Saturday, November 14, 2020

हजारीबाग: गोरहर थाना क्षेत्र के तालाब में मिला एक युवक का शव,परिजन ने जतायी हत्या की आशंका






हजारीबाग। 
जिला अन्तर्गत बरकट्ठा के गोरहर थाना क्षेत्रान्तर्गत चामुदोहर स्थित तालाब में शनिवार की सुबह एक युवक का शव पड़ा मिलने से गांव में सनसनी फैल गयी।जिसके बाद लोगो ने स्थानीय थाना को ख़बर की।ख़बर पाकर गोरहर थाना प्रभारी अरुण कुमार ,एएसआई मुनीब राम व अन्य पुलिस बल पहुँची।पुलिस ने युवक के शव को अपने कब्ज़े में लिया।मृतक की पहचान रविंद्र कुमार (25 ) पिता स्व0 महेंद्र लाल थाना बरकट्ठा बाजार निवासी के रूप में हुई।पुलिस ने शव को अंत्यपरीक्षण के लिए सदर अस्पताल हज़ारीबाग भेज दिया गया।वहीं मामले की हर विंदु पर जांच के लिए पुलिस द्वारा अग्रतर कार्रवाई की जा रही है।



 इस बावत पुलिस इंस्पेक्टर अंजनी कुमार ने बताया कि स्थानीय गोरहर थाना पुलिस को सूचना मिली कि चामुदोहर गांव स्थित तालाब में एक युवक की लाश पड़ी है।इसके बाद गोरहर पुलिस ने त्वरित मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया व पोर्स्टमार्टम के लिए हज़ारीबाग भेज़ा गया।प्रेस के सवाल का जवाब में उन्होंने कहा कि पुलिस अग्रतर कार्रवाई की जा रही है।अनुसंधान के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।वहीं परिजनों ने हत्या की आशंका जतायी है।क्षेत्र में  घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय विधायक अमित कुमार यादव,सीओ निर्मल सोरेन,मुखिया संघ अध्यक्ष बसंत साव ,ज़िप प्रतिनिधि केदार साव समेत अन्य ग्रामीण गोरहर थाना पहुंचे।जहां विधायक ने इस तरह की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की घटना से हम सभी मर्माहत है।उन्होंने मृतक के परिजन को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।साथ ही पुलिस प्रशासन को छानबीन करते हुए न्यायोचित  कार्रवाई करने का निर्देश दिया।वहीं गोरहर पुलिस टीम की ओर से पांच हज़ार व मुखिया बसंत साव ने 2 हज़ार सहायता राशि के रुप मे परिजन को दिया गया।मौके पर सुरेंद्र राम,महेश मंडल,किशोर साव,बबलू कुमार ,मधु यादव समेत अन्य लोग मौजूद थे।

Thursday, November 12, 2020

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 1006 करोड़ घोटाले को ले प्रख्यात चावल कम्पनी के कार्यालयों में CBI की दबिश



CBI ने मंगलवार को देश के सबसे बड़े बैंक बासमती चावल के सबसे बड़े प्रोसेसर में से एक, बेस्ट फ़ूड लिमिटेड और उसके अध्यक्ष और प्रबंधक निदेशक के निवास स्थान के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंक के 1006.46 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी के ठिकानों की तलाशी ली। अधिकारियों ने मंगलवार को कहा। 

 चंडीगढ़ और नई दिल्ली में कंपनी के कार्यालयों में चार स्थानों पर मंगलवार सुबह तलाशी अभियान शुरू हुआ और करनाल में चेयरमैन मोहिंदर पाल जिंदल और प्रबंध निदेशक दिनेश गुप्ता के आवास, उन्होंने कहा। । एजेंसी ने धोखाधड़ी, आपराधिक दुर्व्यवहार, आपराधिक साजिश, आपराधिक कदाचार और जालसाजी से संबंधित आईपीसी की धाराएं 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च, 2018 तक क्रेडिट फंडों के कथित लेनदेन के लिए बेस्ट फूड्स लिमिटेड के खिलाफ दायर की हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने CBI को अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बेस्ट फूड्स लिमिटेड (BFL) बेस्ट प्रीमियम, बेस्ट सुपर प्रीमियम जैसे विभिन्न नामों के साथ BEST के एक अंब्रेला ब्रांड के तहत चावल बेच रही है। 

