Saturday, December 29, 2018

गिरिडीह: दसवीं का छात्र बोकारो के चंद्रपुरा से पाँच दिनों से लापता

बगोदर / गिरिडीह बगोदर थाना क्षेत्र के चौधरीबांध पंचायत अन्तर्गत कोड़ाडीह निवासी विरेन्द्र यादव का 16 वर्षीय पुत्र  कैलाश यादव बोकारो जिले के चन्द्रपुरा में अपने मामा के यहाँ रहकर पढाई करता था। उक्त युवक अपने मामा घर चन्द्रपुरा से पैतृक निवास कोड़ाडीह के लिए 25 दिसम्बर को घर से निकला । लेकिन घर नही पहुँचा ၊ उधर उक्त किशोर युवक के घर नहीं पहुँचने से परिजनो में किसी अनहोनी की आशंका को ले दिन प्रति दिन चिन्ता बढ़ती  जा रही है ၊ इधर परिजनो ने बताया  कि उक्त युवक इसी वर्ष फरवरी माह में मैट्रिक की  परीक्षा देने वाला है ၊ इस सम्बन्ध में  लापता छात्र के दादा टिपन यादव व मामा द्वारा चन्द्रपुरा थाना को  सूचना दे चुके है၊परिजनों ने बताया कि लापता  छात्र को घर तक पहुँचाने या सूचना देने वाले को उचित इनाम उपहार स्वरूप दिया जाएगा । सूचना मो नं 7091762679 अथवा 9503069691 पर दी जा  सकती है ।



गायब छात्र का फाइल


 फोटो

Friday, December 28, 2018

राजस्थान: सरकारी दस्तावेजों से हटेगा पं. दीनदयाल उपाध्याय का फोटोयुक्त लोगो

राजस्थान में नवगठित अशोक गहलोत सरकार ने राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक आदेश को पलटने जा रहीं है। राजस्थान सरकार के लेटर पैड और किसी भी लिखित आदेश पर अब जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय का फोटो वाला लोगो नहीं दिखेगा। कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में अब लेटर पैड और सरकारी परिपत्रों पर केवल अशोक स्तंभ ही छापा जाएगा। इसको लेकर जल्द ही आदेश जारी हो सकते हैं।


बीजेपी के शासन में सरकार ने आदेश जारी कर सभी आदेशों पर पं. दीनदयाल उपाध्याय का लोगो लगाना अनिवार्य किया था। जिसके बाद कांग्रेस सरकार ने इसका विरोध भी किया था। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि बीजेपी की सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडें को लागू करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि यह अशोक स्तम्भ का अपमान है जो कि अलोकतांत्रिक है।


एक रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सरकारी पुस्तकालयों में पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर लिखित पुस्तकें रखनें की बाध्यता भी हटाने जा रही है। गौरतलब है कि बीजेपी की पिछली सरकार में दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वांगमय की पुस्तकें सचिवालय सहित प्रदेशभर की लाइब्रेरी में रखवाई गईं थी।



रांची: एडीजे तदाशा मिश्रा के पुत्र ने बॉडीगार्ड की रिवाल्वर छीन मारी खुद को गोली, हुई मौत

राँची ၊ एडीजी तदाशा मिश्रा के इकलौते पुत्र ने खुद को गोली मार कर खुदकशी कर ली। एडीजी तदाशा मिश्रा के बेटे ने एयरपोर्ट के पास गोली मारी।राँची से बैंगलोर जा रहा था तभी बॉडीगार्ड से हथियार लेकर गोली मार ली। बॉडीगार्ड भी कुछ समझ नहीं सका अचानक कैसे हो गया। गोली चलने के बाद उसे मेडिका अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि अब तक स्पष्ट नहीं है गोली क्यों मारी, आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा एडीजी के पद पर तैनात हैं। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। हालांकि पुलिस फिलहाल कुछ भी कहने से बच रही है। बताया जा रहा है कि अंगरक्षक दिलीप कुमार सिन्हा के सर्विस रिवाल्वर से गोली मारी थी, एयरपोर्ट जाने के दौरान गाड़ी में ही अमितेश ने खुद को गोली मारी थी, मौत की खबर के बाद से ही पुलिस के वरीय अधिकारियों के आने का सिलसिला जारी है। पुलिस महकमे और परिवार में शोक की लहर दौड़ गयी है। अभी शव को मेडिका से रिम्स लाया गया।

Thursday, December 27, 2018

बीते वर्ष 2018 में पत्रकारों के खूब बहे खून,80 पत्रकार मारे गए!!


रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में पत्रकारों की मौत के मामले आठ फीसदी बढ़े हैं. पत्रकार राजनीतिक और धार्मिक घृणा का शिकार बन रहे हैं.        2018 के 11 महीनों में दुनिया भर में 80 पत्रकार मारे गए. गैर सरकारी संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के मुताबिक इस दौरान 348 पत्रकारों को जेल में बंद किया गया और 60 से ज्यादा को बंधक बनाया गया.

