Sunday, January 15, 2023

सिर्फ जोशीमठ ही नहीं आसपास के कई इलाकों का अस्तित्व भी खतरे में



नैनीताल के कुमाऊं विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के प्रोफेसर राजीव उपाध्याय ने कहा है कि, "उत्तराखंड के उत्तरी हिस्से में गांव और टाउनशिप हिमालय के भीतर प्रमुख सक्रिय थ्रस्ट जोन के साथ स्थित हैं और यह क्षेत्र नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के कारण बहुत संवेदनशील हैं." उनके मुताबिक "कई बस्तियां, जो कि पुराने भूस्खलन के मलबे पर बनी हैं, पहले से ही प्राकृतिक तनाव में हैं और मानव निर्मित निर्माण क्षेत्र और तनाव बढ़ा रहे हैं."

जोशीमठ क्षेत्र में भूमि धंसने की घटनाएं 1970 के दशक की शुरुआत में दर्ज की गई थीं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर द्वारा जारी बयान और सेटेलाइट इमेज के अनुसार जोशीमठ कस्बे में आठ जनवरी तक 12 दिनों में अधिकतम तेजी से 5.4 सेंटीमीटर का धंसाव हुआ

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