Saturday, September 24, 2022

दुर्गा पूजा को लेकर विधि व्यवस्था व सुरक्षा व्यवस्था हेतु उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक



दशहरा पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण एवं आपसी भाईचारा के साथ मनायें:- उपायुक्त...

● सभी अनुमंडल पदाधिकारी/अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी/थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत शांति समिति की बैठक करना सुनिश्चित करें: उपायुक्त...
● असमाजिक तत्वों और सोशल नेटवर्किंग साइट्स यथा फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि पर विशेष निगरानी रखेंगे। साथ ही सोशल मीडिया के एडमिन के साथ बैठक करेंगे:- उपायुक्त...
● अवैध शराब कारोबारी/दुकानों की सूचना इकट्ठा कर उसपर उचित कारवाई करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कोई भी शराब दुकान सुबह 10:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही संचालित हो:- उपायुक्त...
● प्रतिनियुक्त पदाधिकारी, दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, पुलिस बल मुस्तैद रहेंगे:- पुलिस अधीक्षक.. ● अफवाह/असमाजिक तत्वों तथा अशांति फैलाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखते हुए जिला प्रशासन को ससमय सूचित करें:- पुलिस अधीक्षक...
● संवेदनशील स्थानों पर नजर रखेंगे और संवेदनशील स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग करना सुनिश्चित करेंगे:- पुलिस अधीक्षक... गिरिडीह।
आज समाहरणालय सभागार कक्ष में आगामी दशहरा पर्व/दुर्गा पूजा के निमित्त विधि व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए जिले के वरीय पदाधिकारियों/पुलिस पदाधिकारियों/दंडाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उपायुक्त ने कहा कि दशहरा पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण एवं आपसी भाईचारा के साथ मनाया जाए एवं अफवाह तथा अशांति फैलाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखते हुए जिला प्रशासन को स-समय सूचना दें। बैठक के दौरान उपायुक्त, श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने जिलेवासियों को दुर्गा पूजा सरकार की गाइडलाइन के आधार पर शांतिपूर्ण एवं आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की। उपायुक्त ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों/प्रखंड विकास पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों से उनके अनुमंडल/प्रखंड व थाना अंतर्गत दुर्गापूजा के लेकर की गई तैयारियों एवं व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत पूजा समितियों के साथ शांति समिति की बैठक करें। समितियों को सरकार की गाइडलाइन से अवगत कराएं। सभी पूजा पंडालों का निरीक्षण करें। जितने भी तालाब है उन सभी की साफ-सफाई सुनिश्चित कराएं। त्योहार के दौरान विधि व्यवस्था सहित विद्युत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई इत्यादि को दुरुस्त करने को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। शहर के आसपास के जिन क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत की आवश्यकता है उन्हें मरम्मत कराने को संबंधित अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिया। शोभा यात्रा में रूट चार्ट का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके अलावे मुर्ति विसर्जन में भी निर्धारित समय का विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी से बारी-बारी दशहरा पर्व के मद्देनजर तैयारियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पुजा के दौरान ट्रैफिक कन्ट्रोल की दिशा में भी चर्चा की गई। आग की रोकथाम एवं बचाव हेतु सभी पण्डालों मे फायर एक्सीटीन्गुइशर की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शहर के झुले/लटकते हुए सभी बिजली के तार को दुरूस्त करने का निर्देश दिया। साथ ही मानसरोवर तालाब की साफ सफाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी सभी सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण वातावरण में दुर्गा पूजा मनाये। कोई ऐसी गलती न हो, जिससे की प्रशासन को कानूनी कार्रवाई करनी पड़े। पुलिस अधीक्षक ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों/अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों/प्रखंड विकास पदाधिकारियों तथा थाना प्रभारियों से पुजा समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर कार्यों की जिम्मेवारी तय करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने आवागमन की सुगमता को देखते हुए प्रतिमा के ऊंचाई पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही पुजा पण्डाल में संचालित होने वाले साउण्ड सिस्टम के ऑपरेट की सूची भी संबंधित थाना को देने की बात कही। थाना प्रभारी को सभी साउण्ड सिस्टम के प्रतिनिधियों से बैठक कर सुप्रीम कोर्ट के गाईडलाईन का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया। विधि-व्यवस्था संधारण की दिशा में समिति के वोलेन्टीयर की तैनाती पूरी तर्त्पता के साथ सुनिश्चित करवाने की बात कही। उन्होने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना मिलने पर डायल 100 या स्थानीय प्रशासन को सूचित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कन्ट्रोल रूम, विडियोग्राफी, ड्रोन एवं सीसी टीवी कैमरा से निगरानी की जाएगी। ट्रैफिक कन्ट्रोल के लिए ट्रैफिक पुलिस की प्रतिनियुक्ति होगी। ट्रैफिक कन्ट्रोल हेतु वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। रावण दहन के दिन रूट डायभट करने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर संवेदनशील स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया। साथ ही जो व्यक्ति 307, 153, 302 केसेस में शामिल है, उनपर 107 की कारवाई करना सुनिश्चित करेंगे। अवैध शराब और अवैध पशु का ट्रांसपोर्टेशन होने पर कड़ी कारवाई करें। बैठक के दौरान उपरोक्त के अलावा एएसपी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, निदेशक डीआरडीए, उप नगर आयुक्त, नगर निगम, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, गिरिडीह जिला, जिला नजारत उप समाहर्ता, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी, सभी थाना प्रभारी, गिरिडीह जिला, कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल व अन्य संबंधित अधिकारी एवम पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

Sunday, February 6, 2022

झारखंड: नींव की खुदाई में निकले तीर-धनुष, 1857 की क्रांति से जुड़े हो सकते हैं यह हथियार




