Wednesday, December 12, 2018

धनबाद:कांग्रेस के जीत की जश्न में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाली

धनबाद। पुटकी में महिला कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का जश्न केंदुआ नगर अध्यक्ष जोहरा खातून उर्फ मुस्कान के नेतृत्व में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाली और मिठाई बांट कर खुशी का इजहार किया। मौके पर धनबाद जिला महिला कांग्रेस कमिटि की जिलाध्यक्ष सीता राणा ने कहा कि तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की 2019 में आने की झलक है। देश की जनता भाजपा के झूठ और सपने बेचने की बात को पहचान गई है और देश के विकास के लिए कांग्रेस व राहुल गांधी पर आस्था जता रही है।

 सीता राणा ने भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा, किसानों को उपज मूल्य, व्यापारियों को बाजार का झूठा सपना दिखाया और धोखा दिया जिसका नतीजा चुनावों में दिख रहा है। केंदुआ नगर अध्यक्ष जोहरा खातून उर्फ मुस्कान ने कहा कि भाजपा सरकार का 2019 में जाना तय है, झारखंड में भी भाजपा अपने अहंकार और वादाखिलाफी के कारण सत्ता से जाएगी और कांग्रेस की सरकार होगी। जनता का कांग्रेस और राहुल गांधी पर भरोसा बढ़ा है और 2019 में कांग्रेस की वापसी के लिए जीजान से महिला कांग्रेस काम करेगी।

मौके पर अजमेरी खातून, लक्ष्मी देवी, सोनी कौर, दिलीप कौर, अनिता कुमारी, कुसमी देवी, पमिया देवी, बसंती देवी, बिंदु देवी आदि शामिल थी।

तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज


Ranchi: राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बहुमत और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें काफी तेज हो गयी है. हालांकि, बीजेपी का कोई भी नेता इन अटकलों से इत्तेफाक नहीं रखता. लेकिन सरकारी अधिकारियों, कर्मियों और आम लोगों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि झारखंड में आगामी चुनाव के मद्देनजर सत्ता में परिवर्तन हो सकता है.

व्हाट्सएप पर इस तरह के कई मैसेज वायरल हो रहे हैं. राजनीतिक पंडित इस बहस में दो हिस्से में बंटे हुए हैं. एक का कहना है कि बीजेपी चुनाव से पहले ऐसी गलती कभी नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से विपक्ष को बैठे-बिठाए एक तगड़ा मुद्दा चुनाव के लिए मिल जाएगा. वहीं दूसरे हिस्से के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि आगामी चुनाव को लेकर ऐसा संभव है. उदाहरण के तौर पर मोदी के गढ़ गुजरात में हुए राजनीतिक उठा-पटक का हवाला दिया जा रहा है.

आदिवासी वोटर को रिझाने की हो सकती है कोशिश

सीएम लाख संताल का दौरा कर लें. लेकिन आदिवासी समाज के बीच सरकार को लेकर जो मैसेज बीते चार साल में गया है, वो किसी से छिपा नहीं है. झारखंड में आदिवासियों का वोट प्रतिशत करीब 27 फीसदी है. किसी भी पार्टी को सत्ता में काबिज करने के लिए यह आंकड़ा काफी होता है. बीते चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिलने के बाद पार्टी ने पहली बार एक गैरआदिवासी चेहरा झारखंड को सीएम के तौर पर दिया. इसे एक तरह का परीक्षण माना जा रहा था.

सरकार बनने के बाद सीएनटी और एसपीटी एक्ट को लेकर सरकार ने जो भी संशोधन करने की कोशिश की, उसका आदिवासी समाज ने पुरजोर विरोध किया. विरोध का असर यह हुआ कि बहुमत वाली सरकार को आदिवासी समाज की आवाज के नीचे दबना पड़ा. किसी तरह का कोई संशोधन सरकार चाह कर भी नहीं करवा सकी.

