Saturday, January 4, 2020

अनोखा है मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर, बलि देने के बाद भी नहीं जाती बकरे की जान


न्यूज़ डेस्क।

बिहार के कैमूर जिले के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी का ख्याति पूरे देश में विख्यात है. मां मुंडेश्वरी धाम बकरे की रक्त हीन बली के लिए भी प्रसिद्ध है जो अपने आप में अजूबा है.

यहां बकरे को काटा नहीं जाता बल्कि अच्छत फूल लेकर मंत्र पढ़कर पुजारी द्वारा मारने से बकरा मां के चरणों में मरणासन्न स्थिति में लेट जाता है और फिर अक्षत और पुष्प लेकर मंत्र पढ़ने से बकरा अपने वास्तविक स्थिति में उठ खड़ा होता है. ऐसा रक्तहीन बली पूरे विश्व में कहीं नहीं होती.

मां मुंडेश्वरी का मंदिर अष्ट कोड़िय रूप में है, जो पवरा पहाड़ी पर स्थित है. इस मंदिर के बीच में पंचमुखी शिवलिंग है जो महामंडलेश्वर कहे जाते हैं, और मां मुंडेश्वरी पार्वती रूप में हैं.

मां मुंडेश्वरी के पूजा करने वाले पुजारी का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण कराया नहीं गया बल्कि इस मंदिर को खुदाई के दौरान पाया गया है और मंदिर पहाड़ी के सबसे ऊपर अष्ट कोड़िय रूप में स्थित है.

तांडूल भोग ही मां मुंडेश्वरी का सर्वोत्तम प्रसाद है. इनकी कीर्ति इतना विख्यात है कि देश के कोने कोने से लोग यह दर्शन और मन्नतें मांगने आते हैं. मन्नतें पूरी होने पर माता को मन्नत का बकरा भी अर्पित करते हैं.

अनोखा है मां मुंडेश्वरी का यह मंदिर, बलि देने के बाद भी नहीं जाती बकरे की जान


न्यूज़ डेस्क।

बिहार के कैमूर जिले के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी का ख्याति पूरे देश में विख्यात है. मां मुंडेश्वरी धाम बकरे की रक्त हीन बली के लिए भी प्रसिद्ध है जो अपने आप में अजूबा है.

यहां बकरे को काटा नहीं जाता बल्कि अच्छत फूल लेकर मंत्र पढ़कर पुजारी द्वारा मारने से बकरा मां के चरणों में मरणासन्न स्थिति में लेट जाता है और फिर अक्षत और पुष्प लेकर मंत्र पढ़ने से बकरा अपने वास्तविक स्थिति में उठ खड़ा होता है. ऐसा रक्तहीन बली पूरे विश्व में कहीं नहीं होती.

मां मुंडेश्वरी का मंदिर अष्ट कोड़िय रूप में है, जो पवरा पहाड़ी पर स्थित है. इस मंदिर के बीच में पंचमुखी शिवलिंग है जो महामंडलेश्वर कहे जाते हैं, और मां मुंडेश्वरी पार्वती रूप में हैं.

मां मुंडेश्वरी के पूजा करने वाले पुजारी का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण कराया नहीं गया बल्कि इस मंदिर को खुदाई के दौरान पाया गया है और मंदिर पहाड़ी के सबसे ऊपर अष्ट कोड़िय रूप में स्थित है.

तांडूल भोग ही मां मुंडेश्वरी का सर्वोत्तम प्रसाद है. इनकी कीर्ति इतना विख्यात है कि देश के कोने कोने से लोग यह दर्शन और मन्नतें मांगने आते हैं. मन्नतें पूरी होने पर माता को मन्नत का बकरा भी अर्पित करते हैं.

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिघलबैंक के कृषक मदन कु सिंह को 'कृषि कर्मण पुरस्कार' 2016-17 प्रदान किया


