मीडिया की आजादी से संबंधित एक सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में संचार माध्यमों की स्वतंत्रता में कमी दर्ज की गई है।
मीडिया की आजादी से संबंधित एक सालाना रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में भारत दो पायदान खिसक कर नीचे चला गया है। सन 2019 के सूचकांक में रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने पाया कि पत्रकारों के खिलाफ घृणा हिंसा में बदल गई है जिससे दुनिया भर में डर बढ़ा है। पैरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स "आरएसएफ" या रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मीडिया की आज़ादी में 180 देशों में भारत अब 140वें नंबर पर पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में चुनाव प्रचार का दौर पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक है। इस देश में चुनाव प्रचार के वक्त पत्रकार सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं। रिपोर्ट में पाया गया है कि दुनियाभर में पत्रकारों के प्रति दुश्मनी की भावना बढ़ी है। इस वजह से भारत में बीते साल अपने काम के दौरान कम से कम 6 पत्रकारों की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय पत्रकारों को कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। विश्लेषण में आरोप लगाया गया है कि 2019 के आम चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थकों द्वारा पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं। हिंदुत्व को नाराज करने वाले विषयों पर बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घृणित अभियानों पर चिंता जताई है। इस वजह से भारत में बीते साल कई पत्रकारों की हत्या कर दी गई।
सूचकांक में कहा गया है कि भारत में प्रेस स्वतंत्रता की वर्तमान स्थिति में से एक, पत्रकारों के खिलाफ हिंसा है जिसमें पुलिस की हिंसा, माओवादियों के हमले, अपराधी समूहों या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का प्रतिशोध आदि सबकुछ शामिल है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के अनुसार प्रेस की आजादी के मामले में नॉर्वे शीर्ष पर है। प्रेस की आजादी के मामले में भारत विगत की तुलना में दो पायदान फिसलकर 140वें पाकिस्तान तीन पायदान लुढ़ककर 142वें और बांग्लादेश चार पायदान लुढ़ककर 150वें स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार नॉर्वे लगातार तीसरे साल पहले पायदान पर है जबकि फिनलैंड दूसरे स्थान पर है। ज्ञात रहे कि पैरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स "आरएसएफ" या रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स एक गैर लाभकारी संगठन है। यह संगठन दुनिया भर के पत्रकारों पर हमलों का दस्तावेजीकरण करने के लिए काम करता है।
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