Monday, November 8, 2021

बैंक मैनेजर ने ही जुए में उड़ा दिए ग्राहकों के 1 करोड़, इस तरह पकड़ी गई चोरी





शिमला.

हिमाचल प्रदेश  में बैंक फ्राड का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां धोखाधड़ी करने वाला आरोपी कोई और नहीं बल्कि खुद बैंक का मैनेजर था. जो ग्राहकों के खाते से पैसे निकालकर आनलाइन जुआ खेलता था. कुल्लू के एक बैंक की दोहरानाला शाखा के मैनेजर पर हेराफेरी का आरोप लगा है. मैनेजर जुए में जीतने पर उपभोक्ता के खाते में उतनी रकम जमा करा देता था, जितनी उसने निकाली होती थी.  

ऐसे खातों पर रहती थी नजर:

मॉडस ऑपरेंडी यानी इस बैंक मैनेजर के अपराध करने के तरीके की बात करें तो ये बैंक अधिकारी उन ग्राहकों के खातों को निशाना बनाता था. जो बैंक में साल में दो-चार बार ही आते थे या फिर जिन्होंने बैंक से एसएमएस अलर्ट  की सुविधा नहीं ले रखी थी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी साल अभी तक बैंक में 35.75 लाख के गबन की बात सामने आ चुकी है.

एक करोड़ से ज्यादा का खेल:

आरोपी मैनेजर ने इस तरह करीब एक करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किया है. बैंक फ्रॉड मामले की जांच बैंक की एक टीम कर रही है. फिलहाल आरोपी मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया है. इस घपले की बात सामने आने के बाद बाकी खाता धारक भी अपनी पासबुक अपडेट करवाने बैंक पहुंच रहे हैं.कहा जा रहा है कि घपले की कुल रकम का पता तब चल पाएगा जब सभी उपभोक्ताओं की पासबुक अपडेट हो जाएगी.

Thursday, September 2, 2021

श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से है संरक्षित



पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में गोवा में सेंट जेवियर के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है। श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।


भक्ति से तात्पर्य 

रामानुज के अनुसार भक्ति का अर्थ पूजा-पाठ या कीर्तन-भजन नहीं बल्कि ध्यान करना या ईश्वर की प्रार्थना करना है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य से रामानुजाचार्य ने भक्ति को जाति एवं वर्ग से पृथक तथा सभी के लिये सम्भव माना है। इसके अलावा रामानुजाचार्य भक्ति को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर उसके लिए दार्शनिक आधार भी प्रदान किया कि जीव ब्रह्म में पूर्णता विलय नहीं होता है बल्कि भक्ति के द्वारा ब्रह्म से निकटता प्राप्त करना है यही मोक्ष है.

Wednesday, September 1, 2021

देश की पहली महिला खनन इंजीनियर बनीं झारखंड की आकांक्षा




2018 में बीआईटी (सिंदरी) धनबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की

केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि पर आकांक्षा को ट्वीट कर बधाई दी.कहा कि आकांक्षा कुमारी की यह उपलब्धि दूसरी महिलाओं को प्रेरित करेगीं

हजारीबाग:-

झारखंड के हजारीबाग के बड़कागांव की रहने वाली आकांक्षा कुमारी ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) में भूमिगत खदान की इंजीनियर (माइनिंग इंजीनियर) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है और वह भारतीय कोयला निगम में खदान में काम करने वाली पहली इंजीनियर बन गयी हैं. सीसीएल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सीसीएल के चार दशक के इतिहास में यह पहली बार है जब एक महिला माइनिंग इंजीनियर ने यहां कार्यभार ग्रहण किया है.आकांक्षा ने मंगलवार को नॉर्थ कर्णपुरा क्षेत्र की चूरी भूमिगत खदान में कार्यभार संभाला.mtg बयान में कहा गया कि आकांक्षा कोल इंडिया की दूसरी और भूमिगत खदान में योगदान देने वाली पहली महिला माइनिंग इंजीनियर हैं। उन्होंने अपने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में भूमिगत खदान को चुनकर न सिर्फ इस भ्रांति को तोड़ा है कि खनन क्षेत्र सिर्फ पुरुषों के लिए है, बल्कि अपने जैसी और भी महत्‍वाकांक्षी छात्राओं को प्रेरित किया है। सीसीएल प्रबंधन ने बताया कि पहले माइनिंग में छात्राओं के लिए कोर्स नहीं होते थे। विज्ञप्ति में बताया गया है कि आकांक्षा ने अपनी स्‍कूली पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की है। बचपन से ही उन्होंने अपने आस पास कोयला खनन की गतिविधियों को करीब से देखा है। इसके चलते खनन के प्रति उनकी रुचि शुरू से ही रही है। यही कारण है कि उन्होंने इंजीनियरिंग में माइनिंग शाखा का चुनाव किया। उन्होंने 2018 में बीआईटी (सिंदरी) धनबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कोल इंडिया में अपना योगदान देने से पहले उन्‍होंने तीन वर्ष तक हिन्‍दुस्‍तान जिंक लिमिटेड की राजस्‍थान स्थित बल्‍लारिया खदान में काम किया। उनके पिता अशोक कुमार बड़कागांव के एक स्कूल में शिक्षक हैं और मां कुमारी मालती गृहिणी हैं। आकांक्षा को कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी, सीसीएल अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पी एम प्रसाद, सभी निदेशकों एवं अन्य कर्मियों ने बधाई दी है। प्रसाद ने कहा कि आकांक्षा की इस उपलब्धि ने खनन क्षेत्र में महिलाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

