Wednesday, February 20, 2019

नहीं रहे भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह

आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.

 

नई दिल्ली. हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना की विधा के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार देर रात दिल्ली के AIIMS में उन्होंने आखिरी सांस ली. नामवर सिंह पिछले एक महीने से एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती थे. ब्रेन हैमरेज की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. 92 साल के नामवर सिंह को डॉक्टर लंबे समय से ठीक करने की कोशिश कर रहे थे. 

इससे पहले जनवरी में भी तबीयत होने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया था, कुछ दिन के इलाज के बाद उनकी सेहत ठीक हो गई थी इसके बाद उन्हें आईसीयू से हटा लिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक नामवर सिंह अपने कमरे में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्‍पताल में भर्ती करवाया गया. हालांकि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई.

उनके पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी घाट पर किया गया.


डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक है. साहित्य और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है.

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि वे एक नायाब आलोचक और साहित्य में दूसरी परंपरा के अन्वेषी थे. उन्होंने ट्वी किया, "हिंदी में फिर सन्नाटे की ख़बर. नायाब आलोचक, साहित्य में दूसरी परम्परा के अन्वेषी, डॉ नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार को आधी रात होते-न-होते उन्होंने आख़िरी सांस ली. कुछ समय से एम्स में भरती थे. 26 जुलाई को वे 93 के हो जाते. उन्होंने अच्छा जीवन जिया, बड़ा जीवन पाया, नतशीश नमन."

बता दें कि आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.

नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर (अब चंदौली) वाराणसी में हुआ था. उन्होंने अधिकतर आलोचना, साक्षात्कार इत्यादि विधाओं में सृजन किया. उन्होंने आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई ऊंचाई दी. नामवर सिंह ने साहित्य में काशी विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की. इसके बाद वे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रहे. उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें चर्चित हैं.  

इनकी मुख्य रचनाएं:

इनकी मुख्य रचनाओं में बकलम खुद, हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां, छायावाद, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद जैसी आलोचना और कहना न होगा जैसे साक्षात्कार जैसी रचनाएं प्रमुख हैं.

बगोदर में संत रविदास जयंती धूम-धाम से मनाया गया

  

 बगोदर(गिरिडीह) ၊ बगोदर प्रखंड के विभिन्न गांवो में मंगलवार को  642 रैदास जयंती धुम-धाम से मनाया गया। वहीं प्रखंड के मंझिलाडीह रविदास टोला पोखरिया पंचायत के पोचरी रविदास टोला समेत कई गांवों में विधि विधान पूर्वक संत रैदास की फोटो लगा कर जयंती के मौके पर उनके अनुयायियों  द्वारा पूजा पाठ कर  गुरु को याद किया गया।इस संबंध में  गणेश दास ने बताया कि संत रैदास जी का जन्म लगभग 1450 ई  कलसा देवी नामक स्थान जो वाराणसी के एक गांव में हुआ था ।गुरु रैदास के जीवन से जुड़ी उनकी घटनाओं को याद कर उनसे प्रेरणा लेते हैं ।संत रैदास के जीवन के कई ऐसे प्रेरक प्रसंग है जिनसे हमसभी सुखी जीवन सूत्र सीख सकते हैं ၊ य ध् दिन उनके अनुयायियों के लिए वार्षिक उत्सव की तरह होता है।वहीं रैदास जी समानता और समाजिक सशक्तिकरण के लिए अनमोल एवं अमिट संदेश दिया है वह सभी को प्रेरित करता रहेगा। इस जयंती के अवसर पर युवाओ मे काफी उत्साह देखा गया।जिसमें सेवा रविदास, संतोष रविदास,गणेश रविदास, भूनेशवर रविदास, राज कुमार,रिंकु लालो, महावीर,संजय सोनु व मझंलाडीह के राम जन्म,कुंदन कुमार, संजय राम ,प्रसादी राम, दिलीप राम, संत कुमार, सुजित कुमार आदि  रविदास युवाओ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


Tuesday, February 19, 2019

आतंकी हमले के बाद सेना की स्थिति को ले सदमे के कारण हुई बीएसएफ के जवान की मौत

कश्मीर की माताएं अपने भटके बच्चों को सरेंडर करवाएं नहीं तो मारे जाएंगे- भारतीय सेना

14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर चरमपंथी हमले में मारे गए 40 जवानों के बाद सेना ने पहली बार प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

इस प्रेस कॉन्फ़्रेसं में लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा कश्मीर की सभी माताओं से अपील करते हुए कहा कि वो अपने भटके बेटों को बुलाकर सरेंडर करवा लें नहीं तो मारे जाएंगे.

