Thursday, December 13, 2018

तीन राज्यों में अप्रत्याशित सफलता के बाद मुख्य मंत्री पद को ले छूटा कांग्रेस का पसीना

  मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अब कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री के नाम पर विचार कर रही है. बुधवार को पूरे दिन कांग्रेस हाईकमान इन राज्यों में अपने नेताओं और जीते विधायकों से बात करने में व्यस्त रहे. दावेदार के समर्थकों द्वारा राज्यों में हंगामा बरपा है ၊ पार्टी से जुड़े सूत्रो की मानें तो मध्यप्रदेश और राजस्थान में पार्टी किसी फैसले तक पहुंचने से पहले अगले साल होने वाले आम चुनाव को ध्यान में रखकर चल रही है.                                   बता दें कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया जबकि राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. कांग्रेस इन दोनों राज्यों में अपने सहयोगी दलों की मदद से सरकार बनाने जा रही है. मध्यप्रदेश में उसे 114 सीटें मिली हैं जो बहुमत से दो सीट कम है वहीं राजस्थान में पार्टी को 99 सीटें मिली है. यहां भी पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाई है. 

गिरिडीह: ACB ने भूमि संरक्षण विभाग के दो कर्मियों को रिश्वत की राशि के साथ लिया गिरफ्त में

गिरिडीह ၊ धनबाद एसीबी की टीम ने गिरिडीह भूमि संरक्षण विभाग के दो कर्मियों को रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तार किया है। एसीबी की टीम ने तालाब निर्माण योजना में रिश्वत लेने के आरोप में भूमि संरक्षण विभाग के कर्मी राकेश कुमार और राकेश पास्कल के गिरिडीह बरगंडा स्थित आवास में छापामारी की,छापामारी में लगभग 3 लाख रुपए नगद बरामद किए गए।एसीबी की टीम दोनों गिरफ्तार कर्मियों को अपने साथ ले गई है।                                बताया जाता है कि भेलवाघाटी क्षेत्र में एक बड़ा तालाब का निर्माण करवाया जा रहा है। इस तालाब के संवेदक ने शिकायत की थी कि उक्त दोनों कर्मियों ने रिश्वत के रूप में डेढ़ लाख रुपए की मांग की है। एसीबी की टीम ने इस शिकायत की जांच का जाल बिछाया और आज 60 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरिडीह आवास से दोनों कर्मियों को धर दबोचा।

आवास की तलाशी के दौरान एक ब्रीफकेस में लगभग 3 लाख रुपये नगद तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए, जिसे एसीबी की टीम अपने साथ ले गई है। रिश्वतखोरों की गिरफ्तारी से भ्रष्ट कर्मियों व अधिकारियों में हड़कंप व्याप्त है।जानकारी के अनुसार राकेश पास्कल 2016 में भी एसीबी के हाथों हजारीबाग में रिश्वत लेते धरा गया था।

Wednesday, December 12, 2018

भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्‍पणी को ले राहुल को सम्मन जारी

मध्‍यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्‍थान के विधानसभा चुनावों में जीत का जश्‍न मना रहे कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ रांची की एक अदालत ने समन जारी‍ किया है। राजधानी की निचली अदालत से जारी यह समन उन्‍हें भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्‍पणी करने के मामले में दिया गया है। संभव है कि इस मामले में राहुल गांधी को अब रांची की अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सशरीर हाजिरी लगानी पड़े। रांची के एसडीजेएम अजय कुमार गुडि़या की अदालत में नवीन कुमार झा की याचिका पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया गया है।

अदालत में दाखिल याचिका में भाजपा कार्यकर्ता नवीन कुमार झा ने कहा था कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्‍ली में आयोजित अधिवेशन में भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्‍पणी की थी। इस दौरान राहुल ने कहा था कि बीजेपी में एक हत्‍यारा अध्‍यक्ष बन सकता है लेकिन कांग्रेस में ऐसा नहीं हो सकता। इस बयान पर नवीन झा ने कहा था कि राहुल के इस बयान से उन्‍हें ठेस पहुंची है। पार्टी की छवि खराब हुई है। इस वजह को लेकर उन्‍होंने याचिका दाखिल की थी।