 शिकायत, अब एफआईआर का हिस्सा, ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 101 मीट्रिक टन प्रति घंटे धान मिलिंग और 149 मीट्रिक टन प्रति घंटे चावल छांटने और ग्रेडिंग की क्षमता स्थापित की थी, और "सबसे बड़े प्रोसेसर में से एक" के रूप में उभरा था। देश में प्रीमियम बासमती चावल ”। बैंक ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 27 सितंबर, 2016 को गैर-निष्पादित आस्तियों के रूप में अपने खातों के वर्गीकरण के परिणामस्वरूप ऋण भुगतान में चूक करना शुरू कर दिया, 1006.46 करोड़ रुपये बकाया के साथ, एक फोरेंसिक ऑडिट के दौरान, बैंक ने इन्वेंटिंग के लिए बैलेंस शीट की कथित धोखाधड़ी और बैंक के फंडों को गलत तरीके से निकालने के लिए, यह आरोप लगाया गया। 

 

 “उपरोक्त सभी गैरकानूनी कार्य भारतीय दंड संहिता के तहत संज्ञेय अपराध हैं और बैंक को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किए गए हैं, जिसे मंजूरी दे दी गई है क्रेडिट सुविधाओं और गैरकानूनी तरीके से बैंकर के फंड की लागत में वृद्धि हुई जिससे एसबीआई को गलत तरीके से 1006.46 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, ”यह कहा।

Tuesday, November 10, 2020



झारखंड में दो विधान सभा सीटों बोकारो के बेरमो और दुमका। जिसमे से बेरमो विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल वासनिक ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी। 


राजेंद्र प्रसाद सिंह के आकस्मिक निधन के बाद बेरमो सीट खाली हुई थी। जयमंगल उनके बड़े पुत्र हैं। वे झारखंड युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और वर्तमान में इंटक से जुड़े हैं। झारखंड कांग्रेस चुनाव समिति के बाद केंद्रीय कांग्रेस चुनाव समिति ने भी कुमार जयमंगल के नाम पर ही मुहर लगाई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और वित्त व खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि बेरमो विधानसभा उपचुनाव में पार्टी रिकॉर्ड मतों से जीतेगी
योगेश्वर महतो भारत के झारखण्ड राज्य की बेरमो सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। 2014 के चुनावों में वे इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार राजेन्द्र प्रसाद सिंह को 12613 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए थे।


लुईस मरांडी  दुमका सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। 2014 के चुनावों में वे झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार हेमन्त सोरेन को 5262 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुई थी।
हेमंत सोरेन के इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई दुमका विधानसभा सीट से उनके छोटे भाई और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन पार्टी के उम्मीदवार हैं।
हेमंत सोरेन के इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई दुमका विधानसभा सीट से उनके छोटे भाई और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सबसे छोटे बेटे बसंत सोरेन पार्टी के उम्मीदवार हैं।

नौवें राउंड के बाद दुमका की स्थिति:

श्री बसंत सोरेन(जेएमएम)- 35828

श्रीमती लुईस मरांडी(भाजपा)- 38220



*श्रीमती लुईस मरांडी 2392 मतों से आगे*

बेरमो विधानसभा उपचुनाव के 13 वां राउंड में कांग्रेस प्रत्याशी कुमार जय मंगल 13043 मतों से आगे।
अनूप सिंह , 70892
बाटुल      ,   57849

किडनी की बीमारी से ग्रसित मां की इलाज के लिए बेटे ने युवा साथी संगठन से लगाई मदद की गुहार




 बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत भलमारा पंचायत में गांव असनाटांड निवासी 40 वर्षीय चमनी देवी विगत 10 महीनों से किडनी की बीमारी से जूझ रही है।बताया जाता है कि महिला की प्रत्येक दो-तीन माह में डायलिसिस की जाती है। उसके पति रतन महतो मजदूरी का काम करते हैं।  लॉकडाउन के  दौरान घर पर बैठे हुए हैं। उसका बेटा दुलारचंद महतो ड्राइवर का काम करता है। अब पूरे परिवार को महिला के इलाज में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इधर पुत्र ने मां की इलाज के लिए युवा साथी संगठन से मदद की गुहार लगाई है।पुत्र दुलारचंद महतो ने संगठन के लोगों को बताया कि उसकी मां 10 फरवरी 2020 को अचानक बीमार पड़ गई थी।जब उसे  निचीतपुर  हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर कतरास बाजार धनबाद ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने बताया कि चमनी देवी को किडनी की बीमारी है।साथ ही उसे मुस्कान हॉस्पिटल बोकारो रेफर कर दिया गया। लेकिन चमनी देवी की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
थक हारकर उक्त महिला को उसके घर पर ही रखा है।पुत्र के अनुसार महिला को हर 10 या 12 दिनों के बाद  बोकारो ले जाना पड़ता है।कोरोना संक्रमण काल के कारण निजी गाड़ी से ही उक्त महिला को निजी वाहन द्वारा ही  मुस्कान हॉस्पिटल बोकारो पहुंचाना पड़ता है।जिसमें काफी ज्यादा खर्च हो रहा है घर पर  रक्त का प्रबंध और दवाओं का खर्च वहन करना मुश्किल हो रहा है।
उक्त महिला के पुत्र ने प्रदेश सरकार व समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई।खबर पाकर युवा साथी संगठन  के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मुस्कान हॉस्पिटल  बोकारो पहुंच कर मदद का आश्वासन दिया।
 जिसमे नावाडीह के युवा साथी संगठन प्रखण्ड अध्यक्ष मिथलेश महतो, चंद्रपुरा प्रखंड  युवा साथी संगठन  अध्यक्ष सुनील कुमार, डुमरी प्रखंड  युवा साथी संगठन  कोषाध्यक्ष मनोज महतो ,डुमरी प्रखंड  युवा साथी संगठन  उपसचिव सुनील महतो आदि सम्मिलित थे।

Sunday, November 8, 2020

झारखंड/ वनांचल और जेपी आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आय़ोग द्वारा आंदोलनकारियों की संपुष्ट सूचियों के आवेदकों के कंडिका सुधार करने को ले अधिसूचना प्रारुप को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी



 आयोग द्वारा  पहली, दूसरी, तीसरी, पांचवी, छठी और नौवीं संपुष्ट सूची में उन्नीस आंदोलनकारी आवेदकों अथवा उनके आश्रित के हैं नाम
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड/ वनांचल और जेपी आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आय़ोग द्वारा आंदेलनकारियों की संपुष्ट सूचियों के आवेदकों के कंडिका सुधार करने से संबंधित अधिसूचना प्रारुप को मंजूरी दे दी है. आय़ोग द्वारा  पहली, दूसरी, तीसरी, पांचवी, छठी और नौवीं संपुष्ट सूची में उन्नीस आंदोलनकारियों के नाम हैं. इनमें बोकारो जिले के दो, पूर्वी सिंहभूम के चार, गिरिडीह के एक, जामताड़ा के दो, लोहरदगा के  तीन, रांची के पांच और सरायकेला-खरसांवा के दो  आंदोलनकारी आवेदक शामिल हैं.

