Wednesday, July 10, 2019

सम्पूर्ण झारखंड में निजी विद्यालयों द्वारा चरण वद्ध आंदोलन किया जाएगा -राम रंजन सिंह


संपूर्ण झारखंड में निजी विद्यालय चरण वद्ध आंदोलन करेगा  -राम रंजन सिंह

सरकार ने कभी छोटे निजी विद्यालयों को सहयोग नहीं किया
न्यूज डेस्क ၊
पाकुड़ ၊ झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन, राँची निजी विद्यालयों के मान्यता के लिए राज्य भर में चरणबद्ध आंदोलन करेगा । उपयुक्त बाते झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन रांची  के महासचिव राम रंजन सिंह ने योग भवन प्रशाल में झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन जिला इकाई पाकुर की बैठक में कहीं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश महासचिव राम रंजन कुमार सिंह न कहा कि झारखंड सरकार द्वारा झारखंड निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली 2011 की नियम 22(5) के अधीन प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नियमावली 2011 में  पत्रांक 629 दिनांक 25.04.2019 के द्वारा संशोधन किया गया । जिसे प्रदेश में लागू किया गया है , उक्त आदेश के अनुसार निजी विद्यालयों को मान्यता का मिलना कठिन ही नहीं , असंभव है, परिणाम स्वरूप 90% से अधिक विद्यालय बंद होने के कगार पर खड़े हो जायेंगे । 
       
ज्ञात हो प्रदेश में आरटीई 2011 में लागू किया गया तब से मान- मानक को पूर्ण करते हुए प्रदेश के सभी जिलों के निजी विद्यालयों ने प्रपत्र 1 में मान्यता के लिए आवेदन जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में समर्पित किया था और अद्यतन समस्त प्रक्रिया को पूर्ण किया । लेकिन आज तक मान्यता के नाम पर सिर्फ भया दोहन और शोषण ही किया जाता रहा । वर्तमान समयानुसार शिक्षा का संपूर्ण दायित्व निजी विद्यालय के कंधों पर है । जबकि निजी विद्यालय सरकार से एक भी पैसा नहीं लेती है और ना ही सरकार से किसी प्रकार का सहयोग ही प्राप्त करती है । निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे हमारे देश ,प्रांत और समाज के ही हैं फिर इनके साथ सौतेला व्यवहार क्यों  ? सरकारी विद्यालय में सरकार के द्वारा शिक्षा को छोड़कर हर सुविधा दी जाती है ,लेकिन निजी विद्यालय के बच्चों को  कोई सुविधा नहीं ।  बड़े ब्रांड के निजी विद्यालय के द्वारा किए गए कार्यों का खामियाजा मध्यम और निम्न स्तर की विद्यालय को भोगना पड़ता है ।* 
       
अब वर्तमान नियमानुसार मान्यता की प्रक्रिया पूर्व से कठिन बना दिया गया है तर्क दिया गया कि निजी विद्यालय  आर.टी.ई. 2009 की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं , इसलिए मान्यता नहीं दी जा रही है । जिले में सरकारी विद्यालय में आरटीई का अनुपालन नहीं होती है शिक्षा नहीं दी जा रही है , निजी विद्यालय में छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक क्षेत्र में नींव डालने का कार्य निजी विद्यालय करते हैं और नाम शोहरत सरकारी विद्यालय कमाते हैं । किसी भी सरकारी प्राथमिक मध्य विद्यालयों में प्रयोगशाला, खेल का मैदान , विद्यालय के लिए मान मानक के आधार पर जमीन उपलब्ध नहीं है , फिर भी वहां सरकार का लेबल लगा है तो आरटीई की कोई पूछ नहीं होती इससे स्पष्ट है कि सरकार को शिक्षा से कोई लेना देना नहीं, वह सिर्फ मध्यम और छोटे विद्यालयों को बंद करवा कर पूंजीपतियों के हाथों बड़े स्कूलों को सौंपना चाहती है ।*
         *आप गौर करें कि प्रदेश में मध्यम एवं निजी विद्यालयों की कुल संख्या लगभग 15000 , उक्त विद्यालयों में शिक्षक शिक्षकों की संख्या लगभग तीन लाख , विद्यालयों में सेवक सेविकाओं ,वाहन चालक की संख्या लगभग एक लाख से अधिक हैं। ये सभी प्रदेश सरकार की नई शिक्षा नीति के कारण बेरोजगार हो जाएंगे , जिसकी संपूर्ण जवाब देगी प्रदेश सरकार की होगी । ये सभी शिक्षित बेरोजगार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे , केंद्र सरकार भी शिक्षित बेरोजगार को रोजगार से जोड़ने पर बल देती है, लेकिन प्रदेश सरकार रोजगार तो देती नहीं, स्वयं के बलबूते पर रोजगार खड़ा करने वाले निजी विद्यालय के शिक्षित बेरोजगार को और बेरोजगार बना देना चाहती है । 
         एसोसिएशन सरकार से मांग करती है कि-
1. जमीन संबंधी बाध्यता को समाप्त कर विद्यालय की यथास्थिति पर मान्यता प्रदान करें ।*
*2. शिक्षा लेना और देना प्रत्येक भारतवासी का जन्मसिद्ध अधिकार है , इस अधिकार से किसी निजी विद्यालय को वंचित नहीं किया जाए।*
*3. मान्यता के लिए नियम को सरल बनाते हुए शिक्षा को व्यवसायीकरण होने से बचाया जाए ।*
*4. सरकार निजी विद्यालयों को जमीन उपलब्ध करा दें, विद्यालय प्रबंधन समिति ईंट और गाड़े की व्यवस्था कर स्वंय विद्यालय का निर्माण करा लेगी ।*
5.  निजी विद्यालयों को निरीक्षण शुल्क और सावधि जमा राशि से मुक्त किया  जाए ।
6. विद्यालयों की मान्यता पर विचार जिला प्रारंभिक समिति का आकार छोटा किया जाए और एसोसिएशन के अध्यक्ष , सचिव को भी इस समिति में शामिल किया जाए ।
7.अग्निशमन से एनओसी लेना काफी कठिन बना दिया गया है,इसे भी लचीला बनाया जाय ।
8.  न्यास/ सोसायटी एवं  विद्यालय प्रबंधन समिति के द्वारा संचालित विद्यालयों को मान्यता दी जाए। मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष जे दत्ता सचिव राजकुमार भगत कोषाध्यक्ष मनोज कुमार भगत उपाध्यक्ष जवाई रियल मुर्मू प्राचार्य कुश जी, फेकरूल शेख रफीकुल आलम रविंद्र पाल साधना ओझा मुकेश कुमार कोलियस मुर्मू अन्य 60 विद्यालयों के प्राचार्य एवं संचालक में उपस्थित थे।

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