रांची।
झारखंड के लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर घर बनाने के लिए नींव की...* झारखंड के लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर घर बनाने के लिए नींव की खुदाई की गई तो जमीन से तीर, धनुष, गदा निकले. इनमें तीरों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है. इन शस्त्रों को देखकर ऐसा लग रहा है कि प्राचीन काल में इन्हें यहां पर छुपाया गया होगा. जैसे ही इस घटना की सूचना गांव में फैली मौके पर भारी संख्या में लोग इन शस्त्रों को देखने के लिए इकट्ठा हो गए. ब्राह्मणडीहा करंज टोली गांव में रहने वाला सुमंत टाना भगत नाम का शख्स घर बनाने के लिए जेसीबी से नींव की खुदाई करा रहा था. इस दौरान उसे जमीन के अलग-अलग हिस्सों से तीर, धनुष, गदा मिले. बताया जा रहा है कि शुरू में कुछ सामान कुछ समझ नहीं आया और गांव के लोग कुछ सामान उठाकर ले गए. जब ज्यादा संख्या में हथियार मिलने शुरू हुए तो घर के मालिक ने इन्हें इकट्ठा करना शुरू कर दिया. इनमें करीब दो दर्जन तीर हैं, इसके अलावा कुल्हाड़ी. हंसुए जैसा हथियार भी है. अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े भी मिले अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े हैं. काफी चीजों में जंग लग चुका है पर कुछ की स्थिति अच्छी है. संभावना जताई जा रही है कि इस जमीन में और भी पुरातात्विक महत्व के अवशेष हो सकते हैं. रांची यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्राध्यापक डॉक्टर कंजीव लोचन ने बताया कि इन चीजों का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है. इनके अध्ययन से लोहरदगा और झारखंड के प्राचीन इतिहास से संबंधित नई जानकारी मिल सकती है. किसी भी औजार में छेद नहीं दिख रहा, यह इनके बहुत पुराना होने का लक्षण है. 1857 की क्रांति से जुड़े हथियार एक ही पैटर्न के कई पात्र मिले हैं, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि यह रसोई के अवशेष न होकर किसी लुहार की दुकान के अवशेष हो सकते हैं. अगारिया जनजाति का काम हो सकता है. लोहरदगा कई आंदोलन और सशस्त्र क्रांति की भूमि रहा है. 1831 के लरका आंदोलन, 1857 की क्रांति सहित कई सशस्त्र आंदोलन यहां हुए हैं. इस दौरान हुए युद्धों का इतिहास में जिक्र मिलता है. हथियारों के इन प्राचीन अवशेषों को उन्हीं आंदोलनों से जोड़कर देखा जा रहा है. 10 साल पहले खुदाई के दौरान मिले थे अवशेष स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 10 साल पहले इस स्थान पर सड़क बन रही थी. तब भी जमीन की खुदाई में इस तरह के हथियार और अन्य अवशेष मिले थे. लेकिन उस समय इनकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी और ग्रामीणों ने ही उन्हें इधर-उधर कर दिया था इस बार अवशेषों ने लोगों की उत्सुकता को बढ़ाया है. इन अवशेषों की पुरातात्विक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह इतिहास के किस दौर और घटना से जुड़े हुए हैं.

लता मंगेशकर पर विशेष;लता : भूतो न भविष्यति....



 

( राजेश झा,विश्व संवाद केंद्र मुंबई) 
लता दीदी के जीवन पर प्रकाश डालना सूरज को दीपक दिखाना है। माना जाता हैं कि लीजेंड पैदा नही होते अवतरित होते हैं। लता दीदी पृथ्वी पर भारत की पुण्य भूमि में अवतरित ही हुई थी। 

लता दीदी के निजी जीवन में पोलिटिकल करेक्टनेस की बीमारी उन्हें कभी छू भी नही पाई थी।

वीर सावरकर देश की आजादी के बाद जब जेल से छूटे तो लता दीदी उनके स्वागत में उनको पिक करने पहुँची थी।

लता दीदी ने जिस दौर में भाजपा को एक वर्ग अछूत समझता था या खुले मंच पर चुप रहने का ढोंग करता था, उस दौर में लता दीदी बोली थी कि मैं चाहती हूँ कि अटल भाई प्रधानमंत्री बने, इसके पीछे जनसंघ/भाजपा से लगाये अटल भाई का पचास साल का तप भी हैं। 

नरेंद्र मोदी के लिये भी उन्होंने चुप्पी तोड़ी थी। 

हाँ गैर राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण किसी सरकार या व्यक्ति को कभी इन्होंने असहज नही किया था। हाँ, पर अपना अनुराग भी इन्होंने कभी छिपाया नही था।

लता दीदी का व्यक्तित्व ऐसा था कि इन्हें सभी प्यार करते हैं। 

लालकिला पर एक बार पंडित प्रदीप के लिखे गीत को लता दीदी की आवाज में सुनकर पण्डित नेहरू भी रोने लगे थे। भावुक होकर बोले थे कि ऐसे गीत भी  सिनेमा जगत में लिखे गाये जाते हैं क्या ? 

लता दीदी से सभी प्यार करता हैं। कोई किसी भी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा, बोली, आदि से सम्बंधित हो... किसी भी फील्ड या पेशे में हो... लता दीदी के आभामंडल से वशीभूत रहता ही हैं। 

कभी कोई पद या सम्मान किसी को मिलता हैं तो उस व्यक्ति का कद बढ़ता हैं। लता मंगेशकर दीदी उन विरले लोगो मे हैं, जिन्हें भारत रत्न मिला था तो भारत रत्न का सम्मान बढ़ा हैं।  
विनम्र श्रद्धांजलि ....