शशिनाथ झा। #Kishan ganj.बिहार प्रदेश का किशनगंज जिला ,जहाँ भारत नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे दिघलबैंक प्रखंड के कृषक मदन कुमार सिंह को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने "कृषि कर्मण पुरस्कार 2016-17 " प्रदान किया ।उक्त पुरस्कार कर्नाटक के तुमकुर में 02 जनवरी 2020 को दिया गया ।जहाँ कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री यदुरप्पा सहित बिहार के कृषिमंत्री प्रेम कुमार भी मौजूद थे ।                     
            मदन कुमार सिंह "किसान श्री "को बिहार सरकार ने 2008 में मोटे अनाज के रिकार्ड उत्पादन हेतु "किसान श्री " के खिताव से नवाजा था ।जबकि 2016 -17 के लिए इन्हें "कृषि कर्मण "पुरस्कार के लिए चुना गया ।इस पुरस्कार में राज्य सरकार को दो कड़ोड़ की नगद राशि सहित प्रशस्तिपत्र और चयनित किसान को दो लाख रुपये नगद और प्रशस्तिपत्र दिया गया ।यह पुरस्कार कर्नाटक प्रदेश के तुमकुर में देश के प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार के मंत्री प्रेम कुमार और कृषक मदन कुमार सिंह को आयोजित समारोह में प्रदान किया ।बताना लाजिमी है कि मदन कुमार सिंह मूलतः सहरसा जिला (बिहार )के निवासी हैं ।11 मार्च 1985 को इनकी शादी इसी दिघलबैंक के निवासी श्री कामेश्वर सिंह की पुत्री पूनम से हुई थी ।सीमावर्ती क्षेत्रों की उपजाऊ जमीन और रोजगारपरक संभावनाओं ने इन्हें यहीं रोक लिया और ये सपरिवार यहीं के निवासी बनकर रह गये ।1985 के दशकों में दिघलबैंक और आसपास के खेतों में केवल धान और पाट की खेती हुआ करती थी ।जहाँ मदन जी ने उन्नत एवं विभिन्न फसलों को उपजाने का प्रयास किया ।काफी जझारु किस्म के मदन ने अनेक पापड़ बेले ,कई चुनौतियों का सामना किया पर पीछे मुड़कर नहीं देखा ।जिसका फलाफल भी सामने आया ,किसानी करते करते ये व्यवसायी भी बन गये ।इनके बढ़ते कदमों के पीछे इनकी पत्नी पूनम का भी बड़ा योगदान रहा ।जहाँ सभी तरह के संघर्षों में इनकी समानरुप से भागीदारी रही ।फलतः लोगों में इनका जुझारुपन और निर्भिकता ने  स्थान बना लिया और सपत्निक ये लोक सेवक के रुप में प्रतिष्ठित हो गये ।जिसके फलस्वरूप पूनम देवी ने 13. 06 .2001 को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बनकर दिघलबैंक प्रमुख के पद पर आसीन हुई तथा दूसरी बार भी इस पद पर विजयी होकर वर्तमान प्रखंड प्रमुख के पद पर काबिज हैं ।वहीं दूसरी ओर किसान ,व्यवसायी और समाजिक कार्यकर्ता बनते रहे मदन ने किसान हित में 2019 के पैक्स चुनाव में दिघलबैंक पैक्स अध्यक्ष
चुनाव में जीत हासिल कर पैक्स अध्यक्ष बन चुके हैं ।आज कृषि कर्मण पुरस्कार पाने से जहाँ इनके समर्थकों में भारी उत्साह है ,तो दूसरी ओर विरोधी खेमा धू धू कर जलने लगा है ।पर विधि के विधान और कर्मफल पर रोक लगा पाना किसी के अधीन नहीं है ।तो इनके लौटने पर स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं लोग ,जहाँ प्रतीक्षा में लोग पलकें बिछाये हुए हैं ।

Friday, January 3, 2020

नावाडीह के आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति ने किया वनभोज सह मिलन समारोह आयोजित,डुमरी विधायक को किया सम्मानित




नावाडीह के विकास में समिति की सराहनीय भूमिका -जगरनाथ

बासु बिहारी। बोकारो।नावाडीह प्रखंड की स्वयं सेवी संस्था आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति नावाडीह की ओर से भालमारा के बोरवापानी  में वनभोज सह मिलन समारोह का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि सह डुमरी क्षेत्र के विधायक जगरनाथ महतो को चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने पर उनका भव्य स्वागत किया गया।समिति के सचिव बासुदेव शर्मा ने मानपत्र व शाल भेंट कर अभिनन्दन किया और बधाई दी।
विधायक श्री महतो ने कहा कि समिति न केवल नावाडीह प्रखंड बल्कि बोकारो जिला के अन्य प्रखंड में भी सामाजिक कार्य कर लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है।नावाडीह प्रखंड के विकास के समिति अहम भूमिका निभा रही है।उन्होंने कहा कि शिक्षा, खेलकूद, पर्यावरण, महिला जागृति, नशा उन्मूलन, दहेज प्रथा, बाल विवाह आदि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती रहे, समिति को  हर संभव सहयोग किया जायगा। प्रमुख पूनम देवी ने कहा कि  प्रखंड में महिला स्वयंसहायता समूह के गठन और स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण का प्रबंध कर जन जागरूकता अभियान में समिति ने उल्लेखनीय कार्य किया है। वहीं समिति के सचिव बासुदेव शर्मा ने नये साल की शुभकामना व्यक्त करते हुए 2020 के लिए समिति की कार्य योजना की जानकारी दी।मौके पर विधायक प्रतिनिधि जयलाल महतो,झामुमो किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष लोकेश्वर महतो, प्रखंड सचिव सोना राम हेम्ब्रम, सहारा इंडिया के शाखा प्रबंधक डीके सिंह, समिति के कोषाध्यक्ष प्रेमचंद महतो,अनवर अंसारी,पंसस किरण देवी, भोलाराम महतो, हरेन्द्र नायक, लालू महतो, मनोज प्रसाद वर्णवाल, मुकेश सिंह,भरत महतो, चंदन शर्मा,उदय साव, शीतल मांझी आदि मौजूद थे।

