मोदी सरकार फ़्रांस से 36 रफ़ायल लड़ाकू विमानों के सौदे में अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के आरोपों में दिन प्रतिदिन घिरती जा रही है।
इस सौदे के संबंध में एक नया रहस्योद्घाटन यह हुआ है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2015 में फ्रांस से 36 रफ़ायल लड़ाकू विमानों के सौदे की घोषणा किए जाने से लगभग 15 दिन पहले अनिल अंबानी पेरिस में फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां वेस ले द्रिआन के दफ़्तर पहुंचे थे, जहां उन्होंने फ्रांसीसी रक्षा मंत्री के शीर्ष सलाहकारों से मुलाक़ात की थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बैठक में ले द्रिआन के विशेष सलाहकार ज्यां-क्लॉड मलाट, औद्योगिक सलाहकार क्रिस्टोफ सालोमन और औद्योगिक मामलों के उनके तकनीकी सलाहकार ज्योफ़री बॉट शामिल हुए थे।
सालोमन ने एक यूरोपीय डिफेंस कंपनी के शीर्ष अधिकारी से कहा था कि यह ‘बेहद शॉर्ट नोटिस पर हुई एक गोपनीय मुलाकात थी।’
एक अधिकारी के अनुसार, बैठक में अनिल अंबानी ने सलाहकारों से कहा था कि वे व्यावसायिक और डिफेंस हेलीकॉप्टरों के निर्माण के लिए उनके साथ काम करने की इच्छा रखते हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि अंबानी ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की बात भी कही थी।
इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबानी के ‘बिचौलिए’ की तरह काम करने और सरकारी गोपनीयता क़ानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जो किया है वो ‘देशद्रोह’ है।
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