Saturday, December 1, 2018

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश का 94 की आयु में निधन

अमेरिका के कद्दावर नेता और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश का शुक्रवार को निधन हो गया. उनकी उम्र 94 वर्ष थी. उनके बेटे एवं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने बुश के निधन की घोषणा करते हुए उन्हें एक अच्छे व्यक्ति और सर्वश्रेष्ठ पिता बताया. बुश की पत्नी बारबरा बुश का इसी साल अप्रैल में निधन हुआ था. दोनों का वैवाहिक बंधन करीब 73 वर्ष का रहा.

अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति बुश विदेश नीति के अच्छे जानकार थे. वर्ष 1989 में सोवियत संघ के विघटन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. इसके करीब दो वर्ष बाद उन्होंने इराक के शक्तिशाली नेता सद्दाम हुसैन को पराजित करने के लिए एक अभूतपूर्व गठबंधन भी बनाया. सीआईए के पूर्व प्रमुख रहे बुश केवल एक कार्यकाल के लिए ही सत्ता में रहे.


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश

देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते वर्ष 1992 के चुनाव में उन्हें डेमोक्रेट उम्मीदवार बिल क्लिंटन से मात खानी पड़ी. राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय आम सहमति के पक्षधर रहे बुश की विचारधारा मौजूदा रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिल्कुल विपरीत थी. 2016 के चुनाव में बुश ने ट्रंप को अपना मत तक नहीं दिया. निधन के समय तक बुश अमेरिका के सबसे उम्रदराज जीवित राष्ट्रपति थे.

बराक ओबामा ने बुश के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका ने जॉर्ज हर्बर्ट वॉककर बुश के रूप में एक देशभक्त और विनम्र सेवक खो दिया है. मैं आज जहां बहुत गमगीन हूं वहीं मेरा दिल उनके प्रति आभार से भरा है.'' जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक बयान में कहा था, ‘‘जेब, नील, मार्विन, डोरो और मैं यह घोषणा करते हुए काफी दुखी हैं कि 94 वर्ष के सराहनीय जीवन के बाद हमारे प्रिय पिता का निधन हो गया.'' जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रवक्ता ने उनका यह बयान ट्विटर पर जारी किया. जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश का जन्म 12 जून 1924 को मैसचुसेट्स के मिल्टन में हुआ था.

लातेहार:उग्रवादियों ने धावा बोल स्टेशन परिसर में की फायरिंग कर आग लगाया ; दस गार्डो को बंधक बना की लूटपाट

दिलीप मल्टीपल ၊                           बालूमाथ(लातेहार) ၊ बालूमाथ थानांतर्गत बारियातु प्रखंड के अमरवाडीह ,फुलब्सिया रेलवे कोल साइडिंग स्टेशन में बीती रात्रि दहशत फैला कर लेवी वसूली करने के मकसद से शुक्रवार देर रात्रि एक बजे के आसपास आठ से दस की संख्या में हथियार से लैस उग्रवादियों ने धावा बोलकर स्टेशन परिसर में फायरिंग की ।एवं दस गार्डो को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट भी किया ।एवं उनके मोबाइल,पैसा एवं जरूरी कागज़ात भी लूट लिया ।फिर सभी गार्डो को एक कमरे में बंद कर दिया ।

 स्टेशन परिसर में खड़ी तीन मोटसाइकिल में आग लगा दिया ।आग लगने की वजह से स्टेशन परिसर भी जल गया ।वही कमरे में बंद गार्डो ने उग्रवादियों के भागने के बाद आगजनी की वजह से दम घुटने पर कमरे का शीशा तोड़कर अपनी जान बचाई ।वही उग्रवादियों ने घटना स्थल पर पर्चा भी छोड़ा हैं ।जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।

आज के दौर में सस्ती नहीं है , एक 'पत्रकार' की जान,जनाब!

