हैं क्योंकि वे उपयोगकर्ताओं को छद्म नामों के तहत काम करने की अनुमति देते हैं। हालांकि, गुमनामी और छद्म नाम गोपनीयता के समान नहीं हैं। बिटकॉइन लेनदेन का पता लगाया जा सकता है, जैसा कि कई अन्य सिक्कों और टोकन के लिए हो सकता है जिन्हें गोपनीयता को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था। पते को जोड़ा जा सकता है और लेनदेन की मात्रा का भी पता लगाया जा सकता है। यदि कोई किसी पते से जुड़ी वास्तविक पहचान प्रकट कर सकता है, तो गोपनीयता पूरी तरह से विघटित हो जाती है।


दरअसल, सार्वजनिक ब्लॉकचेन की प्रकृति ही लेनदेन को ट्रेस करने योग्य बनाती है। एक खुले ब्लॉकचेन पर होने वाले सभी लेन-देन को कोई भी व्यक्ति देख सकता है जिसकी ब्लॉकचेन तक पहुंच है। जिस डिग्री से उनका पता लगाया जा सकता है वह प्रोजेक्ट टीम द्वारा नियोजित क्रिप्टोग्राफी पर निर्भर करता है। गोपनीयता पर ध्यान केंद्रित नहीं करने वाले सार्वजनिक सिक्के लिंक करने योग्य और ट्रेस करने योग्य होते हैं, जबकि गोपनीयता के सिक्के एक या दोनों विशेषताओं को तोड़ने के लिए कई तरह की चुपके रणनीति का उपयोग करते हैं।

सार्वजनिक सिक्के और उपयोगिता टोकन

सच्ची गोपनीयता उन्नत क्रिप्टोग्राफी के साथ आती है और यही कारण है कि आज उपयोग में आने वाली अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी बुनियादी गुमनामी, या बल्कि छद्म नाम से परे कोई गोपनीयता सुविधाएँ प्रदान नहीं करती हैं। वे सार्वजनिक रूप से खुश हैं, इस अर्थ में कि उनके ब्लॉकचेन पर ट्रेस करने योग्य और लिंक करने योग्य लेनदेन उत्पाद को प्रभावित नहीं करते हैं, केवल संभवतः अंतिम उपयोगकर्ता।

लोकप्रिय सार्वजनिक क्रिप्टोकरेंसी और टोकन में शामिल हैं:

बिटकॉइन: क्रिप्टोकुरेंसी जो मानचित्र पर क्रिप्टोकुरेंसी डालता है। जबकि बिटकॉइन गुमनामी प्रदान करता है, यह सच्ची गोपनीयता के रास्ते में बहुत कुछ प्रदान नहीं करता है। लेन-देन लिंक करने योग्य और डिज़ाइन द्वारा पता लगाने योग्य होते हैं।
लिटकोइन : लिटकोइन को कुछ बिटकॉइन उपयोगकर्ताओं को अस्वीकार्य रूप से धीमी गति के प्रतिक्रिया के रूप में बनाया गया था
लेनदेन की गति और भंडारण की समस्याएं। बिटकॉइन की तुलना में, लिटकोइन लेनदेन दरों और भंडारण दक्षता में काफी सुधार प्रदान करता है। हालांकि, लिटकोइन किसी भी प्रमुख गोपनीयता सुविधाओं की पेशकश नहीं करता है जो बिटकॉइन में उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि गोपनीयता एक डिज़ाइन लक्ष्य नहीं है।
एथेरियम: एथेरियम की कल्पना वित्तीय लेनदेन से परे क्षेत्रों में ब्लॉकचेन के उपयोग का विस्तार करने के लिए की गई थी। ईथर शायद इस समय बिटकॉइन का सबसे लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन यह इस समय कोई विशेष गोपनीयता सुविधाएँ प्रदान नहीं करता है।
रिपल: एक्सआरपी एक टोकन है जिसे रिपल एक्सचेंज पर उपयोग के लिए विकसित किया गया है, जो अन्य क्रिप्टोकरेंसी का भी समर्थन करता है। रिपल को पूर्व निर्धारित किया गया था और फिर एक्सआरपी को पदोन्नति के लिए दिया गया था, और क्योंकि रिपल को ब्लॉकचैन पर हमलों के खिलाफ लचीलापन प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, एक्सआरपी अधिक लोकप्रिय हो सकता है क्योंकि बिटकॉइन हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि, हैकिंग के प्रतिरोध के अलावा, XRP कोई विशेष गोपनीयता सुविधाएँ प्रदान नहीं करता है।
निजी क्रिप्टोकरेंसी