बता दें कि भाजयुमो के कार्यकारिणी व राजधानी के हरमू इलाके के निवासी नवीन कुमार झा ने राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा (शिकायतवाद) किया है। इसमें राहुल गांधी पर भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह के खिलाफ अमर्यादित टिप्‍पणी का आराेप लगाते हुए मानहानि के रूप में 10 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई है।

देवघर : ठंढ को ले सरकार द्वारा जिले को कुल 34,278 कम्बल उपाबंटित किया गया

वर्तमान में ठंड को देखते हुए सरकार के द्वारा आदिम जनजाति को प्राथमिकता देते हुए निर्धन, अपंग, असहाय, विधवाओं, भूमिहीन, निसहाय, वृद्ध, वृद्धा एवं भिक्षुओं के बीच कम्बल का निःशुल्क वितरण किया जाना है।

इसके अन्तर्गत देवघर जिले को कुल 34,278 कम्बल उपावंटित किया गया है, जिसके तहत् प्रति पंचायत 160 कम्बल की दर से अंचल कार्यालय, देवघर में 3,680, अंचल कार्यालय, सारवां में 2,240, अंचल कार्यालय, सारठ में 4,320, अंचल कार्यालय, मधुपुर में 3,360, अंचल कार्यालय, देवीपुर में 2,720, अंचल कार्यालय, करौं में 2,240, अंचल कार्यालय, मोहनपुर में 4,480, अंचल कार्यालय, सोनारायठाढ़ी में 1,920, अंचल कार्यालय, पालोजोरी में 4,000, अंचल कार्यालय, मारगोमुण्डा में 2,080, अनुमंडल कार्यालय, देवघर (वार्ड क्षेत्र) में 1,548, अनुमंडल कार्यालय मधुपुर (वार्ड क्षेत्र) में 1,490 एवं जिला मुख्यालय में 200 कम्बलों का वितरण किया जाना है।

इस हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, देवघर एवं मधुपुर तथा सभी अंचलाधिकारियों को निदेशित किया गया है कि उनके द्वारा आपूर्तिकत्र्ता से कम्बल प्राप्त करने के क्रम में कंबलों की विशिष्टता/गुणवत्ता के साथ आकार एवं वजन आदि की भी भली-भाँति जांच कर सरकारी निदेशों के अनुरूप सुयोग्य श्रेणी के लाभुकों के बीच कम्बलों का वितरण सुनिश्चित कराया जाय एवं इस बात का विशेष ध्यान रखा जाय कि कम्बल वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। साथ हीं अधिकारियों को स्पष्ट निदेशित किया गया है कि लाभुकों के बीच कम्बल वितरण में यदि किसी प्रकार की अनियमितता होती है तो संबंधित पदाधिकारी/कर्मी इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेवार होंगे। 

ज्ञात हो कि देवघर जिला अंतर्गत अंचल कार्यालय, देवघर, सारवां, सारठ एवं मधुपुर में कम्बल वितरण की संभावित तिथि दिनांक 13.12.2018 है। वहीं अंचल कार्यालय, देवीपुर, करौं, मोहनपुर एवं सोनारायठाढ़ी में कम्बल वितरण की संभावित तिथि दिनांक 14.12.2018 है। इसके अलावा अंचल कार्यालय, पालोजोरी एवं मारगोमुण्डा में कम्बल वितरण की संभावित तिथि दिनांक 15.12.2018 है। वहीं अनुमंडल कार्यालय, देवघर (वार्ड क्षेत्र) में में कम्बल वितरण की संभावित तिथि दिनांक 13.12.2018, अनुमंडल कार्यालय मधुपुर (वार्ड क्षेत्र) में दिनांक 14.12.2018 एवं जिला मुख्यालय में दिनांक 15.12.2018 है।