एक और साल अपने अंत की ओर है। इस ख़त्म होते साल में कई घटनाएं महत्वपूर्ण और दुखद रहीं। लेकिन इस जाते हुए साल में उन लोगों की बात करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है जिनके कारण हम दुनिया की खबरें जान पाते हैं। “पत्रकार”।  

                                                            वर्त्तमान में हम लगातार अपने देश में नक्सलियों या माओवादियों द्वारा पत्रकारों की हत्या के बारे सुनते रहते हैं। लेकिन सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के देशों में कई पत्रकार अपनी जान अपने काम के दौरान खो देते हैं। कई पत्रकारों के मौत का तो हमें पता भी नहीं चलता। साल 2013 में दुनिया भर में सत्तर पत्रकार रिपोर्टिंग के दौरान मारे गए। जिनमें सबसे असुरक्षित क्षेत्र मध्य पूर्व साबित हुआ। “कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नालिस्ट” संस्था के अनुसार अकेले सीरिया में 29 पत्रकार मारे गए ,इसके अलावा इराक में फिर शुरू हुए सांप्रदायिक हमलों में 10 पत्रकारों ने अपनी जान गँवाई। मिस्र की क्रांति के दौरान भी छ: पत्रकार अनजानी मौत का निशाना बने। संस्था की ओर से बताया गया है कि पिछले साल 74 पत्रकार मारे गए थे। लेकिन इस ऐसे 25 और पत्रकारों को अभी इनमे शामिल नहीं किया गया और ये जांच की रही है की, क्या ये रिपोर्टिंग के दौरान ही मारे गए थे या नहीं।

फिलीपींस, भारत ,पाकिस्तान ,ब्राज़ील बंगलादेश ये ऐसे देश सामने आये हैं जिन्हे पत्रकारों के लिए संवेदनशील बताया गया है। ये फेहरिस्त और भी लम्बी है। लेकिन यहाँ इस बात पर ग़ौर किया जाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि किसी भी देश की सरकार की तरफ से इस मामले में अब तक कोई भी कदम नहीं उठाया गया है और न ही ऐसे कोई उपाए किये गए हैं, जिससे पत्रकार सुरक्षित महसूस कर सकें। अफ़ग़ानिस्तान ,पाकिस्तान और कश्मीर, यहाँ कई विदेशी पत्रकारों की हत्या 90 के दशक में की गयी। और समय के साथ साथ इन घटनायों का दायरा बढ़ता ही गया। भारत में भी और विश्व में भी। भारत के नक्सल प्रभावित राज्यों से अभी कुछ ही दिन पहले खबर आयी थी कि वहाँ के पत्रकारों ने नक्सलियों की किसी भी खबर का बहिष्कार कर दिया है। इसे एक हल के रूप में देखा जा सकता है ? नहीं। और इसके अलावा कुछ महीने पहले एक भारतीय पत्रकार पाकिस्तान गए। जहाँ उन्हें धमकियाँ और चेतावनी मिली कि “वापस चले जाओ” उन्हें बहुत ही हड़बड़ी में बिना काम किये वापस आना पड़ा। सुरक्षा की गारंटी के बिना कोई भी ऐसा ही करेगा। और पाकिस्तान वैसे भी तालिबान की वजह से बदनाम है।

      भारत में पत्रकारों की हत्या :                        पंजाब के बख्शी तीर्थ सिंह , गुजरात के दिनेश पाठक , नई दिल्ली की शिवानी भटनागर व इरफान हुसैन ,मणिपुर के एमए लाल रूहलू व थौन जोअम ब्रजमणि सिंह ,  झारखण्ड के अधीर राय , तमिलनाडु के वी सेल्वा राज , हरियाणा के राम चन्द्रा प्रजापति ,उत्तर प्रदेश के राजेश वर्मा , संजय पाठक ,हेमंत यादव , करुण मिश्रा व जोगेन्द्र सिंह,मध्य प्रदेश के साई रेड्डी व संदीप कोठारी  ,उड़ीसा के तरूण कुमार आचार्य , आंध्र प्रदेश के वीएन शंकर , बिहार के राजदेव रंजन , कर्नाटक की गौरी लंकेश, झारखण्ड के चंदन तिवारी.....၊             ख़ैर एक पाकिस्तानी पत्रकार का भी थोड़ा सा ज़िक्र कर दूं। जिन्हें देश के एक प्रधानमंत्री ने उनके चैनल से ही निकलवा दिया था। वजह थी उनके भ्रष्टाचार का बहंडाफोड़ करना। इसके अलावा जब उन नेता की कुर्सी गयी और दुसरे नेता के आने पर उन्होंने दोबारा चैनल में काम करना शुरू किया तब हालात ये आ गए की उनके चैनल पर हमला करवा दिया गया और 2013 में तालिबान ने उनकी कार में बम रखवा दिया। खुशकिस्मती से वे बच गए। वे पत्रकार हैं जियो चैनल के ”हामिद मीर” । हर कोई उन जैसा नसीब वाला नहीं होता इसी का अंजाम है कि हमने कई भारतीय और विदेशी पत्रकार बीतते साल में खोये। सवाल उठता है कि आखिर किसी सरकार ने अपने देश देश में इनकी सुध क्यों नहीं ली और क्या भविष्य में किसी सकारात्मतक की उम्मीद की जा सकती है। ज़ाहिर है इस सवाल का जवाब यूँ ही नहीं मिल सकता।       

