Friday, March 6, 2020

पंचायत चुनाव को लेकर विष्णुगढ़ में सुगबुगाहट शुरू, लाखों की लागत की पांडे डीह पंचायत भवन बना कूड़े का ढेर


शैलेंद्र पाठक#हजारीबाग।झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का दूसरी टर्म की समाप्ति और तीसरे टर्म की शुरुआत होने वाली है। इसे लेकर ग्राम पंचायतों मे गुटबंदी और राजनीति की सुगबुगाहट भी शुरू गयी है। पिछले पंचायत चुनाव मे अपना किस्मत आजमा चुके इस वर्ष के आखिरी मे होने वाले पंचायत चुनाव के लिए अपनी पुरानी खटाश को भुला कर पंचायत चुनाव मे अपने खोटे सिक्के को भुन्नाने के लिए जुगलबंदी भी शुरु कर दी है।
विडंबना यह है कि इतने दिनों बाद भी बिष्णुगढ़ प्रखंड के गैड़ा पंचायत के पण्डेडीह मे बने लाखों की लागत का पंचायत भवन कूड़े और झाड़ियों से भरा है। सूत्रों की माने तो निर्माण के समय से ही दो गुटों के विवेधात्मक नीति और रस्सा कस्सी के वजह से पंचायत भवन निर्माण के बाद भी निष्क्रिय है। सूत्रों की माने तो पांडेयडीह मे पंचायत भवन के निर्माण के बाद से आज तक भवन का ताला तक नहीं खुला है। सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत मे पंचायती राज व्यवस्था को सुचारू रूप से सम्पादन के लिए लाखों की लागत से पंचायत सचिवालय बनाया गया है।भवन मे सोलर प्लेट, पानी टंकी, मोटर, बिजली, हॉल के साथ प्रत्येक कमरे मे पंखा, महँगी-महंगी और मोटी मोटी गद्देदार कुर्सीयां, दर्जनों प्लास्टिक की कुर्सियां, टेबल, डेस्क, आदि सारी सुविधा प्रदत है ।किन्तु यहां का पंचायत भवन ईट पत्थरों के अलावे कूड़े कचरे और झाड़ियों से लैस है। जहाँ से आम जनता और ग्राम पंचायतों के विकास की बातें होनी थी आज वहां चारों और से झाड़ियों और कूड़े कचरे मे तब्दील है l
पंचायत भवन के पास से बिजली का हाई पावर टेंशन तार गुजरा है जिसके कारण पंचायत भवन निष्क्रिय है। पूर्व मुखिया सम्भु लाल यादव
_जबकी पंचायत भवन के बगल मे प्राइमरी स्कूल संचालित है शायद बच्चों की जान का कोई मोल नहीं_

यूपी पुलिस के सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिहं की बेटियों को स्कूल से निकाला


#न्यूज़ डेस्क।

पिछले पांच सालों से सलाखों के पीछे बंद है उत्तर प्रदेश पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिहं। इस वर्दीवाले का कसूर बस इतना था कि इसने अपने बचाव में अपनी सर्विस रिवाल्वर से नबी अहमद नाम के एक वकील को गोली मार दी थी। ये वो समय था जब ना सिर्फ इलाहाबाद के बल्कि देशभर के वकील सड़कों पर उतर आए थे। दिल्ली से लेकर बैंग्लोर तक बस एक ही आवाज सुनाई दे रह थी कि शैलेंद्र सिंह को फांसी हो । वकीलों ने इस वर्दीवाले का केस तक लड़ने से मना कर दिया था और जिस वकील ने पैरवी की कोशिश भी कि उसे भी डरा-धमाकर पीछे हटवा दिया गया। वहीं पुलिस महकमे ने भी अपने इस वर्दीवाले की टोह लेना मुनासिब नहीं समझ हैरानी की बात तो ये है कि जिस देश में आतंकी अजमल कसाब और कातिल याकूब को वकील नसीब हो गया वहां आज तक जेल में बंद इंस्पेक्टर शैलेंद्र अपने केस के लिए वकील की बाट ही जोह रहे हैं। आज इस वर्दीवाले का भरा-पूरा घर बर्बाद हो चुका है। शैलेंद्र के जेल जाने के गम में इनके घर से कितने ही अपनों की अर्थियां उठ चुकी है। लेकिन इस वर्दीवाले की सुध लेने वाला कोई नहीं। 