उक्त सूचना उपायुक्त ,देवघर के द्वारा जारी की गई है ၊

धनबाद:कांग्रेस के जीत की जश्न में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाली

धनबाद। पुटकी में महिला कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का जश्न केंदुआ नगर अध्यक्ष जोहरा खातून उर्फ मुस्कान के नेतृत्व में ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाली और मिठाई बांट कर खुशी का इजहार किया। मौके पर धनबाद जिला महिला कांग्रेस कमिटि की जिलाध्यक्ष सीता राणा ने कहा कि तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की 2019 में आने की झलक है। देश की जनता भाजपा के झूठ और सपने बेचने की बात को पहचान गई है और देश के विकास के लिए कांग्रेस व राहुल गांधी पर आस्था जता रही है।

 सीता राणा ने भाजपा पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सुरक्षा, किसानों को उपज मूल्य, व्यापारियों को बाजार का झूठा सपना दिखाया और धोखा दिया जिसका नतीजा चुनावों में दिख रहा है। केंदुआ नगर अध्यक्ष जोहरा खातून उर्फ मुस्कान ने कहा कि भाजपा सरकार का 2019 में जाना तय है, झारखंड में भी भाजपा अपने अहंकार और वादाखिलाफी के कारण सत्ता से जाएगी और कांग्रेस की सरकार होगी। जनता का कांग्रेस और राहुल गांधी पर भरोसा बढ़ा है और 2019 में कांग्रेस की वापसी के लिए जीजान से महिला कांग्रेस काम करेगी।

मौके पर अजमेरी खातून, लक्ष्मी देवी, सोनी कौर, दिलीप कौर, अनिता कुमारी, कुसमी देवी, पमिया देवी, बसंती देवी, बिंदु देवी आदि शामिल थी।

तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज


Ranchi: राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बहुमत और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद झारखंड में सत्ता परिवर्तन की अटकलें काफी तेज हो गयी है. हालांकि, बीजेपी का कोई भी नेता इन अटकलों से इत्तेफाक नहीं रखता. लेकिन सरकारी अधिकारियों, कर्मियों और आम लोगों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि झारखंड में आगामी चुनाव के मद्देनजर सत्ता में परिवर्तन हो सकता है.

व्हाट्सएप पर इस तरह के कई मैसेज वायरल हो रहे हैं. राजनीतिक पंडित इस बहस में दो हिस्से में बंटे हुए हैं. एक का कहना है कि बीजेपी चुनाव से पहले ऐसी गलती कभी नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से विपक्ष को बैठे-बिठाए एक तगड़ा मुद्दा चुनाव के लिए मिल जाएगा. वहीं दूसरे हिस्से के राजनीतिक पंडितों का कहना है कि आगामी चुनाव को लेकर ऐसा संभव है. उदाहरण के तौर पर मोदी के गढ़ गुजरात में हुए राजनीतिक उठा-पटक का हवाला दिया जा रहा है.

आदिवासी वोटर को रिझाने की हो सकती है कोशिश

सीएम लाख संताल का दौरा कर लें. लेकिन आदिवासी समाज के बीच सरकार को लेकर जो मैसेज बीते चार साल में गया है, वो किसी से छिपा नहीं है. झारखंड में आदिवासियों का वोट प्रतिशत करीब 27 फीसदी है. किसी भी पार्टी को सत्ता में काबिज करने के लिए यह आंकड़ा काफी होता है. बीते चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिलने के बाद पार्टी ने पहली बार एक गैरआदिवासी चेहरा झारखंड को सीएम के तौर पर दिया. इसे एक तरह का परीक्षण माना जा रहा था.