ढिल्लन ने कहा, ''मैं कश्मीरी मांओं से अपील करता हूं वो अपने बच्चों को सरेंडर करवा दें नहीं तो मारे जाएंगे. बच्चों की परवरिश में मां की अहम भूमिका होती. वो अपने बेटों को समझाएं कि लौट आएं अन्यथा मारे जाएंगे. जो बंदूक उठाएगा वो मारा जाएगा.''

ढिल्लन ने कहा कि पुलवामा मुठभेड़ में सोमवार को तीन आंतकी मारे गए. उन्होंने कहा कि 100 घंटे के भीतर जैश के आतंकवादियों को मार गिराया गया.

Sunday, February 17, 2019

गिरिडीह में एटीएस की टीम ने पांच लोगों से पूछताछ की;मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया एकाउंट भी खंगाला


गिरिडीह: गिरिडीह में शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब रांची से गई एटीएस की टीम ने गिरिडीह शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्र में रहने वाले पांच लोगों से पूछताछ की है.पांचो लोगों से पूछताछ के बाद टीम वापस रांची चली अाई.हालांकि कहा इस बारे में कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ कहने से बच रहे हैं.वही एटीएस की इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया है.

 पूछताछ के बाद वापस रांची आ गई एटीएस की टीम

मिली जानकारी के अनुसार रांची एटीएस की टीम गिरिडीह के  मुफस्सिल और पचम्बा थाना पहुंचे.उसके एटीएस की टीम चैताडीह गांव पहुंची. एटीएस की टीम यहां गांव में चार लोगों से पूछताछ की उसके बाद एक और मोहल्ले में टीम ने एक युवक से पूछताछ की.पूछताछ के बाद टीम वापस चली गई. 

 मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया एकाउंट की गई जांच

मिली जानकारी के अनुसार  एटीएस की टीम ने जिन पांच लोगों से पूछताछ की है,उनके जान पहचान के लोग का संबंध उन प्रतिबंधित संगठनों से है जिसपर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है.हालांकि टीम ने जिन पांच लोगों से पूछताछ की है उनके मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया एकाउंट की भी जांच की है।


#रिपोर्ट-सौरभ

पहचानिये देश में छुपे ऐसे गद्दारों को; जहाँ एक ओर लोग राष्ट्ररक्षकों पर किये हमले को ले खून के आंसू बहा रहे हैं ,वही ये गद्दार......

देश के कोने-कोने में छिपे इन गद्दारों को महंगा पड़ा शहीद जवानों के खिलाफ लिखना, किसी की नौकरी गयी, तो किसी के खिलाफ दर्ज़ हुई एफआईआर
   17-Feb-2019
 
 
 
 
पुलवामा अटैक के बाद देश तमाम लोगों ने अपने-अपने तरीके से शहीदों को श्रद्धांजलि दी। शहीदों के लिए सोशल मीडिया पर देश की आवाज़ में आवाज़ मिलाई। लेकिन ऐसे बहुत से गद्दारों की पहचान भी हुई, जिन्होंने फेसबुक-ट्वीटर न सिर्फ आतंकी हमले का समर्थन किया, बल्कि शहीदों और सुरक्षाबलों का अपमान किया, यहां तक कि कईंयों ने पाकिस्तान का दिल खोलकर समर्थन भी किया। धमकियां दीं..।
 
लेकिन अब देश बदल चुका है, सोशल मीडिया पर ही देशभक्तों ने Naming-Shaming कैंपेन चलाया। इनकी पहचान करके इनके Employer कंपनी को टैग किया, जिस कॉलेज में पढ़ते थे, उनको शिकायतें की गयीं। पुलिस में शिकायत दर्ज की गयी.... नतीज़ा ये हुआ कि देश भर के कोने-कोने में छिपे बैठे 2 दर्जन से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई की गयी। बाद में तमाम लोग माफी मांगते नज़र आये। देखिए एक-एक करके इन आरोपियों की लिस्ट-
 
