जगदीश यादव। चंडीगढ़ । अब इसे सुविधा कहे या दुविधा सरकार की तरफ से 2 किमी की दूरी से स्कूल आने वाली छात्राओ की सुविधा के लिए साइकिले भेजी गई थी जिससे छात्रायें बिना किसी परेशानी के समय पर स्कूल पहुँच सके । परन्तु अगर जमीनी हकीकत देखी जाए तो नाहड़ ब्लाक के लिए 2016 में आई स्कूली छात्राओं के लिए साईकिल बन्द कमरों में धुल चाट रही है। नाहड़ खण्ड में 2016 में उन स्कूली छात्राओं के लिए 511 साईकिल वितरण के लिए आई थी लेकिन विभाग कि लापरवाही के कारण उक्त साईकिल ना तो वितरण हुई ओर ना ही वापिस भेजी गई जो लगभग साढे तीन साल से कमरों में बन्द जगं खा रही है समबन्धित विभाग इन्हे वितरण करने के इसलिए कतरा रहा है कि लबे समय तक खड़ी रहने के कारण जहां जग खा रही है वहीं टायर और टयूब भी खत्म हो गए है, इसके लिए अब विभाग ने रिपेयर करवाने के लिए हैड आफिस को चिटठी लिखी है। जिसमें प्रत्येक साईकिल पर 11 सौ रूपए खर्च होना बताया गया है। वही आज भी अकेले नाहड़ स्कूल से लगभग सौ छात्राएं भंडग़ी, कोहारड़ मुमताजपुर गावों से पैदल दो से तीन किलोमिटर चल कर स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रही है।
Tuesday, November 19, 2019
कोसली: सुविधा या दुविधा..... बच्चों के हक से खिलवाड़... नही बांटी ग़रीब छात्रों की 17 लाख की साईकिलें
जगदीश यादव। चंडीगढ़ । अब इसे सुविधा कहे या दुविधा सरकार की तरफ से 2 किमी की दूरी से स्कूल आने वाली छात्राओ की सुविधा के लिए साइकिले भेजी गई थी जिससे छात्रायें बिना किसी परेशानी के समय पर स्कूल पहुँच सके । परन्तु अगर जमीनी हकीकत देखी जाए तो नाहड़ ब्लाक के लिए 2016 में आई स्कूली छात्राओं के लिए साईकिल बन्द कमरों में धुल चाट रही है। नाहड़ खण्ड में 2016 में उन स्कूली छात्राओं के लिए 511 साईकिल वितरण के लिए आई थी लेकिन विभाग कि लापरवाही के कारण उक्त साईकिल ना तो वितरण हुई ओर ना ही वापिस भेजी गई जो लगभग साढे तीन साल से कमरों में बन्द जगं खा रही है समबन्धित विभाग इन्हे वितरण करने के इसलिए कतरा रहा है कि लबे समय तक खड़ी रहने के कारण जहां जग खा रही है वहीं टायर और टयूब भी खत्म हो गए है, इसके लिए अब विभाग ने रिपेयर करवाने के लिए हैड आफिस को चिटठी लिखी है। जिसमें प्रत्येक साईकिल पर 11 सौ रूपए खर्च होना बताया गया है। वही आज भी अकेले नाहड़ स्कूल से लगभग सौ छात्राएं भंडग़ी, कोहारड़ मुमताजपुर गावों से पैदल दो से तीन किलोमिटर चल कर स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रही है।
Wednesday, November 28, 2018
चंडीगढ़ : प्रदेश में बनाए जा रहे 29 पुलिस स्टेशन - डीजीपी, हरियाणा
चंडीगढ़ -- हरियाणा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), श्री बी0 एस0 सन्धू ने कहा कि हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा प्रदेश के विभिन्न स्थानों व पुलिस लाइनों में 114 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से 29 पुलिस थानों के साथ-साथ पुलिसबल के लिए अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।
डीजीपी ने कहा कि इन पुलिस स्टेशनों के निर्माण से पुलिस कर्मियों को बेहतर कार्यस्थल के साथ-साथ आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा सकेंगी जिससे राज्य पुलिस के जवान अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन और अधिक बेहतर ढंग से कर सकेंगेे। तीन महिला थानों सहित इन पुलिस स्टेशनों का निर्माण आम जनता को सुविधाएं देने व राज्य पुलिसबल को और बेहतर कार्य करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।
उन्होंने कहा कि 62 करोड 52 लाख रुपये की लागत से इन पुलिस स्टेशनों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जबकि निगम द्वारा हॉस्टल और बैरकों के निर्माण कार्य पर 51 करोड 82 लाख रुपये की राशि खर्च की जा रही है।
पुलिस स्टेशनों के बारे में जानकारी देते हुए श्री सन्धू ने कहा कि भिवानी, दादरी और पलवल में महिला पुलिस स्टेशनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा, सिटी पुलिस स्टेशन पलवल, सीआईए पुलिस स्टेशन पलवल और भिवानी, पुलिस स्टेशन बराडा (अंबाला), सेक्टर-65, गुरुग्राम, पटौदी, झज्जर, सिटी नरवाना, सिविल लाइंस सेक्टर-7 जींद, पिनंगवान (नुंह), सेक्टर -20 पंचकूला की पहली मंजिल और सेक्टर -5 पंचकूला पुलिस थाने की अतिरिक्त मंजिल सहित पुलिस थानों का कार्य विभिन्न स्तरों पर प्रगति पर है। इसी प्रकार, भूपानी (फरीदाबाद), सूरजकुंड, रोहरी (रेवाडी), सेक्टर-27, सुशांत लोक (गुरुग्राम) डीएलएफ फेज-3, गुरुग्राम, ऐलनाबाद और सिविल लाइंस, सेक्टर-19, सिरसा के पुलिस थानो को कार्य निविदा प्रक्रिया में है जिसके जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जींद, रेवाडी, भिवानी और पुलिस परिसर मधुबन सहित पुलिस लाइनों में होस्टल व बैरकों का निर्माण किया जा रहा है। पुलिस के बुनियादी ढांचे के उन्नयन से आमजन के सक्रिय सहयोग के साथ प्रदेश की जनता और संपत्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करनेे में मदद मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस देशभर में सबसे बेहतर पुलिस बल के रुप में उभर कर सामने आई है।
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