Wednesday, July 17, 2019

देवघर: बेलपत्रों से बाबा बैद्यनाथ दरबार में लगी विल्व प्रदर्शनी

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देवघर : सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विल्व प्रदर्शन लगाने की परंपरा है। सावन माह के पहले और प्रत्येक सोमवार को विल्व प्रदर्शनी लगाई जाती है। खास बात यह कि त्रिकुटी पहाड़ के दुर्लभ बेलपत्रों से बाबा दरबार में लगने वाली विल्व प्रदर्शनी देखकर श्रद्धालु मुग्ध हो जाते हैं। परंपरा के मुताबिक सावन माह के पहले दिन बुधवार को बाबा मंदिर में आकर्षक विल्वपत्र प्रदर्शनी लगाई गई। बताते चलें कि वर्षो पूर्व विल्व प्रदर्शनी लगाने की परंपरा बमबम बाबा ब्रह्माचारी ने शुरू की थी, जिसका निर्वहन अनवरत जारी है। मंदिर प्रांगण में लगी प्रदर्शनी में राजाराम विल्वपत्र समाज ने राम मंदिर में, पंडित मनोकामना राधेश्याम विल्वपत्र समाज एवं राधेश्याम विल्वपत्र मंदिर समाज ने आनंद भैरव मंदिर में प्रदर्शनी लगाई है। जबकि बरनैल समाज ने तारा मंदिर, जरनैल समाज ने काली मंदिर, बमबम बाबा ब्रह्मचारी समाज, शांति अखाड़ा विल्वपत्र समाज एवं बमबम बाबा मशानी समाज लक्ष्मीनारायण मंदिर में आकर्षक प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी को देखने के लिए इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। 

6 महीने बाद देशभर के 90% अखबार होंगे बंद, लाखों अखबार कर्मी होंगे बेरोजगार




डीएवीपी के खिलाफ कोर्ट जायेगा ‘अखबार बचाओ मंच’, पहले राजनीतिक दलों से मांगों फिर अखबारों से मांगना हिसाब! अस्तित्व बचाने की आखिरी कोशिश में ‘अखबार बचाओ मंच’ न्यायालय की शरण में जायेगा। मंच ये तर्क रखेगा कि जब राजनीतिक दल अपने चंदे का हिसाब और टैक्स नहीं देते तो फिर अखबारों पर एक-एक पैसे का हिसाब और नये-नये टैक्स क्यों थोपे जा रहे हैं।

दरअसल दो-तीन महीने बाद पूरे देश के अखबारों का नवीनीकरण होना है। जिसके लिये डीएवीपी द्वारा एक-एक कागज और पाई-पाई का हिसाब मांग लेने से देश के 95%अखबार नवीनीकरण नहीं करा पायेंगे। अखबार बचाओ मंच का कहना है कि अखबारों से संबधित सरकार की पालिसी के खिलाफ डीएवीपी मनमाने ढंग से अखबारों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। सरकार की विज्ञापन नीति के हिसाब से एक करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले अखबारों को बैलेंस शीट देना अनिवार्य है। जबकि डीएवीपी ने बीस लाख के ऊपर के टर्नओवर वाले अखबारों के लिए बैलेंस शीट अनिवार्य कर दी है।

पूरा मामला जानिए :-
शायद ही कोइ ऐसा व्यवसाय होगा जिसमे कोई manipulation न होता हो , उसी तरह नियमों और कानूनों को देखते हुए देश के 99% मान्यता प्राप्त अखबारों को भी प्रसार संख्या में manipulation करना पड़ता है। बड़े-बड़े ब्रांड अखबार भी बीस हजार कापी को दो लाख प्रसार बताने पर मजबूर है। इस झूठ की मंडी की जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियां भी हैं। यदि कोई अपने अखबार का वास्तविक दो हजार के अंदर का प्रसार बताता है तो उसे डीएवीपी से विज्ञापन की सरकारी दरें नहीं मिलती। और यदि दो हजार से पंद्रह हजार तक के प्रसार का दावा करता है तो उसे लघु समाचार की श्रेणी में रखा जाता है। लघु श्रेणी की विज्ञापन दर इतनी कम होती हैं कि इन दरों से कम संसाधनों वाला अखबार भी अपना बेसिक खर्च भी नहीं निकाल सकता है। यूपी सहित देश के बहुत सारे राज्यों में कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों को राज्य मुख्यालय की मान्यता भी नहीं मिलती। शायद राज्य सरकारों का मानना है कि कम प्रसार वाले अखबारों में राज्य मुख्यालय यानी प्रदेश स्तर की खबरें नहीं छपतीं हैं। सरकारों की इन गलत नीतियों के कारण भी प्रकाशक अपना प्रसार बढ़ा कर प्रस्तुत करता है।