 
 1.  रायपुर में रहने वाली अर्बन नक्सल सुरभी सिंह ने फेसबुक पर सुरक्षाबलों के खिलाफ जहर उगला। शिकायत करने के बाद सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च ने उनको नौकरी निकाल दिया। 
 
 

 
 
 
2. चंडीगढ़ में रहने वाले मीर इकबाल ने फेसबुक पर उल्टा-सीधा लिखा, उनके खिलाफ भी शिकायत की गयी, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने मामले की छानबीन कर रही है।
 
 

  
 
 3. जयपुर की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली कश्मीरी तवलीन मंजूर ने जश्न मनाने का स्टेट्स डाला, तो यूनिवर्सिटी ने उनको और उनकी 3 और सहेलियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
 
 
 
 
 
 
4. राजस्थान के जिला प्रतापगढ़ में एक स्कूल प्रिंसिपल मोहम्मद अजमेरी ने न सिर्फ शहीदों पर अभद्र टिप्पणी की, बल्कि स्कूल की प्रार्थना सभा में सुरक्षाबलों पर अभद्र बातें कहीं। इसके लिए उनको सरकार ने सस्पेंड कर दिया, साथ ही गिरफ्तार भी कर लिया गया। 
 
 

 
 
 
5. आसाम में आईकॉन कॉमर्स कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर पपरी बैनर्जी ने आतंकी हमले का समर्थन किया, बाद में लोगों का मजाक उड़ाया। कॉलेज ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पपरी को सस्पेंड कर दिया। बाद में पपरी ने फेसबुक पर खेद भी व्यक्त किया।
 

 
 
 6. बाला हैदराबाद में ऑनलाइन मीडिया के पत्रकार हैं, इन्होंने न सिर्फ सुरक्षाबलों पर अभद्र आरोप लगाया। जबकि अलगाववादी बातें भी लिखी। इसके खिलाफ हैदराबाद में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। इसके बाद बाला ने अपना अकाउंट बंद कर दिया, हालांकि इसकी कंपनी न्यूजमिनट की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
 

 
 
7. मोहम्मद अशरफ श्रीनगर में ह्यूंडई शोरूम में नौकरी करता है, शिकायत करने पर कंपनी ने अशरफ को तुरंत नौकरी से निकाल बाहर किया।
 

 
 
 8. वैभव शमशेर राणा ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट था, फेसबुक पर जश्न मनाते कईं कमेंट किये। यूनिवर्सिटी ने शमशेर को न सिर्फ सस्पेंड कर दिया। बल्कि एफआईआर भी दर्ज करा दी।
 

 
 
 
9. पश्चिम बंगाल के देबजीत भट्टाचार्जी ने बंगाली में (रोमन लैटर में ) कश्मीर में अलगाववादियों का समर्थन किया। इसके लिए देबजीत पर एफआईआर दर्ज कर दी गयी है। 
 
 
 

 
 
 10. मऊ, यूपी में रहने वाले मो. ओसामा ने शहीदों का अपमान किया और पाकिस्तान का समर्थन किया। यूपी पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज करते हुए। मो. ओसामा को गिरफ्तार कर लिया।
 
 

 
 
11. देहरादून सुभारती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले राशिद ने पुलवामा अटैक के बाद जश्न मनाने का स्टेट्स डाला। शिकायत मिलने पर यूनिवर्सिटी ने तुरंत राशिद को निलंबित कर दिया।
 

 
 
12. श्रीनगर में रहने वाले रियाज़ अहमद वानी अक्सर अपने फेसबुक पर आतंकियों के पक्ष में स्टेट्स डालता रहता था। पुलवामा हमले के बाद भी रियाज ने ऐसा ही स्टेट्स डाला। लेकिन इस बार उसको भारी पड़ा प्राइवेट कंपनी मैकलॉयड ने उनको नौकरी से बाहर कर दिया।
 
 

 
 
13. बंगलुरू में रहकर नौकरी करने वाले कश्मीरी आबिद मलिक फिदायीन आतंकी के पक्ष में स्टेट्स डाला। हमले के बाद जश्न मनाया। इसके बाद बंगलुरू पुलिस ने देशद्रोह की धाराओं में आबिद पर केस दर्ज कर लिया।
 
 
 

 
 