भारतरत्न सुश्री लता मंगेशकर देश की सबसे लोकप्रिय एवं आदरणीय गायिका थीं।  प्रारंभिक काल में उन्होने कुछ मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय तथा फिल्मोद्योग में पैर सुदृढ़ता से जम जाने पर कुछ मराठी फिल्मों व हिंदी फिल्मों का निर्माण भी किया।पांच फिल्मों का संगीतनिर्देशन भी किया। जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्याधुनिक अस्पताल भी उन्होने बनवाये।  लेकिन उनकी पहचान "भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका  " के रूप में ही की जाती है।उन्होने हिंदी, मराठी एवं बांग्ला सहित 36 से अधिक भाषाओं में फिल्मी तथा गैर-फिल्मी गाने गाये हैं।उनकी मनमोहिनी आवाज में ऐसा जादू है जो हर सुननेवाले को मंत्रमुग्ध कर देती है।लता की जादुई आवाज़ के भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है। उनको संगीत  के क्षेत्र में अनुपम योगदान के लिए 'पद्मभूषण' , 'पद्मविभूषण' तथा  'भारत रत्न' ,दादा साहेब फाल्के चारों  नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया गया। 

पुरा नाम- लता दीनानाथ मंगेशकर
जन्म- 28 सितंबर, 1929
स्थान- मध्य प्रदेश, इन्दौर
पिता- दीनानाथ मंगेशकर
माता- शेवंती मंगेशकर  
मृत्यु -६ फरवरी २०२२

प्रारंंभिक जीवन

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को भारत स्थित मध्य प्रदेश जिला के इन्दौर में हुआ था। वे पंडित दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती की बड़ी बेटी थीं। लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे जबकि माँ गुजराती थी और शेवंती उनकी दूसरी पत्नी थी। उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था, जिसकी मृत्यु के बाद दीनानाथ ने नर्मदा की छोटी बहन शेवंती को अपनी जीवन संगिनी बनाया।गोआ में मंगेशी के मूल निवासी होने के कारण पंडित दीनानाथ हार्डीकर ने अपना उपनाम ( सरनेम )बदलकर उन्होंने मंगेशकर कर लिया। उनकी और शेवंती की पहली संतान थीं हेमा थीं जिसे बदलकर लता कर दिया गया। यह नाम दीनानाथ को अपने नाटक ‘भावबंधन’ के एक महिला किरदार लतिका के नाम से मिला। लता के बाद मीना, आशा और हृदयनाथ का जन्म हुआ। बचपन से ही लता को घर में गीत-संगीत और कला का वातावरण मिला और वे स्वभावतः  उसी की तरफ आकर्षित हुई।लता मंगेशकर ने अपना कला क्षेत्र का पहला पाठ अपने पिता से सीखा था। पाँच साल की उम्र में लता  ने अपने पिता के म्यूजिकल नाटक के लिये एक्ट्रेस का काम करना शुरू किया था । स्कूल के पहले दिन से ही उन्होंने बच्चो को गाने सिखाने शुरू कर दिये थे। जब शिक्षको ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वह बहुत गुस्सा हो गयी थी , लेकिन अपनी छोटी बहन आशा को भी स्कूल ले जाने पर  जब शिक्षको ने उन्हें बैठने की अनुमति नहीं दी तो इससे लता को बहुत दुःख हुआ  और उन्होने भी स्कूल जाना ही छोड़ दिया । दीनानाथ मंगेशकर की मृत्यु 1942 में हो गई तब लता मात्र 13 साल की थीं। वे अपने सभी भाई और बहनों में सबसे बड़ी थीं  तो उनपर घर का आर्थिक दायित्व आ गया और उन्होने अभिनय तथा गायन दोनों के द्वारा धनार्जन प्रारम्भ कर दिया। एक मराठी फिल्म के लिए उनकी आवाज में एक गाना रिकॉर्ड किया गया , लेकिन जब  फिल्म रिलीज हुई तो उसमें लता का गाया गाना नहीं था। इस बात से लता  बहुत आहत हुई।दीनानाथ के अच्छे मित्र विनायक दामोदर एक फिल्म कंपनी के मालिक थे, जिन्होने दीनानाथ  की मृत्यु के बाद लता जी के परिवार को बहुत सहारा दिया।

1945 में लता मंगेशकर जी मुंबई आ गई और इसके बाद उनका करियर धीरे -धीरे आकार लेने लगा।लता मंगेशकर ने संगीत की शिक्षा  उस्ताद अमानत अली खान से संगीत की शिक्षा लेना शूरू कर दिया। वर्ष 1947 में विभाजन के बाद उस्ताद अमानत अली खान पाकिस्तान चले गये इसलिए वो भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत सीखने लगीं।   1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर उनके संगीत गुरु बने। लता मंगेशकर ने  विनायक  दामोदर की दूसरी हिंदी फिल्म सुभद्रा , फिर  फिल्म "बड़ी माँ" (1945) में भजन गाये। उनके गाए भजन ‘माता तेरे चरणों में’ 1946 में रिलीज हुई। वर्ष 1947 में हिंदी फिल्म ‘आप की सेवा में’ के लिए भी एक गाना गया, लेकिन सफलता लता से अब भी बहुत दूर थी । गुलाम हैदर ने लता मंगेशकर की मुलाकात शशधर मुखर्जी से कराई जो उन दिनों फिल्म "शहीद" पर काम कर रहे थे। लेकिन मुखर्जी ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी आवाज पतली है।उस समय गायिका नूरजहाँ,शमशाद बेगम, जोह्राबाई अम्बलेवाली का दबदबा था,  उनकी आवाज भारी व अलग थी, उनके सामने लता की आवाज काफी पतली और दबी हुई लगती थी।उसके बाद गुलाम हैदर  ने लता जी को फिल्म " मजबूर" में मौका दिया जिसमे उन्होंने “दिल मेरा तोडा ,मुझे कही का न छोड़ा ” गाना गाया जो उनके जीवन का पहला हिट गाना बना यही कारण है कि लता जी गुलाम हैदर साहब को ही अपना गॉडफादर मानती थी। समय बदला , 1949 में लता जी ने लगातार 4 हिट फिल्मों में गाने गए और सभी गानें बहुत पसंद किये गए ' बरसात', 'दुलारी', 'अंदाज' व 'महल' फिल्में हिट थी, इसमें से 'महल' फिल्म का गाना ‘आएगा आनेवाला’ सुपर हिट हुआ और लता के पैर हिंदी सिनेमा जगत जम गए ।


