Sunday, September 25, 2022

झारखंड सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा 3 दिवसीय प्रशिक्षण हेतु मुंबई पहुंचे





झारखंड सरकार पंचायती राज विभाग द्वारा झारखंड प्रदेश से 8 सदस्य नवनिर्वाचित पंचायत जन प्रतिनिधि मंडल को तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए महाराष्ट्र के पुणे भेजा गया। इसकी सूचना शिव शंकर प्रसाद जिला पंचायत राज पदाधिकारी गिरिडीह (District panchayat Raj officer) ने संस्था झारखंडी एकता संघ (मुंबई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी को फोन करके दिए। झारखंडी एकता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल दिनांक 23/09/2022 को राष्ट्रीय अध्यक्ष असलम अंसारी के नेतृत्व में दिनेश यादव, वकील अंसारी, फारूक अंसारी और वीरेंद्र पंडित झारखंड प्रदेश से प्रशिक्षण शिविर पुणे में आए पंचायत जनप्रतिनिधियों से एक शिष्टाचार मुलाकात कर झारखंडी एकता संघ मुंबई/झारखंड की ओर से झारखंड प्रवासी मज़दूरों के जनहित में किये गए कार्यो, प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों में हो रही समस्याओं, झारखंड प्रदेश के मजदूरों की लगातार हो रही पलायन एवं दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूरों की लगातार मृत्यु होने की घटना से झारखंड प्रदेश से महाराष्ट्र पुणे आए जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया। इस पर झारखंड पंचायत जनप्रतिनिधियों ने प्रवासी मजदूर के हितों में कार्य कर रही संस्था झारखंडी एकता संघ मुंबई के कार्यों की तारीफ करते हुए प्रवासी मजदूरों से संबंधित सभी समस्याओं को झारखंड के पदाधिकारियों एवं सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिए। और संस्था को हर संभव मदद एवं झारखंड प्रदेश में पंचायत स्तरीय जागरूकता अभियान एवं सभी श्रमिकों का निबंधन कार्यों में सहयोग करने का भरोसा दिलाया। झारखंड प्रदेश में बहुत जल्द सरकारी पदाधिकारियों एवं संस्था झारखंडी एकता संघ मुंबई के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। झारखंड प्रदेश से महाराष्ट्र पुणे आए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जनप्रतिनिधियों  में परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता देवी (जिला बोकारो), प्रमुख श्री रामू बैठा (प्रखंड बिरनी, जिला गिरिडीह), मुखिया श्रीमती स्वेता बाखला (ग्राम पंचायत बीरबांकी, प्रखंड अबकी, जिला खूंटी), मुखिया श्रीमती मंजू सुरीन (ग्राम पंचायत खटखुरा, प्रखंड रनिया, जिला खूंटी), मुखिया श्री धीरेन्द्र मंडल (ग्राम पंचायत रेम्बा, प्रखंड जमुआ, जिला गिरिडीह), मुखिया श्री सीताराम वर्मा (ग्राम पंचायत गोरो, प्रखंड जमुआ जिला गिरिडीह) शामिल हैं।

अंकिता भंडारी कांड;सत्ता के नशे में डूबे रशूखदारों की घिनौनी कारगुजारी



सत्ता के नशे में डूबे लोगों ने इस मासूम को सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि इसने गलत काम करने से इंकार कर दिया था। अंकिता सिर्फ 22 दिन ही नौकरी कर पाई थी। पिछले सात दिनों से वो लापता थी, जिसके बाद शनिवार को उसकी लाश मिली थी। अंकिता के ऊपर खास गेस्ट के लिए खास काम करने के लिए दवाब बनाया जा रहा था, जिससे वो इंकार कर रही थी।

कौन थी अंकिता भंडारी:

अंकिता भंडारी एक साधारण परिवार से आती थी। उसकी आंखों में भी बाकी लड़कियों की तरह ऊंची उड़ान भरने के सपने थे। परिवार के मना करने के बाद भी होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही थी। 19 साल की अंकिता पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर रही थी। इस नौकरी से वो ज्यादा खुश नहीं थी, इसलिए दूसरी नौकरी की तलाश भी कर रही थी।



पुलिस ने हत्या को लेकर क्या कहा:

डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि अंकिता भंडारी पर रिसॉर्ट के मालिक द्वारा मेहमानों को "विशेष सेवाएं" प्रदान करने का दबाव बनाया जा रहा था। उत्तराखंड के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि लड़की की अपने एक दोस्त के साथ हुई बातचीत से ये पता चला है।