भूमि अधिग्रहण बिल भी पास कराने में राज्य से लेकर केंद्र तक विरोध हुआ.  हालांकि इस बिल को किसी तरह राज्य सरकार ने पास करवा लिया. पत्थलगढ़ी, कोचांग रेप कांड, कैथोलिक गुरुओं की गिरफ्तारी, धर्म परिवर्तन कानून को लागू करते वक्त जिस तरीके से आदिवासी समाज को टारगेट किया गया उसका खामियाजा भी मौजूदा सरकार को भुगतना पड़ सकता है.

कई ऐसी चीजें दो सालों में हुई, जिससे आदिवासी समाज का एक हिस्सा सत्ता से नाराज है. ऐसे में कहा जा रहा है कि आदिवासी समाज के वोट के मद्देनजर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

आदिवासी चेहरा लाकर मैनेज करने की कोशिश

झारखंड का इतिहास गवाह रहा है कि सीएम का उम्मीदवार आदिवासी होने के बावजूद भी सत्ता स्थिर नहीं रही है. लेकिन सीएम का आदिवासी चेहरा होने के नाते आदिवासी समाज में एक निश्चितता जरूर दिखी है. ऐसे में अगर बीजेपी एक बार फिर से आदिवासी कार्ड खेलती है, तो कई तरह के समीकरण बनते हैं. कहा जा रहा है कि अर्जुन मुंडा, नीलकंठ सिंह मुंडा, समीर उरांव और दिनेश उरांव सरीके नेता को मौका दिया जा सकता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि फिर मौजूदा सीएम क्या करेंगे. चर्चाओं की मानें तो माना जा रहा है कि मौजूदा सीएम को केंद्र में किसी महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा सकता है या पार्टी में अहम किरदार दिया जा सकता है.

पूर्व सीएम और मंत्री करते रहे विरोध, कई विधायक भी भनभना रहे

मौजूदा सरकार की कई नीतियों को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता के तौर पर देखे जाने वाले अर्जुन मुंडा कई बार आलोचना कर चुके हैं. कई बार तो खुलेतौर पर मीडिया में श्री मुंडा ने सरकार की नीतियों के खिलाफ बोला है. मौजूदा खाद्य आपूर्ति और राज्य के दिग्गज माने जाने वाले नेता सरयू राय मुख्यमंत्री के धुर विरोधी माने जाते रहे हैं. कई बार ऐसा हुआ है कि मंत्री ने सीएम के विभाग के खिलाफ ही सीएम को चिट्ठी लिखी है.

सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने सीएम की नीति की आलोचना की है. नाम ना बताने की शर्त पर राज्य के कुछ विधायक हैं जो खुलेतौर पर सीएम की आलोचना करते हैं. उनकी नीतियों के खिलाफ नहीं बोलने का दर्द बयां करते हैं. लेकिन चाह कर भी कुछ कह नहीं पाते. लेकिन दिल्ली तक लॉबी करने वाले विधायक आला अधिकारियों को सारी बात पहुंचाने का काम जरूर करते हैं.

लाखों वोट को खोने का डर!!

स्थापना दिवस के दिन जो हुआ और जिस तरह के फैसले उस दौरान सरकार की तरफ से लिए गए. फैसलों के बाद फिर सरकार कैसे बैकफुट पर है. यह सारी चीज कहीं ना कहीं यह बताती है कि सरकार को आगामी चुनाव में वोट का डर सता रहा है. पारा शिक्षक ही नहीं, रसोइया, राजस्व कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सर्कल इंस्पेक्टर जैसे तमाम अल्प वेतन धारी जिस तरीके से आंदोलनरत है. उससे कहीं ना कहीं बीजेपी के शीर्ष नेता को यह मैसेज जरूर दिया जा रहा होगा कि झारखंड में ऑल इज वेल के मुगालते से निकलने की जरूरत है. अल्प वेतन धारियों को लेकर सरकार के कई मंत्री भी अब खुलकर बोल रहे हैं. विधायक कई मामलों पर मीडिया के जरिए मुखर होने की कोशिश कर रहे हैं. इन सभी चीजों का दबाव सीधेतौर पर सत्ता पर पड़ेगा. और सत्ता पर दबाव राजनीति में सबसे अहम माना जाता है.

