Thursday, February 27, 2020

दुमका की अनाथ बच्ची को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उपलब्ध कराई राशन कार्ड


#दुमका. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चे अपनी पढ़ाई, खेल और अलग तरह की एक्टिविटी को लेकर चर्चा में रहते हैं। कभी-कभी इन बच्चों के एक्टिविटी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है और वो चर्चा का विषय बन जाती है। लेकिन, झारखंड के दुमका जिले की बच्ची इन सबसे अलग अपनी गरीबी को लेकर चर्चा में है। दरअसल, मंगलवार को किसी ने एक बच्ची की गरीबी को दर्शाती फोटो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्विटर पर टैग कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्थानीय प्रशासन पर भड़क गए। उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। फिर प्रशासन ने बुधवार को बच्ची को राशन कार्ड सहित राशन उपलब्ध कराया गया।

चार साल की बच्ची के घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है जबकि मां मानसिक रूप से बीमार है। फिलहाल, बच्ची मां रुक्मणी सोरेन के साथ 70 वर्षीय नानी चुड़की मुर्मू के घर रहती है। जरमुंडी प्रखंड के भोड़ावाद पंचायत के समलापुर में रहनेवाली चुड़की मुर्मू किसी तरह पड़ोसियों से राशन मांगकर अपना गुजारा चलाती है। कभी-कभी लाठी के सहारे वो ब्लॉक तक चली जाती है और खाद्य विभाग के अधिकारियों से कुछ मांगती है जिससे तीनों का पेट पलता है। चुड़की मुर्मू के मुताबिक- उन्हें पिछले एक साल से राशन नहीं मिला है। विधवा पेंशन से मिलने वाली करीब एक हजार रुपए की राशि से थोड़ा-बहुत सहारा मिल जाता है। उन्होंने बताया कि रकम से चावल का जुगाड़ तो हो जाता है लेकिन दाल-सब्जी का अभाव रहता है। वो गोभी का पत्ता सूखाकर रखती है और फिर इसे उबाल कर नमक के साथ चावल में मिलाकर तीनों खाते हैं।

बुधवार को राशन कार्ड मिलने के बाद चुड़की मुर्मू कहती हैं कि अब उनकी बेटी का इलाज भी हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर 2018 को उन्होंने राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद जब राशन कार्ड नहीं बना तो उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में 14 नवंबर 2019 को की। इसके बाद से 25 फरवरी 2020 तक राशन कार्ड नहीं बन पाया था। उन्होंने बताया कि बेटी रुक्मणी सोरेन की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पैसे के अभाव में बेटी का इलाज भी नहीं करा पा रही थी। सरकार के आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों का मुफ्त में इलाज कराया जाता है लेकिन राशन कार्ड न होने के कारण वे आयुष्मान भारत योजना का भी लाभ नहीं ले पा रहे थे। लेकिन अब राशन कार्ड मिलने से उम्मीद है कि आयुष्मान कार्ड बन जाएगा और बेटी का इलाज हो पाएगा।

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