कौन था वो खास शख्स:

रिपोर्टों के अनुसार अंकिता के एक दोस्त ने दावा किया है कि उसे रिसोर्ट में आने वाले बड़े-बड़े लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए कहा जाता था, जिसका वो विरोध कर रही थी। रिसॉर्ट के मालिक अंकिता से वेश्यावृति करने के लिए कहते थे। जब अंकिता नहीं मानी तो उन्होंने उसकी हत्या कर दी।  


कौन-कौन पकड़ाया:

अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद भाजपा ने विनोद आर्य और उनके बेटे अंकित को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। अंकिता भंडारी का शव चीला नहर से बरामद किया गया था, जहां आरोपी ने उसे कथित तौर पर मार कर फेंक दिया था। कहा जा रहा है कि मामले में गिरफ्तार आरोपी पुलकित आर्य, रिसॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता ने अंकिता की हत्या कर शव को नहर में फेंकने की बात कबूल कर ली है। हत्या के तीनों आरोपियों को एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

Saturday, September 24, 2022

अब ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के पढ़ाई की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी सेविकाओं पर:शिक्षा मंत्री



ग्रामीण इलाकों में अब सेविका-सहायिका ही आंगनबाड़ियो में बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेवारी उठाएगी। इसके लिए एक नया प्रस्ताव शिक्षा मंत्रालय में आ चुका है खेल-खेल में पढ़ाई का। सूबे के शिक्षा मंत्री सह उत्पाद-मद्य निषेद्य मंत्री जगरन्नाथ महतो ने इस नए प्रस्ताव की जानकारी प्रेसवार्ता के दौरान शनिवार को गिरिडीह में दिया। सेविका-सहायिका के आभार व्यक्त कार्यक्रम में शामिल गिरिडीह पहुंचे शिक्षा मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। मंत्री ने कहा कि यह अब तक का राज्य में नया फार्मूला है। जिस पर हेमंत सरकार कार्य करने जा रही है। इसके लिए सेविका-सहायिका को उनके मानेदय के बाद 2 हजार का मानेदय अतिरिक्त भुगतान करेगी। मंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव से जुड़ा फाईल उनके पास आ चुका है। लिहाजा, जल्द ही इसका स्वीकृति दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री महतो ने पत्रकारों से बातचीत के क्रम में कहा कि इस फार्मूले का मकसद सिर्फ यही है कि हर रोज आंगनबाड़ी केन्द्र आने वाले बच्चों को पढ़ाई की आदत लग सके। क्योंकि शुरुआती दौर में उन्हें आदत लगने के बाद बच्चों को एक मेद्यावी छात्र बनने का रास्ता आसान हो जाएगा। और इसलिए इस प्रस्ताव पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। एक सवाल के बाद मंत्री ने गिरिडीह के डीएसई विनय कुमार को निर्देश दिया कि कोरोना काल में मध्याह भोजन के राशि वितरण में गड़बड़ी हुई है। तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। जबकि एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि जल्द ही पूरे राज्य के कॉलेजों में शिक्षकों का बहाली किया जाएगा। अब इसकी प्रकिया में हेमंत सरकार जुटी हुई है। क्यांेकि जब उच्च शिक्षण संस्थान में सही तरीके से प्रोफेसर नहीं होगेी, तो छात्रों की क्या पढ़ाई होगी। इधर प्रेसवार्ता के दौरान सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू भी मौजूद थे।

आइपीएल मैच में हार के रुपयों के लिए दोस्तों ने कर दी हर्षित की हत्या

 

File Photo....

धनबाद।

महुदा रेलवे कालोनी निवासी रेलवे ठेकेदार विंध्याचल यादव के 14 वर्षीय पुत्र हर्षित कुमार यादव की हत्या कर उसके दो साथियो ने शव को दफना दिया था। देर रात महुदा पुलिस ने उसका शव ब्लॉक दो के जमुनिया समीप एक गडढे से बरामद किया। बताया जाता कि आइपीएल मैच में हर्षित ने सट्टा लगाया था, जिसमें वह चालीस हजार रुपया हार गया था। उसी पैसे के लिए उसकी हत्या की गयी थी। इस संबंध में विंध्याचल यादव ने कल  शाम महुदा थाना में एक आवेदन देकर अपने पुत्र के अपहरण की आंशका जतायी थी। उसने संदेह के आधार पर दो युवको के नाम पुलिस को बताया था। पुलिस उन दोनो युवको को थाना लाकर पुछताछ कर रही थी। पुलिस द्वारा कड़ाई से पुछताछ करने पर दोनो ने रूपयो के लिए हर्षित की हत्या कर शव को दफना दिये जाने की बात कबूल की। उन दोनो की निशानदेही पर पुलिस ने हर्षित के शव को देर रात ही बरामद कर लिया।
 दोनो युवक खरखरी ओपी क्षेत्र के मधुबन चौहान पट्टी के रहने वाले बताये जाते हैं।

