कालाधन जरूर आएंगे, हर व्यक्ति के खातें में डाले जाएंगे 15 लाख रूपये... ये वो वादे है, जिसे आपने पीएम मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं को कहते हुआ सुना होगा। हालांकि उन्होंने कालाधन पर अंकुश लगाने के लिए नोटबंदी भी लाई, लेकिन वो नोटबंदी भी कालेधन को वापस नहीं ला सकीं।
आपको बता दें कि हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रूपये न डालने पर रांची के एक हाईकोर्ट में जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। बता दें कि यह मामला हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता ने दर्ज कराया है, जिसकी सुनवाई 1 फरवरी को की जाएगी। गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता डोरंडा निवासी हरेंद्र कुमार सिंह के द्वारा दायर मुकदमें पर अगली सुनवाई के दिन शिकायतकर्ता का बयान शपथ-पत्र पर दर्ज किया जाएगा।
वकील हरेंद्र कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि वह विदेशों में जमा कालाधन भारत वापस लाएंगे। इससे सभी भारतीयों के खाते में 15-15 लाख रुपये डाले जाएंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हर साल तीन लाख सरकारी नौकरी देने का भी वादा किया था। ये सभी मुद्दे भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल थे।
वहीं शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस वक्त के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने यह वादा 7 नवंबर 2013 को छत्तीसगढ़ में किया था। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने इस वादे को पूरा नहीं किया। अमित शाह ने एक इलेक्ट्रॉनिक चैनल को 5 फरवरी 2015 को कालाधन आने पर भारतीयों को 15-15 लाख रुपए मिलने की बात को लोकोक्ति कहा और इसे चुनावी उद्देश्य बताया था।
बता दें कि शिकायतकर्ता ने केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास अठावले पर भी आरोप लगाया है। जिसमें उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 18 दिसंबर 2018 को महाराष्ट्र के सांगली में उन्होंने भरोसा दिलाया था कि कालाधन आने पर 15-15 लाख प्रत्येक भारतीय को मिलेंगे। आपको बता दें कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता हरेंद्र की शिकायत पर भारतीय दंड विधान की धारा 415, 420 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब देखना यह है कि इस केस की सुनवाई के बाद अब कौन सा नया पाठ सामने आता है। क्या पीएम मोदी 15 लाख रूपये देंगे या एक बार फिर कालाधन के लिए नोटबंदी करेंगे।

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