Tuesday, November 9, 2021

पूर्ण श्रद्धा आस्था विश्वास शुद्धता व पवित्रता से सराबोर है महापर्व छठ पूजा,छठी मईया की जय





रांची।

मुख्यतः बिहार राज्य से प्रारंभ हुआ सूर्योपासना का यह महापर्व छठ पूजा अब सम्पूर्ण भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाने लगा है। झारखण्ड के सभी चौबीस जिलों में यह पर्व पूर्ण श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
जहां बीते साल संक्रमण के दौर में इस पर्व को घरों में ही मनाने की अपील की गई थी।इस वर्ष महामारी में कमी देख यह पर्व मनाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी स्वाभाविक ही है।
 देश देशान्तर में सनातन धर्म संस्कृति के विस्तार के साथ ही साथ छठी मईया की जय जयकार चहुंओर होने लगी है।इस महापर्व के प्रति आस्था,शुद्धता,पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

 दिवाली के छठवें दिन कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को छठ पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य व उदयीमान सूर्य को अर्घ्य प्रमुख हैं।
छठ पूजा के लिए मान्यता है कि जो भी पति-पत्नी पूरे श्रद्धा भाव से छठ माता का पूजन करते हैं उनका स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है और निःसंतान दम्पत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।  


इस साल छठ पूजा और इसका क्या महत्व है:

छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव को समर्पित पर्व है। यह चार दिनों तक चलता है जिसमें इसका आरम्भ नहाय खाय से होता है। इस साल यह पर्व 8 नवंबर, सोमवार से आरंभ हुआ है।

नहाय खाय से छठ पूजा का प्रारंभ- 08 नवंबर 2021, सोमवार

खरना- 09 नवंबर 2021,मंगलवार

छठ पूजा संध्या अर्घ्य -10 नंवबर 2021, बुधवार

छठ पूजा समापन- 11 नवंबर 2021, गुरुवार, उगते हुए सूर्य को अर्घ्य

नहाय खाय
छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय के रूप में जाना जाता है। इस दिन पूरा परिवार एक पारंपरिक भोजन तैयार करता है और दोपहर में इसे भोग के रूप में परोसता है, इस तैयार भोजन को परिवार के सभी लोग मिल जुलकर ग्रहण करते हैं।

छठ पूजा का महत्व

छठ माता का व्रत सूर्य देव, ऊषा , प्रकृति, जल और वायु को समर्पित होता है। मान्यतानुसार इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास से करने से निःसंतान दम्पत्तियों को भी संतान सुख की प्राप्ति होती है। बताया जाता है कि छठ व्रत अपने संतान की रक्षा और उनके उज्जवल भविष्य और जीवन में खुशहाली लाने के लिए किया जाता है। इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से संतान सुख में वृद्धि के साथ उसे प्रत्येक क्षेत्र में सफलता भी मिलती है। इस प्रकार छठ माता का व्रत भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।


छठ पूजा की कथा

प्राचीन कथा के अनुसार प्रियंवद नाम का एक राजा था और उनकी पत्नी मालिनी थीं। शादी के कई सालों बाद भी जब प्रियंवद को संतान की प्राप्ति नहीं हुई तब वह बहुत दुखी रहने लगे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप से विचार-विमर्श कर यज्ञ करवाने का निश्चय किया। तब यज्ञ की आहुति की खीर महर्षि कश्यप ने राजा प्रियंवद की पत्नी को दी और उसी के प्रभाव से उन्हें संतान के रूप में पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन वह पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। पुत्र वियोग में जब राजा ने अपने प्राण त्यागने का निश्चय किया तो ब्रह्मा जी की मानस पुत्री देवसेना वहां पर प्रकट हुई और उन्हें पुत्र को जीवित करने के लिए छठ व्रत करने को कहा। इस व्रत के प्रभाव से राजा प्रियंवद का पुत्र जीवित हो गया। तब से छठ पूजा बड़े ही धूमधाम से पूर्ण अस्थापूर्वक निष्ठा के साथ पूरे देश में मनाई जाती है।

इस प्रकार छठ पूजा का हिंदुओं में विशेष महत्व है और इन चार दिनों में छठ माता की पूजा विधि विधान से की जानी चाहिए।

8वीं की छात्रा ने ड्राइवर से भागकर की शादी, ससुराल पहुंची तो 8 बच्चों का निकला बाप



 गोड्डा.