दुर्गा पूजा को लेकर विधि व्यवस्था व सुरक्षा व्यवस्था हेतु उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक



दशहरा पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण एवं आपसी भाईचारा के साथ मनायें:- उपायुक्त...

● सभी अनुमंडल पदाधिकारी/अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी/प्रखंड विकास पदाधिकारी/थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत शांति समिति की बैठक करना सुनिश्चित करें: उपायुक्त...
● असमाजिक तत्वों और सोशल नेटवर्किंग साइट्स यथा फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि पर विशेष निगरानी रखेंगे। साथ ही सोशल मीडिया के एडमिन के साथ बैठक करेंगे:- उपायुक्त...
● अवैध शराब कारोबारी/दुकानों की सूचना इकट्ठा कर उसपर उचित कारवाई करना सुनिश्चित करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि कोई भी शराब दुकान सुबह 10:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक ही संचालित हो:- उपायुक्त...
● प्रतिनियुक्त पदाधिकारी, दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, पुलिस बल मुस्तैद रहेंगे:- पुलिस अधीक्षक.. ● अफवाह/असमाजिक तत्वों तथा अशांति फैलाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखते हुए जिला प्रशासन को ससमय सूचित करें:- पुलिस अधीक्षक...
● संवेदनशील स्थानों पर नजर रखेंगे और संवेदनशील स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग करना सुनिश्चित करेंगे:- पुलिस अधीक्षक... गिरिडीह।
आज समाहरणालय सभागार कक्ष में आगामी दशहरा पर्व/दुर्गा पूजा के निमित्त विधि व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए जिले के वरीय पदाधिकारियों/पुलिस पदाधिकारियों/दंडाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में उपायुक्त ने कहा कि दशहरा पर्व सौहार्दपूर्ण वातावरण एवं आपसी भाईचारा के साथ मनाया जाए एवं अफवाह तथा अशांति फैलाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखते हुए जिला प्रशासन को स-समय सूचना दें। बैठक के दौरान उपायुक्त, श्री नमन प्रियेश लकड़ा ने जिलेवासियों को दुर्गा पूजा सरकार की गाइडलाइन के आधार पर शांतिपूर्ण एवं आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की। उपायुक्त ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों/प्रखंड विकास पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों से उनके अनुमंडल/प्रखंड व थाना अंतर्गत दुर्गापूजा के लेकर की गई तैयारियों एवं व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत पूजा समितियों के साथ शांति समिति की बैठक करें। समितियों को सरकार की गाइडलाइन से अवगत कराएं। सभी पूजा पंडालों का निरीक्षण करें। जितने भी तालाब है उन सभी की साफ-सफाई सुनिश्चित कराएं। त्योहार के दौरान विधि व्यवस्था सहित विद्युत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई इत्यादि को दुरुस्त करने को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। शहर के आसपास के जिन क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत की आवश्यकता है उन्हें मरम्मत कराने को संबंधित अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिया। शोभा यात्रा में रूट चार्ट का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके अलावे मुर्ति विसर्जन में भी निर्धारित समय का विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, थाना प्रभारी से बारी-बारी दशहरा पर्व के मद्देनजर तैयारियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पुजा के दौरान ट्रैफिक कन्ट्रोल की दिशा में भी चर्चा की गई। आग की रोकथाम एवं बचाव हेतु सभी पण्डालों मे फायर एक्सीटीन्गुइशर की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शहर के झुले/लटकते हुए सभी बिजली के तार को दुरूस्त करने का निर्देश दिया। साथ ही मानसरोवर तालाब की साफ सफाई सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी सभी सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण वातावरण में दुर्गा पूजा मनाये। कोई ऐसी गलती न हो, जिससे की प्रशासन को कानूनी कार्रवाई करनी पड़े। पुलिस अधीक्षक ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों/अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों/प्रखंड विकास पदाधिकारियों तथा थाना प्रभारियों से पुजा समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर कार्यों की जिम्मेवारी तय करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने आवागमन की सुगमता को देखते हुए प्रतिमा के ऊंचाई पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही पुजा पण्डाल में संचालित होने वाले साउण्ड सिस्टम के ऑपरेट की सूची भी संबंधित थाना को देने की बात कही। थाना प्रभारी को सभी साउण्ड सिस्टम के प्रतिनिधियों से बैठक कर सुप्रीम कोर्ट के गाईडलाईन का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया। विधि-व्यवस्था संधारण की दिशा में समिति के वोलेन्टीयर की तैनाती पूरी तर्त्पता के साथ सुनिश्चित करवाने की बात कही। उन्होने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना मिलने पर डायल 100 या स्थानीय प्रशासन को सूचित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कन्ट्रोल रूम, विडियोग्राफी, ड्रोन एवं सीसी टीवी कैमरा से निगरानी की जाएगी। ट्रैफिक कन्ट्रोल के लिए ट्रैफिक पुलिस की प्रतिनियुक्ति होगी। ट्रैफिक कन्ट्रोल हेतु वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। रावण दहन के दिन रूट डायभट करने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर संवेदनशील स्थानों पर नियमित पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया। साथ ही जो व्यक्ति 307, 153, 302 केसेस में शामिल है, उनपर 107 की कारवाई करना सुनिश्चित करेंगे। अवैध शराब और अवैध पशु का ट्रांसपोर्टेशन होने पर कड़ी कारवाई करें। बैठक के दौरान उपरोक्त के अलावा एएसपी, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, निदेशक डीआरडीए, उप नगर आयुक्त, नगर निगम, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, गिरिडीह जिला, जिला नजारत उप समाहर्ता, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी, सभी थाना प्रभारी, गिरिडीह जिला, कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल व अन्य संबंधित अधिकारी एवम पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