Wednesday, August 18, 2021

ब्रेकिंग:पारा शिक्षकों को नियमित करने पर बनी सहमति, नियुक्ति नियमावली एक हफ्ते में होगी तैयार






झारखंड में पारा शिक्षकों को नियमित करने के फॉर्मूले पर लगभग सहमति बन गयी है. राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने आज पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल और उसके पहले वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की.
उन्होंने कहा कि पारा शिक्षकों की सेवा को नियमित करने पर एक हफ्ते के अंदर नियमावली तैयार की जायेगी. पारा शिक्षकों के संघ को भी नियमावली का प्रारूप दिया जायेगा. अगर उसके किसी बिंदू पर असहमति हुई तो सरकार उसमें जरूरी सुधार करेगी.

👉यह फॉर्मूला तैयार हुआ है

शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं लेने का निर्णय लिया गया है. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी पारा शिक्षकों के स्थायीकरण व वेतनमान के लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जायेगी.

टेट सफल को नहीं देनी होगी परीक्षा

राज्य में वर्तमान में लगभग 65 हजार पारा शिक्षक कार्यरत है. इनमें से 13 हजार शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल हैं. शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को अलग से परीक्षा नहीं देनी हाेगी. पात्रता परीक्षा सफल पारा शिक्षकों को सीधे वेतनमान दिया जायेगा.

शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं देंगे, इसकी जगह ली जायेगी सीमित आकलन परीक्षा

👉नियमावली में हो सकता है प्रावधान.

पारा शिक्षक 60 वर्ष तक नौकरी कर सकेंगे.

5200 से 20 हजार का वेतनमान मिलेगा, प्रति वर्ष वेतनमान में तीन फीसदी की बढ़ोतरी

सरकारी कर्मी के समान अवकाश

परीक्षा पास करने के लिए सामान्य वर्ग को 45% अंक लाना होगा

सामान्य वर्ग को छोड़ अन्य वर्ग को 40 फीसदी अंक. सीमित आकलन परीक्षा सौ अंकों की होगी.

पारा शिक्षकों के स्थायीकरण और वेतनमान को लेकर इससे पूर्व नौ जून 2020 को पारा शिक्षकों के साथ शिक्षा मंत्री की बैठक हुई थी. बैठक में सहमति बनी थी कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल पारा शिक्षकों को वेतनमान दिया जायेगा. जिन शिक्षकों ने पात्रता परीक्षा पास नहीं हैं, उनके लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जाये या शिक्षक पात्रता परीक्षा, इसके लिए विधि विभाग से राय मांगी थी.
विधि विभाग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा लेने का सुझाव दिया था और पारा शिक्षक इसका विरोध कर रहे थे. अब शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं लेने का निर्णय लिया गया है. बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी पारा शिक्षकों के स्थायीकरण व वेतनमान के लिए सीमित आकलन परीक्षा ली जायेगी।

