Thursday, December 27, 2018

बीते वर्ष 2018 में पत्रकारों के खूब बहे खून,80 पत्रकार मारे गए!!


रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पत्रकारों की मौत के मामले आठ फीसदी बढ़े हैं. पत्रकार राजनीतिक और धार्मिक घृणा का शिकार बन रहे हैं.        2018 के 11 महीनों में दुनिया भर में 80 पत्रकार मारे गए. गैर सरकारी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के मुताबिक इस दौरान 348 पत्रकारों को जेल में बंद किया गया और 60 से ज्यादा को बंधक बनाया गया.

18 दिसंबर को जारी हुई आरएसएफ की रिपोर्ट में विस्तार से पत्रकारों के खिलाफ हो रही हिंसा का जिक्र है. रिपोर्ट कहती है कि 49 पत्रकारों की हत्या की गई. संस्था के मुताबिक सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी और स्लोवाकिया के डाटा जर्नलिस्ट यान कुसिएक की हत्या "दर्शाती है कि प्रेस की आजादी के दुश्मन किस हद तक जा सकते हैं."

संस्था ने रिपोर्ट के साथ एक बयान जारी करते हुए कहा, "पत्रकारों के खिलाफ हिंसा इस साल अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है और अब स्थिति गंभीर है." इसके लिए राजनेताओं, धार्मिक नेताओं और कारोबारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है, "कभी कभार तो पत्रकारों के खिलाफ खुलकर घृणा व्यक्त की जा रही है, ऐसा करने वालों में बेशर्म राजनेता, धार्मिक नेता और कारोबारी भी हैं. इसका बुरा नतीजा, पत्रकारों के खिलाफ विचलित करने वाली हिंसा में दिखाई पड़ रहा है."

Infografik Länder, in denen die meisten Journalsiten getötet wurden 2018 EN

ये बने 2018 में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश

अफगानिस्तान अब भी पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश बना हुआ है. 2018 में वहां 15 मीडियाकर्मियों की मौत हुई. नौ पत्रकार तो सिर्फ 30 अप्रैल के दोहरे धमाके में मारे गए. भारत, अमेरिका और मेक्सिको जैसे युद्ध न झेलने वाले देश भी पत्रकारों के लिए जोखिम भरे बने हुए हैं. मेक्सिको में इस साल नौ पत्रकारों की हत्या हुई. भारत में छह पत्रकार मारे गए. दोनों ही देशों में कई पत्रकारों ने जानलेवा हमले झेले और धमकियों का सामना भी किया. अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक शूटिंग के दौरान एक अखबार के पांच कर्मचारी मारे गए.

चीन और तुर्की का बुरा हाल

सरकार या प्रशासन के खिलाफ अपनी राय जाहिर करने वालों के लिए चीन सबसे बड़ी जेल बना हुआ है. आरएएसफ के मुताबिक चीन में गैर पेशेवर पत्रकारों को बड़ी संख्या में कैद किया गया. रिपोर्ट कहती है, "सोशल नेटवर्कों या मैसेजिंग सर्विस में सिर्फ एक पोस्ट लिखने के कारण उन्हें अकसर अमानवीय परिस्थितियों में कैद किया गया."

Infografik Top 5 der Staaten, die Journalisten inhaftieren EN

इन देशों में कैद हुए सबसे ज्यादा पत्रकार

पेशेवर पत्रकारों के लिए तुर्की सबसे बड़ा कैदखाना बना. उसके बाद मिस्र, ईरान और सऊदी अरब का जिक्र है. मध्य पूर्व के देशों में 2018 में 60 पत्रकारों को कैद किया गया. इन देशों के अलावा आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अब तक 24 पत्रकारों को बंधक बनाया हुआ है. यमन के हूथी विद्रोहियों के कब्जे में 16 जर्नलिस्ट हैं.

रिपोर्ट्स विदाउट बॉर्डर्स के मुताबिक 21 जनवरी को मेक्सिको से, 14 मार्च को हैती से और सात जून को रूस से गायब हुए तीन पत्रकारों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है.