लता मंगेशकर ने उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया। अनिल बिस्वास, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन, नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र इत्यादि सभी संगीतकारों ने इनकी प्रतिभा का लोहा माना। लता ने 'दो आँखें बारह हाथ', 'दो बीघा जमीन',' मदर इंडिया', 'मुगल ए आजम' आदि महान फिल्मों में गाने गाये। “एक थी लड़की”, “बड़ी बहन” आदि फिल्मों की  लोकप्रियता लता के गाये गीतों ने  चार चाँद लगाए। इस दौरान आपके कुछ प्रसिद्ध गीत थे “ओ सजना बरखा बहार आई” (परख-1960), “आजा रे परदेसी” (मधुमती-1958), “इतना ना मुझसे तू प्यार बढा़” (छाया- 1961), “अल्ला तेरो नाम”, (हम दोनों -1961), “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, (जंगली-1961), “ये समां” (जब जब फूल खिले-1965) इत्यादि।
बाद के वर्षों में उन्होंने संगीत के हर क्षेत्र में अपनी कला ऐसी बिखेरी जैसे कि गीत, गजल, भजन सब विधा में उनका वर्चस्व बढ़ने लगा। गीत चाहे शास्त्रीय संगीत पर आधारित हो, पाश्चात्य धुन पर हो या फिर लोकधुन की खुशबू से सराबोर हो-हर गीत को लता ने ऐसे जीवंत रूप में पेश किया कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाय । उन्होने मन्ना डे , मुहम्मद रफी, किशोर कुमार, महेंद्र कपूर आदि के साथ-साथ दिग्गज शास्त्रीय गायकों पं भीमसेन जोशी, पं जसराज इत्यादि के साथ भी मनोहारी युगल-गीत गाए। गजल के बादशाह जगजीत सिंह के साथ एलबम “सजदा” ने लता को अद्वितीय , अतुलनीय बना दिया। 


लता मंगेशकर ने 1953 में सबसे पहले मराठी फिल्म ‘वाडई‘ बनाई फिर  इसी वर्ष उन्होंने संगीतकार सी. रामचंद्र के साथ मिलकर हिंदी फिल्म ‘झांझर‘ का निर्माण किया था। तत्पश्चात 1955 में हिंदी फिल्म ‘कंचन‘ बनाई। उपरोक्त तीनों औसत फिल्में थीं। 1990 में उनकी फिल्म ‘लेकिन‘ हिट होने के बाद लता जी ने पांच फिल्मों में संगीत निर्देशन दिया था। सभी फिल्में मराठी थीं और 1960 से 1969 के बीच बनी थीं। बतौर संगीत -निर्देशक उनकी पहली फिल्म राम और पाव्हना (1960) थी। अन्य फिल्में मराठा टिटुका मेलेवा (1962), साहित्यांजी मंजुला (1963), साधु मानसे (1955) व तबाड़ी मार्ग (1969) थीं।

लता मंगेशकर की शादी नहीं हो पाई। बचपन से ही परिवार का बोझ उन्हें उठाना पड़ा। इस दुनियादारी में वे इतना उलझ गईं कि शादी के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली। बताया जाता है कि संगीतकार सी. रामचंद्र ने लता मंगेशकर के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लता जी ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि लता ने इस बारे में कभी खुल कर नहीं कहा, परंतु बताया जाता है कि सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं। सी. रामचंद्र ने कहा था कि लता उनसे शादी करना चाहती थीं, परंतु उन्होंने इंकार कर दिया क्योंकि वह पहले से शादीशुदा थे।

देश-भक्ति गीत

        1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। इस समारोह में लता जी के द्वारा गाए गये गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे। पं नेहरू की आँखें भी भर आईं थीं। ऐसा था आपका भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी स्वर। आज भी जब देश-भक्ति के गीतों की बात चलती है तो सब से पहले इसी गीत का उदाहरण दिया जाता है। लता मंगेशकर के कौन से गीत पसंद किए गए या लोकप्रिय रहे, इसकी सूची बहुत लंबी है।लता के गाये यादगार गीतों में इन फिल्मों के नाम विशेष उल्लेखनीय है – अनारकली, मुगले आजम अमर प्रेम, गाइड, आशा, प्रेमरोग, सत्यम् शिवम् सुन्दरम्।  उम्र बढ़ने के बाद भी लता की आवाज पहले की तरह न केवल सुरीली रही, बल्कि उसमे और भी निखार आ गया था, जैसे हिना, रामलखन, आदि ।एक समय उनके गीत ‘बरसात’, ‘नागिन’, एवं ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में भी लता ने ढेर सारे गाने गाए। जिनमें से अधिकांश पसंद किए गए। किसी को मदन मोहन के संगीत में लता की गायकी पसंद आई तो किसी को नौशाद के संगीत में। सब की अपनी-अपनी पसंद रही। लता  का कहना था कि मैं नहीं जानती कि उन्होंने कितने गाने गाए क्योंकि उन्होंने कोई रिकॉर्ड नहीं रखा। गिनीज बुक में भी उनका नाम शामिल किया गया था, लेकिन इसको लेकर खासा विवाद है। लगभग 6 से 7 हजार गीतों को लता ने अपनी आवाज दी है, ऐसा माना जाता है।