ऊपर वर्णित परियोजनाओं के साथ, लेनदेन विवरण छुपाकर डिफ़ॉल्ट रूप से निजी होने के लिए डिज़ाइन किए गए लोकप्रिय टोकन हैं। ये क्रिप्टोकरेंसी अभी भी इस अर्थ में सार्वजनिक हैं कि उनके पास सार्वजनिक खुले बहीखाते हैं, लेकिन अंतिम उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा के लिए लेनदेन की जानकारी अलग-अलग डिग्री में अस्पष्ट है। यह बताना भी महत्वपूर्ण है कि गोपनीयता और गोपनीयता में अंतर होता है। हर इंसान को निजता का अधिकार है और उस अधिकार के लिए लड़ने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास छिपाने के लिए कुछ है।

लोकप्रिय निजी क्रिप्टोकरेंसी में शामिल हैं:

मोनेरो : मोनेरो दो विशेषताओं के माध्यम से हर समय गोपनीयता प्रदान करता है: रिंग सिग्नेचर और रिंग कॉन्फिडेंशियल ट्रांजैक्शन (रिंगसीटी। रिंग सिग्नेचर लेनदेन में शामिल पार्टियों का पता लगाना मुश्किल बनाते हैं क्योंकि ट्रांजेक्शन सिग्नेचर लोगों के एक बड़े समूह द्वारा साझा किए जाते हैं; परिणामस्वरूप, विशिष्ट उपयोगकर्ताओं को लेन-देन के साथ जोड़ना बहुत मुश्किल है। रिंगसीटी (जो तकनीकी रूप से बोल रहा है, वास्तव में एक विशेष प्रकार का रिंग सिग्नेचर है, एक विशिष्ट विशेषता के बजाय लेनदेन की मात्रा को अस्पष्ट करके अतिरिक्त गोपनीयता प्रदान करता है।
पार्टिकल : पार्ट पार्टिकल द्वारा अपने गोपनीयता प्लेटफॉर्म और विकेन्द्रीकृत मार्केटप्लेस पर उपयोग के लिए बनाया गया एक टोकन है (जो कई लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी का भी समर्थन करता है। पार्टिकल अत्यंत मजबूत गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए एक उपयोगिता टोकन है। बिटकॉइन के नवीनतम संस्करण पर निर्मित, पार्टिकल प्रोटोकॉल को बढ़ाता है। गोपनीय लेनदेन के साथ (सीटी और रिंगसीटी। मोनेरो की तरह, लेन-देन अप्राप्य हैं और राशियां अनलिंक करने योग्य हैं। हालांकि, मोनेरो के विपरीत, पार्टिकल उपयोगकर्ता को गोपनीयता नियंत्रण वापस देता है। पार्ट टोकन गोपनीयता सुरक्षा की कई परतें प्रदान करता है क्योंकि यह जनता के बीच निर्बाध रूप से स्विच कर सकता है। और निजी जबकि मालिक का नियंत्रण कभी नहीं छोड़ते और कभी भी गोपनीयता के अपने अधिकार से समझौता नहीं करते।