Sunday, February 6, 2022

झारखंड: नींव की खुदाई में निकले तीर-धनुष, 1857 की क्रांति से जुड़े हो सकते हैं यह हथियार




रांची।
झारखंड के लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर घर बनाने के लिए नींव की...* झारखंड के लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर घर बनाने के लिए नींव की खुदाई की गई तो जमीन से तीर, धनुष, गदा निकले. इनमें तीरों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है. इन शस्त्रों को देखकर ऐसा लग रहा है कि प्राचीन काल में इन्हें यहां पर छुपाया गया होगा. जैसे ही इस घटना की सूचना गांव में फैली मौके पर भारी संख्या में लोग इन शस्त्रों को देखने के लिए इकट्ठा हो गए. ब्राह्मणडीहा करंज टोली गांव में रहने वाला सुमंत टाना भगत नाम का शख्स घर बनाने के लिए जेसीबी से नींव की खुदाई करा रहा था. इस दौरान उसे जमीन के अलग-अलग हिस्सों से तीर, धनुष, गदा मिले. बताया जा रहा है कि शुरू में कुछ सामान कुछ समझ नहीं आया और गांव के लोग कुछ सामान उठाकर ले गए. जब ज्यादा संख्या में हथियार मिलने शुरू हुए तो घर के मालिक ने इन्हें इकट्ठा करना शुरू कर दिया. इनमें करीब दो दर्जन तीर हैं, इसके अलावा कुल्हाड़ी. हंसुए जैसा हथियार भी है. अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े भी मिले अज्ञात धातु के कलात्मक बर्तन के टुकड़े हैं. काफी चीजों में जंग लग चुका है पर कुछ की स्थिति अच्छी है. संभावना जताई जा रही है कि इस जमीन में और भी पुरातात्विक महत्व के अवशेष हो सकते हैं. रांची यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्राध्यापक डॉक्टर कंजीव लोचन ने बताया कि इन चीजों का ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है. इनके अध्ययन से लोहरदगा और झारखंड के प्राचीन इतिहास से संबंधित नई जानकारी मिल सकती है. किसी भी औजार में छेद नहीं दिख रहा, यह इनके बहुत पुराना होने का लक्षण है. 1857 की क्रांति से जुड़े हथियार एक ही पैटर्न के कई पात्र मिले हैं, ऐसी संभावना जताई जा रही है कि यह रसोई के अवशेष न होकर किसी लुहार की दुकान के अवशेष हो सकते हैं. अगारिया जनजाति का काम हो सकता है. लोहरदगा कई आंदोलन और सशस्त्र क्रांति की भूमि रहा है. 1831 के लरका आंदोलन, 1857 की क्रांति सहित कई सशस्त्र आंदोलन यहां हुए हैं. इस दौरान हुए युद्धों का इतिहास में जिक्र मिलता है. हथियारों के इन प्राचीन अवशेषों को उन्हीं आंदोलनों से जोड़कर देखा जा रहा है. 10 साल पहले खुदाई के दौरान मिले थे अवशेष स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 10 साल पहले इस स्थान पर सड़क बन रही थी. तब भी जमीन की खुदाई में इस तरह के हथियार और अन्य अवशेष मिले थे. लेकिन उस समय इनकी ज्यादा चर्चा नहीं हुई थी और ग्रामीणों ने ही उन्हें इधर-उधर कर दिया था इस बार अवशेषों ने लोगों की उत्सुकता को बढ़ाया है. इन अवशेषों की पुरातात्विक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह इतिहास के किस दौर और घटना से जुड़े हुए हैं.