गुजरात वाला एजेंडा हो सकता है लागू

2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात का जिम्मा आनंदीबेन पटेल के कंधों पर दिया गया. लेकिन पाटीदार समुदाय के आंदोलन से लेकर दलित समुदाय के लोगों के साथ हुए बर्ताव जैसी घटनाओं पर बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई थी. पाटीदार समाज गुजरात के लिए झारखंड के आदिवासी समाज की ही तरह के हैं. वहां भी विजय रूपाणी को सीएम इसलिए बनाया गया था ताकि एक साल बाद होने वाले चुनाव में बीजेपी मुंह की ना खाए. वैसे ही हालात आज झारखंड के हैं. सत्ता बचाने के लिए बीजेपी ने अगर झारखंड में सत्ता परिवर्तन किया भी तो, कोई अचरच नहीं होना चाहिए. क्योंकि राजनीति में सत्ता नहीं तो कुछ भी नहीं का एजेंडा आज से ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के जन्म से ही लागू है.

Tuesday, December 11, 2018

'हार और जीत जीवन का हिस्सा हैं' -पीएम मोदी

विधानसभा चुनावों के न

मंगलवार देर शाम मोदी ने ट्वीट करते हुए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान मेहनत करने के लिए शुक्रिया भी अदा किया.

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हार और जीत जीवन का अहम हिस्सा हैं. साथ ही उन्होंने कहा है कि वह हार स्वीकार करते हैं. मंगलवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार का समान करना पड़ा. जबकि मध्यप्रदेश में भी बीजेपी का सरकार बनना मुश्किल दिख रहा है.

मंगलवार रात पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान मेहनत करने के लिए शुक्रिया भी अदा किया. उन्होंने कहा, ''विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार ने रात-दिन जम कर मेहनत की. मैं उनकी मेहनत को सलाम करता हूं. जीत और हार जीवन का अहम हिस्सा है. इन चुनाव के नतीजों के बाद हम देश की विकास लिए और ज़्यादा मेहनत         ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस, केसीआर और मिजोरम में एमएनएफ को भी बधाई दी है. इसके अलावा उन्होंने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया.  उन्होंने कहा, ''हम विनम्रता से हार स्वीकार करते हैं.''  हार के बाद कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी हैं...

अरुण जेटली, वित्त मंत्री
''हमें इतने खराब नतीजे की उम्मीद नहीं थी. हमें इन नतीजों पर विचार करना होगा. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों जगह पिछले 15 साल से हमारी सरकार थी. मुझे नहीं लगता की हार की वजह एंटी इनकंबेंसी फैक्टर है, बल्कि थकान है.''

वसुंधरा राजे
उन्होंने हार स्वीकार करते हुए कहा, ''मुझे लोगों का ये जनादेश स्वीकार है. बीजेपी ने पिछले पांच सालों में लोगों के लिए काफी काम किया है. मैं चाहती हूं कि आने वाली सरकार सारी पॉलिसी को काम को आगे बढ़ाए.''

अशोक गहलोत
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, ''मोदीजी सिर्फ कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते रहे. उनको ये पता नहीं है कि भारत कभी कांग्रेस मुक्त नहीं होगा. कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाले खुद मुक्त हो जाएंगे.''

शक्ति कांत दास बने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए गवर्नर

उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को उसका नया गवर्नर मिल गया है। वित्त आयोग के सदस्य शक्तिकांत दास को आरबीआई का नया चीफ बनाया गया है। शक्तिकांत दास इससे पहले आर्थिक मामलों के सचिव के पद पर भी अपने सेवाएं दे चुके हैं।

पिछले साल वह इस पद से रिटायर हुए थे। मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले में भी इनकी प्रमुख भूमिका रही थी। नई दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से मास्टर्स डिग्री लेने वाले शक्तिकांत दास भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर के जॉइंट सेक्रटरी, तमिलनाड़ु सरकार के स्पेशल कमिश्नर और रेवेन्यू कमिश्नर, इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के सेक्रटरी के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

बता दें कि बीते साल हुए नोटबंदी के फैसले लेने में भी शक्तिकांत दास की महत्वपूर्ण भूमिका थी। सरकार की तरफ से लिए गए इस फैसले का ड्राफ्ट बनाने वालों में दास भी शामिल थे। सोमवार को उर्जित पटेल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए आरबीआई के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। पटेल ने रघुराम राजन की जगह ली थी. उनका कार्यकाल 3 साल का था। 28 अक्टूबर 1963 को जन्मे उर्जित ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीए किया

चुनाव लाईव 2018: पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आए , क्या हैं संकेत....

