Saturday, January 4, 2020
अनोखा है मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर, बलि देने के बाद भी नहीं जाती बकरे की जान
अनोखा है मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर, बलि देने के बाद भी नहीं जाती बकरे की जान
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिघलबैंक के कृषक मदन कु सिंह को 'कृषि कर्मण पुरस्कार' 2016-17 प्रदान किया
शशिनाथ झा। #Kishan ganj.बिहार प्रदेश का किशनगंज जिला ,जहाँ भारत नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे दिघलबैंक प्रखंड के कृषक मदन कुमार सिंह को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने "कृषि कर्मण पुरस्कार 2016-17 " प्रदान किया ।उक्त पुरस्कार कर्नाटक के तुमकुर में 02 जनवरी 2020 को दिया गया ।जहाँ कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री यदुरप्पा सहित बिहार के कृषिमंत्री प्रेम कुमार भी मौजूद थे ।
मदन कुमार सिंह "किसान श्री "को बिहार सरकार ने 2008 में मोटे अनाज के रिकार्ड उत्पादन हेतु "किसान श्री " के खिताव से नवाजा था ।जबकि 2016 -17 के लिए इन्हें "कृषि कर्मण "पुरस्कार के लिए चुना गया ।इस पुरस्कार में राज्य सरकार को दो कड़ोड़ की नगद राशि सहित प्रशस्तिपत्र और चयनित किसान को दो लाख रुपये नगद और प्रशस्तिपत्र दिया गया ।यह पुरस्कार कर्नाटक प्रदेश के तुमकुर में देश के प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार के मंत्री प्रेम कुमार और कृषक मदन कुमार सिंह को आयोजित समारोह में प्रदान किया ।बताना लाजिमी है कि मदन कुमार सिंह मूलतः सहरसा जिला (बिहार )के निवासी हैं ।11 मार्च 1985 को इनकी शादी इसी दिघलबैंक के निवासी श्री कामेश्वर सिंह की पुत्री पूनम से हुई थी ।सीमावर्ती क्षेत्रों की उपजाऊ जमीन और रोजगारपरक संभावनाओं ने इन्हें यहीं रोक लिया और ये सपरिवार यहीं के निवासी बनकर रह गये ।1985 के दशकों में दिघलबैंक और आसपास के खेतों में केवल धान और पाट की खेती हुआ करती थी ।जहाँ मदन जी ने उन्नत एवं विभिन्न फसलों को उपजाने का प्रयास किया ।काफी जझारु किस्म के मदन ने अनेक पापड़ बेले ,कई चुनौतियों का सामना किया पर पीछे मुड़कर नहीं देखा ।जिसका फलाफल भी सामने आया ,किसानी करते करते ये व्यवसायी भी बन गये ।इनके बढ़ते कदमों के पीछे इनकी पत्नी पूनम का भी बड़ा योगदान रहा ।जहाँ सभी तरह के संघर्षों में इनकी समानरुप से भागीदारी रही ।फलतः लोगों में इनका जुझारुपन और निर्भिकता ने स्थान बना लिया और सपत्निक ये लोक सेवक के रुप में प्रतिष्ठित हो गये ।जिसके फलस्वरूप पूनम देवी ने 13. 06 .2001 को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बनकर दिघलबैंक प्रमुख के पद पर आसीन हुई तथा दूसरी बार भी इस पद पर विजयी होकर वर्तमान प्रखंड प्रमुख के पद पर काबिज हैं ।वहीं दूसरी ओर किसान ,व्यवसायी और समाजिक कार्यकर्ता बनते रहे मदन ने किसान हित में 2019 के पैक्स चुनाव में दिघलबैंक पैक्स अध्यक्ष
Friday, January 3, 2020
नावाडीह के आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति ने किया वनभोज सह मिलन समारोह आयोजित,डुमरी विधायक को किया सम्मानित
किशनगंज: बहादुरगंज थानाध्यक्ष ने नये बर्ष के पहले दिन दबे कुचले महादलितों को मिठाईयां खिलाकर उनके बीच परिवार के साथ कंबल बांटे