8वीं क्लास की छात्रा को पड़ोस में रह रहे एक ड्राइवर से प्यार हो गया। प्यार भी इस कदर हुआ कि बिना घरवालों को बताये बिना गोड्डा के देवदाड़ की रहने वाली तरबानो खातून ने करमाटांड़ बरमुंडी के रहने वाले मुस्तकिम से जनवरी 2021 में कोर्ट मैरिज भी कर लिया। जब वह ससुराल पहुंची, तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। लड़का पहले से ही शादीशुदा था और 8 बच्चों का बाप था। तरबानो ने बताया कि स्कूल आने-जाने के दौरान ही साल भर पहले उसकी मुलाकात गोड्डा में मुस्तकिम से हुई थी। 

पंचायत में ₹50,000 देकर हुआ था तलाक 

ससुराल में बात-बात पर ही झगड़े होते थे। तीन महीने बाद बात तलाक तक पहुंच गई। । इस बात को ले दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। ₹50,000 देने की बात पर दोनों पक्षों में रजामंदी हो गई। लेकिन लड़की के पिता को पैसा नहीं मिले और फिर भी वे अपनी बेटी को अपने घर ले गए। उन्होने कहा जिंदगी तो बेकार हो ही गई, अब झगड़े का क्या फायदा।


तरबानों को प्रताड़ित करने ससुराल वालों ने कोई कसर नही छोड़ी। तरबानों का कहना है कि उसे मारा-पीटा, सिर मुंडवा दिए। दिन-रात कभी भी करेंट लगा देते, ताकि किसी तरह तड़प कर वह मर जाए। चीखती-चिल्लाती तो लोग करेंट हटा देते। तरबानो की आंखों की पुतली के बाल तक नोंच डाले। प्रताड़ना से वह इस कदर परेशान हो गई कि मौका पाकर सोमवार की सुबह दोबारा से घर से भाग निकली। किसी तरह करमाटांड़ बाजार पहुंची और यहां मौजूद कुछ लोगों की नजर उस पर पड़ गई। पूछताछ के दौरान उसने सब कुछ बताया। 

फिर होने लगी बातचीत 
तरबानो ने थाने मे बताया कि मुस्तकिम अंसारी फिर से 7 महीने के बाद उसके साथ फिर बातचीत करने लगा। एक दिन वह अपनी बाइक लेकर आया और अपने साथ अच्छी तरह रखने का झांसा देकर फिर से अपने घर ले आया। उसकी सौतन और पति उसे प्रताड़ित लगे । इस संबंध में थाना प्रभारी रोशन कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है।
लड़की को थाना लाया गया है। लिखित आवेदन मिलने के बाद प्राथमिक दर्ज की जाएगी। लड़की के पिता को भी इत्तला कर दिया गया है। मामले के किसी भी दोषी को बख्सा नहीं जाएगा। पीड़िता के पिता के यहां पहुंचते ही पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर देगी।

Monday, November 8, 2021

119 Padma Awards presented by President Ram Nath Kovind this year





119 Padma Awards  presented by President Ram Nath Kovind this year

The list comprises 7 Padma Vibhushan, 10 Padma Bhushan and 102 Padma Shri Awards. 29 of the awardees are women, 16 Posthumous awardees and 1 transgender awardee. 