                                                                         होना तो यह चाहिए कि इस पर भी “यूनाइटेड नेशन” में एक क़ानून बनना चाहिए ,एक संधि होनी चाहिए और प्रत्येक देश को ऐसी किसी भी घटना के लिए जवाबदेह होना चाहिए, क्योंकि पत्रकार की जान आज के दौर में सस्ती नहीं है, .....सस्ती नहीं है ,जनाब !.!

Friday, November 30, 2018

बोकारो: पंचायत राज उपचुनाव नावाडीह हेतु आज दो ने भरा पर्चा

बोकारो ၊ पंचायती राज उप चुनाव के तहत नावाडीह प्रखंड अंतर्गत एकमात्र गोनियटो पंचायत के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन दो प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया।  पर्चा दाखिल करने वालों में  गणेश सोरेन तथा रेवतलाल मांझी ने निर्वाची पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी नावाडीह के कार्यालय में अपना अपना पर्चा दाखिल किया। कार्यालय से बाहर निकलते ही उक्त दोनो प्रत्याशियों के समर्थकों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया।  एक अन्य उम्मीदवार राम कुमार मरांडी ने पिछले दिन ही अपना पर्चा दाखिल किया था। इस प्रकार अब गोनियाटो पंचायत से मुखिया पद के लिए कुल तीन उम्मीदवार हो गये। जबकि पोखरिया पंचायत के वार्ड सं.09के वार्ड सदस्य पद के लिए एकमात्र इन्दिया देवी ने पर्चा दाखिल किया है। 

निर्वाची पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी अंगारनाथ स्वर्णकार को पर्चा समर्पित करते गणेश सोरेन व रेवतलाल मांझी

आहरडीह पंचायत के वार्ड सं.07 के वार्ड सदस्य पद के लिए  एकमात्र प्रत्याशी मीना देवी ने पर्चा दाखिल किया।

वहीं भालमारा पंचायत के वार्ड सं.03, काछो पंचायत के वार्ड सं.01तथा गोनियटो पंचायत के वार्ड सं.02 के लिए वार्ड सदस्य पद के लिए किसी उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल नही किया।

प्रियंका चोपड़ा के हाथों में आज सजेगी निक जोनास के नाम की मेहंदी, शादी के लिए जोधपुर पहुंचे

 

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) मंगेतर और अमेरिकन सिंगर निक जोनास (Nick Jonas) के साथ जोधपुर पहुंच चुकी हैं. आज रात प्रियंका के हाथों में निक जोनास के नाम की मेंहदी सजेगी. मेहंदी के बाद प्रियंका-निक अपने रिश्तेदारों के साथ संगीत सेरेमनी एन्जॉय करेंगे. प्रियंका और निक (NickYanka Wedding) अपने करीबियों और रिश्तेदारों के साथ गुरुवार सुबह मुंबई से रवाना हुए और अब जोधपुर पहुंच चुके हैं. आज रात जोधपुर से उम्मेद भवन पैलेस में प्रियंका की मेहंदी और संगीत सेरेमनी का आयोजन होगा.

