Wednesday, October 2, 2019

महाराष्ट्र के नागपुर में टावर से गिरकर झारखण्ड के दो प्रवासी मजदूरों की मौत,सरकार और सफेद्पोशों के मुहँ पर तमाचा

 #महाराष्ट्र के नागपुर में टावर से गिरकर दो प्रवासी मजदूरों की मौत                       #मोबाइल टावर कम्पनियों में क्षेत्र के पचासों युवकों की हो चुकी मौत                    

गिरिडीह।
 महाराष्ट्र के नागपुर में बगोदर थाना के देवराडीह पंचायत के गम्हरियाटांड गांव निवासी हुलाश महतो के 30 वर्षीय पुत्र तेजो महतो और हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना के भेलवारा पंचायत के गोलगो गांव निवासी सुखदेव मिस्त्री के 25 वर्षीय पुत्र महेश विश्वकर्मा की मौत टॉवर से गिरने से हो गयी । जबकि विष्णुगढ़ थाना अंतर्गत छोटकी भेलवारा निवासी सोहन महतो घायल हो गया ।मृतक प्रवासी मजदूर बीएनसी पावर ट्रांसमिशन प्राइवेट लिमिटेड में कार्य करते थे।
  मौत की सूचना पाकर परिजनों का  रो-रो कर बुरा हाल है। मृतक के परिजनों के समक्ष पालन -पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
  मौत की सूचना पाकर मंगलवार की सुबह बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह गम्हरियाटांड पहुंचे और मृतक तेजो महतो के परिजनों को सांत्वना दिया और दुख की घड़ी में हिम्मत बढ़ाया ।श्री सिंह ने हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया। मौके पर पूर्व विधायक सिंह ने बीएनसी पावर ट्रांसमिशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के उच्च अधिकारी राजेश चौधरी से फ़ोन पर बातचीत की और कहा कि मृतक तेजो महतो और महेश विश्वकर्मा के परिजनों को कंपनी यथोचित मुआवजा सहायता राशि प्रदान करे और जीवन बीमा का पूरा लाभ दिलवाने में कंपनी परिजनों को सहयोग करे। उन्होंने कहा कि बगोदर और आस पास के इलाके के प्रवासी मजदूरों की देश-विदेश में मौतें नियती बन गयी है। कहा कि झारखण्ड सरकार को प्रवासी मजदूरों के हितों के मद्देनजर एक प्रभावी निदेशालय बनाना चाहिए।
मौके पर श्री सिंह के साथ माले के युवा नेता पूरन कुमार महतो,वार्ड सदस्य सुरेश महतो कमल महतो कारू महतो अशोक कुमार महतो प्रकाश कुमार महतो डेगलाल महतो मंजूर अंसारी गोबिंद कुमार महतो समेत कई अन्य उपस्थित थे।                                  गौरतलब है कि झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों से कथित दलालों के माध्यम से युवकों को अधिक पारिश्रमिक का प्रलोभन देकर महानगरों तथा विदेशों में भेज दिया जाता है,जहाँ कभी तो उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह कार्य लिया जाता है,यहां तक कि वेतन नही देकर भूखों रखा जाता है,तो कहीं से अन्ततः युवकों के शव भेज दिये जाते हैं।क्षेत्र के ऐसे ग्रामीण सऊदी अरब,श्री लंका,मलेसिया आदि देशों मे आज भी गुलामी की जिन्दगी जी रहे हैं। अपने परिवार के भरण पोषण अच्छी तरह करने की तमन्ना दिल मे लिए ऐसे बदनशीबों को कभी स्वदेश नशीब होगा अथवा नहीं,यह कोई नहीं जनता है।लेकिन विभिन्न सरकारों ने आज तक इनकी मौतों पर हमेशा रोटी सेंकने का ही कार्य किया है।इनके आश्रितों के आंशूओं को पोछ्ने वाला कोई भी नहीं ।

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