Thursday, December 26, 2019

पश्चिम बंगाल स्थित गंगासागर हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है;सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार'




पश्चिम बंगाल स्थित गंगासागर हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। मकर संक्रांति के दिन यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहंुचकर स्नान करते हैं। स्नान के बाद इस दिन दान का भी विशेष महत्व होता है। यहां संक्रांति पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। इसलिए कहा जाता है कि 'सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार'।

गंगासागर जाने के लिए कोलकाता से नामखाना की दूरी करीब 110 किलोमीटर है। यहां से चामागुरी घाट तक नौकाएं जाती हैं और वहां से 10 किलोमीटर की दूरी पर गंगासागर है।  सागर द्वीप पर साधुओं का निवास है और द्वीप 150 वर्गमील के लगभग है। यहां वामनखल नामक प्राचीन मंदिर भी है। इसी के निकट चंदनपीड़ी वन में जीर्ण मंदिर और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी मंदिर है।

 गंगासागर में एक मंदिर भी है, जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है। कपिल मुनि के मंदिर में पूजा-अर्चना भी की जाती है। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के  60 हजार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। 

उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर में बह गया, उसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा-अर्चना हेतु मिलती है। अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है। इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है।

मान्यता है कि एक बार गंगासागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गाय दान करने के समान फल मिलता है। गंगासागर में पांच दिनों तक मेला लगा रहता है। इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है। मकर संक्रांति के अवसर पर कई लाख श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है। उसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है। यहां गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है।

मकर संक्रान्ति पर दान का विशेष महत्व,,,शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर मिलता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दिए दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है।
सूर्य उत्तरायण होते हैं।

सामान्यत सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है। इसी कारण यहां रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। 

किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अत: इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अंधकार कम होगा। इसी जिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होती है। 

इस लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा विविध रूपों में सूर्यदेव की उपासना, आराधना एवं पूजन कर, उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट की जाती है। भारतीय पंचांग पद्धति की समस्त तिथियां चन्द्रमा की गति को आधार मानकर निर्धारित की जाती हैं, किन्तु मकर संक्रांति को सूर्य की गति से निर्धारित किया जाता है। इसी कारण यह पर्व प्रतिवर्ष जनवरी में ही पड़ता है।

मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व,,,माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुईं सागर में जाकर मिल गयी थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए यही व्रत किया था।  

गंगासागर (सागर द्वीप या गंगा-सागर-संगम भी कहते हैं) बंगाल की खाड़ी के कॉण्टीनेण्टल शैल्फ में कोलकाता से १५० कि.मी. (८०मील) दक्षिण में एक द्वीप है। यह भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है और पश्चिम बंगाल सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इस द्वीप का कुल क्षेत्रफल ३०० वर्ग कि.मी. है। इसमें ४३ गांव हैं, जिनकी जनसंख्या १,६०,००० है। यहीं गंगा नदी का सागर से संगम माना जाता है।

इस द्वीप में ही रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक आवास है। यहां मैन्ग्रोव की दलदल, जलमार्ग तथा छोटी छोटी नदियां, नहरें हीं। इस द्वीप पर ही प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है। प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लाखों हिन्दू श्रद्धालुओं का तांता लगता है, जो गंगा नदी के सागर से संगम पर नदी में स्नान करने के इच्छुक होते हैं। यहाँ एक मंदिर भी है जो कपिल मुनि के प्राचीन आश्रम स्थल पर बना है। ये लोग कपिल मुनि के मंदिर में पूजा अर्चना भी करते हैं। पुराणों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप के कारण ही राजा सगर के ६० हज़ार पुत्रों की इसी स्थान पर तत्काल मृत्यु हो गई थी। 