किशनगंज: बहादुरगंज थानाध्यक्ष ने नये बर्ष के पहले दिन दबे कुचले महादलितों को मिठाईयां खिलाकर उनके बीच परिवार के साथ कंबल बांटे


  शशि कान्त झा। किशनगंज (बिहार) । जिले के बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुमन कुमार ने नये बर्ष के पहले दिन दबे कुचले महादलितों को मिठाईयां खिलाकर उनके बीच परिवार के साथ कंबल बांटे ।जो बहादुरगंंज के तबारिख की नई इबारत बनकर लोगों को गले लगाने का पैगाम दे गयी ।                                मौका था नये साल की आगाज का ,जहां खा़की के दबदबे में छुपी ईंसानियत खुलकर समाज के सामने आ गयी ।यूं तो सुमन कुमार सिंह ने मधेपूरा जिले से बदलकर  किशनगंज जिला में आने के बाद अपनी काबिलियत के कई रंग बिखेरे ।जहाँ साईबर सेल के इंचार्ज रहकर ,जिले के एस पी कुमार आशिष के आदेश पर तत्कालीन थानाध्यक्ष (सदर किशनगंज)आफताब अहमद के नेतृत्व में गंगा पार साहबगंज से एक डकैती कांड के कुख्यात को धर दबोचा ।वहीं एस पी किशनगंज के नेतृत्व में नकली शराब बनाने बाली फेक्ट्री को समूल नष्ट करने में किशनगंज पुलिस के साथ बड़ी भूमिका भी निभाई ।जिसकी वजह रही कि एस पी कुमार आशिष ने इनके हौसले और बहादुरी को काफी करीब से परख कर 04 दिसंबर 2019 को बहादुरगंज थाने की कमान सौंपी ।जहाँ उनके आदेश पर सुमन जी ने 05दिसंबर 2019 को बहादुरगंज जैसे बड़े थाने में अपनी हाजरी दर्ज कराई ।2009 बैच के एस आई को 18 सर्किल के बड़े थाने की कमान मिलने पर जिले में एक भूचाल सा आ गया ।पर एस पी कुमार आशिष की दूर दृष्टि और पक्का इरादे की कसौटी पर सुमन जी ने खरे उतरने का भरसक प्रयास किया ।जहाँ इन्होने थाना और थानेदार की की परिभाषा हीं बदलकर रख दी ।थाना के नाम पर डरने बालों को ये करीब लाकर बैठाने लगे , जहाँ कथित तौर पर पहले से दलाली पेशे से जुड़े तथाकथितों की लगभग छुट्टी हीं हो गई ।थाना प्रशासन और विधि व्यवस्था को दुरुस्त करने ,अपराध एवं अपराधियों पर कठोर नियंत्रण के लिए इन्होने थाना को 15 सेक्टरों में बांटकर वहां की जिम्मेदारी प्रभारी पुलिस पदाधिकारियों को सौंप दी ।जिससे किसी भी आपात और आपदा की स्थिति में पुलिस की मौजूदगी आज मिशाल बनी हुई है ।
ऐसे में नये साल के पहले दिन अपने परिजनों के साथ मिलकर समाज के दबे कुचलों को मिठाईयां खिलाकर कंबल ओढ़ाना ,एक नई मिशाल बन कर लोगों के बीच चर्चा का बिषय बन चुका है ।ऐसा कहा जाता है कि अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण के साथ सुमन जी ने लोगों के दिलों को भी नियंत्रित कर लिया है ।जहाँ अब अपराध और अपराधियों पर नकेल डालने के लिए इन्हें भारी जनसहयोग मिल रहा है ।जन प्रतिनिधियों की सकारात्मक भूमिका आज पुलिस पब्लिक सहयोग का उदाहरण बनकर सामने आगया है ।वीरानगी के चादर ओढ़े थाना का रंग रुप बदलकर एक सजे पार्क का रुप ले लिया है ।जहाँ के झूलते रंगीन पर्दे ,लोगों को बैठने के लिए सोफे और सुनने के लिए चौबीस घंटे पुलिस पदाधिकारी की मौजूदगी सही मायनों में थाना को एक अलग पहचान दे रही है ।

JAC ने 8वीं बोर्ड परीक्षा की तारीख घोषित कर दी, 5 लाख छात्र होंगे शामिल


रांची। झारखंड अधिविध परिषद् (जैक) ने 8वीं बोर्ड परीक्षा की तारीख घोषित कर दी है। जैक की ओर से यह परीक्षा राज्य के 2200 केंद्रों पर एक साथ आयोजित की जायेगी।