 आय़ोग द्वारा संपुष्ट सूची में दर्ज आंदोलनकारी आवेदकों के नाम 

झारखंड/ वनांचल एवं जेपी आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग द्वारा कंडिका में किए गए सुधार प्रतिवेदनों के बाद आंदोलनकारियों की जो सूची संपुष्ट हुई है, उनमें बोकारो के श्री लखिन्दर महतो और श्री लंबोदर महतो, पूर्वी सिंहभूम जिले के श्री पाहाड़ नायक, श्री गौरी शंकर दास, श्री हरिशंकर महतो और श्री एडिएल मिंज, गिरिडीह जिले के श्री रामचरण मंडल, जामताड़ा के मोहम्मद इम्तियाज खां और आंदोलनकारी स्वर्गीय श्री विनोद राय की आश्रित पत्नी श्रीमती हिमानी राय, लोहरदगा के श्री जलेश्वर उरांव, श्री जॉर्ज कुजूर एवं श्री प्रदीप राणा, रांची के श्री दिलीप कोस्मस खेस, श्री मनोज मिंज, श्री नवीन केशरी उर्फ प्रवीण केशरी, आंदोलनकारी स्वर्गीय श्री साबिर अंसारी की आश्रित पत्नी श्रीमती सैफून निशा औऱ श्री परमेश्वर महतो, सरायकेला-खरसांवा जिले के श्री विमल कुमार हाईबुरु और श्री बुधराम उर्फ बुतरू के नाम शामिल हैं.

Saturday, November 7, 2020

मानव तस्करों द्वारा दिल्ली काम करने भेजी गईं रांची, गोड्डा, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, दुमका, लातेहार, सिमडेगा और गुमला की 45 बच्चियों को एयरलिफ्ट कर लाया गया झारखण्ड



मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने दिल्ली से रेस्क्यू कर झारखण्ड लाईं गईं बच्चियों को शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित
मुख्यमंत्री व सांसद राजमहल ने सुंदरपहाड़ी निवासी नौंवीं कक्षा के एक बच्चे की पढ़ाई का खर्च वहन करने की जिम्मेवारी ली

गरीबी उम्र नहीं देखती। गरीब का जीवन जन्म से ही संघर्षशील होता है। इस क्रम में राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्र में निवास करने वाले बच्चे व बच्चियां मानव तस्करी का शिकार हो जाते हैं और देश के विभिन्न राज्यों में उन्हें काम पर लगा दिया जाता है। जहां उन्हें अपनी इच्छा के विपरीत कार्य करना पड़ता है। ऐसे में कई संस्थाओं व अन्य माध्यमों से बच्चियों पर नजर रखी जाती है। सरकार समय-समय पर ऐसी बच्चियों को रेस्क्यू भी करती है। इस कड़ी में राज्य की 45 बच्चियों की आज घर वापसी हुई है। ये बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने दिल्ली से रेस्क्यू कर झारखण्ड लाईं गईं बच्चियों से मुलाकात के क्रम में कही। 


बच्चियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ेंगे 

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड की बच्चियां अन्य राज्य जाकर दाई व आया का काम करें। यह पीड़ादायक है। सरकार इसको लेकर चिंतित है। सरकार ने इसपर संज्ञान लिया है। राज्य की बच्चियों को नर्स का प्रशिक्षण प्रदान कर, उन्हें हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा गया। उनके आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त हुआ। वे देश के बड़े अस्पतालों में बतौर नर्स मानव सेवा कर रहीं हैं। सरकार का यह संकल्प है कि मानव तस्करी की शिकार बच्चियों को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चियों को आश्वस्त किया कि उन्हें चिंतित होने की आवश्यकता नहीं। उनका बड़ा भाई राज्य की देखरेख में लगा है। झारखण्ड महिला सशक्तिकरण की दिशा में अग्रसर है। 


वयस्क होने तक सभी बच्चियों को दो हजार रुपये प्रतिमाह, वयस्क को रोजगार से है जोड़ना

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने के दिशा में कार्य होगा। बच्चियों की इच्छा के अनुरूप सरकार निर्णय लेगी। वयस्क होने तक सभी बच्चियों को प्रतिमाह दो हजार रुपये दिया जाएगा। वयस्क बच्चियों को रोजगार से जोड़ने का कार्य होगा। उनकी जिंदगी का नया सफर प्रारंभ होगा। इस प्रारंभ में सरकार सदैव बच्चियों के साथ है। 

इस मौक़े पर सांसद श्री विजय हांसदा, विधायक श्री मथुरा महतो, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजीव अरुण एक्का, प्रधान सचिव श्री अविनाश कुमार, सचिव श्रीमती पूजा सिंघल, श्री डी.के सक्सेना व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

Thursday, November 5, 2020

प्रख्यात पत्रकार रवीश कुमार की बेबाकी: मैं आज क्यों लिख रहा हूं, अर्णब की गिरफ्तारी के तुरंत बाद क्यों नहीं लिखा?



आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला संगीन है लेकिन सिर्फ नाम भर आ जाना काफी नहीं होता है। नाम आया है तो उसकी जांच होनी चाहिए और तय प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। एक पुराने केस में इस तरह से गिरफ्तारी संदेह पैदा करती है। महाराष्ट्र पुलिस को कोर्ट में या पब्लिक में स्पष्ट करना चाहिए कि क्या प्रमाण होने के बाद भी इस केस को बंद किया गया था? क्या राजनीतिक दबाव था? तब हम जान सकेंगे कि इस बार राजनीतिक दबाव में ही सही, किसी के साथ इंसाफ़ हो रहा है। अदालतों के कई आदेश हैं। आत्महत्या के लिए उकसाने के ऐसे मामलों में इस तरह से गिरफ्तारी नहीं होती है। कानून के जानकारों ने भी यह बात कही है। इसलिए महाराष्ट्र पुलिस पर संदेह के कई ठोस कारण बनते हैं। जिस कारण से पुलिस की कार्रवाई को महज़ न्याय दिलाने की कार्रवाई नहीं मानी जा सकती।

भारत की पुलिस पर आंख बंद कर भरोसा करना अपने गले में फांसी का फंदा डालने जैसा है। झूठे मामले में फंसाने से लेकर लॉक अप में किसी को मार मार कर मार देने, किसी ग़रीब दुकानदार से हफ्ता वसूल लेने और किसी को भी बर्बाद कर देने का इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। पेशेवर जांच और काम में इसका नाम कम ही आता है। इसलिए किसी भी राज्य की पुलिस हो उसकी हर करतूत को संंदेह के साथ देखा जाना चाहिए। ताकि भारत की पुलिस ऐसे दुर्गुणों से मुक्त हो सके और वह राजनीतिक दबाव या अन्य लालच के दबाव में किसी निर्दोष को आतंकवाद से लेकर दंगों के आरोप में न फंसाए। 

अर्णब गोस्वामी के केस में कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की पुलिस बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। ग़लत नहीं कहा जा रहा है। क्या दिल्ली पलिस और यूपी की पुलिस बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करती है? अर्णब गोस्वामी ने कभी अपने जीवन में हमारी तरह ऐसा पोज़िशन नहीं लिया है। मुझे कुछ होगा तो अर्णब गोस्वामी एक लाइन नहीं बोलेंगे। अगर पुलिस किसी को दंगों के झूठे आरोप में फंसा दे तो अर्णब गोस्वामी पहले पत्रकार होंगे जो कहेंगे कि बिल्कुल ठीक है। पुलिस पर संदेह करने वाले ही ग़लत हैं। फिर भी एक नागरिक के तौर आप भी अर्णब के केस में पुलिस के बर्ताव का सख़्त परीक्षण कीजिए ताकि सिस्टम दबाव और दोष मुक्त बन सके। इसी में सबका भला है।
 

डॉ कफ़ील ख़ान पर अवैध रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा कर छह महीने बंद रखा गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि अवैध रूप से रासुका लगाई गई है। उक्त अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अर्णब गोस्वामी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर तमाम मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ने इस नाइंसाफी पर कुछ नहीं कहा। भारत में किनके राज में प्रेस की स्वतंत्रता अभी खत्म होकर मिट्टी में मिल चुकी है यह बताने की ज़रूरत नहीं है। आपको एक लाख बार बता चुका हूं। प्रेस की स्वतंत्रता की बात करने वाले मंत्रियों के प्रधानमंत्री ने आज तक एक प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है। 