उनके मोक्ष के लिए राजा सगर के वंश के राजा भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और गंगा यहीं सागर से मिली थीं। कहा जाता है कि एक बार गंगा सागर में डुबकी लगाने पर 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने के समान फल मिलता है। जहां गंगा-सागर का मेला लगता है, वहां से कुछ दूरी उत्तर वामनखल स्थान में एक प्राचीन मंदिर है। उसके पास चंदनपीड़िवन में एक जीर्ण मंदिर है और बुड़बुड़ीर तट पर विशालाक्षी का मंदिर है।

कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का यहां एक पायलट स्टेशन तथा एक प्रकाशदीप भी है। पश्चिम बंगाल सरकार सागर द्वीप में एक गहरे पानी के बंदरगाह निर्माण की योजना बना रही है। गंगासागर तीर्थ एवं मेला महाकुंभ के बाद मनुष्यों का दूसरा सबसे बड़ा मेला है। यह मेला वर्ष में एक बार लगता है।

गंगा-डेल्टा, सुंदरवन का उपग्रह चित्र, यहीं बीच में गंगा-सागर द्वीप स्थित है। यह द्वीप के दक्षिणतम छोर पर गंगा डेल्टा में गंगा के बंगाल की खाड़ी में पूर्ण विलय (संगम) के बिंदु पर लगता है। बहुत पहले इस ही स्थानपर गंगा जी की धारा सागर में मिलती थी, किंतु अब इसका मुहाना पीछे हट गया है। अब इस द्वीप के पास गंगा की एक बहुत छोटी सी धारा सागर से मिलती है।  यह मेला पांच दिन चलता है।

 इसमें स्नान मुहूर्त तीन ही दिनों का होता है। यहां गंगाजी का कोई मंदिर नहीं है, बस एक मील का स्थान निश्चित है, जिसे मेले की तिथि से कुछ दिन पूर्व ही संवारा जाता है। यहां स्थित कपिल मुनि का मंदिर सागर बहा ले गया, जिसकी मूर्ति अब कोलकाता में रहती है, और मेले से कुछ सप्ताह पूर्व पुरोहितों को पूजा अर्चना हेतु मिलती है। अब यहां एक अस्थायी मंदिर ही बना है।  इस स्थान पर कुछ भाग चार वर्षों में एक बार ही बाहर आता है, शेष तीन वर्ष जलमग्न रहता है। इस कारण ही कह जाता है:

बाकी तीरथ चार बार, गंगा-सागर एक बार॥
वर्ष २०12 में मकर संक्रांति के अवसर पर लगभग 8 लाख लोगों ने यहां स्नान किया। यह संख्या अगले वर्ष घटकर 6 लाख रह गई। ऐसा कुंभ मेले के कारण हुआ। शेष वर्ष पर्यन्त ५० हजार तीर्थयात्रियों ने स्नान किए।  २०11 में पांच लाख श्रद्धालुओं ने सागर द्वीप में स्नान किया था । यहां आने वाले श्रद्धालुओं से १० भारतीय रुपए कर लिया जाता है।

प्रायः यात्री कोलकाता से नाव से गंगा सागर जाते हैं। कोलकाता से ३८ मील दक्षिण में डायमंड हार्बर स्टेशन है। वहां से नावें और जहाज भी गंगा सागर जाते हैं। कोलकता से गंगासागरद्वीप लगभग ९० मील दक्षिण में है।फेसबुक से जुड़ेसादर प्रणाम नमन आप सभी मित्रजनो को


ज्योतिषियों की मानें तो इस ग्रहण का दुनिया के कई हिस्सों में विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है


न्यूज़ डेस्क
ग्रहण का प्रभाव क्या रहेगा: ये सूर्य ग्रहण धनु राशि और मूल नक्षत्र में बना है। इसलिए व्यक्तिगत रूप से धनु राशि और मूल नक्षत्र में जन्मे लोगों पर इस ग्रहण का खास प्रभाव पड़ने वाला है। ज्योतिषियों की मानें तो इस ग्रहण का दुनिया के कई हिस्सों में विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। राजनीति में कई उथल पुथल देखने को मिलेंगे। महंगाई बढ़ने के आसार रहेंगे। अपराधों में वृद्धि हो सकती है। ये देश की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित करता नजर आ रहा है। सूर्य ग्रहण के कारण देश के कुछ राज्यों में कानून व्यवस्था को चुनौती भी मिल सकती है। सूर्य ग्रहण के प्रभाव के चलते राजनीति के धुरधंरों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए राजनीति के लिहाज से इस ग्रहण को ठीक नहीं माना जा रहा है।