पुरस्कार और सम्मान
लता मंगेशकर को ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिले। जितने मिले उससे ज्यादा के लिए उन्होंने मना कर दिया। 1970 के बाद उन्होंने फिल्मफेअर को कह दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नहीं लेंगी और उनकी बजाय नए गायकों को यह दिया जाना चाहिए। लता को मिले प्रमुख सम्मान और पुरस्कार इस तरह से हैं।


पुरस्कार:

1. फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
2. राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)
3. महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)
4. 1969 - पद्म भूषण
5. 1974 - दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड
6. 1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार
7. 1993 - फिल्म फेयर  पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
8. 1996 - स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
9. 1997 - राजीव गान्धी पुरस्कार
10. 1999 - एन.टी.आर. पुरस्कार
11. 1999 - पद्म विभूषण
12. 1999 - ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
13. 2000 - आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
14. 2001 - स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
15. 2001 - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न"
16. 2001 - नूरजहाँ पुरस्कार
17. 2001 - महाराष्ट्र भूषण  1. फिल्म फेर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
 
1972 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-परी)
1974 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-कोरा कागज)
1990 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-लेकिन)
1959 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आजा रे परदेसी’ (फिल्म-मधुमती)
1963 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘काहे दीप जले कही दिल (फिल्म-बीस साल बाद)
1966 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा’ (फिल्म-खानदान)
1970 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आप मुझसे अच्छे लगने लगे’ (फिल्म-जीने की राह से)

1994 – विशेष पुरस्कार ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ (फिल्म-हम आपके हैं कौन)
2004 – फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड 50 साल पूरे करने पर
इसके साथ ही भारत में अनेक राज्यों द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त किया।

Tuesday, February 1, 2022

केंद्रीय बजट 2022-23 एक नजर...

केंद्रीय बजट 2022-23 एक नजर 👇👇


सस्ते होंगे ये सामान
अगर बात बजट में सस्ते और महंगे सामान की करें तो विदेश से आने वाली मशीनरी सस्ती होगी और खेती के उपकरण भी सस्ते होंगे. कपड़े और चमड़े का सामान सस्ता होगा. 

हीरों के जेवर होंगे सस्ते
हीरों के जेवरात पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई और छातों पर इंपोर्ट ड्यूटी 20 फीसदी बढ़ाई गई है. इस तरह हीरे के जेवर सस्ते होंगे और विदेश से आने वाले छातों पर भी ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.

विपक्ष बनाएगा इनकम टैक्स में राहत न मिलने को मुद्दा
विपक्ष कॉरपोरेट टैक्स और सरचार्ज में कटौती और इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं करने के विषय को मुद्दा बनाएगी. कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम 3.30 - 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे.

आम आदमी को राहत नहीं, इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया
आम आदमी को इस बजट में इनकम टैक्स के मोर्चे पर कोई राहत नहीं मिली है और इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका साफ अर्थ है कि टैक्स के रूप में जाने वाली पूंजी पर कोई बचत नहीं मिलेगी.

 जनवरी में GST कलेक्शन रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा
वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि जनवरी में जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर आया है. आर्थिक गतिविधियों में तेजी से जीएसटी कलेक्शन में महामारी के बावजूद अच्छा उछाल देखा गया है. 

एमएसएमई क्रेडिट पिछले 12 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ा
अधिल शेट्टी, सीईओ, BankBazaar.com ने कहा ECLGS महामारी में MSMEs के लिए एक वरदान रहा है. इसकी समय सीमा बढ़ाने और आवंटन में वृद्धि एक अच्छा कदम है. अन्य क्षेत्रों की तुलना में एमएसएमई क्रेडिट पिछले 12 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ा है.

क्रिप्टोकरेंसी से आय पर 30 फीसदी का टैक्स
वर्चुअल डिजिटल ऐसेट से आमदनी पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा. इसका साफ अर्थ है कि क्रिप्टोकरेंसी भी इसके दायरे में आ जाएगी और क्रिप्टोकरेंसी से आय पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा. 

बजट में फिनटेक और डिजिटलीकरण पर स्पष्ट जोर
अधिल शेट्टी, सीईओ, BankBazaar.com ने कहा है कि बजट में फिनटेक और डिजिटलीकरण पर स्पष्ट जोर नजर आ रहा है. डिजिटलीकरण, फिनटेक और लेनदेन की लागत कम करने पर स्पष्ट जोर है. एटीएम, नेटबैंकिंग, भुगतान एप के माध्यम से डाक बचत को अंतःप्रचालनीय बनाने से वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण लोगों को सुविधा मिलेगी. रुपे और यूपीआई के जरिए एमडीआर शुल्क में सब्सिडी देने का फैसला सकारात्मक कदम है.

 वित्त मंत्री
वित्त मंत्र निर्मला सीतारमण टैक्स से जुड़े एलान कर रही हैं और उन्होंने कहा है कि आईटीआर में गड़बड़ी को सुधार करने के लिए 2 साल का समय मिलेगा.

वित्त मंत्री के बजट भाषण की बड़ी बातें

वन नेशन, वन रजिस्ट्रेशन पॉलिसी को लाया जाएगा.

राज्यों को 1 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे.

महिलाओं के लिए पोषण 2.0 योजना की शुरुआत होगी.

60 किलोमीटर लंबे 8 रोपवे का निर्माण किया जाएगा. 

5जी स्पेक्ट्रम के लिए ब्रॉडबैंड का आवंटन जल्द किया जाएगा. 

शेयर बाजार में उछाल
शेयर बाजार में बजट के दौरान अच्छा उछाल देखा जा रहा है और सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा ऊपर चला गया है. 

ब्लॉक चेन तकनीक पर आधारित होगी डिजिटल करेंसी
वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई की डिजिटल करेंसी ब्लॉक चेन तकनीक पर आधारित होगी. डिजिटल करेंसी को मजबूत करने के लिए ढांचा बढ़ाया जाएगा. 