18 दिसंबर को जारी हुई आरएसएफ की रिपोर्ट में विस्तार से पत्रकारों के खिलाफ हो रही हिंसा का जिक्र है. रिपोर्ट कहती है कि 49 पत्रकारों की हत्या की गई. संस्था के मुताबिक सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी और स्लोवाकिया के डाटा जर्नलिस्ट यान कुसिएक की हत्या "दर्शाती है कि प्रेस की आजादी के दुश्मन किस हद तक जा सकते हैं."

संस्था ने रिपोर्ट के साथ एक बयान जारी करते हुए कहा, "पत्रकारों के खिलाफ हिंसा इस साल अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है और अब स्थिति गंभीर है." इसके लिए राजनेताओं, धार्मिक नेताओं और कारोबारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है, "कभी कभार तो पत्रकारों के खिलाफ खुलकर घृणा व्यक्त की जा रही है, ऐसा करने वालों में बेशर्म राजनेता, धार्मिक नेता और कारोबारी भी हैं. इसका बुरा नतीजा, पत्रकारों के खिलाफ विचलित करने वाली हिंसा में दिखाई पड़ रहा है."

Infografik Länder, in denen die meisten Journalsiten getötet wurden 2018 EN

ये बने 2018 में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश

अफगानिस्तान अब भी पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश बना हुआ है. 2018 में वहां 15 मीडियाकर्मियों की मौत हुई. नौ पत्रकार तो सिर्फ 30 अप्रैल के दोहरे धमाके में मारे गए. भारत, अमेरिका और मेक्सिको जैसे युद्ध न झेलने वाले देश भी पत्रकारों के लिए जोखिम भरे बने हुए हैं. मेक्सिको में इस साल नौ पत्रकारों की हत्या हुई. भारत में छह पत्रकार मारे गए. दोनों ही देशों में कई पत्रकारों ने जानलेवा हमले झेले और धमकियों का सामना भी किया. अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक शूटिंग के दौरान एक अखबार के पांच कर्मचारी मारे गए.

चीन और तुर्की का बुरा हाल

सरकार या प्रशासन के खिलाफ अपनी राय जाहिर करने वालों के लिए चीन सबसे बड़ी जेल बना हुआ है. आरएएसफ के मुताबिक चीन में गैर पेशेवर पत्रकारों को बड़ी संख्या में कैद किया गया. रिपोर्ट कहती है, "सोशल नेटवर्कों या मैसेजिंग सर्विस में सिर्फ एक पोस्ट लिखने के कारण उन्हें अकसर अमानवीय परिस्थितियों में कैद किया गया."

Infografik Top 5 der Staaten, die Journalisten inhaftieren EN

इन देशों में कैद हुए सबसे ज्यादा पत्रकार

पेशेवर पत्रकारों के लिए तुर्की सबसे बड़ा कैदखाना बना. उसके बाद मिस्र, ईरान और सऊदी अरब का जिक्र है. मध्य पूर्व के देशों में 2018 में 60 पत्रकारों को कैद किया गया. इन देशों के अलावा आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अब तक 24 पत्रकारों को बंधक बनाया हुआ है. यमन के हूथी विद्रोहियों के कब्जे में 16 जर्नलिस्ट हैं.

रिपोर्ट्स विदाउट बॉर्डर्स के मुताबिक 21 जनवरी को मेक्सिको से, 14 मार्च को हैती से और सात जून को रूस से गायब हुए तीन पत्रकारों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है.

ओएसजे/एनआर (एएफपी, रॉयटर्स)

Wednesday, December 26, 2018

रांची:डुमरी सीओ को मुख्य मंत्री ने किया बर्खाश्त,दागी अधिकारियों के सम्पति की होगी जांच

 रांची ၊  हटाए जाएंगे डुमरी अंचल से डुमरी के भ्रष्ट अंचलाधिकारी रविंद्र पांडे, साथ ही  होगी उनके संपत्ति की जांच ၊ लक्ष्मण टुंडा पंचायत समिति सदस्य  श्रीमती सुनीता देवी एवं भाजयुमो गिरिडीह जिला उपाध्यक्ष  सुरेन्द्र कुमार  की मांग पर मुख्यमंत्री ने  निर्णय लिया ၊ बुधवार को  सूचना भवन रांची में आयोजित मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम में  लक्ष्मण टुण्डा पंचायत समिति सदस्य श्रीमती सुनीता देवी ने मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास से मुलाकात कर डुमरी अंचलाधिकारी रविंद्र पांडेय के भ्रष्ट कार्यों को अवगत कराते हुए पत्र सौंपकर अविलंब सीओ को डुमरी अंचल से हटाने की मांग की  ၊ जिस पर मुख्यमंत्री ने अंचलाधिकारी डुमरी को अविलम्ब बुधवार को ही हटाने का  निर्देश जारी कर दिया ၊ वही डुमरी प्रखंड के लचर स्वास्थ सुविधा में सुधार हेतु तथा लक्ष्मण टुंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित सभी उप केंद्रों में एएनएम तथा स्वास्थ्य में सुधार की  मांग की  पर भी  मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को डुमरी में स्वास्थ्य में सुधार के लिए स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिए। उक्त कार्य के लिए श्रीमती सुनीता देवी एव सुरेन्द्र कुमार  ने  मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त किए।

