Wednesday, December 26, 2018

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट हुआ। अमरीका का यह विमान वाहक पोत उस समय प्रविष्ट हुआ जब इस इलाक़े में इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स का सैन्य अभ्यास चल रहा था।

ईरान के सशस्त्र बलों ने अपने इस सैन्य अभ्यास में अपनी तेज़ रफ़तार युद्धक नौकाओं और बड़े सटीक रूप से निशाने को ध्वस्त करने वाले मिसाइलों का परीक्षण किया।

यहीं से अटकलें शुरू हो गईं। कुछ संचार माध्यमों में यह ख़बर आई कि ईरान की सेना ने अमरीकी विमान वाहक पोत पर फ़ायरिंग की लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स के अधिकारियों ने इस ख़बरों का खंडन किया मगर साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि हम अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ईरान की नौसेना के प्रमुख एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने सोमवार को कहा कि अमरीकी पोत को ईरान की जलसीमा से क़रीब होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने अपने युद्ध अभ्यास में यह संदेश दे दिया कि अमरीकी सैन्य बल के सामने डट जाने की हमारे पास पूरी क्षमता मौजूद है।

यदि पश्चिमी एशिया के इलाक़े को देखा जाए तो यह हक़ीक़त साफ़ तौर पर नज़र आती है कि अमरीकी वर्चस्व कमज़ोर पड़ चुका है जिसका एक बड़ा कारण क्षेत्रीय देशों की शक्ति का विस्तार है। इस्लामी गणतंत्र ईरान तो पिछले चालीस साल से अमरीकी वर्चस्व को नकार चुका है और अपनी इस रणनीति के कारण ईरान को अमरीका और उसके घटकों की दुशमनी झेलनी पड़ी। ईरान ने इस दुशमनी का सामना करके अन्य देशों के सामने एक उदाहरण भी पेश कर दिया। धीरे धीरे इसी रास्ते पर दूसरे देश भी चल पड़े हैं।

पश्चिमी एशिया के कुछ देशों ने तो रूस को विकल्प के रूप में देखना शुरू कर दिया है बल्कि रूस को प्रेशर टूल के रूप में भी प्रयोग कर लेते हैं। तुर्की ने एसा कई बार किया कि उसने अमरीका पर दबाव डालने के लिए रूस से सहयोग बढ़ाना शुरू कर दिया। तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीद कर अमरीका को कड़ा संदेश दिया और इस संदेश का अमरीका पर असर भी हुआ। अमरीकी सरकार ने अपनी कड़ी शर्तों को नर्म करके रूस को पेट्रियट मिसाइल देने की घोषणा कर दी।

यही तरकीब सऊदी अरब ने भी अपनाई। सऊदी अरब ने भी रूस की ओर झुकाव बढ़ा दिया और रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदने का सौदा किया तो अमरीका ने थाड एयिर डिफ़ेन्स सिस्टम सऊदी अरब को बेचने की बात शुरू कर दी।

दूसरे भी देश इस रणनीति को प्रयोग कर रहे हैं। इस तरह अमरीकी वर्चस्व को ज़बरदस्त चुनौती मिल रही है।

जहां तक इस्लामी गणतंत्र ईरान का सवाल है तो वह स्पष्ट शब्दों में कहता रहा है कि क्षेत्रीय मामलों की ज़िम्मेदारी क्षेत्रीय देशों के हाथों में होनी चाहिए बाहरी शक्तियों को हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

इन हालात में अमरीकी अधिकारियों को इस बात का पूरी तरह आभास है कि अब क्षेत्रीय देशों की अमरीका पर निर्भरता बहुत तेज़ी से कम हो रही है और यह अमरीका के लिए गहरी चिंता का विषय है।  

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