लता मंगेशकर पर विशेष;लता : भूतो न भविष्यति....



 

( राजेश झा,विश्व संवाद केंद्र मुंबई) 
लता दीदी के जीवन पर प्रकाश डालना सूरज को दीपक दिखाना है। माना जाता हैं कि लीजेंड पैदा नही होते अवतरित होते हैं। लता दीदी पृथ्वी पर भारत की पुण्य भूमि में अवतरित ही हुई थी। 

लता दीदी के निजी जीवन में पोलिटिकल करेक्टनेस की बीमारी उन्हें कभी छू भी नही पाई थी।

वीर सावरकर देश की आजादी के बाद जब जेल से छूटे तो लता दीदी उनके स्वागत में उनको पिक करने पहुँची थी।

लता दीदी ने जिस दौर में भाजपा को एक वर्ग अछूत समझता था या खुले मंच पर चुप रहने का ढोंग करता था, उस दौर में लता दीदी बोली थी कि मैं चाहती हूँ कि अटल भाई प्रधानमंत्री बने, इसके पीछे जनसंघ/भाजपा से लगाये अटल भाई का पचास साल का तप भी हैं। 

नरेंद्र मोदी के लिये भी उन्होंने चुप्पी तोड़ी थी। 

हाँ गैर राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण किसी सरकार या व्यक्ति को कभी इन्होंने असहज नही किया था। हाँ, पर अपना अनुराग भी इन्होंने कभी छिपाया नही था।

लता दीदी का व्यक्तित्व ऐसा था कि इन्हें सभी प्यार करते हैं। 

लालकिला पर एक बार पंडित प्रदीप के लिखे गीत को लता दीदी की आवाज में सुनकर पण्डित नेहरू भी रोने लगे थे। भावुक होकर बोले थे कि ऐसे गीत भी  सिनेमा जगत में लिखे गाये जाते हैं क्या ? 

लता दीदी से सभी प्यार करता हैं। कोई किसी भी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा, बोली, आदि से सम्बंधित हो... किसी भी फील्ड या पेशे में हो... लता दीदी के आभामंडल से वशीभूत रहता ही हैं। 

कभी कोई पद या सम्मान किसी को मिलता हैं तो उस व्यक्ति का कद बढ़ता हैं। लता मंगेशकर दीदी उन विरले लोगो मे हैं, जिन्हें भारत रत्न मिला था तो भारत रत्न का सम्मान बढ़ा हैं।  
विनम्र श्रद्धांजलि ....

भारतरत्न सुश्री लता मंगेशकर देश की सबसे लोकप्रिय एवं आदरणीय गायिका थीं।  प्रारंभिक काल में उन्होने कुछ मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय तथा फिल्मोद्योग में पैर सुदृढ़ता से जम जाने पर कुछ मराठी फिल्मों व हिंदी फिल्मों का निर्माण भी किया।पांच फिल्मों का संगीतनिर्देशन भी किया। जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्याधुनिक अस्पताल भी उन्होने बनवाये।  लेकिन उनकी पहचान "भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायिका  " के रूप में ही की जाती है।उन्होने हिंदी, मराठी एवं बांग्ला सहित 36 से अधिक भाषाओं में फिल्मी तथा गैर-फिल्मी गाने गाये हैं।उनकी मनमोहिनी आवाज में ऐसा जादू है जो हर सुननेवाले को मंत्रमुग्ध कर देती है।लता की जादुई आवाज़ के भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं। टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्राज्ञी स्वीकार किया है। उनको संगीत  के क्षेत्र में अनुपम योगदान के लिए 'पद्मभूषण' , 'पद्मविभूषण' तथा  'भारत रत्न' ,दादा साहेब फाल्के चारों  नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया गया। 

