बिहार। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में बिहार के रहने वाले जवान रतन ठाकुर भी शहीद हो गए. जब उनके घर पर शाहदत की खबर पहुंची तो मातम छा गया. पिता निरंजन ठाकुर फूट-फूटकर कर रोने लगे. उन्होंने कहा कि मेरा एक ही बेटा था जिसे मैंने बहुत जतन-रतन से पाला था.
बेटे को पढ़ाने के लिए मैंने मजदूरी की. सड़कों पर जूस बेचा. ठेले लगाकर कपड़े बेचे. लेकिन अब सब ख़त्म हो गया है. आतंकियों ने मेरे बेटे को मार दिया. उन्होंने बताया कि रतन पढ़ाई में अच्छा था. वह 2011 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ. उसकी पहली पोस्टिंग गढ़वा में हुई.
उसकी नौकरी लगने के बाद हमारी गरीबी दूर हो रही थी. धीरे-धीरे सब सही हो रहा था. पर उसके शहीद होने के बाद अब हम किसके सहारे जीएंगे. शहीद रतन की पत्नी राजनंदनी ने बताया कि रतन का दोपहर डेढ़ बजे फोन आया था. उन्होंने कहा कि श्रीनगर जा रहे हैं. रात में बात करेंगे. मैंने उनके फोन का इंतजार करती रही.
इस बीच खबर मिली की पुलवामा में आतंकियों ने हमला कर दिया है. जब हमने टीवी देखा तो हमले का पता लगा. फिर थोड़ी ही देर बार उनके ऑफिस से फोन आया और रतन के शहीद होने की खबर मिली.
पिता निरंजन ने बताया कि रतन की पत्नी गर्भवती है. फोन पर बात होने पर उसने होली पर घर आने की बात कही थी. उसका एक चार साल का बेटा कृष्णा ठाकुर है. जिसे उसके पिता के शहीद होने की खबर तक नहीं है.
पूछने पर बेटा कहना है कि पापा ड्यूटी पर हैं. वो जब आएंगे तो खिलौना लाएंगे. उसके फोन पर यह भी बताया था कि होली पर आने के लिए उसने छुट्टी का आवेदन दिया था।
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