Saturday, April 20, 2019

धनबाद: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तीन अभ्यर्थियों ने किया नामांकन

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए शनिवार को नामांकन के तृतीय दिन तीन अभ्यर्थियों ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त के समक्ष नामांकन पत्र दाखिल किया।

आज  कांग्रेस पार्टी के श्री कीर्ति आजाद, पिता भागवत झा आजाद, हाउसिंग कॉलोनी, धनबाद, श्री दीपक कुमार दास, पीपुल पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक, पिता श्री राजेन्द्र दास, विवेकानंद रोड, चास जिला बोकारो तथा श्री मिहीर चन्द्र महतो, अम्बेडकर पार्टी ऑफ इंडिया, पिता श्री रमेश महतो, अलकुशा, थाना चास जिला बोकारो ने नामांकन पत्र दाखिल किया।


शनिवार के तीन नामांकन को लेकर लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अब तक 7 अभ्यर्थियों ने नामांकन किया है*।

बृहस्पतिवार को तीन तथा नामांकन के प्रथम दिन एक अभ्यर्थी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त ने बताया कि 23 अप्रैल 2019 तक पूर्वाहन 11:00 बजे से अपराहन 3:00 बजे तक लोकसभा चुनाव 2019 के अभ्यर्थी अपना नामांकन कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल को पूर्वाहन 11:00 बजे से नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की जाएगी। 26 अप्रैल 2019 को अपराह्न 3:00 बजे तक अभ्यर्थी अपना नाम वापस ले सकेंगे तथा उसी दिन 3:30 बजे से चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी जगरनाथ महतो ने भरा पर्चा, कहा जनता का समर्थन, जीत सुनिश्चित

बोकारो। गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से महागठबंधन के प्रत्याशी जगरनाथ महतो ने शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने बोकारो डीसी सह निर्वाचन पदाधिकारी कृपानंद झा को नाॅमिनेशन फार्म सौंपा। नामांकन दाखिल करने से पूर्व उन्होंने शक्ति प्रदर्शन भी किया। उनके साथ हजारों कार्यकर्ता डीसी ऑफिस पहुंचे थे।


इस दौरान जगरनाथ महतो ने कहा कि उनकी जीत सुनिश्चित है। क्योंकि जनता और महागठबंधन का उन्हें समर्थन है। मांडू विधायक जयप्रकाश भाई पटेल के मोदी प्रेम के बारे में जब सवाल किया गया, तो जगरनाथ महतो ने कहा कि उनके बारे में हमसे मत पुछिए।


गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय द्वारा एनडीए प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चैधरी को आशीर्वाद देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उससे कुछ भी फर्क नहीं पड़ने वाला है।


महागठबंधन के बड़े नेता रहे नदारतः पर्चा दाखिल करने के दौरान उनके साथ झाविमो के सबा अहमद को छोड़ महागठबंधन के बड़े नेता कोई नजर नहीं है। यहां तक कि झामुमो के शीर्ष नेता भी शामिल नहीं हुए।

CJI के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर SC ने कहा, यह अविश्वसनीय आरोप, मीडिया विवेक से काम ले

नयी दिल्ली : प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ एक महिला द्वारा लगाये गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई की. महिला सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी हैं और उसने सीजेआई पर यौन उत्पीड़न और अत्याचार के आरोप लगाए हैं. सुप्रीम कोर्ट के 22 न्यायाधीशों के आवास पर महिला के शपथपत्रों की प्रतियां भेजी गईं जो शनिवार को सार्वजनिक हो गईं. इसके बाद प्रधान न्यायाधीश गोगोई की अगुवाई में तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया गया.

सीजेआई की अदालत संख्या एक में सुनवाई के दौरान आरोपों से आहत सीजेआई ने कहा,‘‘ आरोप अविश्वसनीय है." उन्होंने कहा- "यह अविश्वनीय है. मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए. न्यायाधीश के तौर पर 20 साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस 6.80 लाख रुपये है. कोई मुझे धन के मामले में नहीं पकड़ सकता, लोग कुछ ढूंढना चाहते हैं और उन्हें यह मिला.' उन्होंने कहा ,‘‘इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं लेकिन मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा.'

सीजेआई ने कहा, ‘‘मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं. न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.' इस पीठ में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और संजीव खन्ना शामिल थे. पूर्व कर्मचारी ने अपने हलफनामे में दो घटनाओं का जिक्र किया है जब गोगोई ने कथित तौर पर उसका उत्पीड़न किया. दोनों ही घटनाएं कथिततौर पर अक्टूबर 2018 में हुईं. दोनों घटनाएं सीजेआई के तौर पर उनकी नियुक्ति के बाद की हैं. सुप्रीम कोर्ट के महासचिव संजीव सुधाकर कलगांवकर ने इस बात की पुष्टि की है कि अनेक न्यायाधीशों को एक महिला के पत्र प्राप्त हुए हैं.