Friday, August 13, 2021

स्वतंत्रता दिवस पर झारखंड के गोड्डा में शूट की गई फौजी मेरा भाई हुई रिलीज



गोड्डा। 
झारखंड के गोड्डा जिले के छोटे से कसबे महागामा के ऊर्जा नगर ईसीएल कालोनी में यहां के प्रतिभावान युवा कलाकारों ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर फौजी मेरा भाई नाम के एलबम की शूटिंग की है। कलाकारों ने महज दस दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस एलबम की शूटिंग की है। इस एलबम को 13 अगस्त को रिलीज किया जा रहा है और इसका टेलर 10 अगस्त को झारखंड रनर बिट्टु चैनल पर अपलोड किया गया। टीम जुगाड़ आफिसयल स्टूडियो में बनी इस एलबम का कास्टिंग बिट्टु जायसवाल ने तैयार किया है तथा सिंगर के तौर पर अभिषेक गुप्ता उर्फ ऋषभ गुप्ता ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वहीं लिरिक्स  राहुल शर्मा और  आकाश कुमार तथा कोरियोग्राफी विनय ने तैयार की है। इस एलबम की थीम यह है कि स्कूल में  बच्चे पढने के लिए जा रहा हैं, कुछ आतंकी संगठन समाज में भय पैदा करने के लिए बच्चे को स्कूल भैन को रोक कर किडनैप कर लेते हैं। इस घटना की जानकारी बगल में रह रहे फौजी को मिलता है ।आतंवादी बच्चे को पुराने खंडहर में छिपा कर रखता है जिसको फौजी अपने जान पर खेल कर बच्चे को बचाता है। इस घटना में दो फौजी घायल होकर नौ आतंकवादियों को मार गिराकर बच्चों को सुरक्षित निकाल कर परिजन को सौंप देता है।बच्चों के मिलने से परिजनों में फौजी के प्रति सम्मान बढ जाता है।
बता दें कि अभिषेक गुप्ता उर्फ ऋषभ गुप्ता ने अपनी मधुर ध्वनि से इसके गीत को सजाया संवारा है।आपको बता दें कि श्री गुप्ता जिले के प्रख्यात व अनुभवी यूएनआई पत्रकार डॉ सुनील गुप्ता के पुत्र हैं।

Thursday, August 12, 2021

पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर अपनी मांग पर अड़े एबीपीएसएस के देश भर के पत्रकार

एबीपीएसएस के राष्ट्रीय अधिवेशन में सर्वेश तिवारी ने किया झारखण्ड से प्रतिनिधित्व

पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर अग्रसर छत्तीसगढ़ सरकार से शीघ्र पहल की अपील

पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर अपनी मांग पर अड़े देश भर के पत्रकार



गिरिडीह।
 देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने को लेकर देश भर के पत्रकारों के साथ अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति लगातार संघर्षशील रहा है।संगठन के राष्ट्रीय अधिवेशन से लौटकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश तिवारी ने कहा कि आने वाले दिनों में दिसम्बर में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में देश के कई राज्यो के पत्रकार शामिल होंगे।वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश कलावाडीया ने बताया कि पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर 2022 में दिल्ली में एक महाआंदोलन किये जाने का निर्णय लिया गया है।


उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में संपन्न राष्ट्रीय अधिवेशन में 22 राज्यों के पत्रकारों ने भाग लिया।अधिवेशन में पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर छत्तीसगढ़ में हो रहे संघर्ष एव देश मे पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए सामूहिक रूप से चर्चा की गई।


कहा कि संगठन के छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द शर्मा ने छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यो से  कोरोना वॉरियर्स पत्रकारो का सम्मान करते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जल्द से जल्द यदि सरकार द्वारा पत्रकार सुरक्षा कानून प्रदेश में लागू नही किया गया तो आने वाले दिनों में राजधानी में प्रदेश ही नही देश भर के पत्रकार एकत्रित होकर महाआंदोलन करेंगे । 


अधिवेशन में महाराष्ट्र के नागपुर से पहुंचे किसान नेता अविनाश भाऊ काकड़े ने पत्रकारों के पक्ष में बात करते हुए मोदी सरकार के साथ भूपेश सरकार को कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून देश एव छत्तीसगढ़ में जल्द से जल्द लागू करे।साथ ही पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार अभी जाग जाये और एकत्रित हो जाये आने वाला दौर आपके लिए और कठिन होने वाला है, क्योंकि सरकार नही चाहती है कि आप सच्चाई को जनता तक पहुँचाए ।


अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय संरक्षक शंकर पांडेय ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भुपेश सरकार से एक प्रतिनिधिमंडल आने वाले दिनों में मुलाकात करेगा और प्रदेश में जल्द से जल्द सुरक्षा कानून लागू करने की पुरजोर अपील करेगा। 
मौके पर बिलासपुर में पत्रकार कोरोना वॉरियर्स सम्मान समारोह के साथ एकता ब्लड बैंक के सौजन्य से रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। जिसमें पत्रकारों ने स्वेक्षापूर्वक रक्त दान किया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि शंकर पांडेय के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में अविनाश भाऊ काकड़े, किसान नेता,हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके केशरवानी, सचिव राकेश पांडेय,डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश सिंह गौतम ,सचिव रवि पांडेय,अधिवक्ता आलोक गुप्ता जी के साथ बिहार,उत्तरप्रदेश,गुजरात, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मध्यप्रदेश,के अलावा प्रदेश के जिलों से भारी संख्या में पत्रकार शामिल हुए ।
सम्मान समारोह में कोरोना के कारण मृत पत्रकार साथियों के साथ अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह चौहान,भरत सिंह जाला, योगेश शाह,सलीम भवानी, योगेश व्यास,गुजरात से जुड़े पत्रकार सुरक्षा समिति के पत्रकार साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
 पत्रकार  कोरोना वेरियर्स सम्मान समारोह में आये बहुत से पत्रकारो ने रक्त दान शिविर में रक्त दान किया जिनको समिति ने आभार व्यक्त किया एवं प्रशस्ति पत्र भी दिया गया इसमे सहयोग कर रही संस्था एकता ब्लड बैंक का भी आभार व्यक्त किया गया ।
समारोह में  पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर चर्चा में राष्ट्रीय महासचिव महफूज खान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बिद्याभूषण जी,महासचिव राकेश परिहार,रत्नाकर त्रिपाठी,अजय परमार,सरोज जोशी,शहनाज मकल,मनोज सिंह,शेख रईस, अमन खान,सर्वेश तिवारी,मकसूद आलम,नितिन सिन्हा के साथ अन्य प्रदेश के पत्रकारो ने अपने विचार रखे।समारोह का संचालन राष्ट्रीय महासचिव राकेश प्रताप सिंह परिहार ने किया।


