Wednesday, December 9, 2020

लोक अदालतें केवल हाथी के दांत साबित हो रहे हैं - सुधीर कुमार पप्पू,अधिवक्ताजमशेदपुर

 


जमशेदपुर के अधिवक्ता सह समाजसेवी सुधीर कुमार पप्पू ने कहा है कि लोक अदालत एवं नेशनल लोक अदालत जो आयोजित की जाती हैं वह केवल आई वाश है क्योंकि इसमें वकील एवं मुवक्किल  को काफी परेशानी उठानी पड़ती है एवं आज के ऑनलाइन के दौर में और भी कठिनाई होती है। 


अधिवक्ता ने कहा कि इसलिए बार एसोसिएशन को ठोस निर्णय लेनी चाहिए।उन्होंने कहा कि लोक अदालत का तात्पर्य है सुलभ सस्ता एवं समय की बचत मगर लोक अदालत का फॉर्म भी 2 से ₹5 में बिक्री होते हैं जबकि न्यायालय द्वारा मुफ्त में दी जानी चाहिए।अधिवक्ता श्री पप्पु ने कहा कि लोक अदालत के अधिकार सभी न्यायिक पदाधिकारी को अपने कोर्ट में ही निष्पादन करने का आदेश मिलना चाहिए। मगर लोक अदालत में सिर्फ निष्पादन के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। कहीं पर भी जिला न्यायालय के द्वारा इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता है क्योंकि लोक अदालत में सिर्फ वही मामला निष्पादन होते हैं जो  सुलहनामा   लायक  होता है। लोक अदालत प्रतिदिन न्यायिक दंडाधिकारी  की अदालत में होनी चाहिए एवं अगर तिथि कोई भी हो न्यायालय उस  तिथि को अगर अधिवक्ता द्वारा सुलहनामा के आधार पर आवेदन देकर निष्पादित कराना चाहते हैं तो उस तिथि को  recall कर मुकदमा को तुरंत न्यायालय में ही निष्पादित कर देना चाहिए। मगर सभी न्यायालय लोक अदालत के माध्यम से मामला निष्पादन कर सबसे ज्यादा निष्पादित अभिलेख दिखाने की कोशिश की जाती है।उन्होंने
 बताया कि धारा 320 सीआरपीसी के अंतर्गत जो मामला सुलहनामा के आधार पर निष्पादन किया जा सकता है लोक अदालत का  आयोजन करने के लिए सरकारी राजस्व खर्च होती है  अगर एक ही दिन में न्यायालय में मामला का निष्पादन हो जाता है  तो  क्लाइंट पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगी और समय की भी बचत होगी।

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