लोकतंत्र में जनता ही मालिक होता हैं, और महिला के सशक्तिकरण से देश का विकास संम्भव हैं, इसलिए भारत के प्रधानमंत्री ने कोडरमा में नारी शक्ति को प्रत्याशी बनाया गया
Thursday, May 2, 2019
महिला सशक्तिकरण को ले ही कोडरमा सीट पर महिला प्रत्याशी बनाया गया - रघुबर दास,मुख्य मंत्री
CBSE 12वीं टॉपर हंसिका शुक्ला ने 500 में से लाए 499 नंबर, जानें कहा कटा 1 नंबर
CBSE 12वीं का परिणाम आ गया है। रिजल्ट आज 2 मई को जारी कर दिया गया है। आप अपना परिणाम सीबीएसई के अधिकारिक वेबसाइट पर जा कर चेक कर सकते हैं। 2018 में गूगल ने भी रिजल्ट दिखाया था। इस साल CBSE बोर्ड में कुल 31 लाख बच्चों ने एग्जाम दिए हैं। इसमें 18.1 लाख लड़के और 12.9 लाख लड़कियां शामिल हैं। आपको बता दें कि इस बार सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं 15 फरवरी से 4 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थी। जिसमें करीब 31 लाख बच्चों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। पिछले साल 2018 में सीबीएसई ने Class 10th का रिजल्ट 29 मई 2018 और Class 12th का रिजल्ट 26 मई 2018 को जारी किया गया था।
CBSE में इस बार डीपीएस गाजियाबाद की हंसिका शुक्ला और मुजफ्फरनगर के एस. डी. पब्लिक स्कूल की करिश्मा अरोड़ा शामिल हैं। दोनों ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। हंसिका के नंबर्स की बात करें तो उनका एक नंबर सिर्फ अंग्रेजी में कटा है। बाकी राजनीतिक विज्ञान, हिस्ट्री, मनोविज्ञान और म्यूजिक में उनके पूरे 100-100 नंबर हैं। तीन लड़कियां संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं। इसमें गौरांगी चावला (ऋषिकेश), ऐश्वर्या (रायबरेली) और भव्या (जिंद, हरियाणा) शामिल हैं। तीनों के 500 में से 498 नंबर आए हैं।
हंसिका शुक्ला के पिता साकेत कुमार शुक्ला राज्यसभा में डेप्युटी सेक्रटरी हैं। जबकि उनकी मां मीना शुक्ला वीएमएलजी (डिग्री कॉलेज) में शिक्षिका हैं। हंसिका का सपना है कि वह IAS बनकर उन बच्चों को पढ़ा कर सफल बना पाएं जो धन के अभाव में पढ़ नहीं पाते।
हंसिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने टीचर और माता-पिता को दिया
सोरेन एंड मरांडी कंपनी ने राज्य वासियों को ठगा : रघुबर दास
Wednesday, May 1, 2019
ईरान से तेल ख़रीद मामले में क्या मोदी जी ट्रम्प को अपना 56 इंच का सीना दिखा पायेंगे?
👉: क्या भारत ने अमरीका से यह स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि वह ईरान से तेल का आयात बंद नहीं कर सकता?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, नई दिल्ली का कहना है कि उसने वाशिंगटन से यह सपष्ट कर दिया है कि उसके पास ईरानी तेल का कोई विकल्प नहीं है।
ग़ौरतलब है कि अमरीका ने मई 2018 में परमाणु समझौते से निकलने के बाद, ईरान पर फिर से एकपक्षीय आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिए थे और यह धमकी दी थी कि वह ईरानी तेल के निर्यात को शून्य तक पहुंचा देगा।
ट्रम्प प्रशासन ने नम्बर में 8 देशों को ईरान से तेल आयात के लिए 6 महीने की छूट दी थी, जो 2 मई को समाप्त हो रही है, जिसके बाद अब अमरीका ने किसी भी देश को तेल आयात की छूट नहीं देने की घोषणा की है और 2 मई के बाद ईरानी तेल आयात करने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने अमरीकी समकक्ष माइक पोम्पियो से टोलिफ़ोन पर बात करते हुए कहा है कि नई दिल्ली को हर हालत में तेहरान से तेल आयात के लिए छूट दी जानी चाहिए।
स्वराज ने देश की राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पोम्पियो से अनुरोध किया कि भारत को कुछ समय के लिए और छूट दी जानी चाहिए, इसलिए कि 23.5 मिलियन तेल का तुरंत विकल्प खोजना उसके लिए संभव नहीं है।
हालांकि पोम्पियो ने भारतीय विदेश मंत्री को फ़िलहास किसी तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया है, बल्कि उन्होंने कहा है कि इस समस्या को अब विदेश मंत्रालय के स्तर पर हल नहीं किया जा सकता, इसलिए कि ट्रम्प प्रशासन ने कड़ाई से प्रतिबंध लागू करने का फ़ैसला लिया है।