साथ ही कहा कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप दुर्भावनापूर्ण और निराधार हैं. उन्होंने कहा,‘‘ इसमें कोई शक नहीं है कि ये दुर्भावनापूर्ण आरोप हैं.' अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता "बेहद खतरे" में है. साथ ही कहा कि वह इस बात को मीडिया के विवेक पर छोडती है कि सीजेआई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में जिम्मेदार ढंग से पेश आना है. गौरतलब है कि इस पीठ का गठन उस वक्त किया गया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के संबंध में अधिकारियों को बताया. विशेष सुनवाई शनिवार सुबह शुरू हुई.

(इनपुट : भाषा)


बिहार के नवादा में कृषक की धारदार हथियार से आँख फोड़ कर हत्या

नवादा  जिले के रोह थाना क्षेत्र के ताजपुर गांव के एक किसान की शनिवार की अहले सुबह हत्या कर दी गयी. किसान की हत्या धारदार हथियार से चेहरे पर की गयी है. यह हत्या ताजपुर गांव से दूर बुधुवड़ खलिहान में की गयी है. मृतक खलिहान के बगल वाले खेत को पटवन करने के लिए वहां सोता था. पटवन करने के बाद खलिहान में बीती रात्रि को मृतक राजकुमार केवट सोये हुए थे. इसी बीच अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी. 

प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि किसान की हत्या किसी भारी-भरकम धारदार हथियार से चेहरे पर तीन बार वार किये गये हैं. मृतक के शरीर पर चेहरे को छोड़कर कहीं और प्रहार नहीं किया गया है. मृत किसान की पहचान ताजपुर गांव के राजकुमार केवट रूप में की गयी है. हत्या के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतक के बेटे हरेंद्र निषाद ने बताया कि पिताजी करीब 10-15 दिनों से लगातार खलिहान में सो रहे थे. बीती रात्रि को करीब रात के 8:30 बजे के करीब पिताजी खलिहान में सोने गए थे सुबह करीब 8:00 बजे के करीब खलिहान से पिताजी नहीं उठने पर अपने छोटे भाई को पिताजी को उठाने के लिए भेजा गया. छोटा भाई ने वहां जाकर पिताजी की हालत देखा और रोने लगा. घटना की सूचना मुझे दी. छोटे भाई द्वारा सूचना दिये जाने पर तत्काल खलिहान जाकर पिताजी को देखा, तो उनके चेहरे पर तीन बार किसी धारदार हथियार से प्रहार कर उनकी हत्या कर दी गयी थी. मृतक के चेहरे मुंह नाक और आंख पर प्रहार करके हत्या कर दी गयी है. 

मृत राजकुमार केवट के तीन बेटे और चार बेटी हैं. मृतक की पत्नी सोना देवी का कहना है कि कोई हमारे पति को लौटा दे. वहीं, बेटा हरेंद्र निषाद, वीरेंद्र, डायमंड पिता की लाश को देख कर बार-बार बेहोश हो रहा है. पत्नी का कहना है कि 'अब के देखतै हो हमरा के और कैसे चलते हो हमार घरवा.' 

घटना के बाद स्थानीय थाना प्रभारी नीरज कुमार ने घटना की जांच की. वहीं, परिजनों ने पुलिस के वरीय अधिकारी की बुलाने की मांग को लेकर घंटों अड़े रहे और लाश को पोस्टमार्टम के लिए नहीं जाने दिया. घटना की सूचना पाकर सदर एसडीपीओ विजय कुमार झा घटनास्थल पर पहुंचकर घटना के बारे में पूरी जानकारी ली. स्थानीय लोगों कुछ इसी तरह की घटना वर्ष 2003 में ताजपुर गांव में हुई थी. उस कांड में हत्यारे का आज तक पता नहीं चल पाया. उससमय भी ताजपुर गांव के बदरुद्दीन नामक व्यक्ति की हत्या धारदार हथियाार से चेहरे पर वार करके की गयी थी. सदर एसडीपीओ विजय कुमार झा ने बताया कि घटना की पूरी जानकारी ली जा रही है. वहीं, अनुसंधान के बाद ही कुछ बताया जायेगा. वहीं, लाश को पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेज दिया गया है.