ओएसजे/एनआर (एएफपी, रॉयटर्स)

Wednesday, December 26, 2018

रांची:डुमरी सीओ को मुख्य मंत्री ने किया बर्खाश्त,दागी अधिकारियों के सम्पति की होगी जांच

 रांची ၊  हटाए जाएंगे डुमरी अंचल से डुमरी के भ्रष्ट अंचलाधिकारी रविंद्र पांडे, साथ ही  होगी उनके संपत्ति की जांच ၊ लक्ष्मण टुंडा पंचायत समिति सदस्य  श्रीमती सुनीता देवी एवं भाजयुमो गिरिडीह जिला उपाध्यक्ष  सुरेन्द्र कुमार  की मांग पर मुख्यमंत्री ने  निर्णय लिया ၊ बुधवार को  सूचना भवन रांची में आयोजित मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम में  लक्ष्मण टुण्डा पंचायत समिति सदस्य श्रीमती सुनीता देवी ने मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास से मुलाकात कर डुमरी अंचलाधिकारी रविंद्र पांडेय के भ्रष्ट कार्यों को अवगत कराते हुए पत्र सौंपकर अविलंब सीओ को डुमरी अंचल से हटाने की मांग की  ၊ जिस पर मुख्यमंत्री ने अंचलाधिकारी डुमरी को अविलम्ब बुधवार को ही हटाने का  निर्देश जारी कर दिया ၊ वही डुमरी प्रखंड के लचर स्वास्थ सुविधा में सुधार हेतु तथा लक्ष्मण टुंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित सभी उप केंद्रों में एएनएम तथा स्वास्थ्य में सुधार की  मांग की  पर भी  मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को डुमरी में स्वास्थ्य में सुधार के लिए स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिए। उक्त कार्य के लिए श्रीमती सुनीता देवी एव सुरेन्द्र कुमार  ने  मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त किए।

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट हुआ। अमरीका का यह विमान वाहक पोत उस समय प्रविष्ट हुआ जब इस इलाक़े में इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स का सैन्य अभ्यास चल रहा था।

ईरान के सशस्त्र बलों ने अपने इस सैन्य अभ्यास में अपनी तेज़ रफ़तार युद्धक नौकाओं और बड़े सटीक रूप से निशाने को ध्वस्त करने वाले मिसाइलों का परीक्षण किया।

यहीं से अटकलें शुरू हो गईं। कुछ संचार माध्यमों में यह ख़बर आई कि ईरान की सेना ने अमरीकी विमान वाहक पोत पर फ़ायरिंग की लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स के अधिकारियों ने इस ख़बरों का खंडन किया मगर साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि हम अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ईरान की नौसेना के प्रमुख एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने सोमवार को कहा कि अमरीकी पोत को ईरान की जलसीमा से क़रीब होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने अपने युद्ध अभ्यास में यह संदेश दे दिया कि अमरीकी सैन्य बल के सामने डट जाने की हमारे पास पूरी क्षमता मौजूद है।

यदि पश्चिमी एशिया के इलाक़े को देखा जाए तो यह हक़ीक़त साफ़ तौर पर नज़र आती है कि अमरीकी वर्चस्व कमज़ोर पड़ चुका है जिसका एक बड़ा कारण क्षेत्रीय देशों की शक्ति का विस्तार है। इस्लामी गणतंत्र ईरान तो पिछले चालीस साल से अमरीकी वर्चस्व को नकार चुका है और अपनी इस रणनीति के कारण ईरान को अमरीका और उसके घटकों की दुशमनी झेलनी पड़ी। ईरान ने इस दुशमनी का सामना करके अन्य देशों के सामने एक उदाहरण भी पेश कर दिया। धीरे धीरे इसी रास्ते पर दूसरे देश भी चल पड़े हैं।

पश्चिमी एशिया के कुछ देशों ने तो रूस को विकल्प के रूप में देखना शुरू कर दिया है बल्कि रूस को प्रेशर टूल के रूप में भी प्रयोग कर लेते हैं। तुर्की ने एसा कई बार किया कि उसने अमरीका पर दबाव डालने के लिए रूस से सहयोग बढ़ाना शुरू कर दिया। तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीद कर अमरीका को कड़ा संदेश दिया और इस संदेश का अमरीका पर असर भी हुआ। अमरीकी सरकार ने अपनी कड़ी शर्तों को नर्म करके रूस को पेट्रियट मिसाइल देने की घोषणा कर दी।

यही तरकीब सऊदी अरब ने भी अपनाई। सऊदी अरब ने भी रूस की ओर झुकाव बढ़ा दिया और रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदने का सौदा किया तो अमरीका ने थाड एयिर डिफ़ेन्स सिस्टम सऊदी अरब को बेचने की बात शुरू कर दी।

दूसरे भी देश इस रणनीति को प्रयोग कर रहे हैं। इस तरह अमरीकी वर्चस्व को ज़बरदस्त चुनौती मिल रही है।

जहां तक इस्लामी गणतंत्र ईरान का सवाल है तो वह स्पष्ट शब्दों में कहता रहा है कि क्षेत्रीय मामलों की ज़िम्मेदारी क्षेत्रीय देशों के हाथों में होनी चाहिए बाहरी शक्तियों को हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