आत्मरक्षा के लिए गोली चलाना शैलेंद्र सिंह की बर्बादी की कहानी बन गया

उत्तर प्रदेश पुलिस  के सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस वर्दी को उन्होने राष्ट्र सेवा के लिए पहना था उसे पहने ही उन पर हत्यारा होने का दाग लग जाएगा। कभी नारी बारी पुलिस चौकी के इंचार्ज शैलेंद्र पर कोर्ट में ही जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में उसकी जान जाने की पूरी आशंका थी हमला करने वाला था एक वकील नबी अहमद जिस पर कम से कम आधा दर्जन मुकदमे दर्ज होंगे। बताया जाता है कि जब सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह पर हमला हुआ तो इस वर्दीवाले ने आत्मरक्षा की खातिर अपनी सर्विस रिवाल्वर से गोली चला दी थी ये गोली नबी अहमद को लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस पूरी घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमे साफ तौर पर देखा जा सकता है कि उस समय दर्जनों हमलावरों से घिरा अकेला सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह मोब लिंचिंग का  शिकार हो रहा था जिसका नेतृत्व नबी अहमद कर रहा था। नबी अहमद साफतौर पर सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पिटाई करते हुए देखा जा सकता था। लेकिन आत्मरक्षा के लिए शैलेंद्र सिंह का गोली चलाना उनकी जिंदगी को तहस-नहस कर गया। वकील तो उनके खिलाफ हो ही गए थे उनके खुद के महकमे ने उनका साथ नहीं दिया । हैरान कर देने वाली बात थी कि इलाहाबाद परिक्षेत्र की पुलिस ने अपने ही विभाग के सब इंस्पेक्टर को सलाखों के पीछे भेजने के लिए दिन रात एक कर दिया था और आत्मरक्षा करने वाले उस सब इंस्पेक्टर को हत्यारा घोषित कर कई धाराए लगाकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। आज तक ये सब इंस्पेक्टर जमानत के लिए तरस रहा है लेकिन उम्मीद की किरण कोसो दूर भी नजर ऩहीं आ रही।  

भरा-पूरा परिवार हो गया बर्बाद

शैलेंद्र के जेल जाने के बाद से उनका भरा-पूरा परिवार तबाही के समंदर में गोते खातकर डूबने के कागार पर आ चुका है। इन चार सालों में  सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के माता पिता की मृत्यु हो गई और जेल में बंद इस बेटे की बदकिस्मती तो देखिए कि वो अपने मां-बाप की चिता को मुखाग्नि भी ना दे पाया। वहीं उसका एक छोटा भाई इसी के चलते पागल हो गया। किस्मत का खेल यही नहीं थमा  फिर उनकी पैरवी करता उनका साला भी एक एक्सीडेंट में सदा के लिए खामोश हो गया और उसी  दुःख में सब इंस्पेक्टर की सास भी चल बसी। और एक भरा-पूरा परिवार खत्म सा हो गया लेकिन अब भी बदकिस्मती शैलेंद्र और उसके परिवार का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं दिख रही है। उसकी बेबस पत्नी सुहागन होते हुए भी विधवा सी जिंदगी बसर कर रही है। दो मासूम बच्चियो को साथ लिए इस बेचारी ने कोई दर-चौखट नहीं छोड़ी होगी जहां इसने पति कि रिहाई के लिए गुहार ना लगाई हो लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा उल्टा  इलाहाबाद पुलिस के अधिकारी तो अपने वर्दी के सितारे बढ़वाते नजर आए कि देखो कैसे हमने अपने ही विभाग के सब इंस्पेक्टर को सलाखो के पीछे पहुंचा दिया 