Friday, April 19, 2019

मीडिया की आजादी से संबंधित एक सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में संचार माध्यमों की स्वतंत्रता में कमी दर्ज की गई है

 मीडिया की आजादी से संबंधित एक सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में संचार माध्यमों की स्वतंत्रता में कमी दर्ज की गई है।

मीडिया की आजादी से संबंधित एक सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में भारत दो पायदान खिसक कर नीचे चला गया है।  सन 2019 के सूचकांक में रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने पाया कि पत्रकारों के खिलाफ घृणा हिंसा में बदल गई है जिससे दुनिया भर में डर बढ़ा है।  पैरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स "आरएसएफ" या रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मीडिया की आज़ादी में 180 देशों में भारत अब 140वें नंबर पर  पहुंच गया है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में चुनाव प्रचार का दौर पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक है। इस देश में चुनाव प्रचार के वक्त पत्रकार सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं।  रिपोर्ट में पाया गया है कि दुनियाभर में पत्रकारों के प्रति दुश्मनी की भावना बढ़ी है। इस वजह से भारत में बीते साल अपने काम के दौरान कम से कम 6 पत्रकारों की हत्या कर दी गई।  रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय पत्रकारों को कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। विश्लेषण में आरोप लगाया गया है कि 2019 के आम चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थकों द्वारा पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं। हिंदुत्व को नाराज करने वाले विषयों पर बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घृणित अभियानों पर चिंता जताई है।  इस वजह से भारत में बीते साल कई पत्रकारों की हत्या कर दी गई।

सूचकांक में कहा गया है कि भारत में प्रेस स्वतंत्रता की वर्तमान स्थिति में से एक, पत्रकारों के खिलाफ हिंसा है जिसमें पुलिस की हिंसा, माओवादियों के हमले, अपराधी समूहों या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का प्रतिशोध आदि सबकुछ शामिल है।  वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के अनुसार प्रेस की आजादी के मामले में नॉर्वे शीर्ष पर है।  प्रेस की आजादी के मामले में भारत विगत की तुलना में दो पायदान फिसलकर 140वें पाकिस्तान तीन पायदान लुढ़ककर 142वें और बांग्लादेश चार पायदान लुढ़ककर 150वें स्थान पर है।   रिपोर्ट के अनुसार नॉर्वे लगातार तीसरे साल पहले पायदान पर है जबकि फिनलैंड दूसरे स्थान पर है। ज्ञात रहे कि पैरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स "आरएसएफ" या रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स एक गैर लाभकारी संगठन है।  यह संगठन दुनिया भर के पत्रकारों पर हमलों का दस्तावेजीकरण करने के लिए काम करता है। 

कांग्रेस छोड़ते वक्त राहुल गांधी को चिट्ठी में प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या लिखा

 

कांग्रेस की तेज-तर्रार प्रवक्ताओं में शुमार प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. प्रियंका चतुर्वेदी शिवसेना में शामिल हो गईं. इससे पहले इस्तीफा देने के लिए प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एक भावुक पत्र लिखा है. प्रियंका ने कहा है कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और मर्यादा की बात करती है, लेकिन पार्टी के कई नेताओं के व्यवहार में ऐसा नहीं दिखता है.

प्रियंका ने लिखा है कि जिन लोगों ने मेरे खिलाफ अभद्रता की उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया गया, तर्क दिया गया कि चुनाव में सभी की जरूरत है. उसी दिन मैंने तय कर लिया कि इस अपमान के बाद मुझे इस पार्टी से जाना चाहिए.


राहुल गांधी को लिखे पत्र में प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, "मैं ये इस्तीफा बेहद दुखी होकर लिख रही हूं, मैंने 10 साल पहले यूथ कांग्रेस मुंबई में ज्वाइन की थी, क्योंकि मैं पार्टी की विचारधारा, और आपके समावेशी, प्रगतिशील और उदार राजनीति में विश्वास करती थी."

मेरे बच्चों ने भी गालियां खाईं

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे लिखा, " इन 10 सालों में पार्टी ने मुझे कई प्लेटफॉर्म दिए, जहां से मैं पार्टी की विचारधारा को आगे लेकर गई." प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी जब अपने सबसे निचले स्तर पर चली गई थी तो उन्होंने पूरी निष्ठा , समपर्ण और भावना के साथ कई प्लेटफॉर्म पर पार्टी का पक्ष रखा." प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, "मुझे आपको याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि पार्टी की सेवा करते वक्त मुझे कितनी निजी धमकियां मिली, मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई, मुझे गालियां मिली, इतना ही नहीं मेरे परिवार के सदस्यों को जिसमें मेरे बच्चे भी शामिल हैं उन्हें भी ये सब झेलना पड़ा."