परीक्षा 24 जनवरी 2020 को सुबह 11 बजे से 02 बजे तक ली जायेगी। जैक की ओर से इसे लेकर नोटिस जारी कर दिया गया है। वहीं जैक ने अपने वेबसाइट पर एडमिट कार्ड अपलोड कर दिया है। जैक की ओर से वेबसाइट पर परीक्षा लेने, क्वेश्चन पेपर जैसी अन्य सूचनाएं भी दी गयी हैं।
क्वेश्चन पेपर, ओएमआर शीट और अटेंडेंस शीट कार्यालय में मौजूद रहेगी

जैक की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 20 जनवरी 2020 तक क्वेश्चन पेपर, ओएमआर शीट और अटेंडेंस शीट जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में मौजूद रहेगी।

परीक्षा के दिन सुबह आठ बजे तक परीक्षा केंद्र के अधीक्षक जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा निर्धारित वितरण केंद्र से क्वेश्चन पेपर, ओएमआर शीट और अटेंडेंस शीट ले कर सकते हैं।
 परीक्षा ओएमआर शीट पर ली जायेगी

वहीं ओएमआर शीट में परीक्षा लेने के बाद सभी विषयों के ओएमआर शीट को अलग-अलग पैकेट में भरकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा।

जैक ने कहा है कि परीक्षा ओएमआर शीट पर ली जायेगी। इस परीक्षा में लगभग 5 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। रिजल्ट मार्च के अंत तक जारी किया जायेगा। वैसे विद्यार्थी जो इस बोर्ड परीक्षा में फेल हो जायेंगे, उनके लिए कंपाटमेंटल परीक्षा ली जायेगी।
कंपाटमेंटल परीक्षा गर्मी की छुट्टी के दौरान होगी

यह कंपाटमेंटल परीक्षा गर्मी की छुट्टी के दौरान होगी। आठवीं बोर्ड की लिखित परीक्षा के साथ छात्रों का 100 मार्क्स का इंटरनल असेस्टमेंट भी होगा। इंटरनल असेस्टमेंट में स्टूडेंट्स के अटेंडेंस पर अधिकतम 40 अंक मिलेंगे।

झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से ली गयी परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 40 अंक मिलेंगे। स्कूल में आयोजित अलग-अलग तरह की एक्टिविटी पर अधिकतम 10 अंक मिलेंगे।

Thursday, January 2, 2020

दु:खद : जम्मू में सेना के जवान की मौत के बाद घर आया शव, पत्नी ने कुएं में कूदकर दी जान

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रांची के चान्हो थाना क्षेत्र के बहेराटोली निवासी सेना के जवान 29 वर्षीय बजरंग भगत की मौत के बाद आज सुबह उनकी पत्नी मनीत उरांव ने कुएं में छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। 29 दिसंबर को बजरंग की मौत के बाद एक जनवरी की देर शाम शव को यहां लाया गया था। आज बजरंग का अंतिम संस्कार किया जाना था लेकिन उससे पहले उनकी पत्नी ने भी जान दे दी। फिलहाल, मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

ग्रामीणों ने कहा- महिला को उसकी ननद करती थी प्रताड़ित :

ग्रामीणों के मुताबिक, दो साल पहले बजरंग और मनीता की शादी हुई थी। मनीता रातू की रहनेवाली थी। उधर, घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे मनीता के परिजनों ने बजरंग की बहन और उसके पति बिस्वा उरांव पर हत्या का आरोप लगाया है। मृतका के परिजनों का कहना है कि बच्चा नहीं होने पर बजरंग की पत्नी मनीता उरांव को उसकी ननद (बजरंग की बहन) ताना देते रहती थी जिससे तंग आकर उसने जान दी है। बजरंग भगत के पिता का निधन पहले ही हो चुका है। पांच बहनों की शादी हो चुकी है। घर में उनकी बूढी मां है। बजरंग 2012 में सेना में भर्ती हुए थे।

जम्मू में बिस्तर से गिरकर हुई थी बजरंग की मौत :

बजरंग भगत रेजिमेंटल सेंटर नागपुर महाराष्ट्र के यूनिट 17 में गार्ड के पद पर पदस्थापित थे। करीब तीन माह पहले उनकी पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। यूनिट के सीओ कर्नल विजय सिंह ने फोन पर बताया कि सोने के दौरान बिस्तर से गिरने के कारण उनकी मौत हुई है। हालांकि परिजनों ने कहा कि 29 दिसम्बर की रात करीब 10 बजे बजरंग के मोबाइल पर बात हुई थी और सुबह आठ बजे अचानक फोन पर सूचना मिली कि बजरंग अब इस दुनिया में नहीं

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...