पुरा नाम- लता दीनानाथ मंगेशकर
जन्म- 28 सितंबर, 1929
स्थान- मध्य प्रदेश, इन्दौर
पिता- दीनानाथ मंगेशकर
माता- शेवंती मंगेशकर  
मृत्यु -६ फरवरी २०२२

प्रारंंभिक जीवन

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को भारत स्थित मध्य प्रदेश जिला के इन्दौर में हुआ था। वे पंडित दीनानाथ मंगेशकर और शेवंती की बड़ी बेटी थीं। लता के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर एक्टर थे जबकि माँ गुजराती थी और शेवंती उनकी दूसरी पत्नी थी। उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था, जिसकी मृत्यु के बाद दीनानाथ ने नर्मदा की छोटी बहन शेवंती को अपनी जीवन संगिनी बनाया।गोआ में मंगेशी के मूल निवासी होने के कारण पंडित दीनानाथ हार्डीकर ने अपना उपनाम ( सरनेम )बदलकर उन्होंने मंगेशकर कर लिया। उनकी और शेवंती की पहली संतान थीं हेमा थीं जिसे बदलकर लता कर दिया गया। यह नाम दीनानाथ को अपने नाटक ‘भावबंधन’ के एक महिला किरदार लतिका के नाम से मिला। लता के बाद मीना, आशा और हृदयनाथ का जन्म हुआ। बचपन से ही लता को घर में गीत-संगीत और कला का वातावरण मिला और वे स्वभावतः  उसी की तरफ आकर्षित हुई।लता मंगेशकर ने अपना कला क्षेत्र का पहला पाठ अपने पिता से सीखा था। पाँच साल की उम्र में लता  ने अपने पिता के म्यूजिकल नाटक के लिये एक्ट्रेस का काम करना शुरू किया था । स्कूल के पहले दिन से ही उन्होंने बच्चो को गाने सिखाने शुरू कर दिये थे। जब शिक्षको ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वह बहुत गुस्सा हो गयी थी , लेकिन अपनी छोटी बहन आशा को भी स्कूल ले जाने पर  जब शिक्षको ने उन्हें बैठने की अनुमति नहीं दी तो इससे लता को बहुत दुःख हुआ  और उन्होने भी स्कूल जाना ही छोड़ दिया । दीनानाथ मंगेशकर की मृत्यु 1942 में हो गई तब लता मात्र 13 साल की थीं। वे अपने सभी भाई और बहनों में सबसे बड़ी थीं  तो उनपर घर का आर्थिक दायित्व आ गया और उन्होने अभिनय तथा गायन दोनों के द्वारा धनार्जन प्रारम्भ कर दिया। एक मराठी फिल्म के लिए उनकी आवाज में एक गाना रिकॉर्ड किया गया , लेकिन जब  फिल्म रिलीज हुई तो उसमें लता का गाया गाना नहीं था। इस बात से लता  बहुत आहत हुई।दीनानाथ के अच्छे मित्र विनायक दामोदर एक फिल्म कंपनी के मालिक थे, जिन्होने दीनानाथ  की मृत्यु के बाद लता जी के परिवार को बहुत सहारा दिया।