शशि कान्त झा। किशनगंज (बिहार) । जिले के बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने नये बर्ष के पहले दिन दबे कुचले महादलितों को मिठाईयां खिलाकर उनके बीच परिवार के साथ कंबल बांटे ।जो बहादुरगंंज के तबारिख की नई इबारत बनकर लोगों को गले लगाने का पैगाम दे गयी । मौका था नये साल की आगाज का ,जहां खा़की के दबदबे में छुपी ईंसानियत खुलकर समाज के सामने आ गयी ।यूं तो सुमन कुमार सिंह ने मधेपूरा जिले से बदलकर किशनगंज जिला में आने के बाद अपनी काबिलियत के कई रंग बिखेरे ।जहाँ साईबर सेल के इंचार्ज रहकर ,जिले के एस पी कुमार आशिष के आदेश पर तत्कालीन थानाध्यक्ष (सदर किशनगंज)आफताब अहमद के नेतृत्व में गंगा पार साहबगंज से एक डकैती कांड के कुख्यात को धर दबोचा ।वहीं एस पी किशनगंज के नेतृत्व में नकली शराब बनाने बाली फेक्ट्री को समूल नष्ट करने में किशनगंज पुलिस के साथ बड़ी भूमिका भी निभाई ।जिसकी वजह रही कि एस पी कुमार आशिष ने इनके हौसले और बहादुरी को काफी करीब से परख कर 04 दिसंबर 2019 को बहादुरगंज थाने की कमान सौंपी ।जहाँ उनके आदेश पर सुमन जी ने 05दिसंबर 2019 को बहादुरगंज जैसे बड़े थाने में अपनी हाजरी दर्ज कराई ।2009 बैच के एस आई को 18 सर्किल के बड़े थाने की कमान मिलने पर जिले में एक भूचाल सा आ गया ।पर एस पी कुमार आशिष की दूर दृष्टि और पक्का इरादे की कसौटी पर सुमन जी ने खरे उतरने का भरसक प्रयास किया ।जहाँ इन्होने थाना और थानेदार की की परिभाषा हीं बदलकर रख दी ।थाना के नाम पर डरने बालों को ये करीब लाकर बैठाने लगे , जहाँ कथित तौर पर पहले से दलाली पेशे से जुड़े तथाकथितों की लगभग छुट्टी हीं हो गई ।थाना प्रशासन और विधि व्यवस्था को दुरुस्त करने ,अपराध एवं अपराधियों पर कठोर नियंत्रण के लिए इन्होने थाना को 15 सेक्टरों में बांटकर वहां की जिम्मेदारी प्रभारी पुलिस पदाधिकारियों को सौंप दी ।जिससे किसी भी आपात और आपदा की स्थिति में पुलिस की मौजूदगी आज मिशाल बनी हुई है ।
ऐसे में नये साल के पहले दिन अपने परिजनों के साथ मिलकर समाज के दबे कुचलों को मिठाईयां खिलाकर कंबल ओढ़ाना ,एक नई मिशाल बन कर लोगों के बीच चर्चा का बिषय बन चुका है ।ऐसा कहा जाता है कि अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण के साथ सुमन जी ने लोगों के दिलों को भी नियंत्रित कर लिया है ।जहाँ अब अपराध और अपराधियों पर नकेल डालने के लिए इन्हें भारी जनसहयोग मिल रहा है ।जन प्रतिनिधियों की सकारात्मक भूमिका आज पुलिस पब्लिक सहयोग का उदाहरण बनकर सामने आगया है ।वीरानगी के चादर ओढ़े थाना का रंग रुप बदलकर एक सजे पार्क का रुप ले लिया है ।जहाँ के झूलते रंगीन पर्दे ,लोगों को बैठने के लिए सोफे और सुनने के लिए चौबीस घंटे पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी सही मायनों में थाना को एक अलग पहचान दे रही है ।
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Thursday, January 2, 2020
दु:खद : जम्मू में सेना के जवान की मौत के बाद घर आया शव, पत्नी ने कुएं में कूदकर दी जान
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ग्रामीणों ने कहा- महिला को उसकी ननद करती थी प्रताड़ित :
ग्रामीणों के मुताबिक, दो साल पहले बजरंग और मनीता की शादी हुई थी। मनीता रातू की रहनेवाली थी। उधर, घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे मनीता के परिजनों ने बजरंग की बहन और उसके पति बिस्वा उरांव पर हत्या का आरोप लगाया है। मृतका के परिजनों का कहना है कि बच्चा नहीं होने पर बजरंग की पत्नी मनीता उरांव को उसकी ननद (बजरंग की बहन) ताना देते रहती थी जिससे तंग आकर उसने जान दी है। बजरंग भगत के पिता का निधन पहले ही हो चुका है। पांच बहनों की शादी हो चुकी है। घर में उनकी बूढी मां है। बजरंग 2012 में सेना में भर्ती हुए थे।
जम्मू में बिस्तर से गिरकर हुई थी बजरंग की मौत :
बजरंग भगत रेजिमेंटल सेंटर नागपुर महाराष्ट्र के यूनिट 17 में गार्ड के पद पर पदस्थापित थे। करीब तीन माह पहले उनकी पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। यूनिट के सीओ कर्नल विजय सिंह ने फोन पर बताया कि सोने के दौरान बिस्तर से गिरने के कारण उनकी मौत हुई है। हालांकि परिजनों ने कहा कि 29 दिसम्बर की रात करीब 10 बजे बजरंग के मोबाइल पर बात हुई थी और सुबह आठ बजे अचानक फोन पर सूचना मिली कि बजरंग अब इस दुनिया में नहीं
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