मतलब हम #चांद पर पहला कदम रखने वाले पहले #भारतवासी,,
अमेरिका की सच्चाई:
चाँद पर सर्वप्रथम कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रॉन्ग की सच्चाई:-
21 जुलाई 1969 जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रक्खा,, और वहाँ अमेरिकन झंडा गाड़ दिया,, असल में वह झंडा चांद पर कम रूस की छाती पर ज्यादा गाड़ा गया था,, वे लोग अभी बधाइयां ले ही रहे थे विश्व भर से,, तब तक वह बात फैल गई,,
असल में अमेरिकनों ने जो वीडियो डाला था झंडा गाड़ने का उसमें झंडा फहरा रहा था,, तो पहली बात ये उठी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की बिना वायुमंडल के फ्लैग फहरा कैसे रहा था??
अमेरिका के पास चुप रहने के अलावा कोई जवाब न था इसका,,
फिर दूसरा सवाल उठा--नील आर्मस्ट्रांग जहां खड़ा था चंद्रमा पर वहां से एक तरफ उसकी छाया बन रही थी,, तो उस समय जब छाया पूर्व की तरफ बन रही थी तो सूर्य पश्चिम में होना चाहिए,,जबकि उस समय जिधर छाया बन रही थी वीडियो में,, असल में सूर्य भी उधर ही था,, तो छाया सूर्य की तरफ कैसे बनी??
इस मजेदार वाकये ने उन्हें कहीं का न छोड़ा,, उनका झूठ पकड़ा गया था,,
लेकिन तब तक तीसरा सवाल उठा--जिस तरफ छाया बन रही थी उस तरफ छाया की लंबाई को एक खास कोण पर सिर के ऊपर से सीधी रेखा में गुजारने पर वह मात्र 35 फिट दूर किसी बिंदु पर मिल रही थी जहां से प्रकाश आ रहा था,,
जबकि सूर्य वहां से लाखों करोड़ों किलोमीटर दूर है,, तो रोशनी इतनी नजदीक से कैसे आ रही थी??क्या कोई बड़ी लाइट लगाकर किसी स्टूडियो में चंद्रमा पर उतरने का वीडियो बनाया गया है??
ऐसे ऐसे 32 सवाल उस समय उठाए गए थे जिसमें से एक का भी जवाब अमेरिका ने नहीं दिया था,,
केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के खगोल विज्ञान के प्रोफेसर माईकल रिच ने बयान दिया था कि असल में यह चंद्रमा अभियान राजनैतिक कारणों से जल्दबाजी में अंतरिक्ष में हमारा नियंत्रण है यह सिद्ध करने के लिए किया गया था,,
अभी कुछ दिन पहले #रूस ने घोषणा की थी कि हम 2031 तक चंद्रमा तक पहुंच जाएंगे,, ध्यान देना मेरे भाई,, अभी और आज से 12 साल बाद,, जबकि अमेरिका ने आज से 50 साल पहले एक झूठा दावा किया और बेइज्जती के शिकार हुए,,भारत में यह बात क्यों नहीं पढ़ाई जाती हमारे बालकों को ये एक अलग विषय है,,
मेरे भाइयों हम चंद्रमा पर जाने वाले #प्रथम राष्ट्र होने जा रहे हैं,,,,इस गौरव के क्षण के हम सब और समूचा विश्व गवाह होगा,,बहुत बहुत शुभकामनाएं मां भारती के सपूतों को,,