RBI साल 2022 में डिजिटल करेंसी लॉन्च करेगा
RBI साल 2022 में डिजिटल करेंसी लॉन्च करेगा और इसके जरिए डिजिटल करेंसी का देश में आधिकारिक लॉन्च होगा. 


सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए बजट में जोर- वित्त मंत्री
सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए इस बजट मे 19,500 करोड़ रुपये का आवंटन बढ़ाया गया है और देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नए चार्जिंग स्टेशन्स लगाए जाएंगे. देश में सौर ऊर्जा के लिए सोलर पैनल आधारित बिजली प्रोजेक्ट्स के विकास पर जोर दिया जाएगा. 


रक्षा में अनुसंधान या रिसर्च के लिए 25 फीसदी बजट बढ़ा- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने एलान किया है कि सरकार की ओर से रक्षा में अनुसंधान या रिसर्च के लिए 25 फीसदी बजट एलोकेशन बढ़ाया जाएगा. इस बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए काफी ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि सीमाओं पर अतिरिक्त परिस्थितियां हैं.

3 करोड़ परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा.

सरकारी खरीद पेपरलेस होगी.

2022 में 5G सर्विस शुरू होगी- वित्त मंत्री

साल 2022 में 5G सर्विस शुरू की जाएगी और गांवों में ब्रॉडबैंड सर्विस मुहैया कराने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा. टेलीकॉम सेक्टर में नौकरी के नए अवसर तलाशे जाएंगे. 

इस साल से मिलेंगे ई-पासपोर्ट- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने एलान किया है कि इस साल से देश में ई-पासपोर्ट मिलने लगेंगे और उनमें चिप लगी होंगी. ई-पासपोर्ट के लिए पासपोर्ट सेवा केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा और वहां पर नई तकनीक आधारित पासपोर्ट सेवाओं को मुहैया कराने के लिए एलोकेशन किया जाएगा. 
 
साल 2022-23 में 80 लाख नए घरों का निर्माण होगा- वित्त मंत्री

साल 2022-23 में 80 लाख नए घरों का निर्माण होगा और इसके तहत 48,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी. नए घरों के लिए शहरी क्षेत्रों में ज्यादा राशि आवंटित की जाएगी और ग्रामीण इलाकों के लिए आधुनिक घरों का निर्माण किया जाएगा. 


बजट की अब तक की बड़ी बातें संक्षिप्त में

केन-बेतवा प्रोजेक्ट के लिए 14,00 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. 

400 वंदे भारत ट्रेनों का उत्पादन अगले 3 साल में किया जाएगा.

पीपीपी मॉडल के जरिए रेलवे के गुड्स सेक्टर का विस्तार होगा. 

750 नई ई-लैब्स बनाई जाएंगी और इनके जरिए टेस्टिंग पर जोर होगा.

इस साल से चिप लगे पासपोर्ट आ जाएंगे.

निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर देने के लिए SEZ की जगह नया कानून लाया जाएगा.

2 लाख आंगनबाड़ी को अपग्रेड किया जाएगा.

महिलाओं के लिए 3 नई योजनाओं को शुरू किया जा रहा है.

2022 में 5G सर्विस शुरू होगी- वित्त मंत्री

साल 2022 में 5G सर्विस शुरू की जाएगी और गांवों में ब्रॉडबैंड सर्विस मुहैया कराने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा. टेलीकॉम सेक्टर में नौकरी के नए अवसर तलाशे जाएंगे. 


इस साल से मिलेंगे ई-पासपोर्ट- वित्त मंत्री

वित्त मंत्री ने एलान किया है कि इस साल से देश में ई-पासपोर्ट मिलने लगेंगे और उनमें चिप लगी होंगी. ई-पासपोर्ट के लिए पासपोर्ट सेवा केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा और वहां पर नई तकनीक आधारित पासपोर्ट सेवाओं को मुहैया कराने के लिए एलोकेशन किया जाएगा. 


पोस्ट ऑफिस में भी अब ऑनलाइन ट्रांसफर संभव- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

पोस्ट ऑफिस में भी अब ऑनलाइन ट्रांसफर हो सकेगा और डाकघर कोर बैंकिंग सेवा के तहत आएंगे. 75 जिलों में डिजिटल बैंकिंग की शुरुआत की जाएगी. 2022 से डाकघरों में डिजिटल बैंकिंग पर कामकाज किया जाएगा. डाकघरों में ATM की सुविधा होगी. 


साल 2022-23 में 80 लाख नए घरों का निर्माण होगा- वित्त मंत्री

साल 2022-23 में 80 लाख नए घरों का निर्माण होगा और इसके तहत 48,000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी. नए घरों के लिए शहरी क्षेत्रों में ज्यादा राशि आवंटित की जाएगी और ग्रामीण इलाकों के लिए आधुनिक घरों का निर्माण किया जाएगा. 


बजट की अब तक की बड़ी बातें संक्षिप्त में

केन-बेतवा प्रोजेक्ट के लिए 14,00 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. 

400 वंदे भारत ट्रेनों का उत्पादन अगले 3 साल में किया जाएगा.

पीपीपी मॉडल के जरिए रेलवे के गुड्स सेक्टर का विस्तार होगा. 

750 नई ई-लैब्स बनाई जाएंगी और इनके जरिए टेस्टिंग पर जोर होगा.

इस साल से चिप लगे पासपोर्ट आ जाएंगे.


शिक्षा के क्षेत्र में वित्त मंत्री के एलान
शिक्षा के क्षेत्र की बात की जाए तो डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाई जाएंगी और स्कूलों में हर क्लास में टीवी लगाया जाएगा. युवा शक्ति को स्किल इंडिया मिशन के जरिए और स्किल्ड वर्कर बनाने पर सरकारी योजनाओं के तहत काम किया जाएगा. लोगों के लिए आजीविका के साधन बढ़ाए जा सकें इसके लिए सरकारी प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. 