अब ये झूठ देश के करीब 95% अखबारों को ले डूबेगा। और देश के लाखों अखबार कर्मी और पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। यानी सरकारी नीतियों और प्रकाशकों के टकराव की इस चक्की में आम अखबार कर्मी/पत्रकार पिस जायेंगे।
क्योंकि अब बताये गये प्रसार के हिसाब से करोड़ों की राशि के कागज की खरीद और अन्य प्रोडक्शन कास्ट का हिसाब दिये बिना डीएवीपी अखबारों का नवीनीकरण नहीं करेगा। अखबारी कागज पर जीएसटी होने के कारण अब तीन का तेरह बताना संभव नहीं है।

यही कारण है कि अखबारी कागज पर से जीएसटी हटाने की मांग को लेकर प्रकाशकों, अखबार कर्मियों और पत्रकारों ने खूब संघर्ष किया। सरकार के नुमाइंदों को दर्जनों बार ज्ञापन दिये। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक धरना-प्रदर्शन किये। वित्त मंत्री से लेकर पीएमओ और जीएसटी कौंसिल से लेकर विपक्षी नेता राहुल गांधी तक फरियाद की। फिर भी हासिल कुछ नहीं हुआ।

डीएवीपी ने अखबारों की नयी मान्यता के आवेदन पत्र में अखबारों से एक एक पैसे का पक्का हिसाब मांगा है। यानी कागज की जीएसटी से लेकर बैंक स्टेटमेंट मांग कर ये स्पष्ट कर दिया है कि तीन महीने बाद नवीनीकरण के लिए देशभर के सभी अखबारों से ऐसे ही हिसाब मांगा जायेगा। और इस तरह का हिसाब देशभर के 95%अखबार नहीं दे सकेंगे।

इस संकट से लड़ने के लिए पत्रकार संगठन एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं। इन संगठनों का मानना है कि अखबार बंद होने से प्रकाशक तो हंसी-खुशी अखबार बंद करके किसी दूसरे धंधे में आ जायेंगे लेकिन देश के लाखों अखबार कर्मी/पत्रकारों के पास रोजगार का दूसरा विकल्प नहीं होगा।

इस बार पत्रकार संगठन सरकार से पहले तो ये मांग करेंगे कि अखबारों के कम और वास्तविक प्रसार को सरकारी विज्ञापनों की इतनी दरें मिल जायें कि कम संसाधनों का बेसिक खर्च निकल आये। दूसरी महत्वपूर्ण मांग ये होगी कि कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की प्रेस मान्यता बरकरार रहे।
 
दस लाख से कम कुल वार्षिक विज्ञापन पाने वालों से डीएवीपी आय-व्यय का हिसाब ना मांगे। कम संसाधनों, कम आमदनी और कम विज्ञापन पाने वाले इन अखबारों को जीएसटी से मुक्त किया जाये। अखबारों को इन संकटों से बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा पत्रकार संगठनों का साझा मंच ‘अखबार बचाओ मंच’ का कहना है कि यदि ये मांगे भी पूरी नहीं हुयीं तो न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा।

मंच का सबसे मजबूत तर्क होगा कि जब राजनीतिक दल चंदे का हिसाब देने के लिए विवश नहीं हैं तो कम संसाधन और बहुत ही कम सरकारी विज्ञापन पाने वाले देश के अधिकांश अखबार एक-एक पैसे का हिसाब देने के लिए विवश क्यों किए जा रहे हैं।

