हिन्दु नेता ब्राह्मण एकता मंच युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री मिश्न ने मीडिया पर भी कसा तंज
Thursday, February 21, 2019
भारतीय सेना पर आतंक की पीड़ा से मर्माहत हो लिखा प्रधान मंत्री मोदी को पत्र
Wednesday, February 20, 2019
जयपुर जेल में पाकिस्तानी जासूस को साथी कैदियों ने पीट-पीटकर कर मार डाला
पुलवामा आतंकी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान में चल रहे तनाव के बीच राजस्थान से बड़ी खबर आई है. बुधवार को जयपुर जेल में बंद पाकिस्तानी कैदी शकीरूल्लाह की हत्या कर दी गई है. जयपुर जेल में बंद अन्य कैदियों ने पीट-पीटकर पाकिस्तानी कैदी की हत्या कर दी. जयपुर जेल में ही बंद तीन अन्य सजायाफ्ता कैदियों ने पीट-पीटकर शकीरूल्लाह की हत्या की.
हत्या की खबर मिलते ही जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं, मामले की जांच की जा रही है. बताया जा रहा है कि शकीरूल्लाह जासूसी के अारोप में जेल में बंद था और सजा काट रहा था.
गौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले में पाकिस्तान परस्त आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था. इस हमले के बाद से ही पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से का माहौल है. आम जनता लगातार सड़कों पर उतर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और भारत सरकार से कड़ा एक्शन लेने की मांग कर रही है.
क्षेत्र में विकास कार्यों में सकारात्मक सोच को ले हुआ युवा साथी का गठन
अशोक कुमार ၊
बगोदर/गिरिडीह:-बगोदर प्रखंड के लापसियाटांड में जागरूक यूवाओ के द्वारा बुधवार एक बैठक किया गया ।बैठक मे सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बगोदर व आस पास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर एक सकारात्मक सोच के तहत लोगो से सम्पर्क किया जायगा ।इस दौरान युवा साथी संगठन का गठन किया गया ।जिसमे अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार महतो, सचिव अशोक कुमार,कोषाध्यक्ष सनी को बनाया गया। मौके पर चेतलाल महतो, सदिक अंसारी,मुस्कान महतो, पुरन महतो, हजारी महतो, चंदन महतो,संतोष महतो, विकास सोनी, चंदन साव, मुरत कुमार, प्रयाग महतो,विनोद महतो, समेत काफी संख्या में युवा शामिल थे ।
फोटो:-बैठक मे शामिल लोग
रंगदारी का अड्डा बना एनएच 2 का घंघरी टोल प्लाजा;रूपये की मांग को ले तोड़े यात्री बस के शीशे,मारपीट भी की
अशोक कुमार ၊ बगोदर/गिरिडीह:-हमेशा से विवादो की सुर्खियों में रहने वाला जीटी रोड घंघरी टोल प्लाजा एक बार फिर मंगलवार की रात्रि 10 बजे पम्मी नामक बस के साथ रंगदारी तथा अवैध वसूली को लेकर बस के शीशे तोडे जाने को ले चर्चा मे आया ၊ घटना में कई लोगों के साथ अमानवीय रूप से मारपीट भी किया गया।हालाकि बगोदर थाना मे बस चालक के द्वारा किसी प्रकार का आवेदन नहीं दी गई।बताया जाता है कि रांची से गिरिडीह जा रही पम्मी बस घंघरी टोल प्लाजा पहूंची तो वहां गाडिय़ों की लम्बी कतार लगी हुई थी ।चालक ने उसी कतार में बस को खड़ा कर दिया।जिसके बाद कुछ लोगों ने टोल कैंपस मे बस के चालक से पैसे की मांग की।नहीं देने पर बस के शीशे तोड़ दिये गये ।जिसमें कई यात्रियों को चोटे भी लगी । इधर इस मामले को लेकर टोल प्रबंधक सनी शर्मा ने बताया कि टोल कर्मियों के द्वारा बस के साथ किसी प्रकार का घटना से कोई तालुकत नहीं है ।प्रबंधक ने साफ तौर पर कहे कि कुछ युवको के द्वारा वाहनों से पैसे की उगाही कर रहे थे ।उसी दौरान पम्मी बस के साथ उन्ही युवको के द्वारा पम्मी बस के साथ मारपीट व तोड फोड की गई जो टोल मे लगे सीसीटीवी कैमरे मे कैद है।
वही बगोदर थाना प्रभारी पृथ्वी सेन दास ने कहा सूचना मिलने पर पुलिस टोल प्लाजा पहूंची तब तक बस वहां से चली गई थी ।इस मामले में किसी प्रकार का आवेदन नहीं मिला है।आवेदन मिलने पर करवाई की जायगी ।
अव्यवस्थित घंघरी टोल प्लाजा को लेकर बगोदर विधायक नागेन्द्र महतो ने दिल्ली स्थित परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी के कार्यलय पहुँच कर उनके नीजि सचिव वैभव डॉगे से मिलकर टोल प्लाजा को स्थान्तरित करने के को लेकर13 अप्रैल2018 को एक आवेदन पत्र भी दे चुके हैं ၊
नहीं रहे भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह
आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.
