Wednesday, March 4, 2020

ओमान में फंसे 11 भारतीय मजदूरों का दल लौटा वतन,परिजनों के खिल उठे चेहरे




अशोक कुमार
।#गिरिडीह। रोजी रोटी की तलाश और परिवार के लिए कुछ बेहतर करने की चाह रख कर नौजवान तबका प्रदेश की रुख करता है।अच्छी कमाई और बेहतर जीवन की तलाश में गिरिडीह,हजारीबाग,बोकारो व कोडरमा जिले के 30 मजदूर तीन वर्ष पूर्व ओमान की सफर पर बड़ी ही उम्मीद और जोश के साथ आंखों में एक सपना लिए रवाना हुए थे।मगर ओमान की राजधानी मसकट पहुंचने के बाद इन मजदूरों के साथ जो हुआ, उससे उनके सारे सपने चकनाचूर हो गए।आखिरकार बंधक सी जिंदगी गुजार रहे मजदूरों को वतन की याद सताने लगी और मजदूरों ने सोशल मीडिया प्रवासी ग्रुप के एडमिन सिकन्दर अली के माध्यम से लोगों से वतन वापसी में मदद की गुहार लगाई।जिसके बाद यह मामला मिडिया के माध्यम से तूल पकड़ा और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सौरेन ने इस मामले में पहल करते हुए ट्वीटर से विदेश मंत्रालय को अवगत कराया । लेकिन विदेश में फंसे इन भारतीय   मजदूरों को कोई  मदद नहीं मिल पायी।काफी कोशिशों के बाद हारकर परिवार वालो ने टिकट का पैसा भेजावाकर इनकी वतन वापसी करायी।मजदूरों के घर वापसी पर पूरे इलाके में खुशी की लहर है। वही घरवालों के चेहरे पर खुशी है।वापस आये मजदूरों में बगोदर प्रखंड के महुरी के खुबलाल पासवान,बेको के चंद्रीक महतो,टेकलाल महतो,मुंडरो के सोहनलाल महतो,प्रदीप महतो डुमरडेली के डुमरचंद महतो,तुकतुको के निर्मल महतो,सोहन महतो व कोडरमा के महेन्द्र सिंह शामिल हैं।जबकि 5 फरवरी गुरूवार दोपहर को बगोदर प्रखंड के बेको के संतोष कुमार महतो व अजय कुमार महतो बिष्णुगढ प्रखंड के बलकमका के रामचंद्र महतो व उदयपुर के जगदीश महतो की वतन वापसी होगी।गौरतलब कि 2017 में गिरिडीह, हज़ारीबाग़ बोकारो व कोडरमा जिले के 30 मजदूर एक एजेंसी के माध्यम से ओमान गए थे।वहाँ पर मजदूरों के साथ ना तो अच्छा व्यवहार किया जा रहा था और न ही उन्हें सात महीने से कोई वेतन दिया जा रहा था।एक लंबा अरसा गुजरने के बाद जब मजदूरों की स्थिति जस की तस बनी रही तो मजदूरों को अपने देश के मिट्टी की याद सताने लगी थी।

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