कार्पोरेट के अखबार करोड़ों रुपये की लागत लगाकर अखबारों में घाटे सह भी सकते हैं। क्योंकि वो अपने मुख्य व्यापार से अरबों रूपये का मुनाफा कमाते है। इनके मुख्य व्यापारों में सरकारों के सहयोग की जरूरत पड़ती है। सरकारों को समाचार पत्रों में सरकारों के गुड वर्क को ज्यादा उजागर करने और खामियों को छिपाने की गरज रहती है। इन कारणों से देश की जनता कार्पोरेट के ब्रांड अखबारों से विश्वसनीयता खोती जा रहे है। पाठक सच पढ़ना चाहता है। उसका रूझान छोटे-छोटे अखबारों की तरफ बढ़ रहा है। लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कार्पोरेट और पेड न्यूज की बेड़ियों में ना जकड़ जाये इसलिए पाठक चार पन्ने के छोटे अखबार में चार सच्ची खबरें पढ़ना चाहता है। जिस तरह राजनीतिक दलों की नीतियों से प्रभावित होकर लोग गुप्त दान करते हैं ऐसे ही छोटे अखबारों को अभी अब लोग दान स्वरुप टुकड़ों – टुकड़ों में कागज देने लगे हैं। जब राजनीतिक दलों के चंदे का हिसाब नहीं तो छोटे अखबारों का हिसाब क्यों?

मुंबई हमले का मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद गिरफ्तार, भेजा गया जेल

   
  आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया है. पंजाब की काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने हाफिज सईद को लाहौर से गिरफ्तार किया. वह लाहौर से गुजरांवाला जा रहा था. गिरफ्तारी के बाद हाफिज सईद को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. इस दौरान हाफिद सईद ने कहा कि मैं अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट जाऊंगा. इससे पहले सोमवार को लाहौर की आतंकवाद निरोधी अदालत (ATC) ने मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा के प्रमुख आतंकी सरगना हाफिज सईद और तीन अन्य को जमानत दे दी थी. डॉन न्यूज के मुताबिक, यह फैसला मदरसे की भूमि को अवैध कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने के एक मामले में लिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, सईद के अलावा हाफिज मसूद, आमेर हमजा और मलिक जफर को 31 अगस्त तक 50,000 पाकिस्तानी रुपये के मुचलके पर अंतरिम जमानत दी गई. सुनवाई के दौरान, आरोपी के कानूनी वकील ने अदालत से जमानत की याचिका स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा कि जमात-उद-दावा भूमि के किसी भी टुकड़े का अवैध रूप से उपयोग नहीं कर रहा है. इस बीच, लाहौर हाई कोर्ट (एलएचसी) ने संघीय सरकार, पंजाब सरकार और काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) को सईद और उसके सात सहयोगियों की ओर से दायर याचिका के बारे में नोटिस जारी किया, जिसमें सीटीडी ने एक मामले में चुनौती भी दी थी।

Tuesday, July 16, 2019

6 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद दरिंदे ने उसको ईट से मारने की कोशिश की

 

दिल्ली ၊
देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर जनकपुरी C-1 के पास फुटपाथ पर सोने वाली मासूम बच्ची के साथ कल देर रात दुष्कर्म जैसी घटना उजागर होते ही यहां के लोगों के दिलों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर का माहौल बना हुआ है । फुटपाथ पर सोने वाली  महिला की रात बारह बजे के करीब जब नींद खुली,तो उसने अपने पास सो रही छह साल की बच्ची को गायब पाया । गरीब महिला ने तुरंत अपने पति और टैक्सी स्टैंड पर सो रहे लोगों को उठाया । महिला की चीख पुकार सुनकर वहा आसपास के लोग इकट्ठा हो गए,और गायब बच्ची को नाले के पास इधर-उधर खोजना  शुरू किया । टैक्सी-ड्राइवर ने पास ही बने शौचालय के पीछे गंदगी वाली जगह पर एक शख्स द्वारा बच्ची को हवस का शिकार बनाने के बाद जान से मारने की कोशिश करते देखा । शोर मचाने पर सभी लोगों ने बड़ी मुस्तैदी से दरिंदे-आरोपी को पकड़ते हुए पुलिस को सूचित कर दिया । मासूम पीड़ित के पास से खून से सना ईट का टुकड़ा भी मिला, जिससे दरिंदे ने बच्ची को जान से मारने के लिए उसके सिर पर कई वार किए थे । मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया । खून से लथपथ मासूम को आनन-फानन में दीनदयाल-अस्पताल में भर्ती करवाया गया । मासूम-पीड़ित  बच्ची की अति-गंभीर स्थिति के चलते डॉक्टरों ने रात मे ही बच्ची को सफदरजंग अस्पताल रेफर कर कर दिया, यहां पर मासूम बच्ची की हालत अति नाजुक व चिंताजनक बनी हुई है । आपको बता दें अभी थोड़े दिन पहले द्वारका में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म की भागीदार निर्भया के बाद, इस घटना को देखते हुए अभी भी नई मासूम निर्भया का जन्म जारी है ।मासूम के मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है । पीड़ित-बच्ची की मां फुटपाथ पर ही रहती है ।और पिता बेलदारी का काम करता है । मासूम के मां-बाप सहित आक्रोशित-लोगों ने आरोपित-दरिंदों को सलाखों के पीछे ना रखते हुए सरेआम जिंदा-चौराहे पर फांसी पर लटका देने की मांग करते हुए कहा आखिर सरकार मासूम संरक्षण के लिए कोई उचित और ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है । थाना-पुलिस द्वारा मीडिया को आरोपित के बारे में बताने मे हिचकिचाना, इन जैसे कुकर्मियों के चेहरे को समाज के सामने उजागर ना करना ही, इस तरह की दरिंदगी भरी घटनाओं में लगातार हो रही बढ़ोतरी का मुख्य कारण होने से,अब दिल्ली भी दरिंदगी का घर बन चुकी है ।