इन हालात में अमरीकी अधिकारियों को इस बात का पूरी तरह आभास है कि अब क्षेत्रीय देशों की अमरीका पर निर्भरता बहुत तेज़ी से कम हो रही है और यह अमरीका के लिए गहरी चिंता का विषय है।  

Tuesday, December 25, 2018

महाराष्ट्रट्र: क्रिसमस के मौके चर्च में प्रार्थना कर रहे इसाई समुदाय पर हमला

क्रिसमस के मौके पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कुछ शरारती तत्वों ने एक चर्च को निशाना बनाया है, जिस वक्त यह अटैक किया गया, तब चर्च में चल रही प्रार्थना में 40 से ज्यादा लोग हिस्सा ले रहे थे। बता दें कि इस हमले में तीन लोग गंभीर रूप से जख्मी बताए जा रहे हैं, जिनकी हालत स्थिर बनी हुई है। हमले का आरोप कट्टरपंथी समूह पर लगा है।
एक तरफ जहां देशभर में लोग क्रिसमस की बधाईयां (Merry Christmas Wishes) दे रहे हैं, वहीं कोल्हापुर में इस मौके पर चर्च को निशाना बनाया गया है। कोल्हापुर के एसपी अभिनव देशमुख घटना की जानकारी देते हुए बताया कि किराए पर लिए गए एक घर, जहां हमेशा चर्च की तरफ प्रार्थना कराई जाती है, में प्रार्थना की जा रही थी।

अब नहीं आएगा बिजली बिल, नए साल से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला!

अगर आप अपने ज्यादा बिजली के बिल से परेशान हैं तो ये खबर आपके लिए है। अब जल्द ही आपके घर बिजली का बिल नहीं आएगा और इसकी शुरुआत अगले साल यानि अप्रैल 2019 से होगी। मोदी सरकार ने सभी लोगों को राहत देने वाला फैसला लेते हुए स बिजली मंत्रालय ने फैसला किया है कि अगले तीन सालों में वो देशभर में बिजली के सभी मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड में बदलेगी।

बिजली मंत्रालय के इस फैसले का मकसद बिजली के ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन में होने वाले नुकसान में कमी लाना है। साथ ही इससे वितरण कंपनियों की स्थिति बेहतर होगी और ऊर्जा संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा। कागजी बिल की व्यवस्था खत्म होने के साथ बिल भुगतान में भी आसानी होगी।

सरकार के मुताबिक, स्मार्ट मीटर गरीबों के हित में है क्योंकि ग्राहकों को पूरे महीने का बिल एक बार में देने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाए वे अपनी जरूरतों के अनुसार बिल का भुगतान कर सकते हैं। इतना ही नहीं बड़े पैमाने पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विनिर्माण से युवाओं के लिए रोजगार भी पैदा होंगे।

आपको बता दें राज्य सरकारों ने सभी के लिए बिजली दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं और अपने ग्राहकों को सातों दिन 24 घंटे बिजली देने पर सहमति जताई थी। इसके तहत वितरण लाइसेंस में एक अप्रैल 2019 या उससे पहले से ग्राहकों को सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा।

सभी स्मार्ट मीटर को बिजली निगम में बने कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। कर्मचारी स्काडा सॉफ्टवेयर के जरिए कंट्रोल रूम से ही मीटर रीडिंग नोट कर सकेंगे। इसके साथ ही अगर कोई मीटर के साथ छेड़छाड़ करता है तो उसका संकेत कंट्रोल रूम में मिलेगा। अगर कोई उपभोक्ता समय पर बिजली बिल नहीं भरता, तो कंट्रोल रूम से ही उसका मीटर कनेक्शन भी काटा जा सकेगा। इसके लिए उपभोक्ताओं के घर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।



कर्नाटक : मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक बार फिर विवादों के घेरे में

कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। वायरल हो रहा उनका एक वीडियो इस विवाद की वजह है। इस वीडियो में वह किसी व्यक्ति को निर्दयता से मारने का आदेश देते दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह आदेश उन्होंने जनता दल सेक्युलर के स्थानीय नेता कि ह्त्या के बाद किसी पुलिस अधिकारी को दिए हैं।

यह वीडियो स्थानीय पत्रकार ने रिकॉर्ड किया है। इसमें कुमारस्वामी कहते दिख रहे हैं कि 'प्रकाश एक अच्छा आदमी था। मैं नहीं जानता कि उसे इस तरह किसने मारा। हत्यारे को बेरहमी से मारो। कोई विवाद नहीं होगा। बाद में मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री इस हत्या से सदमे में थे और उन्होंने ऐसा भावनाओं में बहकर कह दिया