नई दिल्ली. हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना की विधा के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार देर रात दिल्ली के AIIMS में उन्होंने आखिरी सांस ली. नामवर सिंह पिछले एक महीने से एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती थे. ब्रेन हैमरेज की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. 92 साल के नामवर सिंह को डॉक्टर लंबे समय से ठीक करने की कोशिश कर रहे थे.
इससे पहले जनवरी में भी तबीयत होने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया था, कुछ दिन के इलाज के बाद उनकी सेहत ठीक हो गई थी इसके बाद उन्हें आईसीयू से हटा लिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक नामवर सिंह अपने कमरे में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. हालांकि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई.
उनके पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक आज उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी घाट पर किया गया.
डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक है. साहित्य और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है.
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि वे एक नायाब आलोचक और साहित्य में दूसरी परंपरा के अन्वेषी थे. उन्होंने ट्वी किया, "हिंदी में फिर सन्नाटे की ख़बर. नायाब आलोचक, साहित्य में दूसरी परम्परा के अन्वेषी, डॉ नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार को आधी रात होते-न-होते उन्होंने आख़िरी सांस ली. कुछ समय से एम्स में भरती थे. 26 जुलाई को वे 93 के हो जाते. उन्होंने अच्छा जीवन जिया, बड़ा जीवन पाया, नतशीश नमन."
बता दें कि आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा. कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो. देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे. उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है.
नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर (अब चंदौली) वाराणसी में हुआ था. उन्होंने अधिकतर आलोचना, साक्षात्कार इत्यादि विधाओं में सृजन किया. उन्होंने आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई ऊंचाई दी. नामवर सिंह ने साहित्य में काशी विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की. इसके बाद वे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रहे. उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें चर्चित हैं.
इनकी मुख्य रचनाएं:
इनकी मुख्य रचनाओं में बकलम खुद, हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियां, छायावाद, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद जैसी आलोचना और कहना न होगा जैसे साक्षात्कार जैसी रचनाएं प्रमुख हैं.
बगोदर में संत रविदास जयंती धूम-धाम से मनाया गया
बगोदर(गिरिडीह) ၊ बगोदर प्रखंड के विभिन्न गांवो में मंगलवार को 642 रैदास जयंती धुम-धाम से मनाया गया। वहीं प्रखंड के मंझिलाडीह रविदास टोला पोखरिया पंचायत के पोचरी रविदास टोला समेत कई गांवों में विधि विधान पूर्वक संत रैदास की फोटो लगा कर जयंती के मौके पर उनके अनुयायियों द्वारा पूजा पाठ कर गुरु को याद किया गया।इस संबंध में गणेश दास ने बताया कि संत रैदास जी का जन्म लगभग 1450 ई कलसा देवी नामक स्थान जो वाराणसी के एक गांव में हुआ था ।गुरु रैदास के जीवन से जुड़ी उनकी घटनाओं को याद कर उनसे प्रेरणा लेते हैं ।संत रैदास के जीवन के कई ऐसे प्रेरक प्रसंग है जिनसे हमसभी सुखी जीवन सूत्र सीख सकते हैं ၊ य ध् दिन उनके अनुयायियों के लिए वार्षिक उत्सव की तरह होता है।वहीं रैदास जी समानता और समाजिक सशक्तिकरण के लिए अनमोल एवं अमिट संदेश दिया है वह सभी को प्रेरित करता रहेगा। इस जयंती के अवसर पर युवाओ मे काफी उत्साह देखा गया।जिसमें सेवा रविदास, संतोष रविदास,गणेश रविदास, भूनेशवर रविदास, राज कुमार,रिंकु लालो, महावीर,संजय सोनु व मझंलाडीह के राम जन्म,कुंदन कुमार, संजय राम ,प्रसादी राम, दिलीप राम, संत कुमार, सुजित कुमार आदि रविदास युवाओ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका
चौंकाने वाली खबर 🚨 बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...
-
Nationalism is a political, social, and economic ideology and movement characterized by the promotion of the interests of a particular nati...
-
झारखण्ड में जैसे युवतियों,महिलाओं और बच्चियों को जलाकर हत्या कर दिए जाने का ट्रेंड निकल पड़ा है।रोजाना इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।जो अ...
-
#रांची : झारखंड में चीफ मिनिस्टर हेमंत सोरेन के कैबिनेट का विस्तार मंगलवार 28 जनवरी को शाम 4 बजे होगा। मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने मंत्रिम...