Monday, July 15, 2019

उत्‍तर प्रदेश, बिहार और असम में 33 लाख से ज्‍यादा लोग बाढ़ की चपेट में


देश के अधिकतर हिस्सों में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए हैं। उत्‍तर प्रदेश, बिहार और असम में 33 लाख से ज्‍यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं। उत्‍तर प्रदेश में कई जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। असम के 33 में से 25 जिलों में बाढ़ की वजह से करीब 15 लाख लोग प्रभावित हैं। बिहार में बाढ़ से अब तक 29 लोगों की मौत हुई है और आठ जिले प्रभावित हैं।सरकारी अनुमान के मुताबिक, राज्‍य में लगभग 18 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की वजह से अब तक 65 लोगों की मौत हो गई है जबकि 24 से ज्यादा लोग लापता हैं। 

अब आप ऑफिस में नहीं चला पाएंगे Facebook-WhatsApp!


 अब आप ऑफिस में नहीं चला पाएंगे Facebook-WhatsApp! सोशल मीडिया को लेकर सरकार का कड़ा निर्देश जारी

गृह मंत्रालय ने सरकारी कर्मचारियों के लिये पहली बार सोशल मीडिया पॉलिसी जारी है..
 डेटा सिक्यॉरिटी और हैकिंग की खबरें बढ़ती जा रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने सरकारी कर्मचारियों के लिए पहली बार सोशल मीडिया पॉलिसी जारी की है. तो अगर आप भी सरकारी दफ्तर में काम  करते हैं और अपने ऑफिस में फेसबुक, वॉट्सऐप चलाते हैं तो ये खबर आपके लिए है.नई पॉलिसी के तहत अब सरकारी कर्मचारी अपने ऑफिस के कंप्यूटर, लैपटॉप मोबाइल या फिर किसी दूसरे डिवाइस पर फेसबुक, वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. मंत्रालय का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है.

कर्तव्यहीनता के विरूद्ध देवघर एसपी की कड़ी कार्यवाई, 67 पुलिसकर्मी सस्पेंड




देवघर ၊ जिला के एसपी नरेंद्र कुमार सिंह ने पुलिस महकमे में बड़ी कार्यवाई करते हुए 67 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में 10 पुलिस अधिकारी और 57 पुलिस के जवानों का नाम शामिल है। देवघर एसपी के अनुसार, अपने कर्तव्य का पालन नही करने के कारण इन्हें सस्पेंड किया गया है। निलंबित हुए पुलिसकर्मी श्रावणी मेला में सुरक्षा और विधि व्यवस्था बनाये रखने के लिए जगह जगह तैनात थे। देवघर एसपी के अनुसार, निलंबित सभी पुलिसकर्मी जांच के दौरान ड्यूटी से गायब पाए गए थे। विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला जैसे महत्वपूर्ण ड्यूटी से अनुपस्थित रहना इन पुलिसकर्मियों की स्वेच्छाचारिता, मनमानेपन, आदेश का उल्लंघन, कर्तव्यहीनता और एक अयोग्य पुलिसकर्मी होने का द्योतक है, इसकी वजह से इन्हें निलंबित किया गया है।
बहरहाल देवघर एसपी की इस कार्यवाई से पुलिस महकमें में हड़कंप मची है।


बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...