डैश: उभरने वाली पहली गोपनीयता-केंद्रित क्रिप्टोकरेंसी में से एक, डैश (पूर्व में डार्ककोइन सिक्का मिश्रण नामक तकनीक के माध्यम से लेनदेन को रोकने का प्रयास करता है। सिक्का मिश्रण एक तृतीय-पक्ष तकनीक है जिसे वैकल्पिक रूप से बिटकॉइन सहित सार्वजनिक क्रिप्टोकरेंसी के साथ उपयोग किया जा सकता है। कुछ गोपनीयता जोड़ें, लेकिन डैश डिफ़ॉल्ट रूप से मिश्रण को शामिल करता है। गोपनीयता के दृष्टिकोण से डैश की प्रमुख आलोचना यह है कि यह "मास्टरनोड्स" पर निर्भर करता है, जो कि उन्नत क्रिप्टोग्राफी नहीं है, बल्कि तृतीय-पक्ष मिक्सर है। यदि आप मास्टर्नोड ऑपरेटरों पर भरोसा नहीं करते हैं या कई केंद्रीय सर्वर रहते हैं, डैश की गोपनीयता में आत्मविश्वास महसूस करना मुश्किल है।
Zcash : Zcash की गोपनीयता रणनीति है
है, लेन-देन इतिहास - सिक्कों का जब भी कोई लेन-देन होता है। मोनेरो और पार्टिकल की तरह, लेन-देन के इतिहास को अस्पष्ट करके, Zcash लेनदेन का पता लगाना असंभव बना देता है। ZEC अपने सिक्कों को निजी बनाने के लिए zk-SNARKs नामक एक उन्नत क्रिप्टोग्राफ़िक तकनीक का उपयोग करता है। और पार्टिकल की तरह, ज़कैश मुद्रा से परे अपनी गोपनीयता के लिए उपयोग विकसित कर रहा है।
हालांकि क्रिप्टोकाउंक्शंस अक्सर लोकप्रिय कल्पना में गोपनीयता के साथ जुड़े होते हैं, वास्तव में, अधिकांश क्रिप्टोकाउंक्शंस केवल छद्म नाम के बुनियादी स्तर प्रदान करते हैं। अनिवार्य रूप से, बिटकॉइन जैसे क्रिप्टो-कॉइन उसी स्तर की गोपनीयता प्रदान करते हैं जो आपको मिलती है यदि आप किसी स्टोर में नकदी का उपयोग करके कुछ खरीदते हैं जहां कोई आपको नहीं पहचानता है। इस परिदृश्य में, आपके लेन-देन गुमनाम हैं, लेकिन लेन-देन की मात्रा का आसानी से पता लगाया जा सकता है। और अगर कोई आपकी पहचान निर्धारित करने में सक्षम है, तो सारी गोपनीयता जल्दी से लुप्त हो जाती है।
हालाँकि, कुछ मुट्ठी भर क्रिप्टोकरेंसी, जैसे कि पार्टिकल, एक अलग श्रेणी में आते हैं। सच्ची गोपनीयता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है न कि केवल गुमनामी प्रदान करने के लिए, उनमें विशेष सुविधाएँ शामिल हैं जो उपयोगकर्ताओं की पहचान का पता लगाना और कुछ सिक्कों के लिए, लेनदेन की मात्रा को प्रभावी रूप से असंभव बनाती हैं। जबकि इनमें से कुछ निजी क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड-ऑफ (जैसे डैश के मामले में मास्टर्नोड्स) हैं जो उन्हें गोपनीयता के दृष्टिकोण से कम आकर्षक बनाते हैं, अन्य पूरी तरह से विकेन्द्रीकृत तरीके से गोपनीयता प्राप्त करते हैं।
(Tahaleka live doesn't take responsibility of the market speculation.Beware in investment on your own risks.)