राशियों पर इसका प्रभाव: कर्क, तुला, मीन, कुंभ राशि के जातकों के लिए ग्रहण शुभ फल प्रदान करने वाला बनेगा। तो वहीं वृषभ, कन्या, धनु और मकर राशि वालों की ये मुश्किलें बढ़ाने का काम करेगा। हालांकि मेष, मिथुन, वृश्चिक, सिंह राशि के जातकों के लिए यह मिलाजुले परिणाम देगा। सूर्यग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ग्रहण के खत्म होने के बाद स्नान कर दान पुण्य जरूर करें।

Wednesday, December 25, 2019

प्रेमिका से मिलने पहुंचा, घरवालों ने प्रेमी की गला दबाकर उसकी हत्या कर

प्रेम प्रसंग के मामले में एक युवक की हत्या का ताजा मामला जमुई जिले से सामने आया है. जहां एक आशिक को रात में अपनी प्रेमिका से मिलना महंगा पड़ गया. प्रेमिका के घरवालों ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और उसकी डेड बॉडी को सड़क किनारे फेंक दिया. इस हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई है. मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है. 


वारदात जमुई जिले के चकाई थाना इलाके की है. जहां एक महिला से अवैध संबंध रखने पर एक युवक को अपनी जान से हाथ धोनी पड़ी. रात में अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचे आशिक की प्रेमिका के घरवालों ने गला दबाकर हत्या कर दी और उसके शव को  जल खरिया गांव जाने वाली कच्ची सड़क किनारे फेंक दिया. मृतक की पहचान सुशील रजक के रूप में की गई है. जो राज मिस्त्री का काम करता था. बताया जा रहा है कि गांव की ही एक पड़ोसी महिला के साथ उसका अफेयर कई दिनों से चल रहा था.


मृतक युवक की मां लालमणि देवी ने बताया कि उसके बेटे का एक महिला के साथ नाजायज संबंध था. इसको लेकर हमेशा विवाद होते रहता था. उन्होंने बताया कि रात में खाना खाकर वह घर में ही सोया हुआ था. लेकिन सुबह में उसकी डेड बॉडी कच्ची सड़क से बरामद हुई. हालांकि युवक वहां कैसे पहुंचा. पुलिस इसकी छानबीन कर रही है.  चकाई थानाध्यक्ष राजीव कुमार तिवारी के मुताबिक मृतक के गले पर निशान हैं जिसके बाद यह आशंका जताई गई है कि उसकी गला दबा कर हत्या कर दी गई है. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा ।

खूंटी में श्रीमद भागवत कथा प्रारम्भ - आयोजन में भक्तों का हुजूम

                                                                                                                                        खूंटी : खूंटी में आर्ट ऑफ लिविंग परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के प्रथम दिवस में आज स्वामी दिव्यानंद जी ने भागवत कथा का महत्व बताया की कथा वही है जिसमें ईश्वर से प्रेम हो हमारे सनातन धर्म में ईश्वर के हर स्वरूप को प्रेम स्वरूप ही कहा गया है माना गया है,इस कथा को सुनने से भक्तों में श्री कृष्ण की ज्ञान वैराग्य भक्ति स्थापित हो जाएगी, श्रीमद भागवत कथा गुरु शिष्य संबंध भी है जिसमें गुरुदेव सुखदेव जी महाराज अपने प्रिय  शिशय राजा परीक्षित को भगवान की कथा अमृत का रसपान कराते हुए उनके हृदय में भगवान की प्रेम भक्ति स्थापित करते हैं और उन्हें भगवान से मिलाते हैं अर्थात् आत्मज्ञान कराते हैं, कथा के प्रथम दिवस में खूंटी नगर वासी एवं आस पास के ग्रामीण हजारों की संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य उत्सव कथा का आनंद लिया कथा का रसपान किया बैंगलोर से आए हुए स्वामी दिव्यानंद जी की पूरी टीम भजन सत्संग से पूरे वातावरण को  भक्तिमय कर दिया......जय गुरुदेव