1945 में लता मंगेशकर जी मुंबई आ गई और इसके बाद उनका करियर धीरे -धीरे आकार लेने लगा।लता मंगेशकर ने संगीत की शिक्षा  उस्ताद अमानत अली खान से संगीत की शिक्षा लेना शूरू कर दिया। वर्ष 1947 में विभाजन के बाद उस्ताद अमानत अली खान पाकिस्तान चले गये इसलिए वो भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत सीखने लगीं।   1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर उनके संगीत गुरु बने। लता मंगेशकर ने  विनायक  दामोदर की दूसरी हिंदी फिल्म सुभद्रा , फिर  फिल्म "बड़ी माँ" (1945) में भजन गाये। उनके गाए भजन ‘माता तेरे चरणों में’ 1946 में रिलीज हुई। वर्ष 1947 में हिंदी फिल्म ‘आप की सेवा में’ के लिए भी एक गाना गया, लेकिन सफलता लता से अब भी बहुत दूर थी । गुलाम हैदर ने लता मंगेशकर की मुलाकात शशधर मुखर्जी से कराई जो उन दिनों फिल्म "शहीद" पर काम कर रहे थे। लेकिन मुखर्जी ने यह कहकर मना कर दिया कि उनकी आवाज पतली है।उस समय गायिका नूरजहाँ,शमशाद बेगम, जोह्राबाई अम्बलेवाली का दबदबा था,  उनकी आवाज भारी व अलग थी, उनके सामने लता की आवाज काफी पतली और दबी हुई लगती थी।उसके बाद गुलाम हैदर  ने लता जी को फिल्म " मजबूर" में मौका दिया जिसमे उन्होंने “दिल मेरा तोडा ,मुझे कही का न छोड़ा ” गाना गाया जो उनके जीवन का पहला हिट गाना बना यही कारण है कि लता जी गुलाम हैदर साहब को ही अपना गॉडफादर मानती थी। समय बदला , 1949 में लता जी ने लगातार 4 हिट फिल्मों में गाने गए और सभी गानें बहुत पसंद किये गए ' बरसात', 'दुलारी', 'अंदाज' व 'महल' फिल्में हिट थी, इसमें से 'महल' फिल्म का गाना ‘आएगा आनेवाला’ सुपर हिट हुआ और लता के पैर हिंदी सिनेमा जगत जम गए ।


लता मंगेशकर ने उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया। अनिल बिस्वास, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन, नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र इत्यादि सभी संगीतकारों ने इनकी प्रतिभा का लोहा माना। लता ने 'दो आँखें बारह हाथ', 'दो बीघा जमीन',' मदर इंडिया', 'मुगल ए आजम' आदि महान फिल्मों में गाने गाये। “एक थी लड़की”, “बड़ी बहन” आदि फिल्मों की  लोकप्रियता लता के गाये गीतों ने  चार चाँद लगाए। इस दौरान आपके कुछ प्रसिद्ध गीत थे “ओ सजना बरखा बहार आई” (परख-1960), “आजा रे परदेसी” (मधुमती-1958), “इतना ना मुझसे तू प्यार बढा़” (छाया- 1961), “अल्ला तेरो नाम”, (हम दोनों -1961), “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, (जंगली-1961), “ये समां” (जब जब फूल खिले-1965) इत्यादि।
बाद के वर्षों में उन्होंने संगीत के हर क्षेत्र में अपनी कला ऐसी बिखेरी जैसे कि गीत, गजल, भजन सब विधा में उनका वर्चस्व बढ़ने लगा। गीत चाहे शास्त्रीय संगीत पर आधारित हो, पाश्चात्य धुन पर हो या फिर लोकधुन की खुशबू से सराबोर हो-हर गीत को लता ने ऐसे जीवंत रूप में पेश किया कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाय । उन्होने मन्ना डे , मुहम्मद रफी, किशोर कुमार, महेंद्र कपूर आदि के साथ-साथ दिग्गज शास्त्रीय गायकों पं भीमसेन जोशी, पं जसराज इत्यादि के साथ भी मनोहारी युगल-गीत गाए। गजल के बादशाह जगजीत सिंह के साथ एलबम “सजदा” ने लता को अद्वितीय , अतुलनीय बना दिया। 


लता मंगेशकर ने 1953 में सबसे पहले मराठी फिल्म ‘वाडई‘ बनाई फिर  इसी वर्ष उन्होंने संगीतकार सी. रामचंद्र के साथ मिलकर हिंदी फिल्म ‘झांझर‘ का निर्माण किया था। तत्पश्चात 1955 में हिंदी फिल्म ‘कंचन‘ बनाई। उपरोक्त तीनों औसत फिल्में थीं। 1990 में उनकी फिल्म ‘लेकिन‘ हिट होने के बाद लता जी ने पांच फिल्मों में संगीत निर्देशन दिया था। सभी फिल्में मराठी थीं और 1960 से 1969 के बीच बनी थीं। बतौर संगीत -निर्देशक उनकी पहली फिल्म राम और पाव्हना (1960) थी। अन्य फिल्में मराठा टिटुका मेलेवा (1962), साहित्यांजी मंजुला (1963), साधु मानसे (1955) व तबाड़ी मार्ग (1969) थीं।

