शशिनाथ झा। #Kishan ganj.बिहार प्रदेश का किशनगंज जिला ,जहाँ भारत नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे दिघलबैंक प्रखंड के कृषक मदन कुमार सिंह को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने "कृषि कर्मण पुरस्कार 2016-17 " प्रदान किया ।उक्त पुरस्कार कर्नाटक के तुमकुर में 02 जनवरी 2020 को दिया गया ।जहाँ कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री यदुरप्पा सहित बिहार के कृषिमंत्री प्रेम कुमार भी मौजूद थे ।
मदन कुमार सिंह "किसान श्री "को बिहार सरकार ने 2008 में मोटे अनाज के रिकार्ड उत्पादन हेतु "किसान श्री " के खिताव से नवाजा था ।जबकि 2016 -17 के लिए इन्हें "कृषि कर्मण "पुरस्कार के लिए चुना गया ।इस पुरस्कार में राज्य सरकार को दो कड़ोड़ की नगद राशि सहित प्रशस्तिपत्र और चयनित किसान को दो लाख रुपये नगद और प्रशस्तिपत्र दिया गया ।यह पुरस्कार कर्नाटक प्रदेश के तुमकुर में देश के प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार के मंत्री प्रेम कुमार और कृषक मदन कुमार सिंह को आयोजित समारोह में प्रदान किया ।बताना लाजिमी है कि मदन कुमार सिंह मूलतः सहरसा जिला (बिहार )के निवासी हैं ।11 मार्च 1985 को इनकी शादी इसी दिघलबैंक के निवासी श्री कामेश्वर सिंह की पुत्री पूनम से हुई थी ।सीमावर्ती क्षेत्रों की उपजाऊ जमीन और रोजगारपरक संभावनाओं ने इन्हें यहीं रोक लिया और ये सपरिवार यहीं के निवासी बनकर रह गये ।1985 के दशकों में दिघलबैंक और आसपास के खेतों में केवल धान और पाट की खेती हुआ करती थी ।जहाँ मदन जी ने उन्नत एवं विभिन्न फसलों को उपजाने का प्रयास किया ।काफी जझारु किस्म के मदन ने अनेक पापड़ बेले ,कई चुनौतियों का सामना किया पर पीछे मुड़कर नहीं देखा ।जिसका फलाफल भी सामने आया ,किसानी करते करते ये व्यवसायी भी बन गये ।इनके बढ़ते कदमों के पीछे इनकी पत्नी पूनम का भी बड़ा योगदान रहा ।जहाँ सभी तरह के संघर्षों में इनकी समानरुप से भागीदारी रही ।फलतः लोगों में इनका जुझारुपन और निर्भिकता ने स्थान बना लिया और सपत्निक ये लोक सेवक के रुप में प्रतिष्ठित हो गये ।जिसके फलस्वरूप पूनम देवी ने 13. 06 .2001 को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बनकर दिघलबैंक प्रमुख के पद पर आसीन हुई तथा दूसरी बार भी इस पद पर विजयी होकर वर्तमान प्रखंड प्रमुख के पद पर काबिज हैं ।वहीं दूसरी ओर किसान ,व्यवसायी और समाजिक कार्यकर्ता बनते रहे मदन ने किसान हित में 2019 के पैक्स चुनाव में दिघलबैंक पैक्स अध्यक्ष
चुनाव में जीत हासिल कर पैक्स अध्यक्ष बन चुके हैं ।आज कृषि कर्मण पुरस्कार पाने से जहाँ इनके समर्थकों में भारी उत्साह है ,तो दूसरी ओर विरोधी खेमा धू धू कर जलने लगा है ।पर विधि के विधान और कर्मफल पर रोक लगा पाना किसी के अधीन नहीं है ।तो इनके लौटने पर स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं लोग ,जहाँ प्रतीक्षा में लोग पलकें बिछाये हुए हैं ।


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