बिल्कुल अन्वय नाइक और कुमुद नाइक की आत्महत्या के मामले में इंसाफ मिलना चाहिए। अन्वय नाइक की बेटी की कहानी बेहद मार्मिक है। इस बात की जांच आराम से हो सकती है कि अर्णब गोस्वामी ने अन्वय नाइक से स्टुडियो बनाकर पैसे क्यों नहीं दिए? 80 लाख से ऊपर का काम है तो कुछ न कुछ रसीदी सबूत भी होंगे। अन्वय नाइक की बेटी का कहना सही है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए लेकिन कानून को भी मर्यादा से ऊपर नहीं होना चाहिए। जांच की निष्पक्षता की मर्यादा अहम है। तभी लगेगा कि पारदर्शिता के साथ न्याय हो रहा है। राजनीतिक दबाव में केस का खुलना और केस का बंद होना ठीक नहीं है। 

जब एनडीटीवी पर छापे पड़ रहे थे और एक चैनल को डराया जा रहा था तब अर्णब का कैमरा बाहर लगा था और लिंचमैन की तरह कवर किया जा रहा था। उनके कवरेज में एक लाइन प्रेस की स्वतंत्रता पर नहीं थी। उनका रिपोर्टर डॉ रॉय के घर की दीवार फांदने का प्रयास कर रहा था। बीजेपी के मंत्री प्रवक्ता मेरा बहिष्कार करते हैं। एन डी टी वी की सोनिया वर्मा सिंह ने ट्विट कर अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। एनडीटीवी के अन्य सहयोगियों ने अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। ये फर्क है। जब 2016 में एन डी टी वी इंडिया को बैन किया जा रहा था तब प्रेस क्लब में पत्रकार जुटे थे। आप पूछ सकते हैं कि अर्णब और उनके बचाव में उतरे मंत्री लोग क्या कर रहे थे।  जब विपक्ष के नेताओं पर छापे की आड़ में हमले होते हैं अर्णब हमेशा जांच एजेंसियों की साइड लेते हैं। 

अर्णब ने मोदी सरकार पर क्या सवाल उठाए हैं,बेरोज़गारी से लेकर किसानों के मुद्दे कितने दिखाए गए हैं यह सब दर्शकों को पता है। उल्टा अर्णब गोस्वामी सरकार पर उठाने वालों को नक्सल से लेकर राष्ट्रविरोधी कहते हैं। भीड़ को उकसाते हैं। झूठी और अनर्गल बाते करते हैं। वे कहीं से पत्रकार नहीं हैं। उनका बचाव पत्रकारिता के संदर्भ में करना उनकी तमाम हिंसक और भ्रष्ट हरकतों को सही ठहराना हो जाएगा। 

अर्णब की पत्रकारिता रेडियो रवांडा का उदाहरण है जिसके उद्घोषक ने भीड़ को उकसा दिया और लाखों लोग मारे गए थे। अर्णब ने कभी भीड़ की हिंसा में मारे गए लोगों का पक्ष नहीं लिया। पिछले चार महीने से अपने न्यूज़ चैनल में जो वो कर रहे हैं उस पर अदालतों की कई टिप्पणियां आ चुकी हैं। तब किसी मंत्री ने क्यों नहीं कहा कि कोर्ट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला कर रहा है? जबकि मोदी राज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को जिनती बार उभारा गया है उतना किसी सरकार के कार्यकाल में नहीं हुआ। हर बात में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा बताई और दिखाई जाती है। 

एक बार अर्णब हाथरस केस में योगी की पुलिस को ललकार कर देख लेते, मुख्यमंत्री योगी को ललकार कर देख लेते जिस तरह से वे मुख्यमंत्री उद्धव को ललकारते हैं तो आपको अंतर पता चल जाता कि कौन सी सरकार संविधान का पालन कर रही है। उद्धव ठाकरे ने प्रचुर संयम का परिचय दिया है और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओ  ने भी जिनकी एक छवि मारपीट की भी रही है। कई हफ्तों से अर्णब बेलगाम पत्रकारिता की हत्या करते हुए हर संवैधानिक मर्यादा की धज्जियां उड़ा रहे थे। पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्विट किया है कि यूपी में पत्रकारों के खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। क्या अर्णब में साहस है कि वे अब भी योगी सरकार को ललकार दें इस मसले पर। जो आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं वो सीमा की बात करने लगेंगे और अर्णब पर रासुका लगा दी जाएगा डॉ कफील ख़ान की तरह। गौरी लंकेश की हत्या के मामले को अर्णब ने कैसे कवर किया था? या नहीं किया था?