सरकार बनने के बाद सीएनटी और एसपीटी एक्ट को लेकर सरकार ने जो भी संशोधन करने की कोशिश की, उसका आदिवासी समाज ने पुरजोर विरोध किया. विरोध का असर यह हुआ कि बहुमत वाली सरकार को आदिवासी समाज की आवाज के नीचे दबना पड़ा. किसी तरह का कोई संशोधन सरकार चाह कर भी नहीं करवा सकी.

भूमि अधिग्रहण बिल भी पास कराने में राज्य से लेकर केंद्र तक विरोध हुआ.  हालांकि इस बिल को किसी तरह राज्य सरकार ने पास करवा लिया. पत्थलगढ़ी, कोचांग रेप कांड, कैथोलिक गुरुओं की गिरफ्तारी, धर्म परिवर्तन कानून को लागू करते वक्त जिस तरीके से आदिवासी समाज को टारगेट किया गया उसका खामियाजा भी मौजूदा सरकार को भुगतना पड़ सकता है.

कई ऐसी चीजें दो सालों में हुई, जिससे आदिवासी समाज का एक हिस्सा सत्ता से नाराज है. ऐसे में कहा जा रहा है कि आदिवासी समाज के वोट के मद्देनजर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

आदिवासी चेहरा लाकर मैनेज करने की कोशिश

झारखंड का इतिहास गवाह रहा है कि सीएम का उम्मीदवार आदिवासी होने के बावजूद भी सत्ता स्थिर नहीं रही है. लेकिन सीएम का आदिवासी चेहरा होने के नाते आदिवासी समाज में एक निश्चितता जरूर दिखी है. ऐसे में अगर बीजेपी एक बार फिर से आदिवासी कार्ड खेलती है, तो कई तरह के समीकरण बनते हैं. कहा जा रहा है कि अर्जुन मुंडा, नीलकंठ सिंह मुंडा, समीर उरांव और दिनेश उरांव सरीके नेता को मौका दिया जा सकता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि फिर मौजूदा सीएम क्या करेंगे. चर्चाओं की मानें तो माना जा रहा है कि मौजूदा सीएम को केंद्र में किसी महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा सकता है या पार्टी में अहम किरदार दिया जा सकता है.

पूर्व सीएम और मंत्री करते रहे विरोध, कई विधायक भी भनभना रहे

मौजूदा सरकार की कई नीतियों को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता के तौर पर देखे जाने वाले अर्जुन मुंडा कई बार आलोचना कर चुके हैं. कई बार तो खुलेतौर पर मीडिया में श्री मुंडा ने सरकार की नीतियों के खिलाफ बोला है. मौजूदा खाद्य आपूर्ति और राज्य के दिग्गज माने जाने वाले नेता सरयू राय मुख्यमंत्री के धुर विरोधी माने जाते रहे हैं. कई बार ऐसा हुआ है कि मंत्री ने सीएम के विभाग के खिलाफ ही सीएम को चिट्ठी लिखी है.

सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने सीएम की नीति की आलोचना की है. नाम ना बताने की शर्त पर राज्य के कुछ विधायक हैं जो खुलेतौर पर सीएम की आलोचना करते हैं. उनकी नीतियों के खिलाफ नहीं बोलने का दर्द बयां करते हैं. लेकिन चाह कर भी कुछ कह नहीं पाते. लेकिन दिल्ली तक लॉबी करने वाले विधायक आला अधिकारियों को सारी बात पहुंचाने का काम जरूर करते हैं.

लाखों वोट को खोने का डर!!

स्थापना दिवस के दिन जो हुआ और जिस तरह के फैसले उस दौरान सरकार की तरफ से लिए गए. फैसलों के बाद फिर सरकार कैसे बैकफुट पर है. यह सारी चीज कहीं ना कहीं यह बताती है कि सरकार को आगामी चुनाव में वोट का डर सता रहा है. पारा शिक्षक ही नहीं, रसोइया, राजस्व कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सर्कल इंस्पेक्टर जैसे तमाम अल्प वेतन धारी जिस तरीके से आंदोलनरत है. उससे कहीं ना कहीं बीजेपी के शीर्ष नेता को यह मैसेज जरूर दिया जा रहा होगा कि झारखंड में ऑल इज वेल के मुगालते से निकलने की जरूरत है. अल्प वेतन धारियों को लेकर सरकार के कई मंत्री भी अब खुलकर बोल रहे हैं. विधायक कई मामलों पर मीडिया के जरिए मुखर होने की कोशिश कर रहे हैं. इन सभी चीजों का दबाव सीधेतौर पर सत्ता पर पड़ेगा. और सत्ता पर दबाव राजनीति में सबसे अहम माना जाता है.