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार उत्पीड़न के तहत मामला दर्ज


जामताड़ा । जिला के मिहिजाम थाना में बुधवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार उत्पीड़न के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी और विधायक हेमंत सोरेन के लिखित आवेदन पर मिहिजाम थाना कांड संख्यां 110/2019 यू/एस 504/506 आई0पी0सी0एवं यू/एस 3 (एस) (एस) एसी/एसटी उत्पीड़न के तहत दर्ज किया गया है।

अटल भूजल योजना की शुरुआत, मोदी बोले- 2024 तक होगा ‘हर घर जल




न्यूज़ डेस्क।
  नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर अटल भूजल योजना की शुरुआत की. इसके साथ ही पीएम मोदी ने अटल टनल का भी उद्घाटन किया. दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज भारत के दो रत्नों अटल बिहारी वाजपेयी, मदन मोहन मालवीय का जन्मदिन है. मनाली के पास एक गांव में आज हवन हो रहा है. जब मैं हिमाचल में रहता था तो अटल जी मनाली आते थे, तब अटल जी ने इस टनल पर काम करना शुरू किया था. तब मैंने नहीं सोचा था कि अटलजी के सपने को उनके नाम से ही जोड़ा जाएगा.
प्रधानमंत्री बोले कि करगिल के युद्ध के बाद सुरक्षा की दृष्टि से इस टनल का उपयोग काफी महत्वपूर्ण है. लेह-लद्दाख और करगिल का भी भाग्य इस टनल से बदल जाएगा. पानी के मुद्दे पर अटल बिहारी वाजपेयी ने काफी काम किया था.

80 साल की उम्र में खेती छोड़ने का फैसला करने वाले किसान के लिए एक भव्य समारोह


    भनडारा में एक किसान परिवार ने सोमवार को एक भव्य विदाई पार्टी का आयोजन किया क्योंकि वह मोहेगांव में 60 साल के बाद यहां खेती के लिए बोली लगाती है।

 परिवार ने 80 साल की उम्र में खेती छोड़ने का फैसला करने वाले किसान गजानन काले के लिए एक भव्य समारोह आयोजित किया।

 "मैंने तब खेती करना शुरू किया जब मैं 18 साल का था। मैंने अपने जीवन के 60 साल खेती में बिताए हैं। मेरे लिए यह एक भावनात्मक क्षण है, क्योंकि किसी चीज को अलविदा कहना बहुत मुश्किल है, जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं,"  ।

 काले के साथ, परिवार ने बाइक, कार और बैलगाड़ी की भव्य शोभायात्रा निकालकर 10 अन्य किसानों को सम्मानित किया।

 जुलूस के दौरान, जो काले के घर से शुरू हुआ था, जहां एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, बच्चों, महिलाओं और युवा लड़कों सहित ग्रामीणों ने विभिन्न गीतों पर नृत्य किया और खुशी से ढोल बजाए।

 काले के परिवार में 19 सदस्य हैं और उनके पास खेती के लिए 25 एकड़ जमीन है।

 "मेरे भाई को अपने बुढ़ापे के कारण खेती करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसलिए, हमने फैसला किया कि उन्हें खेती से सेवानिवृत्त होना चाहिए और अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। हमने उनके लिए अपने खेती के दिनों को यादगार बनाने के लिए एक शानदार विदाई समारोह की व्यवस्था की।"  यशवंत काले ने कहा।

 पूरे गाँव और उनके रिश्तेदारों के लिए कलीम के परिवार द्वारा शानदार व्यंजनों और मिठाई की व्यवस्था की गई थी।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...