किसानों के जीवन की बेहतरी के लिए सरकार प्रतिबद्ध- वित्त मंत्री
किसानों के खाते में MSP के जरिए 2.37 करोड़ रुपये सरकार ने भेजे हैं और आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. सरकार की ओर से रसायन और कीटनाशक मुक्त खेती का प्रसार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. 


किसानों को डिजिटल सेवाएं दी जाएंगी- वित्त मंत्री ने कहा
वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को डिजिटल सेवाएं दी जाएंगी और भारत में गरीबी मिटाने के लक्ष्य पर पुरजोर रूप से कार्य किया जाएगा. ड्रोन के जरिए कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देंगे. 100 गति शक्ति कार्गो टर्मिनट बनाए जाएंगे. 


सिंचाई-पेयजल को बढ़ाने पर जोर- वित्त मंत्री

25 हजार किलोमीटर के नेशनल हाईवे के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा. देश में 5 बड़ी नदियों को जोड़ने के लिए जल संसाधन विकास मंत्रालय की भी मदद से कार्य किया जाएगा. देश में सिंचाई और पेयजल के लिए योजनाओं पर काम किया जा रहा है और गंगा किनारे बसे किसानों को मदद दी जाएगी.


आर्थिक विकास दर 9 फीसदी से ज्यादा रहेगी-वित्त मंत्री
वित्त वर्ष 2021-22 में देश की आर्थिक विकास दर 9.2 फीसदी रहने का अनुमान है और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार के प्रयासों का नतीजा देखने को मिल रहा है. देश में 25 हजार किलोमीटर का हाईवे विकसित होगा. देश की 5 बड़ी नदियों को जोड़ने की योजना है.

LIC का आईपीओ जल्दवित्त मंत्री

निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि एलआईसी का आईपीओ जल्द आएगा और इसके लिए जरूरी कार्यवाही का काम सुचारू रूप से चल रहा है. देश में आईटी और प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया जाएगा और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया जाएगा.

अगले 3 सालों में नई वंदे भारत ट्रेनों को लाया जाएगा
वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले सालों में 25 हजार किलोमीटर का हाईवे तैयार किया जाएगा. अगले 3 सालोमें 400 नई वंदे भारत ट्रेनों को लाया जाएगा. देश में 60 लाख नई नौकरियों का प्रबंध किया जाएगा. सरकार के पास 30 लाख अतिरिक्त नौकरी देने की क्षमता है.

Monday, January 31, 2022

बड़ी खबर: झारखंड में आपदा प्रबंधन की बैठक के बाद मिली बड़ी छूट,खुल रहे सभी कक्षाओं के स्कूल्स


झारखण्ड में लॉकडाउन में सरकार ने बड़ी राहत दे दी है।कोरोना संक्रमण के घटते मामले को लेकर 31 जनवरी सोमवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकार की अहम बैठक हुई।इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की है। इसमें आपदा और स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह समेत तमाम पदाधिकारी मौजूद थे।बैठक में अहम फैसला लिया गया कि 17 जिले में स्कूलों के तमाम क्लास में पढ़ाई शुरू कर दी जायेगी। कक्षा 1 से लेकर ऊपर के सारे क्लास चलेंगे।लेकिन 7 जिलों में पाबंदी स्कूलों में रहेगी। इन सात जिले में जमशेदपुर,सरायकेला-खरसावां,बोकारो,राँची,सिमडेगा,चतरा,देवघर जिले में कक्षा 9 से ऊपर के क्लास चलेंगे।सारे कॉलेजों को संचालित करने का आदेश दे दिया गया है।इसके अलावा सारे जिम को खोल दिये गये है।वहीं स्टेडियम में खेल तो होंगे,लेकिन दर्शकों के जाने की इजाजत नहीं होगी।रात 8 बजे के बाद की बंदिशें बरकरार रखी गयी है और रात 8 बजे के बाद बंदिशें हटाने पर अगले बैठक में निर्णय होगी। कोरोना के संक्रमण के घटते डर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।वहीं विवाह समारोह में 100 लोगो को पहले इजाजत थी,जिसको बढ़ाकर 200 लोग तय कर दिया गया है रेस्टोरेंट जैसे चल रहे थे, वैसे ही चलेंगे। जबकि स्कूल -कॉलेज हो या कोई भी जगहकोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं दी जायेगी।•

इसके साथ ही सरकारी और निजी दफतरों में 50 प्रतिशत संख्याबल के साथ ही ऑफिस खोलने का आदेश जारी हुआ था. राज्य सरकार के द्वारा जारी वर्तमान पाबंदियां 31 जनवरी तक के लिए ही लागु थी. लेकिन कोरोना के मामलों में कमी और संक्रमण के खतरे को कम होता देख आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक कर कई तरह की पाबंदियों से राहत दी गयी है।

इन पाबंदियों से मिली राहत

-सभी कॉलेजों को खोलने का आदेश दिया गया है.

-17 जिलों में कक्षा 1 से कक्षा 12वीं तक खुलेंगी, 7 जिलों में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं खुलेंगी.

-राँची में कक्षा 9वीं से 12वीं तक ही ऑफलाइन माध्यम से खुलेंगी स्कूल.

-राँची, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, सिमडेगा, चतरा, देवघर, सरायकेला में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं खुलेंगी.

