
Saturday, October 1, 2022
एक ऐसा मंदिर जहां महिलाएं नही कर सकती हैं पूजा...

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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायिनी की पूजा की जाती है,इनकी पूजा से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है
नवरात्रि छठा दिन - माँ कात्यायनी
चन्द्रहासोज्जवलकराशाईलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
नवरात्रि का छठवां दिन माता कात्यायनी को समर्पित होता है. माँ कात्यायनी को ही महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है. देवी कात्यायनी जी के संदर्भ में एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार
एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ॠषि हुए तथा उनके पुत्र ॠषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ॠषि कात्यायन उत्पन्न हुए थे. देवी कात्यायनी जी देवताओं ,ऋषियों के संकटों कोदूर करने लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में उत्पन्न होती हैं. महर्षि कात्यायन जी ने देवी पालन पोषण किया था. जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था और ॠषि कात्यायन ने भगवती जी कि कठिन तपस्या, पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं. महर्षि कात्यायन जी की इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें. देवी ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार की तथा अश्विन कृष्णचतुर्दशी को जन्म लेने के पश्चात शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीन दिनोंतक कात्यायन ॠषि ने इनकी पूजा की, दशमी को देवी ने महिषासुर का वध किया ओर देवों को महिषासुर के अत्याचारों से मुक्त किया.
माँ कात्यायिनी का स्वरूप अत्यंत दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है. ये अपनी प्रिय सवारी सिंह पर आरूढ रहती हैं. इनकी चार भुजाएं भक्तों को वरदान देती हैं. इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है. तो दूसरा वरदमुद्रा में है. अन्य हाथों में तलवार और कमल का फूल है.
इनका गुण शोध कार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायिनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं।
Friday, September 30, 2022
नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है, इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है
मां दुर्गा की पांचवीं शक्ति का नाम स्कंदमाता है। स्कंदमाता का रूप बहुत ही अद्भुत है। उनकी चार भुजाएँ हैं। वह ऊपर की दाहिनी भुजा में स्कंद को गोद में और निचली भुजा में कमल का फूल धारण किए हुए हैं। ऊपर वाला बायां हाथ वर मुद्रा में है जबकि निचली भुजा में भी कमल का फूल है। उनका वर्ण बहुत श्वेत है। कमल आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासन भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।
मां स्कंदमाता को सफेद रंग प्रिय है। यह रंग शांति, सद्भाव और सादगी का प्रतीक है। जहां तक संभव हो, भक्त को पूजा के समय उसी रंग के कपड़े पहनने चाहिए।
पांचवें दिन की पूजा में योगी का मन ‘विशुद्ध’ चक्र में प्रविष्ट करता हैं। यह उनकी योग साधना का पांचवा दिन होता है। इसके सिद्ध होने से बुद्धि का विकास और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महत्व
मां स्कंदमाता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। इनकी पूजा करने से भक्त इस मृत्युलोक में भी परम सुख और शांति का अनुभव करने लगता है। वह अपनी सभी इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर, मोक्ष प्राप्त करता है। जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा अवश्य करनी चाहिए। मां स्कंदमाता संतान प्राप्ति का वरदान देती हैं। जो कोई भी पूरी विधि-विधान से उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। लेकिन ध्यान रहे, स्कंदमाता की पूजा में कुमार कार्तिकेय का होना जरूरी है
Wednesday, September 28, 2022
माता दुर्गा के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा आज,इनका वाहन सिंह है
माता दुर्गा के तीसरे शक्तिरूप का नाम चंद्रघंटा है। इनके मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र है, इस कारण माता के इस रूप का नाम चंद्रघंटा पड़ा। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं तथा सभी हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित है। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा यु़द्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। इनके घण्टे की भयानक चण्डध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य-राक्षस सदैव प्रकम्पित रहते हैं।
मां चंद्रघंटा को जागृत करने के लिए इस मंत्र का जप करना चाहिए- या देवी सर्वभूतेषु मां चन्द्रघण्टारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
अग्नि तत्व की तेजोमयी मूर्ति मां चंद्रघंटा अमृतमयी, स्वब्रह्मामयी रूपिणी है। चंद्र में प्रकाश सूर्य द्वारा प्रकाशित है।
Tuesday, September 27, 2022
बिहार में वन देवी मानकर लोग कर रहे एटलस मॉथ की पूजा