Tuesday, March 23, 2021

iPhone के साथ चार्जर ना देना Apple को पड़ा भारी, लगा 14 करोड़ का जुर्माना




नई दिल्ली।
दुनिया की दिग्गज फोन मेकर कंपनी एप्पल को अपने आईफोन 12 सीरीज के स्मार्टफोन के साथ चार्जर ना देना भारी पड़ गया। 9to5Google की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रजील की कंज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंसी Procon-SP ने एप्पल पर इसके लिए 2 मिलियन डॉलर (करीब 14 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। ब्रजीलियन एजेंसी ने भ्रामक विज्ञापन, बिना चार्जर के डिवाइस बेचना और अनुचित नियमों' को जुर्माने की वजह बताया है। प्रोकॉन-एसपी ने यह भी बताया है एप्पल के इस कदम से पर्यावरण को कोई लाभ नहीं दिख रहा। 
एजेंसी ने पूछा- क्यों नहीं घटाई कीमत?
अपने फैसले में एजेंसी ने एप्पल से यह भी पूछा कि क्या कंपनी ने चार्जर निकालने के बाद iPhone 12 की कीमत घटा दी है? हालांकि एप्पल की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं मिला है। कंपनी ने ऐसे सवालों के जवाब भी नहीं दिए, जैसे कि चार्जर के साथ और उसके बिना हैंडसेट की कीमत क्या थी, और क्या कंपनी ने चार्जर का प्रोडक्शन कम कर दिया है?
iOS अपडेट को लेकर भी लगाई लताड़
बॉक्स के साथ चार्जर ना मिलने के अलावा एजेंसी ने कंपनी को कुछ अन्य मुद्दों पर भी सवाल पूछे हैं। iOS अपडेट के मामले पर एजेंसी ने पूछा, 'ऐसा कहा जा रहा है कि कुछ यूजर्स को आईफोन्स अपडेट करने के बाद कई फंक्शन में दिक्कत आई थी, जिसमें Apple ने कोई मदद नहीं की। एप्पल को यह समझने की जरूरत है कि ब्राजील में कड़े उपभोक्ता संरक्षण कानून और संस्थान हैं। जिनका एप्पल को सम्मान करना होगा।'
चार्जर हटाने की एप्पल ने बताई थी यह वजह
बता दें कि एप्पल ने पिछले साल अक्टूबर में आईफोन 12 सीरीज को लॉन्च किया था। कंपनी ने उस समय दुनियाभर के लोगों को हैरान कर दिया था, जब बॉक्स के साथ चार्जर ना देने की बात कही थी। हालांकि कंपनी ने इसके पीछे एक जरूरी वजह भी गिनाई थी। एप्पल का कहना था कि चार्जर ना देकर कंपनी ई-वेस्ट की समस्या को कम कर रही है,जिससे पर्यावरण को फायदा होगा।  सैमसंग ने भी इस तरकीब को अपनाया है

Sunday, March 10, 2019

यमनी सेना ने सऊदी अरब का एक ड्रोन विमान मार गिराया

यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों के एयर डिफ़ेंस सिस्टम ने  सुबह सऊदी अरब के दक्षिणी क्षेत्र जीज़ान में सऊदी अरब का एक ड्रोन विमान मार गिराया।

इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों ने बताया है कि इस ड्रोन विमान को जीज़ान के जहफ़ान क्षेत्र में निशाना बनाया गया है।

सऊदी अरब और उसके घटकों द्वारा यमन के भीषण परिवेष्टन के बावजूद इस देश की सेना और स्वयं सेवी बलों की रक्षा शक्ति में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही है।

यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों ने यमन पर सऊदी गठबंधन के हमलों के आरंभ से अब तक सऊदी अरब और उसके घटकों के कई ड्रोन विमान मार गिराए हैं। 

यमनी सेना की यह कार्यवाही सऊदी सैन्य गठबंधन द्वारा अलहुदैदा में युद्ध विराम समझौते के निरंतर उल्लंघन के जवाब में की जा रही है। स्टाकहोम में पिछले वर्ष दिसम्बर के महीने में यमनी गुटों के बीच इस बात पर सहमति हुई थी कि अलहुदैदा में युद्ध विराम पर अल किया जाएगा और 18 दिसम्बर से यह युद्ध विराम लागू है।