भारत, ईरान से तेल आयात करने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है।
भारत में आम चुनाव जारी हैं, ऐसी स्थिति में अगर वह ईरान से तेल आयात करना बंद करता है तो निश्चित रूप से देश में तेल की क़ीमतों में वृद्धि होगी, जो पहले से ही सरकार के लिए एक बड़ी समस्या है।
मोदी सरकार को डर है कि तेल के मूल्यों में अधिक वृद्धि से अगले तीन चरण के चुनाव में बीजेपी को नुक़सान पहुंच सकता है, इसलिए उसकी कोशिश है कि कम से कम चुनाव के समापन तक अमरीका उसे ईरान से तेल आयात करने की छूट देदे।
स्वराज ने पोम्पियो ने कहा है कि देश में लोकसभा चुनाव जारी है, इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम फ़ैसला आने वाली सरकार करेगी।
भारत की विपक्षीय पार्टियां पहले ही मोदी सरकार पर ईरान से तेल आयात करने में अमरीका के दबाव में काम करने का आरोप लगाती रही हैं।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि ईरान से तेल ख़रीदने के कारण भारत पर अमरीका की प्रतिबंध की धमकी, क्या भारत की संप्रभुता पर हमला नहीं है? मोदी जी झूठे अपनी छाती ठोंकते रहते हैं, अब क्यों ख़ामोश हैं? msm
विश्व मज़दूस दिवसः सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते
1 मई, मज़दूरों के दिन के तौर पर याद किया जाता है और इसे विश्व श्रमिक दिवस के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान, भारत और पाकिस्तान सहित दुनिया भर में पहली मई को मज़दूर दिवस मनाया जा रहा है इस मौक़े पर मजदूरों के समर्थन में बड़े-बड़े सम्मेलन और कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं और रैलियां भी निकाली जा रही हैं। 1 मई को, मज़दूरों के वैश्विक दिवस के रूप में मनाया जाता है और हर साल यह दिन इस वादे के साथ मनाया जाता है कि मज़दूरों की आर्थिक स्थिति को बदलने के प्रयास तेज़ किए जाएंगे, लेकिन शायद आज भी दुनिया भर के मज़दूर अपने अच्छे दिन का इंतेज़ार कर रहे हैं।
ईरान की राजधानी तेहरान में विश्व श्रमिक दिवस के अवसर पर देश भर के श्रमिकों के एक समूह को राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने संबोधित किया। राष्ट्रपति रूहानी इस मौक़े पर सबसे पहले देश और दुनिया के मज़दूरों को उनके दिन की मुबारकबाद पेश की और ईश्वर से मज़दूरों के अच्छे दिनों के लिए प्रार्थना भी की। एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान में मज़दूरों की आर्थिक स्थिति में पिछले कई दशकों में काफ़ी सुधार हुआ है और इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में मज़दूरों की आर्थिक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 1 मई को श्रम दिवस मनाने की शुरूआत, 1 मई 1886 को हुई थी जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने और शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हुए हड़ताल की थी। हड़ताल को समाप्त कराने के लिए अमेरिकी पुलिस ने मज़दूरों पर अंधाधुंध गोली चला दी जिसके परिणामस्वरूप दर्जनों मज़दूर हताहत और घायल हुए थे। अमेरिकी मज़दूरो पर अत्याचार केवल यहां समाप्त नहीं हुआ था बल्कि उस समय की अमेरिकी सरकार ने हड़ताल पर गए कई मज़दूरों को फांसी पर भी लटका दिया था, लेकिन मज़दूर किसी भी तरह की दमनात्मक कार्यवाही के आगे नहीं झुके और अपने आंदोलन को जारी रखा जिसका सबूत है 1 मई को मनाया जाने वाला मज़दूर दिवस है। (RZ)
दुनिया की 65 प्रतिशत आबादी "सही अर्थ me न्याय" से वंचित
एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर के लगभग 5 अरब 10 करोड़ लोग न्याय के सही अर्थ तक पहुंच से वंचित हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार जस्टि फ़ार टास्क फ़ोर्स की ओर तैयार की गयी रिपोर्ट हेग में वर्ल्ड् जस्टिस फ़ोरम में 29 अप्रैल को जारी की गयी थी।