ना पैसा रहा है और ना उम्मीद ही बची है

आज सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की धर्मपत्नी सपना सिंह अपने पिता के साथ उनके ही घर पर अपनी 2 बेटियों इशिता सिंह और सौम्या सिंह के साथ नाम के लिए जिंदगी काट रही है। क्योंकि खुशियां तो उनसे कब का नाता तोड़ चुकी है। बड़ी बेटी इशिता कक्षा 3 में पढ़ती है और सौम्या अभी नर्सरी में है। सौम्या ने तो अपने पिता को ठीक से देखा भी नहीं है क्योकि उसके जन्म के कुछ दिन बाद ही सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जेल चले गए थे। बर्बाद हो चुके परिवार को पड़ौसियों ने भी नहीं छोड़ा और इनकी सारी जमीन-जायदाद हड़प ली। शैलेंद्र की पत्नी ने पति के मुकदमे के लिए अपना एक –एक गहना बेच दिया धीरे-धीरे सब खत्म हो गया है ना पैसा रहा और उम्मीद तो कब का साथ छोड़ चुकी है। 

बेटियों के स्कूल से नाम काट दिए गए हैं

आज हालात ये हैं कि शैलेंद्र सिंह का परिवार खाने के लिए भी मोहताज है। जब घर में अन्न का दाना नहीं है तो बेटियों की फीस कहां से भरी जाए। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि फीस ना भर पाने के चलते बेटियों के नाम तक कटने की नौबत आ चुकी है।  बेटी बचाओ बेटी पढाओ के नारे देने वाली केंद्र और राज्य सरकार को तो इन मासूमों के हालात देखकर शर्म आनी चाहिए।  लगभग 5 साल से जेल में बंद उत्तर प्रदेश पुलिस का सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह  सब कुछ अपनी आँखों से देख रहा है लेकिन ये मजबूर बाप और पति कैसे अपनी पत्नी और बेटियों को दुनिया की सारी खुशियां दे।  लेकिन अफसोस की जेल की सलाखों पर सर पटकने और आंसू बहाने के अलावा वो कुछ कर भी नहीं सकता। 

क्यों पुलिस विभाग ही अपने जवान के साथ दिखा रहा बेरूखी 

लेकिन यहां सवाल उठना लाजमी है कि आखिर क्यों उत्तर प्रदेश पुलिस अपने ही जवान का साथ नहीं दे रही। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दर्जनों हमलावरों से घिरे सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र ने आत्मरक्षा मे ही गोली चलाई थी फिर उसे उसके ही विभाग ने हत्यारा बनाकर सलाखों के पीछे क्यों पहुंचा दिया। आखिर इस वर्दवाले के साथ ये नाइंसाफी क्यों हो रही है। क्या इसकी बर्बाद जिंदगी के पन्नों पर खुशियां कभी लौट पाएंगी..??

Thursday, March 5, 2020

कोरोना वायरस से कैसे निजात पाया जाए, इसको लेकर सरकार चिंतित... हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड



रांची।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि *कोरोना वायरस* आपदा जैसी है, इससे कैसे निजात पाया जाए। सरकार इस विषय को लेकर चिंतित है। यह अधिक से अधिक न फैले इसपर सरकार कार्य कर रही है। मैं राज्यवासियों से अपील करता हूं कि वे खुद की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। हर तरह का एहतियात राज्य के लोग बरतें। जहां तक उल्लास से भरे रंगों के त्योहार होली की बात है, तो अब ये भी राज्यवासियों को तय करना है कि वे होली का सत्कार कैसे करेंगे। लोग शुभकामनाएं लेंगे और देंगे। लेकिन उसका तरीका क्या हो। यह लोग ही तय करें। बस इस वायरस से बचने के उपायों पर ध्यान केंद्रित कर हमें कार्य करना है। इससे बचने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले खेल के आयोजनों को भी स्थगित करने की सूचना आ रही है, जो इंगित करता है कि सतर्कता भी बचाव माध्यम हो सकता है।