14. निधि सेठी, दिल्ली एनडीटीवी में डिप्टी एडिटर थी, शहीदों पर तंज कसा। एनडीटीवी ने निधि को तुंरत 2 हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया और जांच बिठा दी। इसके बाद निधि ने अपना फेसबुक अकाउंट भी डीलिट कर दिया।
 

 
 
 
15. लखनऊ में रज़ाब ने फेसबुक-व्हाट्सअप पर पुलवामा हमले की खुशियां मनाने के पोस्ट डाले। कॉलेज ने तुरंत उनको निष्कासित कर दिया। साथ ही रज़ाब पर एफआईआर दर्ज की ली गयी और गिरफ्तार कर लिया गया।
 
 

 
 
 16. लुधियाना में रहने वाले रईस खान ने फेसबुक पर धमकी भरे पोस्ट डाले, इसके बाद पंजाब पुलिस उसकी खबर ले रही है।
 


 
 
 
ऐसे और भी काफी नाम हैं, जिन्होंने ऐसे ही एंटी-इंडिया पोस्ट किया है। इनके खिलाफ सोशल मीडिया पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित कंपनी को सूचित किया जा रहा है। जिसका मतलब है आने वाले दिनों में ये लिस्ट और लंबी होगी। सोशल मीडिया पर देशद्रोहियों के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन की खास बात ये है कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब स्वस्फूर्त तरीके से ऐसे गद्दारों के खिलाफ आम भारतीयों ने आवाजा उठाई है। 
 courtesy:JKN


 
 
 

पीएम मोदी ने झारखण्ड में किया 4 नये मेडिकल कॉलेजों का उद्धाटन

पीएम मोदी ने झारखंड में हजारीबाग, पलामू और दुमका मेडिकल कॉलेजों का ऑनलाइन उद्घाटन,  हजारीबाग शहरी पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का शिलान्यास,  ग्रामीण पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का उद्घाटन, हजारीबाग से पटना के लिए ट्रेन का शुभारंभ,  विनोबा भावे यूनिवर्सिटी में जनजातीय अध्ययन केन्द्र का शिलान्यास,  रामगढ़ में महिला इंजीनियरिंग कॉलेज का उद्घाटन,  सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए गिफ्ट मिल्क योजना का शुभारंभ किया। विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास किया। 

इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को चाबी सौंपी। इस मौके पर किसानों को स्मार्टफोन भी दिए गए।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आपका प्यार और विश्वास मुझे काम करने और दौड़ने की ताकत देती है। उन्होंने पुलवामा में शहीद हुए झारखंड के विजय सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि झारखंड वीरों की भूमि है। उन्होंने कहा कि साढ़े चार साल मे यहां की सरकार ने जो विकास किया केन्द्र सरकार ने उसे आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यहां जिन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया उससे झारखंड का विकास होगा।  यहां शुरू की गई स्मार्टफोन योजना से किसानों को खेती की नई-नई जानकारी मिलेगी। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और बजट में की गई किसान सम्मान योजना का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि झारखंड महिला सशक्तिकरण में आगे रहा है। रामगढ़ का महिला इंजीनियरिंग कॉलेज कैप्टन शिखा शर्मा जैसी बेटियां देगा। केन्द्र सरकार भी आदिवासी समाज को हर तरह की शिक्षा देने के लिए प्रयासरत है। विनोबा भावे यूनिवर्सिटी में जनजातीय अध्ययन केन्द्र से यहां के आदिवासी युवाओं को यहां की संस्कृति को आगे बढ़ाने में सहयोग मिलेगा। यहां की सपोर्ट्स क्षमता को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। झारखंड ने देश को कई तीरंदाज दिए हैं।

 आज सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए दुग्ध योजना, जिसे कान्हा दुग्ध योजना रखा गया है उससे यहां के बच्चों को बेहतर पोषण मिल सकेगा। यहां के नायकों को सम्मान देने के लिए भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए संग्राहलय बनाए जा रहे हैं। ये म्यूजियम हमें आदिवासी नायकों की तो याद दिलाएंगे साथ ही पर्यटन का केन्द्र भी बनेंगे। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में बेहतरीन कार्य करने पर उन्होंने सीएम रघुवरदास और राज्य सरकार के अधिकारियों को बधाई दी।



बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...