Tuesday, July 27, 2021

झारखंड में विधानसभा-लोकसभा की सीटों का नए सिरे से परिसीमन, इंटरनेट व मीडिया में Viral News की क्या है सच्चाई!!

झारखण्ड विस का नए सिरे से परिसीमन हो गया है। नए परिसीमन के आधार पर ही झारखंड विधानसभा चुनाव-2024 होगा। यह खबर पिछले कई दिनों से इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों-फेसबुक और वाट्सएप आदि पर वायरल है। इसके बाद से लोग सच्चाई जानना चाह रहे हैं। यह खबर किसी भी परंपरागत मीडिया से जेनरेट नहीं हुई है। यही कारण है कि लोग जानना चाह रहे हैं कि सच क्या है ? विधानसभा की सीटों के साथ ही झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों के परिसीमन की भी बात की जा रही है। वाट्सएप पर परिसीमन से संबंधित अधिसूचना भी प्रसारित की जा रही है। हालांकि यह अधिसूचना पुरानी है। साल 2007 की अधिसूचना है। आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है ? *अधिसूचना के अनुसार झारखंड में घट जाएगी ST के लिए आरक्षित सीटें* भारत परिसीमन आयोग, निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली से जारी अधिसूचना के अनुसार झारखंड में विधानसभा के लिए 81 सीटें होंगी। यहां पहले से 81 विधानसभा सीटें हैं। परिसीमन के बाद सीटों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होगा। परिवर्तन विधानसभा की भौगोलिक स्थिति और आरक्षित श्रेणी में होगा। फिलहाल झारखंड में अनुसूचित जनजाति ( ST) के लिए 28 सीटें हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति (SC) के लिए 8 सीटें आरक्षित हैं। नए परिसीमन के अनुसार एसटी की सीटें घटकर 22 और एससी की सीटें बढ़कर 10 हो जाएंगी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल साबिगंज जिले के बरहेट से विधायक हैं। परिसीमन के बाद सीट का नाम बदलकर बरहड़वा कर दिया गया है। साथ ही यह सीट एसटी के लिए न होकर सामान्य होगी।     होल्ड पर है झारखंड में परिसीमन वायरल खबर आधा सच और आधा फसाना है। दरअसल, झारखंड विधानसभा की सीटों और यहां की लोकसभा की सीटों का परिसीमन होल्ड पर है। साल 2007 में देश भर में विधानसभा और लोकसभा की सीटों का परिसीमन हुआ। यह परिसीमन 2009 के लोकसभा चुनाव से देशभर में लागू हो गया। तब झारखंड में भी लागू होना था। लेकिन यहां के आदिवासी ( ST) विधायकों ने विरोध किया। विरोध का कारण यह था कि परिसीमन प्रस्ताव लागू होने के बाद झारखंड विधानसभा में ST की  सीटें घट जाएंगी। जब परिसीमन रिपोर्ट लागू हो रहा था उस समय मधु कोड़ा झारखंड के मुख्यमंत्री थे। मधु कोड़ा सरकार कांग्रेस और झामुमो के समर्थन से चल रही थी। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। सोनिया गांधी यूपी सरकार की अध्यक्ष थीं। मधु कोड़ा के नेतृत्व में झारखंड के आदिवासी नेताओं और विधायकों ने सोनियां गांधी और मनमोहन सिंह से मुलाकात की। झारखंड में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने के लिए जोर दिया गया। नतीजतन, झारखंड में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं हुई। जबकि पूरे देश में लागू हो गई। झारखंड विधानसभा सीटों का परिसीमन अब भी होल्ड पर है। कभी भी लागू हो सकता है।  *पुरानी खबर इंटरनेट मीडिया पर वायरल* झारखंड विधानसभा की सीटों के परिसीमन की जो रिपोर्ट इंटरनेट मीडिया पर वायरल है, वह 13-14 साल पुरानी है। फिलहाल इस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। वायरल खबर को देखकर किसी भी विधानसभा क्षेत्र के विधायकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...