*रांची:झारखंड के डॉक्टर ने बताया कैसे बचें Coronavirus से, सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर



रांची : दुनिया भर में खौफ मचा देने वाले कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर झारखंड सरकार भी अलर्ट मोड में आ गयी है. बोकारो के सिविल सर्जन (CS) डॉ अशोक कुमार पाठक ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचने के कुछ टिप्स दिये हैं, तो स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में हेल्पलाइन नंबर जारी किये हैं. कोरोना वायरस से संबंधित हेल्पलाइन नंबर 0651-2542700 और 09955837428 पर लोग विशेष जानकारी ले सकेंगे और कोरोना पीड़ितों के बारे में सूचना दे भी सकेंगे.

बोकारो के सिविल सर्जन ने कहा है कि इस घातक बीमारी से बचने का सबसे उचित माध्यम जागरूकता है. इससे बचाव के लिए हमेशा साबुन से हाथ धोयें, अधपका मांस न खायें, घर को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखें, यदि खांसी होती है, तो उस समय मुंह पर रुमाल रखें, सर्दी, खांसी, जोड़ों और गर्दन में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर के पासे जायें और विशेषज्ञ का परामर्श लें.

कोरोना वायरस से बचने के जरूरी टिप्स

हाथ को हमेशा साबुन से धोयें

अधपका मांस कभी न खायें

घर में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें

खांसते समय मुंह पर रुमाल जरूर रखें

सर्दी-खांसी, जोड़ों और गर्दन में तेज दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जायें

डॉक्टर की सलाह को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि मन में कोरोना का खौफ हो, तो मास्क लगा लें, सुरक्षित रहेंगे।

छब्बीस अक्षर अंगरेजिया नाम अल्फाबेट लागे रे की असलियत,काम किसी और का नाम किसी अन्य का


