Tuesday, July 7, 2020

झारखंड के 12 हजार वकीलों के लाइसेंस पर खतरा,आखिर क्यों...




झारखंड के 12 हजार वकीलों के लाइसेंस पर खतरा उत्पन्न हो गया है। इन वकीलों ने यदि अपने प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं कराया, तो इनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे और वकालत पर रोक लगा दी जाएगी। सत्यापन के लिए झारखंड बार कौंसिल सभी वकीलों को अंतिम अवसर दे रही है। अगस्त तक सभी को सत्यापन करा लेना होगा।

बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी राज्यों के बार कौंसिल को वकीलों का सत्यापन कराने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्हें अंतिम अवसर दिया है। झारखंड बार कौंसिल से करीब 31 हजार वकील निबंधित हैं और अभी तक 19 हजार ने ही अपने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया है। बार कौंसिल सभी जिलों के बार संघों को प्रमाणपत्र का सत्यापन कराने के लिए नियमित पत्र भेजती रही है, लेकिन कुछ वकील इसका विरोध कर रहे हैं।

राज्य के सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों को सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन 12 हजार वकीलों ने इसके लिए फॉर्म नहीं भरा है। सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों के साथ एक फॉर्म भर कर देना होता है। फिर बार कौंसिल संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थानों में प्रमाणपत्रों की जांच के लिए भेजती है। सत्यापन पूरा होने के बाद वकील को कौंसिल के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट मिलती है। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और कौंसिल के चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिलती है।

एक माह में सत्यापन पूरा करे विश्वविद्यालय : बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को राज्य की बार कौंसिल से भेजे गए प्रमाणपत्रों का सत्यापन एक माह में पूरा कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। बार कौंसिल ने कहा है कि प्रमाणपत्रों का सत्यापन एक माह में कर दें। इसमें किसी प्रकार का विलंब नहीं किया जाए।

प्रमाणपत्र गुम और फट जाने की दे रहे दलील : राज्य के अधिकांश वकील इस नियम का विरोध कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि वह 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनका प्रमाणपत्र अब फट गया है। कुछ वकीलों का कहना है कि प्रमाणपत्र गुम हो गया है। इतने साल प्रैक्टिस करने के बाद फिर से प्रमाणपत्र की जांच कराने का निर्णय उचित नहीं है। जिनके पास प्रमाणपत्र नहीं है, उनके लिए संबंधित बार कौंसिल से नियमित प्रैक्टिस का प्रमाणपत्र ही मान्य होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अनिवार्य बताया : सुप्रीम कोर्ट ने बार कौंसिल के वेरिफिकेशन रूल्स 2015 के तहत सभी बार कौंसिल को वकीलों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन को अनिवार्य बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके बाद सभी बार कौंसिल प्रमाणपत्रों का सत्यापन करा रही हैं।

नियमित प्रैक्टिस करने का भी देना होगा प्रमाणपत्र : झारखंड के वकीलों को अपने नियमित प्रैक्टिस का भी प्रमाणपत्र देना होगा। वकीलों को अपने जिला बार संघों से नियमित प्रैक्टिस के प्रमाणपत्र के साथ कोर्ट के कुछ आदेश भी जमा करने होंगे, जिसमें उनकी बहस करने का उल्लेख किया गया हो। सभी बार संघों से भी अभी तक इसकी पूरी सूची बार कौंसिल को नहीं मिली है। इसके लिए भी सभी बार संघों को नोटिस दिया गया है।

निबंधन करा दूसरा काम करते हैं : वकालत की डिग्री लेने के बाद कई लोग प्रैक्टिस के लिए बार कौंसिल से निबंधन कराते हैं। इसके बाद संबंघित जिलों के बार संघों की संबद्धता भी हासिल करते हैं। लेकिन वह प्रैक्टिस नहीं करते। कई लोग दूसरा व्यवसाय करते हैं और वकीलों की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी लेते हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित कर बार कौंसिल लाइसेंस रद्द करेगी। झारखंड बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने कहा कि वेरिफिकेशन रूल्स 2015 के तहत सभी वकीलों को अपने प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराना है। इसके लिए सभी बार संघों को नोटिस दिया गया है। जो वकील अभी तक सत्यापन नहीं कराए हैं, उन्हें नोटिस दिया गया है।

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