यमन में युद्ध विराम और इस देश में संकट को वार्ता द्वारा हमल करने के लिए अब तक कई बार वार्ताएं और प्रयास हो चुके हैं किन्तु सऊदी अरब और उसके घटकों ने हर बार प्रयासों को विफल बना दिया है।

ज्ञात रहे कि सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 को अमेरिका, संयुक्त अरब इमारात और कुछ दूसरे देशों के समर्थन से यमन पर हमला किया था जिसमें अब तक 14 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं।

मारे जाने वालों में ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। यमनी जनता के कड़े प्रतिरोध के कारण सऊदी अरब और उसके घटक यमन में अब तक अपने किसी भी लक्ष्य को साध नहीं सके हैं। 

Friday, February 22, 2019

पाकिस्तान में सऊदी समर्थित तकफ़ीरी इस देश के पड़ोसियों के लिए शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियां करके समस्याएं उत्पन्न कर रहे: जनरल क़ासिम सुलैमानी

जनरल क़ासिम सुलैमानी का कहना है कि पाकिस्तान में सऊदी समर्थित तकफ़ीरी इस देश के पड़ोसियों के लिए शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियां करके समस्याएं उत्पन्न कर रहे हैं।

आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमान्डर जनरल क़ासिम सुलैमानी का कहना है कि पाकिस्तान में सऊदी समर्थित तकफ़ीरी भारत तथा अफ़ग़ानिस्तान सहित इस देश के समस्त पड़ोसियों के लिए शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियां अंजाम देकर समस्याएं पैदा कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इस बात को सही ढंग से समझना चाहिए।

जनरल क़ासिम सुलैमानी ने गुरुवार को ईरान के उत्तर में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के एक कार्यक्रम में कहा कि इस्लामी जगत में रक्तपात और मतभेद की जड़ वहाबियत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता और सरकार को इस बात की अनुमति नहीं देनी चाहिए कि सऊदी अरब के पैसे तकफ़ीरी आतंकवादियों के हाथ में पड़ें और वे पाकिस्तान को दुनिया के मुक़ाबले पर खड़ा कर दे।  सऊदी शासन अमरीकी समर्थन से क्षेत्र में विध्वंसक भूमिका निभा रहा है।  वह आतंकियों के समर्थन से ईरान की सीमाओं को अशान्त करने के प्रयास कर रहा है।  13 फ़रवरी 2019 को ईरान के सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत की आतंकी घटना इस बात की पुष्टि करती है जिसमें ईरान के 27 जवान शहीद हुए थे।  वह आत्मघाती जिसने ईरान के सीमा सुरक्षाबलों के वाहन को लक्ष्य बनाया था उसका संबन्ध पाकिस्तान से था।  इससे पता चलता है कि पाकिस्तान, अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में गंभीर नहीं है।  आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में पाकिस्तान के हालिया क्रियाकलापों से ईरान सहमत नहीं है।  संयुक्त सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए पाकस्तान को और अधिक प्रयास करने होंगे।

जनरल क़ासिम सुलैमानी ने कहा कि ईरान, पाकिस्तान के लिए एक विश्वसनीय पड़ोसी है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान कभी भी इस्लामाबाद के लिए ख़तरा नहीं होगा किन्तु इस्लामी गणतंत्र ईरान उन तकफ़ीरी पिट्ठुओं से बदला लेकर रहेगा जिनके हाथ ईरानी युवाओं के ख़ून से रंगे हुए हैं।

अमरीका और पश्चिम का समर्थन प्राप्त आतंकवादियों से संघर्ष में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।  ईरान की यह भूमिका आतंकवाद के समर्थकों के लिए खुली चेतावनी है कि तेहरान, आतंकवाद से संघर्ष में सीमाओं की ओर ध्यान नहीं देगा और तकफ़ीरी आतंकवादियों के विरुद्ध कार्यवाही में केवल सीमा तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि उससे भी आगे जा सकता है।  

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...