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने इसके एवज में कभी पार्टी से पुरस्कार या प्रतिफल की अपेक्षा नहीं की. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उनकी उम्मीदों का सम्मान करेगी.


प्रियंका आगे लिखती हैं, "पिछले कुछ सप्ताह में कुछ चीजें हुई, जिससे मुझे लग गया कि मेरी सेवाओं का पार्टी में महत्व नहीं रह गया है, और मैं ऐसी जगह पहुंच गई जहां से वापस नहीं आया जा सकता. साथ-साथ मुझे ये भी एहसास हो रहा है कि मैं जितना ज्यादा वक्त मैं कांग्रेस को दूंगी वो मेरी खुद की प्रतिष्ठा और मर्यादा की कीमत पर होगा."

प्रियंका ने राहुल को लिखा, "जिन चीजों से मुझे निराशा हो रही है वो ये है कि जहां पार्टी द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की बात की जाती है, आप भी इनके हक में बात करते हैं, लेकिन यही चीज पार्टी के कुछ नेताओं के व्यवहार में नहीं दिखती है. जब मैं पार्टी के लिए आधिकारिक दौरे पर थी तभी मेरे साथ एक गंभीर, घटना हुई, लेकिन पार्टी ने इसे नजरअंदाज कर दिया. इस घटना के बाद मुझे यकीन हो गया कि अब मेरे लिए आगे बढ़ने का वक्त हो गया और मुझे कांग्रेस से बाहर फोकस करना चाहिए."


राहुल को आगे के लिए शुभकामना देते हुए प्रियंका ने कहा कि उनके मन में राहुल गांधी लिए अपार श्रद्धा और शुभ कामना है, वे पार्टी के सभी नेताओं का आभार जताना चाहेंगी, जो उनके साथ खड़े रहे, उनका उत्साह बढ़ाया. प्रियंका ने आखिर में लिखा है कि उन्हें तत्काल कांग्रेस पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त किया जाए.


बता दें कि इससे पहले प्रियंका ने ट्वीट कर कहा था कि कांग्रेस को खून पसीना देने वालों की जगह इस पार्टी में गुंडों को तवज्जो दी जा रही है. प्रियंका ने कहा था कि पार्टी के लिए उन्होंने गालियां खाईं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी में रहने वाले नेताओं ने ही उन्हें ही धमकियां दीं, जो लोग धमकियां दे रहे थे, वो बच गए उनका बिना किसी कार्रवाई के बच जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं. प्रियंका के साथ बदसलूकी का मामला उनके मथुरा दौरे से जुड़ा है, जब उन्होंने राफेल से जुड़ा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था.

गिरिडीह नगर थाना में एनडीए प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश चौधरी, आजसू जिलाध्यक्ष व विज्ञापन एजेंसी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लघंन का मामला दर्ज

गिरिडीहः अनुमति के बगैर नगर निगम के खम्भों पर आजसू प्रत्याशी के चुनावी होर्डिंग्स लगाने के मामले में सदर अंचलाधिकारी रवीन्द्र सिन्हा के आवेदन पर गिरिडीह नगर थाना में एनडीए प्रत्याशी चन्द्रप्रकाश चौधरी, आजसू जिलाध्यक्ष गुड्डू यादव व बैनर प्रकाशित करने वाली एजेंसी ऑरेंज मीडिया के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लघंन का मामला दर्ज कर लिया गया है।


इस बाबत नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो ने बताया कि प्रत्याशी समेत तीनों के खिलाफ आचार संहिता के उल्लघंन का मामला दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है। बताया गया कि शहर में नगर निगम के खम्भों आजूस प्रत्याशी की होर्डिंग्स बिना अनुमति के ही लगा दिया गया था।

बताया गया कि पूरे मामले की जांच के उपरांत ही यह कदम उठाया गया है।दरअसल एनडीए प्रत्यासी के प्रचार के लिए दो चार दिन से शहर के कई स्थानों पर निगम के लगाएं पोलों पर अवैध तरीके होर्डिंग्स टांग दिया गया था। इस मामले को लेकर कई दलों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।


शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ सिन्हा को जाँच के आदेश दिए जिसके बाद सीओ के आवेदन पर एनडीए प्रत्याशी समेत तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।


हालांकि गुरुवार शाम से निगम भी अभियान चलाकर होर्डिंग्स को हटाने का काम कर रही थी। लेकिन जिला प्रशासन के इस कदम ने एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी है। फिलहाल इस मामले से पार्टी लीडरशिप में अनुभवहीनता को आजसू पार्टी की किरकिरी भी हो रही है।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...