हालांकि देश की वर्तमान राजनीति में राजनेताओं ने नैतिकता और पवित्रता की उम्मीद करना बेमानी है, लेकिन जो राजनेता देश चलाने और संभालने की बात करते हैं उन्हें तो अपना आचरण नैतिक और पवित्र ही रखना चाहिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी यदि शब्दों का घालमेल कर राजनीति करेंगे तो फिर दूसरे नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है। राहुल गांधी 29 जनवरी को अपनी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी के साथ गोवा के दौरे पर थे, तभी राहुल गांधी गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। चूंकि पर्रिकर इन दिनों जानलेवा रोग कैंसर से संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए राहुल की इस मुलाकात को शिष्टाचार मुलाकात माना गया। स्वाभाविक है कि दोनों के बीच कोई राजनीतिक संवाद नहीं हुआ होगा। लेकिन 30 जनवरी को राहुल गांधी ने बीमार पर्रिकर से हुई मुलाकात को राजनीति से जोड़ दिया। राहुल ने एक सार्वजनिक समारोह में कहा कि 29 जनवरी को उन्होंने पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात की। पर्रिकर ने भी कहा था कि राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री ने रक्षामंत्री से कोई बात नहीं की। राहुल ने शब्दों का ऐसा घालमेल किया, जिससे लगा कि 29 जनवरी की मुलाकात में पर्रिकर ने राफेल पर राहुल से बात की है। यह माना कि राफेल विमान सौदे पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते, लेकिन राहुल को कम से कम बीमार पर्रिकर के कंधे पर बंदूक रख कर नहीं चलानी चाहिए। राहुल के बयान के बाद पर्रिकर को अपनी सफाई में पत्र भी लिखना पड़ा। स्वाभाविक है कि इससे पर्रिकर के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा होगा। ऐसे में यदि पर्रिकर के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो कौन जिम्मेदार होगा? क्या राजनीति करने का मतलब किसी की जान लेना है? राहुल गांधी भी जानते हैं कि मनोहर पर्रिकर देश के चुनिंदा ईमानदार नेताओं में से एक है। पर्रिकर की ईमानदारी की वजह से ही उन्हें गोवा के सीएम के पद से हटा कर देश का रक्षामंत्री बनाया गया था। राहुल गांधी को कम से कम पर्रिकर जैसे राजनेता को तो बख्शना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राफेल विमान सौदे पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करें, यह उनकी राजनीति हो सकती है, लेकिन किसी बीमार व्यक्ति को टारगेट करना उचित नहीं माना जा सकता। यह माना कि तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनने से राहुल गांधी बेहद उत्साहित हैं और उन्हें लगता है कि अब लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी और भाजपा को हटा देंगे। लेकिन ऐसे अति उत्साह में राजनीति की नैतिकता और पवित्रता का तो ख्याल रखना ही चाहिए। (एसपी मित्तल)
Friday, February 1, 2019
वर्तमान राजनीति में राजनेताओं से नैतिकता और पवित्रता की उम्मीद करना बेमानी!!
Wednesday, January 30, 2019
तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने पर प्रेमीयुगल ने दे दी जान
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बदनामी से तंग आकर एक प्रेमी जोड़े ने ट्रेन के सामने कूदकर खुदकुशी कर ली. उन दोनों की लाशें पुलिस ने रेलवे लाइन से बरामद की हैं. पुलिस को जांच में पता चला कि मामला ब्लैकमेलिंग का है. युवक-युवती का उनका एक दोस्त ही ब्लैकमेल कर रहा था. इसी बात से परेशान होकर दोनों ने ये खौफनाक कदम उठाया है. अब आरोपी लड़का फरार है.
मामला मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र का है. जहां मंगलवार को पुटठा गांव के पास रेलवे लाइन पर स्थानीय लोगों ने एक युवक और युवती की लाश पड़ी हुई देखी. फौरन इस बात की सूचना पुलिस को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर जा पहुंची. दोनों लाशों को देखकर साफ पता चल रहा था कि उन दोनों ने किसी ट्रेन के सामने कूदकर जान दी है. पुलिस ने जब उनका पर्स और बैग आदि चैक किया तो मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद हुए.
उन दोनों की शिनाख्त शोभापुर निवासी नितिन और हसनपुर की रहने वाली कोमल के रूप हुई है. पुलिस ने दोनों शव पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए. पुलिस के मुताबिक छानबीन में पता चला कि नितिन और कोमल के बीच करीब दो साल से लव अफेयर चल रहा था. नितिन मेरठ एक फैक्ट्री में काम करता था. इसी दौरान एक दिन नितिन के एक दोस्त प्रवेश ने कोमल और नितिन की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया में शेयर कर दी.
इसी के चलते वो तस्वीरें नितिन और कोमल के घरवालों ने भी देख ली. इससे पहले मामला बढ़ता. नितिन के घरवाले रिश्ता लेकर कोमल के घर जा पहुंचे. वहां कोमल के परिजनों से दोनों की शादी की बात की. कोमल के घरवाले भी शादी के लिए मान गए. लेकिन उन्होंने कहा कि पहले कोमल की बड़ी बहन की शादी हो जाए. फिर नितिन और कोमल का विवाह कर देंगे.