सोशल मीडिया में वायरल कोई बात किस कदर फैलती है इसका एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है ၊ हाल ही में खोरठा भाषा में कर्णप्रिय गीत के माध्यम से बच्चों को अंग्रेजी सिखाने वाले शिक्षक की बॉलीवुड में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन तथा प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने प्रशंसा की थी ၊ कई टीवी चैनलों ने आपाधापी में इसे मुख्य खबर तक बनाया ၊ लेकिन आपको बता दें कि इस गीत के रचयिता उक्त युवा शिक्षक नहीं बल्कि डुमरी निवासी सेवानिवृत पैंसठ वर्षीय शिक्षक राम किशुन सोनार हैं ၊ वे उत्क्रमित मध्य विद्यालय चेगड़ो (डुमरी-2 ,गिरिडीह ) से सेवा निवृत शिक्षक है व फिलहाल ग्राम जामतारा, थाना व अनुमंडल डुमरी, जिला गिरिडीह के निवासी हैं। यह पेशा से शिक्षक के अलावा कवि , गीतकार व रेडियो लोक गीत गायक कलाकार भी हैं । इनके खोरठा में लिखे सौ से भी अधिक गीत 'दुनिया हो गइले वीरान ,करलह बसंत चितचोरी , जे पियवा खातीर , उमड़ल बदरिया ,देश हो ले आजाद आदि कई पत्र पत्रिकाओं शशांक , सेवाति , नभाटा आदि में पूर्व में प्रकाशित हो चुके हैं ၊ उन्होंने बताया कि एक बार गिरिडीह डीएसइ के कार्यक्रम में आमंत्रण मिलने पर इन्होंने छब्बीस अक्षर अंग्रेजिया की रचना की थी ၊ इनका कहना है कि सेवाकाल के दौरान सर्व शिक्षा अभियान के तहत जहाँ कहीं प्रशिक्षण या कार्यक्रम हुआ करता था वे सक्रियता से सम्मिलित होते रहे हैं। यहाँ तक कि सेवा निवृति के बाद भी इन्हें उत्क्रमित +2 उच्च विद्यालय असुरबांध (डुमरी) गिरिडीह में डीईएलएड के प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया था।वहां भी इन्होंने अपने बरसो पुराने गीत - "छब्बीस अक्षर अंगरेजिया नाम अल्फाबेट लागे रे" को प्रशिक्षण के दौरान प्रस्तुत किया था जिसे कई प्रशिक्षु युवकों ने अपने स्मार्ट मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया था। बाद में वही गीत इन दिनों वाट्सएप व यूट्यूब पर काफी चर्चित हो रहा है। हालांकि इस बात को लेकर इन्हें काफी खुशी है कि इनके द्वारा रचित गीत खूब सराहे जा रहे हैं। लेकिन उन्हें इस बात को लेकर काफी दुख व एतराज भी है कि वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले परमेश्वर यादव ने प्रस्तुति के क्रम में रचनाकार के रूप में उनके नाम का जिक्र नहीं किया, जिस पर इन्होंने आपत्ति प्रकट की है । उधर युट्यूब व ट्वीटर के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त श्री यादव ने इस संवाददाता को पूर्व में तो बताया कि उक्त गीत उन्हीं की रचना है ၊ जब उनसे पूछा गया तो आगे कहा कि जब वे मध्य विद्यालय में छात्र थे तभी 2006 में लिखा था ၊ किन्तु 2008 में मैट्रिक पास श्री यादव ने पुनः भूल सुधार करने की कोशिश की ၊

ईरान के उपराष्ट्रपति में दिखा संक्रमण,कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 2922 हुए


ईरानी अस्पताल में कोरोनोवायरस बॉडी बैग्स दिखाने का दावा करते हुए फुटेज सामने आया है - जैसा कि देश का पहला उपराष्ट्रपति 'संक्रमित है', बीमारी 8% सांसदों को प्रभावित कर चुकी है और 54,000 मतदाताओं को अभी छोड़ दिया जाता है। बीमारी फैलने से रोकें
तेहरान ने घोषणा की कि आज कुल संक्रमण बढ़कर २, ९ २२ हो गया और कहा गया कि देश के सबसे वरिष्ठ वीपी, इशाक जहाँगीरी, बीमारी का अनुबंध करने वाले नवीनतम हाई-प्रोफाइल व्यक्ति थे।

कथित रूप से चिकित्सा कर्मियों द्वारा फुटेज को उत्तरी ईरानी प्रांत के कोम शहर में एक अस्पताल में उसी नाम से दर्ज किया गया था, जहां कोरोनोवायरस, जिसे आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा COVID-19 नाम दिया गया था, पहली बार पता चला था।

रांची: रांची के दंपति में दिखे कोरोना के लक्षण, खिलाड़‍ियों का नॉनवेज रोका, हर हाथ में नींबू



रांची।
 कोरोना वायरस को लेकर झारखंड में भी धीरे-धीरे लोगों में दहशत का माहौल बन रहा है। रांची के रिम्स में कोरोना के चार संदिग्ध भर्ती किए जाने के बाद अब हर जगह कोरोना वायरस के बारे में बातें होने लगी हैं। इन संदिग्‍धों में दो रांची, एक धनबाद और एक पलामू का युवक है। इन सभी का आइसोलेशन वार्ड में इलाज रहा है। कहा जा रहा है कि फिलहाल चारों संदिग्धों में कोरोना के लक्षण देखे गए हैैं। इनका सैंपल जांच को कोलकाता भेजा गया है। बुधवार को इन चारों मरीजों का सैंपल जांच के लिए कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कोलरा एंड इंटेरिक डिजीज लैब भेजा गया है। जिन संदिग्धों का सैंपल लिया गया है उनमें से रांची के एक दंपती के अलावा पलामू और धनबाद के एक-एक संदिग्ध हैैं।
एहतियात के तौर पर सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार द्वारा देशभर में हाई अलर्ट जारी करने के बाद राज्य सरकार ने भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