रिपोर्ट में अन्याय की महामारी का चिन्ह बताया गया है जो दुनियाभर के देशों विशेषकर निर्धनों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
जस्टिस टॉस्क फ़ोर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में न्याय की व्यवस्था 5 अरब 10 करोड़ लोगों के मामले हल करने में विफल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चाहे वह हिंसा का शिकार हों, तलाक़ चाहते हों, नौकरी पर परेशान किए जाने का मामला हों, कर्ज़े से निपट रहे हों या कारोबारी परमिट हो, वह ख़र्चे और जटिल कार्य शैली की वजह से रुक जाते हैं, उन्हें अविश्वास का भी सामना होता है कि उनके साथ न्याय होगा या नहीं।
जस्टि फ़ार टॉस्क फ़ोर्स में अर्जीन्टीना, नीदरलैंड, सिरालियोन के मंत्रियों और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं पर आधारित ग़ैर सरकार संगठन दा एल्डर्ज़ शामिल है जो मिलकर शांति, न्याय और मानवाधिकार के लिए काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 करोड़ 30 लाख से अधिक लोग अन्याय की बेहद ख़राब स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वह आधुनिक ग़ुलाम हैं, सरकार के बिना हैं, या उनके देश, समाजिक विवाद, हिंसा और जंगलराज का शिकार हैं।
इस में कहा गय है कि 4 अरब 50 करोड़ लोग क़ानून की ओर से दिए गये अवसरों में शामिल नहीं हैं, उनके पास क़ानूनी पहचान, उनकी नौकरी से संबंधित, ख़ानदान या जाएदाद से संबंधित दस्तावेज़ मौजूद नहीं और इसीलिए वह आर्थिक अवसरों, पब्लिक सेवाएं और क़ानून की रक्षा तक पहुंच प्राप्त करने में विफल हैं। (AK)
तेज बहादुर यादव का नामांकन आखिरकार जिला निर्वाचन अधिकारी ने किया रद्द ,सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
वाराणसी । तेज बहादुर यादव का नामांकन आखिरकार बुधवार की दोपहर बाद 3.35 बजे जिला निर्वाचन अधिकारी ने रद कर दिया। निर्वाचन कार्यालय से बाहर आकर इस बात की जानकारी स्वयं सपा प्रत्याशी तेज बहादुर यादव ने दी। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं अब नए समीकरणों में सपा की दूसरी प्रत्याशी शालिनी यादव चुनावी मैदान में हैं। बताया गया कि चुनाव आयोग ने नामांकन के वक्त सेना से बर्खास्तगी का पत्र नहीं लगाने को आधार बनाया है।
जिला निर्वाचन कार्यालय से निकले तेजबहादुर और सपा नेताओं ने कहा कि हाईकमान के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला होगा। इसके बाद सपा नेताओं के साथ तेजबहादुर यादव पार्टी कार्यालय वापस लौट गए। यहां पर पार्टी पदाधिकारियों ने आपसी परिचर्चा कर पार्टी शीर्ष नेतृत्व को इस प्रकरण से अवगत कराया। उम्मीद है अब शालिनी यादव सपा की ओर से मैदान में होंगी या तेजबहादुर मामले पर सपा सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी इसका फैसला अखिलेश यादव ही करेंगे।
वहीं इससे पूर्व पहले निर्दल और बाद में सपा के सिंबल पर नामांकन फार्म दाखिल करने वाले बीएसएफ के बर्खास्त फौजी तेज बहादुर यादव को जिला निर्वाचन अधिकारी से नोटिस मिलते ही सपा में हड़कंप मच गया। सोमवार को नामांकन कराने शालिनी यादव के साथ पहुंचे सपा नेता मंगलवार को तेजबहादुर के साथ नामांकन स्थल पर पहुंचे थे। वे तेज बहादुर का नामांकन फार्म को वैध कराने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने के साथ मौके पर डटे रहे। फिर भी जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी कर एक मई को सुबह 11 बजे तक मोहलत देते हुए जवाब मांगा गया था। वाजिब जवाब नहीं मिलने पर उनके फार्म को अाखिरकार खारिज कर दिया गया।
सपा कार्यकर्ताओं में निराशा : दोपहर तक चले संशय के बाद बुधवार दोपहर 1.35 बजे तेजबहादुर यादव को निर्वाचन कार्यालय में बुलाया गया। इसके बाद दोपहर 2.35 बजे स्थिति कुछ और स्पष्ट हुई जब और जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से उनके वकील बाहर निकले और बताया कि जो होगा अच्छा होगा। हालांकि इस दौरान तेजबहादुर यादव जिला निर्वाचन अधिकारी के पास ही मौजूद रहे। हालांकि साढे तीन बजे सपा प्रत्याशी ने वाराणसी से अपना नामांकन रद होने की सूचना स्वयं मीडिया को देते हुए फैसले से असंतोष जाहिर करते हुए कोर्ट जाने की बात कही है। जिला निर्वाचन अधिकारी के फैसले से सपा कार्यकर्ताओं में निराशा फैल गई।