Sunday, January 30, 2022

बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर




क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए।
ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा।
यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य।

 यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -

ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है
अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है।

वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर की प्राचीनता व छत टपकने के रहस्य के बारे में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुरातत्व विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक कई दफा आए लेकिन इसके रहस्य को नहीं जान पाए हैं अभी तक बस इतना पता चल पाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 11वीं सदी में किया गया था।

मंदिर की बनावट बौद्ध मठ की तरह है। इसकी दिवारें 14 फीट मोटी हैं जिससे इसके सम्राट अशोक के शासन काल में बनाए जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं वहीं मंदिर के बाहर मोर का निशान व चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के कार्यकाल में बने होने के कयास भी लगाए जाते हैं लेकिन इसके निर्माण का ठीक-ठीक अनुमान अभी नहीं लग पाया है
भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर अति प्राचीन है मंदिर में भगवान जगन्नाथ  बलदाऊ व सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां विराजमान हैं प्रांगण में सूर्यदेव और पद्मनाभम की मूर्तियां भी हैं जगन्नाथ पुरी की तरह यहां भी स्थानीय लोगों द्वारा भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है लोगों की आस्था मंदिर के साथ गहरे से जुड़ी है लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं ।

Monday, December 27, 2021

नगदी 300 करोड़ रुपए तक पहुंची;एक साथ नोटों की चार गड्डियां गिनने वाली मशीन मंगाई, 100 किलो सोना चांदी भी



नगदी 300 करोड़ रुपए तक पहुंची। एक साथ नोटों की चार गड्डियां गिनने वाली मशीन मनाई, 100 किलो सोना चांदी भी 

इतनी धन दौलत के मालिक पीयूष जैन को काकादेव पुलिस थाने के फर्श पर सोना पड़ा

आखिर गुटखा कारोबारियों के नाम उजागर क्यों नहीं हो रहे हैं। 

उत्तर प्रदेश के कानपुर और कन्नौज के बहुचर्चित इत्र कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों से अब तक 300 करोड़ रुपए नगद बरामद किए जा चुके हैं। नोटों का मिलना लगातार जारी है। इसलिए अब आयकर विभाग और जीएसटी   इंटेलिजेंस के अधिकारियों ने एक साथ नोटों की चार गड्डियां गिनने वाली मशीन मंगाई है। पहले एक समय में एक गड्डी की कितनी हो रही थी। इसमें समय अधिक लग रहा था। अब मशीन में चार गड्डियां एक साथ डाली जाती है। यही वजह है कि अब नगदी का आंकड़ा 300 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। जानकारों के अनुसार 100 किलो सोना चांदी भी मिला है। चांदी तो बोरियों में भरी मिली है। गंभीर बात यह है कि नगदी और सोना-चांदी मिलने का सिलसिला जारी है। यह पहला अवसर है, जब किसी एक कारोबारी के ठिकानों से 300 करोड़ रुपए की नगद राशि मिली है। जीएसटी इंटेलिजेंस ने इत्र कारोबारी पीयूष जैन को 26 दिसंबर को ही गिरफ्तार कर लिया था। इतनी धन दौलत के मालिक पीयूष जैन ने 26 दिसंबर की रात कानपुर के काकादेव पुलिस स्टेशन के फर्श पर गुजारी। पुलिस ने जैन को लॉकअप में रखने के बजाए थाने के इंस्पेक्टर के कक्ष में सुलाया। जमीन पर बिछाने के लिए एक दरी और ओढ़ने के लिए चद्दर दिया गया। पुलिस कर्मियों को भी इस बात पर आश्चर्य हो रहा था कि जो पीयूष जैन अपने घर में सोने चांदी के पलंग और नोटों की गड्डियों पर सोता रहा, उसे आज पुलिस थाने के फर्श पर सोना पड़ रहा है। 
गुटखा कारोबारियों की भूमिका:
जानकार सूत्रों के अनुसार पीयूष जैन किसी भी प्रकार से इत्र बनाने का काम नहीं करता है। जैन निर्माताओं से इत्र खरीदकर उत्तर प्रदेश के गुटखा कारोबारियों को सप्लाई करता है। पीयूष जैन की भूमिका गुटखा कारोबारियों और इत्र निर्माताओं के बीच दलाल की है। लेकिन निर्माताओं और गुटखा कारोबारियों का भरोसा पीयूष जैन पर है। गुटखा बनाने में इत्र के फ्रेग्रेंस की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। सुगंध से ही यह पता चलता है कि गुटखा रजनीगंधा का है या पान पराग का। पीयूष जैन शिखर गुटखा को भी उसके ग्राहकों के मिजाज के अनुरूप फ्रेग्रेंस की सप्लाई करता है। चूंकि कन्नौज में इत्र का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और कानपुर में देश के मशहूर गुटखा कंपनियों की फैक्ट्रियां हैं, इसलिए पीयूष जैन के ठिकाने कन्नौज और कानपुर में हैं। जीएसटी इंटेलीजेंस के अधिकारी भी मानते हैं कि इतनी नगदी और सोना-चांदी अकेले पीयूष जैन की नहीं हो सकती। इसके पीछे गुटखा कारोबारियों की भूमिका है। हो सकता है कि बरामद नगदी के मालिक गुटखा कारोबारी भी हों। यहां यह उल्लेखनीय है कि गत 20 दिसंबर को जीएसटी इंटेलिजेंस की गुजरात शाखा ने एक मशहूर गुटखे के दो ट्रक अहमदाबाद में जब्त किए थे। तब यह मामला जीएसटी चोरी का था। लेकिन बाद में पीयूष जैन की भूमिका सामने आई तो  इंटेलिजेंट  ने सबसे पहले जैन के कन्नौज स्थित आवास पर जांच पड़ताल की। यह जांच पड़ताल 23 दिसंबर को शुरू हुई थी और 27 दिसंबर तक जैन के ठिकानों से नगदी मिलने का सिलसिला जारी है। अब इंटेलिजेंट के अधिकारी पीयूष जैन को रिमांड पर लेकर आगे की जांच पड़ताल करेंगे। 
S.P.MITTAL (27-12-2021)

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...