Thursday, March 5, 2020

छब्बीस अक्षर अंगरेजिया नाम अल्फाबेट लागे रे की असलियत,काम किसी और का नाम किसी अन्य का


सोशल मीडिया में वायरल कोई बात किस कदर फैलती है इसका एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है ၊ हाल ही में खोरठा भाषा में कर्णप्रिय गीत के माध्यम से बच्चों को अंग्रेजी सिखाने वाले शिक्षक की बॉलीवुड में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन तथा प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने प्रशंसा की थी ၊ कई टीवी चैनलों ने आपाधापी में इसे मुख्य खबर तक बनाया ၊ लेकिन आपको बता दें कि इस गीत के रचयिता उक्त युवा शिक्षक नहीं बल्कि डुमरी निवासी सेवानिवृत पैंसठ वर्षीय शिक्षक राम किशुन सोनार हैं ၊ वे उत्क्रमित मध्य विद्यालय चेगड़ो (डुमरी-2 ,गिरिडीह ) से सेवा निवृत शिक्षक है व फिलहाल ग्राम जामतारा, थाना व अनुमंडल डुमरी, जिला गिरिडीह के निवासी हैं। यह पेशा से शिक्षक के अलावा कवि , गीतकार व रेडियो लोक गीत गायक कलाकार भी हैं । इनके खोरठा में लिखे सौ से भी अधिक गीत 'दुनिया हो गइले वीरान ,करलह बसंत चितचोरी , जे पियवा खातीर , उमड़ल बदरिया ,देश हो ले आजाद आदि कई पत्र पत्रिकाओं शशांक , सेवाति , नभाटा आदि में पूर्व में प्रकाशित हो चुके हैं ၊ उन्होंने बताया कि एक बार गिरिडीह डीएसइ के कार्यक्रम में आमंत्रण मिलने पर इन्होंने छब्बीस अक्षर अंग्रेजिया की रचना की थी ၊ इनका कहना है कि सेवाकाल के दौरान सर्व शिक्षा अभियान के तहत जहाँ कहीं प्रशिक्षण या कार्यक्रम हुआ करता था वे सक्रियता से सम्मिलित होते रहे हैं। यहाँ तक कि सेवा निवृति के बाद भी इन्हें उत्क्रमित +2 उच्च विद्यालय असुरबांध (डुमरी) गिरिडीह में डीईएलएड के प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किया गया था।वहां भी इन्होंने अपने बरसो पुराने गीत - "छब्बीस अक्षर अंगरेजिया नाम अल्फाबेट लागे रे" को प्रशिक्षण के दौरान प्रस्तुत किया था जिसे कई प्रशिक्षु युवकों ने अपने स्मार्ट मोबाइल फोन द्वारा रिकॉर्ड किया था। बाद में वही गीत इन दिनों वाट्सएप व यूट्यूब पर काफी चर्चित हो रहा है। हालांकि इस बात को लेकर इन्हें काफी खुशी है कि इनके द्वारा रचित गीत खूब सराहे जा रहे हैं। लेकिन उन्हें इस बात को लेकर काफी दुख व एतराज भी है कि वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर सुर्खियां बटोरने वाले परमेश्वर यादव ने प्रस्तुति के क्रम में रचनाकार के रूप में उनके नाम का जिक्र नहीं किया, जिस पर इन्होंने आपत्ति प्रकट की है । उधर युट्यूब व ट्वीटर के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त श्री यादव ने इस संवाददाता को पूर्व में तो बताया कि उक्त गीत उन्हीं की रचना है ၊ जब उनसे पूछा गया तो आगे कहा कि जब वे मध्य विद्यालय में छात्र थे तभी 2006 में लिखा था ၊ किन्तु 2008 में मैट्रिक पास श्री यादव ने पुनः भूल सुधार करने की कोशिश की ၊

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