निर्वाचन अधिकारी की त्रुटि वायरल : एक ओर जिला निर्वाचन अधिकारी ने त्रुटि पर तेज बहादुर यादव को नोटिस जारी की वहीं दूसरी ओर जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से एक भारी भूल भी नोटिस में कर दी गई। तेजबहादुर को जारी नोटिस में दिनांक 01-05-2109 कर दिया गया। जबकि यह वर्ष 2019 होना चाहिए था। सोशल मीडिया पर यह सूचना वायरल होने के बाद देर रात डीएम ने इस सूचना में सुधार कराया। हालांकि तब तक यह त्रुटि सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी। वहीं तेजबहादुर के समर्थकों की ओर से भी यह लापरवाही पर जिला प्रशासन को सोशल मीडिया में कठघरे में खड़ा किया जा रहा है।
बोले तेज बहादुर यादव : निर्वाचन अधिकारी से मिलकर आने के बाद तेजबहादुर ने मीडिया से बातचीत भी की। तेज बहादुर का कहना है कि बीएसएफ की तरफ से चुनाव आयोग को पत्र दिया जा चुका है कि अनुशासन हीनता में उनको बर्खास्त किया गया था। इसमें किसी भी प्रकार से चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि पीएमओ के इशारे पर देर की जा रही है। तेजबहादुर ने बताया कि रात 12 बजे उनके वकील को जिला निर्वाचन कार्यालय से फोनकर बुलाया गया और बीएसएफ से पत्र मंगाने के लिए कहा गया।
दोपहर साढे तीन बजे आया फैसला : सुबह निर्वाचन कार्यालय में तेज बहादुर यादव अपने अधिवक्ता की ओर से जवाब दाखिल करने पहुंचे। जवाब सुनने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने पहले 12.40 बजे तक की मोहलत मांगी। हालांकि समय बीतने के बाद साढे तीन बजे फैसला हो सका। वहीं दूसरी ओर बीजेपी की ओर से जिला निर्वाचन कार्यालय में तेजबहादुर के चुनाव लड़ने पर रोक की मांग करते हुए आपत्ति भी दाखिल की गई।
बुधवार सुबह से सियासी सरगर्मी : बुधवार की सुबह 11 बजे से पूर्व तेज बहादुर यादव अपने वकील के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी से मिलने पहुंचे। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी तेज बहादुर के पर्चे पर सुनवाई के पहले समर्थक डीएम पोर्टिको के बाहर धरने पर बैठ गए। तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने की आशंका के बीच धरने पर बैठे समर्थकों ने अनवरत धरने की चेतावनी दी तो विवाद होने की सूरत के बीच एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को मौके पर पहुंचकर मनाया, इसके बाद शांति की स्थिति बनी।
शपथ पत्र से उठे सवाल : जिला निर्वाचन के अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने सपा प्रत्याशी तेज बहादुर यादव से नोटिस के जरिए पूछा था कि भारत सरकार या किसी राज्य के अधीन पद धारण करने के दौरान भ्रष्टाचार के करण या अभक्ति के कारण पदच्युत किया जाता है। ऐसे पदच्युत की तारीख आप ने अपने विवरण में 19 अप्रैल 2017 लिखा है। आप की ओर से दिए गए द्वितीय नामांकन फार्म के शपथपत्र में उल्लेख किया गया है कि गलती से पहले नामांकन फार्म में नहीं की जगह हां लिख दिया गया है। शपथपत्र में बयान दिया गया है कि 19 अप्रैल 2017 को बर्खास्त किया गया है लेकिन भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा पदधारण के दौरान भ्रष्टाचार एवं अभक्ति के कारण पदच्युत नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि आप अभक्ति या भ्रष्टाचार के कारण पदच्युत किए जाने, न किए जाने पर निर्णायक साक्ष्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। आपके द्वारा दोनों नाम निर्देशन पत्र के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया है। नोटिस का जवाब मिलने पर ही विचार किया जाएगा।
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