गुजरात वाला एजेंडा हो सकता है लागू

2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात का जिम्मा आनंदीबेन पटेल के कंधों पर दिया गया. लेकिन पाटीदार समुदाय के आंदोलन से लेकर दलित समुदाय के लोगों के साथ हुए बर्ताव जैसी घटनाओं पर बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई थी. पाटीदार समाज गुजरात के लिए झारखंड के आदिवासी समाज की ही तरह के हैं. वहां भी विजय रूपाणी को सीएम इसलिए बनाया गया था ताकि एक साल बाद होने वाले चुनाव में बीजेपी मुंह की ना खाए. वैसे ही हालात आज झारखंड के हैं. सत्ता बचाने के लिए बीजेपी ने अगर झारखंड में सत्ता परिवर्तन किया भी तो, कोई अचरच नहीं होना चाहिए. क्योंकि राजनीति में सत्ता नहीं तो कुछ भी नहीं का एजेंडा आज से ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के जन्म से ही लागू है.

Tuesday, December 11, 2018

'हार और जीत जीवन का हिस्सा हैं' -पीएम मोदी

विधानसभा चुनावों के न

मंगलवार देर शाम मोदी ने ट्वीट करते हुए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान मेहनत करने के लिए शुक्रिया भी अदा किया.

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हार और जीत जीवन का अहम हिस्सा हैं. साथ ही उन्होंने कहा है कि वह हार स्वीकार करते हैं. मंगलवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार का समान करना पड़ा. जबकि मध्यप्रदेश में भी बीजेपी का सरकार बनना मुश्किल दिख रहा है.

मंगलवार रात पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए बीजेपी के कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान मेहनत करने के लिए शुक्रिया भी अदा किया. उन्होंने कहा, ''विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी कार्यकर्ता के परिवार ने रात-दिन जम कर मेहनत की. मैं उनकी मेहनत को सलाम करता हूं. जीत और हार जीवन का अहम हिस्सा है. इन चुनाव के नतीजों के बाद हम देश की विकास लिए और ज़्यादा मेहनत         ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस, केसीआर और मिजोरम में एमएनएफ को भी बधाई दी है. इसके अलावा उन्होंने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लोगों का भी शुक्रिया अदा किया.  उन्होंने कहा, ''हम विनम्रता से हार स्वीकार करते हैं.''  हार के बाद कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी हैं...

अरुण जेटली, वित्त मंत्री
''हमें इतने खराब नतीजे की उम्मीद नहीं थी. हमें इन नतीजों पर विचार करना होगा. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश दोनों जगह पिछले 15 साल से हमारी सरकार थी. मुझे नहीं लगता की हार की वजह एंटी इनकंबेंसी फैक्टर है, बल्कि थकान है.''

वसुंधरा राजे
उन्होंने हार स्वीकार करते हुए कहा, ''मुझे लोगों का ये जनादेश स्वीकार है. बीजेपी ने पिछले पांच सालों में लोगों के लिए काफी काम किया है. मैं चाहती हूं कि आने वाली सरकार सारी पॉलिसी को काम को आगे बढ़ाए.''

अशोक गहलोत
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, ''मोदीजी सिर्फ कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते रहे. उनको ये पता नहीं है कि भारत कभी कांग्रेस मुक्त नहीं होगा. कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाले खुद मुक्त हो जाएंगे.''

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...