कांग्रेस का अध्यक्ष बनने से पहले ही अशोक गहलोत ने गांधी परिवार के मुकाबले में अपना गुट बनाया
Monday, September 26, 2022
शक्तिदायिनी मां का आगमन,नवरात्र हुआ आज से आरंभ
नवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाला व्रत, पूजा एवं मेलों का उत्सव है, सभी नौ दिन माँ आदिशक्ति के भिन्न-भिन्न रूपों को समर्पित हैं। देवी का प्रत्येक रूप, एक नवग्रह(चंद्रमा, मंगल, शुक्र, सूर्य, बुद्ध, गुरु, शनि, राहू, केतु) की स्वामिनी तथा उनसे जुड़ी बाधाओं को दूर व उन्हें प्रवल करने हेतु भी पूजा जाता है। नवरात्रि छः महिने के अंतराल के साथ वर्ष में दो बार मनाई जाती है, जिसे चैत्र नवरात्रि तथा शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि को नवदुर्गा अथवा नौदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है।
शारदीय नवरात्रि 2022: 26 सितम्बर 2022 से स्टार्ट होकर 4 अक्टूबर 2022 को समाप्त हो रही है।
| संबंधित अन्य नाम | नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, चैत्र नवरात्रि, वसंत नवरात्रि, महा नवरात्रि, राम नवरात्रि, राम नवमी,नवरात्रे, नौरात्रे, गुड़ी पड़वा, उगादी |
| सुरुआत तिथि | चैत्र /अश्विन शुक्ल प्रतिपद |
| उत्सव विधि | व्रत, हवन, जागरण, जागराता, माता की चौकी, मेला।प्रतिपदा: माँ शैलपुत्री26 September 2022या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ इन्हें हेमावती तथा पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। तिथि: चैत्र /अश्विन शुक्ल प्रतिपदा सवारी: वृष, सवारी वृष होने के कारण इनको वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। अत्र-शस्त्र: दो हाथ- दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल धारण किए हुए हैं। मुद्रा: माँ का यह रूप सुखद मुस्कान और आनंदित दिखाई पड़ता है। ग्रह: चंद्रमा - माँ का यह देवी शैलपुत्री रूप सभी भाग्य का प्रदाता है, चंद्रमा के पड़ने वाले किसी भी बुरे प्रभाव को नियंत्रित करती हैं। शुभ रंग: स्लेटी |
Sunday, September 25, 2022
डोमचांच में सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कर किया रास्ता बंद, एसपी से गुहार
जेवर दुकान से लाखों की चोरी, वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद
झारखंड सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा 3 दिवसीय प्रशिक्षण हेतु मुंबई पहुंचे
झारखंड सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा झारखंड प्रदेश से 8 सदस्य नवनिर्वाचित पंचायत जन प्रतिनिधि मंडल को तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए महाराष्ट्र के पुणे भेजा गया। इसकी सूचना शिव शंकर प्रसाद जिला पंचायत राज पदाधिकारी गिरिडीह (District panchayat Raj officer) ने संस्था झारखंडी एकता संघ (मुंबई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी को फोन करके दिए। झारखंडी एकता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल दिनांक 23/09/2022 को राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी के नेतृत्व में दिनेश यादव, वकील अंसारी, फारूक अंसारी और वीरेंद्र पंडित झारखंड प्रदेश से प्रशिक्षण शिविर पुणे में आए पंचायत जनप्रतिनिधियों से एक शिष्टाचार मुलाकात कर झारखंडी एकता संघ मुंबई/झारखंड की ओर से झारखंड प्रवासी मज़दूरों के जनहित में किये गए कार्यो, प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों में हो रही समस्याओं, झारखंड प्रदेश के मजदूरों की लगातार हो रही पलायन एवं दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूरों की लगातार मृत्यु होने की घटना से झारखंड प्रदेश से महाराष्ट्र पुणे आए जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। इस पर झारखंड पंचायत जनप्रतिनिधियों ने प्रवासी मजदूर के हितों में कार्य कर रही संस्था झारखंडी एकता संघ मुंबई के कार्यों की तारीफ करते हुए प्रवासी मजदूरों से संबंधित सभी समस्याओं को झारखंड के पदाधिकारियों एवं सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिए। और संस्था को हर संभव मदद एवं झारखंड प्रदेश में पंचायत स्तरीय जागरूकता अभियान एवं सभी श्रमिकों का निबंधन कार्यों में सहयोग करने का भरोसा दिलाया। झारखंड प्रदेश में बहुत जल्द सरकारी पदाधिकारियों एवं संस्था झारखंडी एकता संघ मुंबई के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। झारखंड प्रदेश से महाराष्ट्र पुणे आए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जनप्रतिनिधियों में परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता देवी (जिला बोकारो), प्रमुख श्री रामू बैठा (प्रखंड बिरनी, जिला गिरिडीह), मुखिया श्रीमती स्वेता बाखला (ग्राम पंचायत बीरबांकी, प्रखंड अबकी, जिला खूंटी), मुखिया श्रीमती मंजू सुरीन (ग्राम पंचायत खटखुरा, प्रखंड रनिया, जिला खूंटी), मुखिया श्री धीरेन्द्र मंडल (ग्राम पंचायत रेम्बा, प्रखंड जमुआ, जिला गिरिडीह), मुखिया श्री सीताराम वर्मा (ग्राम पंचायत गोरो, प्रखंड जमुआ जिला गिरिडीह) शामिल हैं।
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