जोधपुर रवाना होने से पहले प्रियंका और निक मुंबई एयरपोर्ट पर मीडिया से रूबरू हुए. प्रियंका की बहन और एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा एयरपोर्ट पर स्पॉट हुईं. निक जोनस के दोनों भाई और भाभी भी यहां देखे गए.

लातेहार: आयुष्मान भारत योजना से गरीबों का नहीं हो रहा भला : अयुब खान


सांसद आदर्श ग्राम के आदिम जनजाति से ईलाज हेतु प्राईवेट हॉस्पिटल ने 1500 सौ रूपया लिया  

लातेहार - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) का लाभ चंदवा क्षेत्र के गांवों के गरीबों व आदिम जनजातियों को नहीं मिल पा रहा है, गावों के भ्रमण के दौरान ऐसे अनेकों मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में आदर्श ग्राम चटुआग मे एक मामला सामने आया ၊ जब इसकी सूचना माकपा नेता अयुब खान को मिली तो वे अपने साथियों के साथ आदिम जनजाति परहैया जाति के बिनोद परहैया की 6 वर्षीय पुत्री छोटी कुमारी, जिसका हाथ गिरने से फ्रेक्चर हो गया था, को देखने उसके घर पहुंच गए ၊ परिजनों और रामकुमार परहैया, बिफई परहै़या, सुरेश परहैया, मॉ मुनीका परहिन ने उन्हें बताया कि चंदवा के एक प्राईवेट हॉस्पिटल में उसे दिखाया, वहां चिकित्सकों ने कच्चा पलास्टर कर 1500 रूपया ले लिया ၊माकपा नेता ने कहा कि इसके पास ग्रीन कार्ड भी है, जबकि आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत  ईलाज मे गरीबों का एक भी पैसा खर्च नहीं होने, गरीबों के लिए राहत और कल्याणकारी योजना बताया जा रहा था ၊ कहा कि  आयुष्मान भारत योजना और योजनाओं की तरह गांवों में फ्लॉपऔर जुमला साबित हो रही है, जबकि इस योजना को दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना बताया गया है ၊ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और मुख्यमंत्री श्री रघुबर दास जी का संकल्प है कि देश और झारखण्ड का कोई गरीब परिवार पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न रहे , इसी सोच के तहत देशभर में गरीबों का 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कराया गया ၊

श्री खान ने कहा कि झारखण्ड के कुल 68 लाख परिवारों में से 57 लाख गरीब परिवार समेत पूरे देश में 50 करोड़ से भी अधिक लोगों को इस योजना का फायदा मिलने की बात कही गई थी जो धरातल पर नहीं दिख रही है ၊ दूसरी ओर सूत्रों का मानना है कि सरकार द्वारा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इस योजना का लाभ दी जा रही है ၊

धनबाद: पूर्व डिप्टी मेयर रंजय सिंह हत्याकांड में हर्ष सिंह समेत पाँच ने किया सरेंडर

धनबाद ၊ रंजय सिंह हत्याकांड में फरार चल रहे हर्ष सिंह ने सरेंडर कर दिया है। उनके साथ राजू खान लोदना, भुटाली सिंह बरवाअड्डा, विनय यादव झरिया व लक्ष्मण भूली ने भी सरेंडर किया है हर्ष ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया है। हर्ष सिंह पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह का भाई है। बता दें कि 29 जनवरी 2017 को रंजय सिंह की दिन दहाड़े सरायढेला में रघुकुल के सामने गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। 

पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह के भाई हर्ष के सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करते समय सैकड़ों समर्थक उनके साथ मौजूद थे। परिसर में पहुंचते ही वह दौड़कर सीजेएम कोर्ट के अंदर चले गए,आइओ निरंजन तिवारी ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहे. बताया जा रहा है कि समर्थकों के विरोध के कारण हर्ष ने दौड़कर कोर्ट में प्रवेश किया। डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह और कांग्रेस नेता अभिषेक सिंह भी वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे၊इधर सीजेएम राजीव रंजन के कोर्ट ने हर्ष सिंह का जमानत रद्द कर दिया है और उसे जेल भेजने की तैयारी चल रही है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता समर श्रीवास्तव ने कोर्ट में दलील दी कि अब तक एक भी गवाह पुलिस नहीं ला पायी है।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...