 


  


आस्था के महापर्व छठ में कुमारधुबी के बच्चों ने किया अनोखा पहल, लोगों ने की सराहना




धनबाद।

धनबाद के कुमारधुबी बाघाकुड़ी के बच्चों ने छठ महापर्व पर  एक अनोखी पहल करते हुए अपने अपने गुल्लक में जमा की गई राशि से कद्दू खरीदकर छठ व्रतधारियों के बीच कद्दू का वितरण किया। 
जिसे देखकर लोगों ने इस पवित्र कार्य की काफी सराहना की। बच्चों ने बताया कि उन्हें अचानक मन मे ख्याल आया कि छठ महापर्व में कुछ किया जाय। वे अपने-अपने गुल्लक को तोड़कर छ: हजार रुपये निकाले। जिससे उनलोगों ने बाजार से 2 क्विंटल कद्दू खरीद कर छठ व्रतधारियों के बीच वितरण किया।इस अवसर पर बच्चों में अमन गुप्ता, गोपी य इरफान अहमद खान, बबली वर्मा, अजय सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

बैंक मैनेजर ने ही जुए में उड़ा दिए ग्राहकों के 1 करोड़, इस तरह पकड़ी गई चोरी





शिमला.

हिमाचल प्रदेश  में बैंक फ्राड का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां धोखाधड़ी करने वाला आरोपी कोई और नहीं बल्कि खुद बैंक का मैनेजर था. जो ग्राहकों के खाते से पैसे निकालकर आनलाइन जुआ खेलता था. कुल्लू के एक बैंक की दोहरानाला शाखा के मैनेजर पर हेराफेरी का आरोप लगा है. मैनेजर जुए में जीतने पर उपभोक्ता के खाते में उतनी रकम जमा करा देता था, जितनी उसने निकाली होती थी.  

ऐसे खातों पर रहती थी नजर:

मॉडस ऑपरेंडी यानी इस बैंक मैनेजर के अपराध करने के तरीके की बात करें तो ये बैंक अधिकारी उन ग्राहकों के खातों को निशाना बनाता था. जो बैंक में साल में दो-चार बार ही आते थे या फिर जिन्होंने बैंक से एसएमएस अलर्ट  की सुविधा नहीं ले रखी थी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी साल अभी तक बैंक में 35.75 लाख के गबन की बात सामने आ चुकी है.

एक करोड़ से ज्यादा का खेल:

आरोपी मैनेजर ने इस तरह करीब एक करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किया है. बैंक फ्रॉड मामले की जांच बैंक की एक टीम कर रही है. फिलहाल आरोपी मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया है. इस घपले की बात सामने आने के बाद बाकी खाता धारक भी अपनी पासबुक अपडेट करवाने बैंक पहुंच रहे हैं.कहा जा रहा है कि घपले की कुल रकम का पता तब चल पाएगा जब सभी उपभोक्ताओं की पासबुक अपडेट हो जाएगी.

Thursday, September 2, 2021

श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से है संरक्षित



पूरी दुनिया के लोग मिस्र की राजाओं के मृत शरीर (ममी) और भारत में गोवा में सेंट जेवियर के संरक्षित शरीर को देख हैरान हैं. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि मिस्र के राजाओं के मृत शरीर, जिस वस्त्र में लपेटे जाते थे। मसलिन भारतवर्ष से ही आयातित थे। तमिलनाडु कज जिला तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम स्थित "श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर”, जिसे भारत के सबसे बड़े मंदिर-परिसर का गौरव प्राप्त है, में विशिष्टाद्वैतदर्शन के महान आचार्य और श्रीवैष्णव परंपरा के अग्रणी संत स्वामी रामानुजाचार्य (1017-1137) का पद्मासनस्थ भौतिक शरीर विगत 878 सालों से संरक्षित रखा जा रहा है और यहां देखा जा सकता है। श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के पांचवें परिक्रमा-पथ पर स्थित “श्री रामानुज मंदिर” के दक्षिण-पश्चिम कोने पर यह भौतिक शरीर संरक्षित है। रामानुजाचार्य 120 वर्ष तक जीवित रहे थे। 1137 में उन्होंने पद्मासन अवस्था में ही समाधि ले ली थी। स्वयं श्रीरंगनाथस्वामी के आदेश से उसी अवस्था में रामानुजाचार्य के शिष्यों ने उनके भौतिक शरीर को संरक्षित रख लिया। इस संरक्षित शरीर में आँखें, नाखून आदि स्पष्ट दिखाई देते हैं। सड़न से बचाने के लिए इस शरीर पर रोजाना किसी प्रकार का अभिषेक नहीं किया जाता। वर्ष में दो बार जड़ी-बूटियों से इस शरीर को साफ किया जाता है और उस समय भौतिक शरीर पर चंदन और केसर का आलेपन किया जाता है। उल्लेखनीय बात है की इस पवित्र स्थान का गोवा या मिस्र जैसा कोई प्रचार नहीं किया जाता। रामानुजाचार्य द्वारा इस्तेमाल एक बॉक्स अभी भी मंदिर के अंदर देखा जा सकता है।