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Monday, December 10, 2018

गिरिडीह:नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में दो ASI हुए निलंबित

झारखंड के गिरिडीह में राजधनवार थाना क्षेत्र की दुष्कर्म पीड़ित दो नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में जांच के बाद एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने राजधनवार थाना के दो सहायक अवर निरीक्षक इस्माइल मरांडी एवं बुद्धदेव मरांडी को निलंबित कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, दुष्कर्म मामले के अनुसंधान अधिकारी इस्माइल मरांडी को बिना महिला पुलिसकर्मी के लड़कियों को लाने एवं बुद्धदेव उरांव को छेड़छाड़ करने के आरोप में निलंबित किया गया है। दोनों नाबालिग छात्राओं को 17 नवंबर को तीन युवक राजधनवार से अपहरण कर कोलकाता ले गए थे और 15 दिनों तक दुष्कर्म किया था। इस कांड के अनुसंधानकर्ता इस्माइल मरांडी एवं बुद्धदेव मरांडी दोनों लड़कियों के पिता के साथ कोलकाता जाकर दोनों लड़कियों को बरामद कर तीनों युवकों को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया था।

Breaking: उर्जित पटेल ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद से दिया इस्तीफ़ा

उर्जित पटेल ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

रिज़र्व बैंक के वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया है, "निजी वजहों से मैंने तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है. पिछले कई वर्षों से भारतीय रिज़र्व बैंक में विभिन्न पदों पर रहना मेरे लिए सम्मान की बात रही है. पिछले कुछ वर्षों में रिज़र्व बैंक कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और सहयोग बेहद अहम रहा. मैं इस मौके पर अपने सहयोगियों और रिज़र्व बैंक के डायरेक्टर्स के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ और भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूँ."

रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने जब पिछले महीने अपने भाषण में खुलकर रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता की वकालत की थी और माना था कि नकदी की उपलब्धता, क्रेडिट फ्लो और सरकार के नियंत्रण को लेकर मोदी सरकार और रिज़र्व बैंक में मतभेद हैं.

पिछले कुछ समय से मोदी सरकार और गवर्नर उर्जित पटेल के बीच मनमुटाव की ख़बरें आ रही थीं. कहा जा रहा था कि सरकार ने आरबीआई एक्ट के सेक्शन-7 के भीतर अपने विशेषाधिकार को लागू कर दिया है. इसे रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता में हस्तक्षेप माना गया था.ऐसी भी ख़बरें थी कि वित्त मंत्रालय ने रिज़र्व बैंक कानून की धारा सात को लागू करने पर विचार कर रही थी. यह धारा सरकार को जनहित के मुद्दों पर रिजर्व बैंक गवर्नर को निर्देश देने का अधिकार देती है.यह भी कहा गया कि सरकार रिज़र्व बैंक से 3 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपये की मांग कर रही है, जिसका आरबीआई ने विरोध किया है. इन सब मुद्दों पर सरकार और उर्जित पटेल के बीच लगातार खटास की खबरें आती रहीं. इस खींचतान के बीच गवर्नर उर्जित पटेल ने 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की.

पिछले महीने ही रिज़र्व बैंक के बोर्ड की मैराथन बैठक भी हुई थी. ये बैठक तकरीबन नौ घंटे तक चली थी.

रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर नियुक्त होने से पहले पटेल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ में प्रेसिडेंट (बिज़नेस डेवलपमेंट) और आईडीएफ़सी में कार्यकारी निदेशक थे. (श्रोत:बीबीसी)

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...