द वायर के संस्थापक हैं सिद्धार्थ वरदराजन। अर्णब गोस्वामी सिद्धार्थ वरदराजन के बारे में क्या क्या कहते रहे हैं आप रिकार्ड निकाल कर देख सकते हैं मगर सिद्धार्थ वरदराजन ने उनकी गिरफ्तारी में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। निंदा की है। उसी तरह से कई ऐसे लोगों ने की है। अर्णब के पक्ष में उतरे बीजेपी की मंत्रियों और समर्थकों की लाचारी देखिए। वे सुना रहे हैं कि कहां गए संविधान की बात करने वाले। पत्रकार रोहिणी सिंह ने एक जवाब दिया है राकेश सिन्हा को। संविधान की बात करने वालों को आपने जेल भेज दिया है। कुछ को दंगों के आरोप में फंसा दिया है। इनकी समस्या ये है कि जिन्हें नक्सल कहते हैं, देशद्रोही कहते हैं उन्हीं को ऐसे वक्त में खोजते हैं। इस बात के अनेक प्रमाण हैं कि कई लोगों ने एक नागरिक के तौर पर अर्णब की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह फर्क साफ रखा है कि अर्णब पत्रकार नहीं है और न ही यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है। 
 

न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन ने भी निंदा की है जबकि अर्णब इसके सदस्य तक नहीं है। अर्णब ने हमेशा इस संस्था का मज़ाक उड़ाया है। क्या न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन किसी ऐसे छोटे चैनल के पत्रकार की गिरफ्तारी पर बोलेगा जो उसका सदस्य नहीं है?  ज़ाहिर है केंद्र सरकार अर्णब के साथ खड़ी है। अर्णब केंद्र सरकार के हिस्सा हो चुके हैं। अर्णब पत्रकार नहीं हैं। इसे लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता के हर पैमाने को ध्वस्त किया है। जिस तरह से पुलिस कमिश्नर को ललकार रहे थे वो पत्रकारिता नहीं थी। 

मैंने कल इस मामले पर कुछ नहीं लिखा क्योंकि प्राइम टाइम के अलावा कई काम करने पड़ते हैं। मैं लंबा लिखता हूं इसलिए भी टाइम चाहिए होता है। जब गिरफ्तारी की ख़बर आई तो मैं व्हाट्स एप पर था। फिर तुरंत कपड़े धोने चला गया। नील डालने के बाद भी बनियान में सफेदी नहीं आ रही थी। उससे जूझ रहा था तभी किसी का फोन आया कि चैनल खोलिए अर्णब गिरफ्तार हुए हैं। मैंने कहा कि उन्हीं जैसौं के कारण तो मेरे घर में न्यूज़ चैनल नहीं खुलता है। ख़ैर जब बनियान धोने के बाद पंखे की सफाई के लिए ड्राईंग रूम में आया तो चैनल खोल दिया। पंखे पर जमी धूल आंखों में गिर रही थी और मीडिया पर जमी धूल चैनल पर दिखने लगी। वैेसे कुछ दिन पहले फेसबुक पर रिपब्लिक चैनल के मामले में एडिटर्स गिल्ड की प्रतिक्रिया पोस्ट की थी कि किसी एक पर आरोप है तो आप पूरे गांव पर मुकदमा नहीं कर सकते। 
 