रांची एयरपोर्ट पहुंचते ही खुद से 108 एंबुलेंस को फोन किया

पलामू के हैदरनगर निवासी 42 वर्षीय संदिग्ध मरीज चीन के वुहान से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। रांची एयरपोर्ट पहुंचते ही खुद से ही 108 एंबुलेंस को बुलाकर रिम्स पहुंचा। दूसरा मरीज धनबाद के सुसानबढिय़ा का रहने वाला है। 21 वर्षीय युवक किसी मोबाइल कंपनी के बुलावे पर चीन के गुआंगजोऊ गया हुआ था। रांची एयरपोर्ट से उसे कोराना के लक्षण की जांच के लिए सीधा रिम्स भेजा गया। वहीं अन्य दो मरीज रांची के दंपति हैं। छुट्टियां बिताने के लिए दोनों इंडोनेशिया गए थे। दोनों पति-पत्नी को शरीर में दर्द, सर्दी व खांसी की शिकायत थी। बुधवार सुबह रांची एयरपोर्ट उतरने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को सूचना दी गई और संदिग्धों को जांच के लिए रिम्स भेजा गया। सभी को रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

आइसोलेशन वार्ड में पांच बेड के साथ कमरा भी अलग

कोरोना के सभी संदिग्धों को फिलहाल रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। आइसोलेशन वार्ड में कोरोना वायरस के संदिग्ध के लिए अलग कमरे के साथ पांच बेड की व्यवस्था की गई है। उसी कमरे में इलाज के तमाम इंतजाम किए गए हैं। आइसोलेशन वार्ड में निगेटिव प्रेशर रूम नहीं होने के कारण किसी अन्य लोगों को बगैर एन 95 मास्क के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

राज्य सरकार द्वारा संचालित आवासीय सेंटर के खिलाडिय़ों को अगले आदेश तक नॉनवेज खाना नहीं दिया जाएगा। कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव को देखते हुए खेल विभाग ने यह निर्णय लिया है। इस संदर्भ में विभाग द्वारा सभी आवासीय सेंटर को यह आदेश जारी कर दिया गया है। आवासीय सेंटर के अलावा डे बोर्डिंग सेंटर के खिलाडिय़ों को भी इससे बचाने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।


विभाग द्वारा सभी सेंटर प्रशिक्षकों को आदेश दिया गया है कि खिलाडिय़ों को सही तरीके से हाथ धुलाए बिना खाना नहीं दिया जाए। प्रतिदिन सभी प्रशिक्षुओं को आधा नींबू का उपयोग अवश्य कराया जाए। खिलाडिय़ों को अगर किसी भी तरह की सर्दी-खांसी होती है, तो उन्हें अविलंब डॉक्टर के पास ले जाएं। जब तक अगला आदेश नहीं मिले, सभी को शाकाहारी भोजन दें।


विभाग ने डे बोर्डिंग सेंटर के प्रशिक्षुओं को इन सारी बातों की जानकारी देने का निर्देश दिया है, ताकि वे अपने घर में इसका इस्तेमाल करें। राज्य में अभी 26 आवासीय सेंटर व 85 डे बोर्डिंग सेंटर संचालित हैं। एक आवासीय सेंटर व डे बोर्डिंग सेंटर में 25 से 30 खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। राज्य खेल समन्वयक व लातेहार जिला खेल पदाधिकारी उमा जायसवाल ने बताया कि विभाग खिलाडिय़ों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह चौकस है। इसी के तहत यह निर्णय लिया गया है।

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...