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट

अमरीका का विमानवाहक पोत यूएस जान सी स्टेनिस फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में प्रविष्ट हुआ। अमरीका का यह विमान वाहक पोत उस समय प्रविष्ट हुआ जब इस इलाक़े में इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स का सैन्य अभ्यास चल रहा था।

ईरान के सशस्त्र बलों ने अपने इस सैन्य अभ्यास में अपनी तेज़ रफ़तार युद्धक नौकाओं और बड़े सटीक रूप से निशाने को ध्वस्त करने वाले मिसाइलों का परीक्षण किया।

यहीं से अटकलें शुरू हो गईं। कुछ संचार माध्यमों में यह ख़बर आई कि ईरान की सेना ने अमरीकी विमान वाहक पोत पर फ़ायरिंग की लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान की पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स के अधिकारियों ने इस ख़बरों का खंडन किया मगर साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि हम अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ईरान की नौसेना के प्रमुख एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने सोमवार को कहा कि अमरीकी पोत को ईरान की जलसीमा से क़रीब होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने अपने युद्ध अभ्यास में यह संदेश दे दिया कि अमरीकी सैन्य बल के सामने डट जाने की हमारे पास पूरी क्षमता मौजूद है।

यदि पश्चिमी एशिया के इलाक़े को देखा जाए तो यह हक़ीक़त साफ़ तौर पर नज़र आती है कि अमरीकी वर्चस्व कमज़ोर पड़ चुका है जिसका एक बड़ा कारण क्षेत्रीय देशों की शक्ति का विस्तार है। इस्लामी गणतंत्र ईरान तो पिछले चालीस साल से अमरीकी वर्चस्व को नकार चुका है और अपनी इस रणनीति के कारण ईरान को अमरीका और उसके घटकों की दुशमनी झेलनी पड़ी। ईरान ने इस दुशमनी का सामना करके अन्य देशों के सामने एक उदाहरण भी पेश कर दिया। धीरे धीरे इसी रास्ते पर दूसरे देश भी चल पड़े हैं।

पश्चिमी एशिया के कुछ देशों ने तो रूस को विकल्प के रूप में देखना शुरू कर दिया है बल्कि रूस को प्रेशर टूल के रूप में भी प्रयोग कर लेते हैं। तुर्की ने एसा कई बार किया कि उसने अमरीका पर दबाव डालने के लिए रूस से सहयोग बढ़ाना शुरू कर दिया। तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीद कर अमरीका को कड़ा संदेश दिया और इस संदेश का अमरीका पर असर भी हुआ। अमरीकी सरकार ने अपनी कड़ी शर्तों को नर्म करके रूस को पेट्रियट मिसाइल देने की घोषणा कर दी।

यही तरकीब सऊदी अरब ने भी अपनाई। सऊदी अरब ने भी रूस की ओर झुकाव बढ़ा दिया और रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम ख़रीदने का सौदा किया तो अमरीका ने थाड एयिर डिफ़ेन्स सिस्टम सऊदी अरब को बेचने की बात शुरू कर दी।

दूसरे भी देश इस रणनीति को प्रयोग कर रहे हैं। इस तरह अमरीकी वर्चस्व को ज़बरदस्त चुनौती मिल रही है।

जहां तक इस्लामी गणतंत्र ईरान का सवाल है तो वह स्पष्ट शब्दों में कहता रहा है कि क्षेत्रीय मामलों की ज़िम्मेदारी क्षेत्रीय देशों के हाथों में होनी चाहिए बाहरी शक्तियों को हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

इन हालात में अमरीकी अधिकारियों को इस बात का पूरी तरह आभास है कि अब क्षेत्रीय देशों की अमरीका पर निर्भरता बहुत तेज़ी से कम हो रही है और यह अमरीका के लिए गहरी चिंता का विषय है।  

Tuesday, December 25, 2018

महाराष्ट्रट्र: क्रिसमस के मौके चर्च में प्रार्थना कर रहे इसाई समुदाय पर हमला

क्रिसमस के मौके पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में कुछ शरारती तत्वों ने एक चर्च को निशाना बनाया है, जिस वक्त यह अटैक किया गया, तब चर्च में चल रही प्रार्थना में 40 से ज्यादा लोग हिस्सा ले रहे थे। बता दें कि इस हमले में तीन लोग गंभीर रूप से जख्मी बताए जा रहे हैं, जिनकी हालत स्थिर बनी हुई है। हमले का आरोप कट्टरपंथी समूह पर लगा है।
एक तरफ जहां देशभर में लोग क्रिसमस की बधाईयां (Merry Christmas Wishes) दे रहे हैं, वहीं कोल्हापुर में इस मौके पर चर्च को निशाना बनाया गया है। कोल्हापुर के एसपी अभिनव देशमुख घटना की जानकारी देते हुए बताया कि किराए पर लिए गए एक घर, जहां हमेशा चर्च की तरफ प्रार्थना कराई जाती है, में प्रार्थना की जा रही थी।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...