भक्ति से तात्पर्य 

रामानुज के अनुसार भक्ति का अर्थ पूजा-पाठ या कीर्तन-भजन नहीं बल्कि ध्यान करना या ईश्वर की प्रार्थना करना है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य से रामानुजाचार्य ने भक्ति को जाति एवं वर्ग से पृथक तथा सभी के लिये सम्भव माना है। इसके अलावा रामानुजाचार्य भक्ति को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर उसके लिए दार्शनिक आधार भी प्रदान किया कि जीव ब्रह्म में पूर्णता विलय नहीं होता है बल्कि भक्ति के द्वारा ब्रह्म से निकटता प्राप्त करना है यही मोक्ष है.

Wednesday, September 1, 2021

देश की पहली महिला खनन इंजीनियर बनीं झारखंड की आकांक्षा




2018 में बीआईटी (सिंदरी) धनबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की

केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि पर आकांक्षा को ट्वीट कर बधाई दी.कहा कि आकांक्षा कुमारी की यह उपलब्धि दूसरी महिलाओं को प्रेरित करेगीं

हजारीबाग:-

झारखंड के हजारीबाग के बड़कागांव की रहने वाली आकांक्षा कुमारी ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) में भूमिगत खदान की इंजीनियर (माइनिंग इंजीनियर) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है और वह भारतीय कोयला निगम में खदान में काम करने वाली पहली इंजीनियर बन गयी हैं. सीसीएल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सीसीएल के चार दशक के इतिहास में यह पहली बार है जब एक महिला माइनिंग इंजीनियर ने यहां कार्यभार ग्रहण किया है.आकांक्षा ने मंगलवार को नॉर्थ कर्णपुरा क्षेत्र की चूरी भूमिगत खदान में कार्यभार संभाला.mtg बयान में कहा गया कि आकांक्षा कोल इंडिया की दूसरी और भूमिगत खदान में योगदान देने वाली पहली महिला माइनिंग इंजीनियर हैं। उन्होंने अपने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में भूमिगत खदान को चुनकर न सिर्फ इस भ्रांति को तोड़ा है कि खनन क्षेत्र सिर्फ पुरुषों के लिए है, बल्कि अपने जैसी और भी महत्‍वाकांक्षी छात्राओं को प्रेरित किया है। सीसीएल प्रबंधन ने बताया कि पहले माइनिंग में छात्राओं के लिए कोर्स नहीं होते थे। विज्ञप्ति में बताया गया है कि आकांक्षा ने अपनी स्‍कूली पढ़ाई नवोदय विद्यालय से की है। बचपन से ही उन्होंने अपने आस पास कोयला खनन की गतिविधियों को करीब से देखा है। इसके चलते खनन के प्रति उनकी रुचि शुरू से ही रही है। यही कारण है कि उन्होंने इंजीनियरिंग में माइनिंग शाखा का चुनाव किया। उन्होंने 2018 में बीआईटी (सिंदरी) धनबाद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कोल इंडिया में अपना योगदान देने से पहले उन्‍होंने तीन वर्ष तक हिन्‍दुस्‍तान जिंक लिमिटेड की राजस्‍थान स्थित बल्‍लारिया खदान में काम किया। उनके पिता अशोक कुमार बड़कागांव के एक स्कूल में शिक्षक हैं और मां कुमारी मालती गृहिणी हैं। आकांक्षा को कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी, सीसीएल अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पी एम प्रसाद, सभी निदेशकों एवं अन्य कर्मियों ने बधाई दी है। प्रसाद ने कहा कि आकांक्षा की इस उपलब्धि ने खनन क्षेत्र में महिलाओं के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...