 
लेकिन मैं अर्णब का घर देखकर हैरान रह गया। रोज़ 6000 शब्द टाइप करके मैं गाज़ियाबाद के उस फ्लैट में रहता हूं जिसमें कुर्सी लगाने भर के लिए बालकनी नहीं है। अर्णब का घर कितना शानदार है। ईर्ष्या से नहीं कह रहा। मुझे किसी का भी अच्छा घर अच्छा लगता है। एक रोज़ किसी अमीर प्रशंसक ने घर आने की ज़िद कर दी और आते ही बच्चों के सामने कह दिया कि बस यही घर है आपका। हम तो सोचे कि आलीशान फ्लैट होगा। एक मोहतरमा तो रोने लगीं कि मेरा घर ले लीजिए। कोरोना के कारण जब घर से एंकरिंग करने लगा तो मेरे घर में झांकने लगे। उन्हें लगा कि रवीश कुमार शाहरूख़ ख़ान है। जल्दी उन्हें मेरे घर की दीवारों से निरशा हो गई। मैं ठीक ठाक कमाता हूं और किसी चीज़ की कमी नहीं है। मुझे अपना घर बहुत अच्छा लगता है। मेरी तेरह साल पुरानी कार को देखकर कई बार लोगों को लगा कि किसे बुला लिया अपनी महफिल में। वैसे ईश्वर ने सब कुछ दिया है। लोगों ने इतना प्यार दे दिया कि सौ फ्लैट कम पड़ जाएं उसे रखने के लिए। मैं अर्णब के शानदार घर के विजुअल के सामने असंगठित क्षेत्र के एक मज़दूर की तरह सहमा खड़ा रह गया। मैं क्या बोलता, मेरे बोले का कोई मोल है भी या नहीं। एक अदना सा पत्रकार एक चैनल के मालिक के लिए बोले, यह मालिकों का अपमान है। 

मैं तो बस अर्णब के घर की ख़ूबसूरती में समा गया। कल्पनाओं में खो गया। ड्राईंग रूम की लंबी चौड़ी शीशे की खिड़की के पार नीला समंदर बेहद सुंदर दिख रहा था। अरब सागर की हवाएं खिड़की को कितना थपथपाती होंगी। यहां तो क़ैदी भी कवि हो जाए। मुझे इस बात की खुशी हुई कि अर्णब के दिलो दिमाग़ में जितना भी ज़हर भरा हो घर कैसा हो, कहां हो, कैसे रहा जाए इसका टेस्ट काफी अच्छा है। उसमें सौंदर्य बोध है। बिल्कुल किसी नफ़ीस रईस की तरह जो अपने टी-पॉट की टिकोजी भी मिर्ज़ापुर के कारीगरों से बनवाता हो। मैं यकीन से कह सकता हूं कि अर्णब के अंदर सुंदरता की संभवानाएं बची हुई हैं। लेकिन सोचिए रोज़ समंदर के विशाल ह्रदय का दर्शन करने वाले एंकर का ह्रदय कितना संकुचित और नफ़रतों से भरा है।

अर्णब गोस्वामी जब भी जेल से आएं, अव्वल तो पुलिस उन्हें तुरंत रिहा करे, मैं यही कहूंगा कि कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने इस सुंदर घर को निहारा करें। इस सुंदर घर का लुत्फ उठाएं। सातों दिन कई कई घंटे एंकरिंग करना श्रम की हर अवधारणा का अश्लील उदाहरण है। अगर इस घर का लुत्फ नहीं उठा  सकते तो मुझे मेहमान के रूप में आमंत्रित करें। मैं कुछ दिन वहां रहूंगा। सुबह उनके घर की कॉफी पीऊंगा। वैसे अपने घर में चाय पीता हूं लेकिन जब आप अमीर के घर जाएं तो अपना टेस्ट बदल लें। कुछ दिन कॉफी पर शिफ्ट हो जाएं। और हां एक चीज़ और करना चाहता हूं। उनकी बालकनी में बैठकर अरब सागर से आती हवाओं को सलाम भेजना चाहता हूं और बॉर्डर फिल्म का गाना फुल वॉल्यूम में सुनना चाहता हूं।  ऐ जाते हुए लम्हों, ज़रा ठहरो, ज़Gरा ठहरो….मैं भी चलता हूं... ज़रा उनसे मिलता हूं... जो इक बात दिल में है उनसे कहूं तो चलूं तो चलूं…. और हां पुलिस की हर नाइंसाफी के खिलाफ हूं। चाहें लिखू या न लिखूं।

✒️ रविशकुमार

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