लता मंगेशकर की शादी नहीं हो पाई। बचपन से ही परिवार का बोझ उन्हें उठाना पड़ा। इस दुनियादारी में वे इतना उलझ गईं कि शादी के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली। बताया जाता है कि संगीतकार सी. रामचंद्र ने लता मंगेशकर के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, लेकिन लता जी ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि लता ने इस बारे में कभी खुल कर नहीं कहा, परंतु बताया जाता है कि सी. रामचंद्र के व्यक्तित्व से लता बहुत प्रभावित थीं और उन्हें पसंद भी करती थीं। सी. रामचंद्र ने कहा था कि लता उनसे शादी करना चाहती थीं, परंतु उन्होंने इंकार कर दिया क्योंकि वह पहले से शादीशुदा थे।

देश-भक्ति गीत

        1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे। इस समारोह में लता जी के द्वारा गाए गये गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर सब लोग भाव-विभोर हो गये थे। पं नेहरू की आँखें भी भर आईं थीं। ऐसा था आपका भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी स्वर। आज भी जब देश-भक्ति के गीतों की बात चलती है तो सब से पहले इसी गीत का उदाहरण दिया जाता है। लता मंगेशकर के कौन से गीत पसंद किए गए या लोकप्रिय रहे, इसकी सूची बहुत लंबी है।लता के गाये यादगार गीतों में इन फिल्मों के नाम विशेष उल्लेखनीय है – अनारकली, मुगले आजम अमर प्रेम, गाइड, आशा, प्रेमरोग, सत्यम् शिवम् सुन्दरम्।  उम्र बढ़ने के बाद भी लता की आवाज पहले की तरह न केवल सुरीली रही, बल्कि उसमे और भी निखार आ गया था, जैसे हिना, रामलखन, आदि ।एक समय उनके गीत ‘बरसात’, ‘नागिन’, एवं ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में भी लता ने ढेर सारे गाने गाए। जिनमें से अधिकांश पसंद किए गए। किसी को मदन मोहन के संगीत में लता की गायकी पसंद आई तो किसी को नौशाद के संगीत में। सब की अपनी-अपनी पसंद रही। लता  का कहना था कि मैं नहीं जानती कि उन्होंने कितने गाने गाए क्योंकि उन्होंने कोई रिकॉर्ड नहीं रखा। गिनीज बुक में भी उनका नाम शामिल किया गया था, लेकिन इसको लेकर खासा विवाद है। लगभग 6 से 7 हजार गीतों को लता ने अपनी आवाज दी है, ऐसा माना जाता है।

पुरस्कार और सम्मान
लता मंगेशकर को ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिले। जितने मिले उससे ज्यादा के लिए उन्होंने मना कर दिया। 1970 के बाद उन्होंने फिल्मफेअर को कह दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नहीं लेंगी और उनकी बजाय नए गायकों को यह दिया जाना चाहिए। लता को मिले प्रमुख सम्मान और पुरस्कार इस तरह से हैं।


पुरस्कार:

1. फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
2. राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 and 1990)
3. महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार (1966 and 1967)
4. 1969 - पद्म भूषण
5. 1974 - दुनिया मे सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड
6. 1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार
7. 1993 - फिल्म फेयर  पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
8. 1996 - स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
9. 1997 - राजीव गान्धी पुरस्कार
10. 1999 - एन.टी.आर. पुरस्कार
11. 1999 - पद्म विभूषण
12. 1999 - ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
13. 2000 - आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
14. 2001 - स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
15. 2001 - भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न"
16. 2001 - नूरजहाँ पुरस्कार
17. 2001 - महाराष्ट्र भूषण  1. फिल्म फेर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 and 1994)
 
1972 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-परी)
1974 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-कोरा कागज)
1990 – महिला पार्श्व गायिका राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (फिल्म-लेकिन)
1959 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आजा रे परदेसी’ (फिल्म-मधुमती)
1963 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘काहे दीप जले कही दिल (फिल्म-बीस साल बाद)
1966 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा’ (फिल्म-खानदान)
1970 – फिल्मफयर अवार्ड्स ‘आप मुझसे अच्छे लगने लगे’ (फिल्म-जीने की राह से)

1994 – विशेष पुरस्कार ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ (फिल्म-हम आपके हैं कौन)
2004 – फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड 50 साल पूरे करने पर
इसके साथ ही भारत में अनेक राज्यों द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त किया।

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