Monday, December 24, 2018

विश्व की सबसे मंहंगी ज़मीन सरहिंद, जिला फतेहगढ़ साहब (पंजाब) में है, जो मात्र 4 स्क्वेयर मीटर है

क्या आप जानते हैं विश्व की सबसे मंहंगी ज़मीन सरहिंद, जिला फतेहगढ़ साहब (पंजाब) में है, जो मात्र 4 स्क्वेयर मीटर है।

क्यों हुई ये छोटी सी ज़मीन सबसे महंगी? जरूर जानिये - रोंगटे खड़े कर देनें वाली ऐतिहासिक घटना।

यहां पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी क दोे छोटे साहिबजादों का अंतिम संस्कार किया गया था।

सेठ दीवान टोडर मल ने यह ज़मीन 78000 सोने की मोहरें (सिक्के) दे कर मुस्लिम बादशाह से खरीदी थी।सोने की कीमत के मुताबिक इस 4 स्कवेयर मीटर जमीन की कीमत 2500000000 (दो अरब पचास करोड़)बनती है। 

दुनिया की सबसे मंहंगी जगह खरीदने का रिकॉर्ड विश्व मे कहीं नहीं है ! आजतक दुनिया के इतिहास में इतनी मंहंगी जगह कहीं नही खरीदी गयी।

और....दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध ना कभी किसी ने पढ़ा होगा ना ही सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 42 लोगों के साथ हुआ था और जीत किसकी होती है..??

उन 42 सूरमो की !

यह युद्ध 'चमकौर युद्ध' (Battle of Chamkaur) के नाम से भी जाना जाता है जो कि मुग़ल योद्धा वज़ीर खान की अगवाई में 10 लाख की फ़ौज का सामना सिर्फ 42 सिखों से, 6 दिसम्बर 1704 को हुआ जो कि गुरु गोबिंद सिंह जी की आज्ञा से तैयार हुए थे !

नतीजा यह निकलता है की उन 42 शूरवीरों की जीत होती है और हिंदुस्तान में मुग़ल हुकूमत की नींव, जो बाबर ने रखी थी, उसे जड़ से उखाड़ दिया गया।

औरंगज़ेब ने भी उस वक़्त गुरु गोविंद सिंह जी का लोहा माना और घुटने टेक दिए और ऐसे मुग़ल साम्राज्य का अंत हुआ।

औरंगजेब की तरफ से एक प्रश्न किया गया गुरु गोविंद सिंह जी से, कि यह कैसी फ़ौज तैयार की आपने जिसने 10 लाख की फ़ौज को उखाड़ फेंका?

गुरु गोविंद सिंह जी ने जवाब दिया,

"चिड़ियों से मैं बाज लडाऊ,

गीदड़ों को मैं शेर बनाऊ

सवा लाख से एक लडाऊं,

तभी गोविंद सिंह नाम कहाउँ !!" गुरु गोविंद सिंह जी ने जो कहा वो किया और जिन्हें आज हर कोई शीश झुकता है। यह है हमारे भारत की अनमोल विरासत जिसे कभी पढ़ाया ही नहीं जाता! 

अगर आपको यकीन नहीं होता तो एक बार जरूर Google में लिखे 'बैटल ऑफ़ चमकौर' और सच आपको स्वयं पता लग जाएगा।

आपको अगर ये लेख थोड़ा सा भी अच्छा लगा हो और आपको भारतीय होने पर गर्वान्वित करता हो तो ज़रूर इसे आगे शेयर करें जिससे हमारे देश के गौरवशाली इतिहास के बारे में दुनिया को पता लगे !

कुछ आगे 

चमकौर साहिब की जमीन, आगे चलकर, एक समृद्ध सिख ने खरीदी। उस को इसके इतिहास का कुछ पता नहीं था। जब पता चला कि यहाँ गुरु गोविंद सिंह जी के दो बेटे शहीद हुए थे, तो उन्होंने यह ज़मीन गुरु महाराज जी के बेटों की यादगार ( गुरुद्वारा साहिब) के लिए देने का मन बनाया।

जब अरदास करने के समय उस सिख से पूछा गया कि अरदास में उनके लिए गुरु साहिब से क्या विनती करनी है ....तो उस सिख ने कहा के गुरु जी से विनती करनी है कि मेरे घर कोई औलाद ना हो ताकि मेरे वंश में कोई भी यह कहने वाला ना हो कि यह ज़मीन मेरे बाप दादा ने दी है।

वाहेगुरु...  

और यही अरदास हुई और बिलकुल ऐसा ही हुआ कि उन सिख के घर कोई औलाद नहीं हुई। 

अब हम अपने बारे में सोचें

50....100 रु. दे कर क्या क्या माँगते हैं _

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...