गिरिडीह ၊ एक ओर सरकार द्वारा जन सुविधाओं को ले पेयजल आपूर्ति के दृष्टिकोण से विभिन्न स्थानों पर हैण्ड पम्प लगवाए गए हैं ,किंतु दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इस तपती भीषण गर्मी में अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं ၊ जो हाथी के दांत बनकर रह गये हैं ,दिखाने के और जबकि खाने के और ၊
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में जनता के लिए पेयजल आपूर्ति निश्चित किये जाने को ले जगह जगह हैण्ड पम्प लगवाये हैं ,आश्चर्यजनक तथ्य है कि इससे भले ग्रामीण जनता की प्यास नहीं बुझी हो , लेकिन संवेदक के अवश्य पौ बारह हो चुके हैं ၊ उन्होंने इन हैण्ड पंप के इन्स्टॉस्टॉलेशन में स्थानीय बाजार में उपलब्ध निम्नतम स्तर की सामग्री केस इन , बॉल्व इत्यादि जो लगाए हैं ၊ इस सम्बन्ध में एक चापाकल तकनीशियन ने रहस्योद्घाटन किया है कि केसिन की घटिया क्वालिटी के कारण वह कुछ ही दिनों में जमीन के अंदर सड़ जाते हैं , बॉल्व खराब हो जाते हैं ၊ बताया जा रहा है कि प्रखण्ड में हैण्ड पंपों को लगाने हेतु भूमिगत बोरिंग भी निर्धारित मात्रा से कम तथा कम चौड़ी की गई है ၊ पूर्व एसडीएम श्री ज्ञान प्रकाश मिंज ने इस सम्बन्ध में बताया था कि यह कार्य पूर्व में ही कराये गए हैं , मैं क्या करूँ ၊ किंतु वास्तविकता यह है कि डुमरी प्रखण्ड में ही संवेदक ने अनियमितता नहीं बरती है , बल्कि जिले के कई स्थानों में इस मामले पर झोल ही झोल है ၊ मजे की बात है कि जिले के कई प्रखण्ड में एक ही संवेदक को हैण्ड पंप लगाने का कार्य सौंप दिया गया था ၊ कुछ ऐसा ही उदाहरण जिले के डुमरी प्रखण्ड में पारसनाथ रेल स्टेशन से लेकर इसरी बाजार चौक तक लोगों को देखने को मिल रहे हैं ၊ हावड़ा - नई दिल्ली बीजी लाईन पर अबस्थित इस मुख्य मार्ग के दोनों ओर स्थित विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में जाने आने वाले लोग प्यास के मारे हलकान हो रहे हैं ၊ दूसरी ओर स्थानीय मुख्य व्यवसायिक केन्द्र होने के कारण लोगों की जमघट यहाँ लगी रहती हैं। भ्रष्ट मशीनरी के कोपभाजन का शिकार केवल डुमरी के ही ग्रामीण नहीं हैं , अपितु जिले के अन्य प्रखण्डों के अंतर्गत कई पंचायतों की स्थिति कमोबेश एक ही है ၊
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