Friday, February 1, 2019

नवजात शिशुओं के मामले में झारखण्ड पुलिस पूरी संवेदनशीलता से काम करेगी और देश के सामने नई इबारत पेश करेगी


हजारीबाग ၊

सड़क किनारे, झाड़ियों में, कॉर्टन में मिले मृत बच्चों के शव किन परिस्थितियों में छोड़े गए हैं, उन्हें जीवितावस्था में छोड़ा गया या मृत्यु के बाद, यह जानना अत्यंत जरूरी है। 

यह भी जानना ज़रूरी है कि शिशु की हत्या करने के बाद तो कहीं शव को छोड़ा नहीं गया। इसके कारणों की तह तक जाना अत्यंत आवश्यक है, और यह तभी संभव हो सकता है जब इसमें पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझे और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए हर मामले की उपयुक्त धाराओं में एफआईआर दर्ज करें।

 उक्त बातें पालोना मुहिम चलाने वाली संस्था आश्रयणी फाउंडेशन की संस्थापक मोनिका गुंजन  आर्य ने कही। वह हजारीबाग स्थित पुलिस अकेडमी में प्रशिक्षु डीएसपी और सब इंस्पेक्टर्स को सम्बोधित कर रहीं थीं। इस मौके पर 20 से ज्यादा डीएसपी और 450 ट्रेनी सब इंस्पेक्टर (महिला व पुरुष) उपस्थित थे।


उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि झारखंड में यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इस अपराध की गम्भीरता को बताते हुए उन्होंने देश के अनेक हिस्सों में हुई ऐसी जघन्य घटनाओं की अनेक वीडियो फुटेज एवं तस्वीरे भी दिखाईं और बताया कि किस प्रकार पुलिस की सजगता से कुछ मामलों में दोषियों तक पहुंचा जा सका और कैसे इसकी कमी के कारण पर्याप्त क्लू होने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका। घटनाओं में संदेह होने के बाद भी यह नहीं जाना जा सका कि बच्चों की हत्या हुई है या मामला कुछ और है।

श्रीमती आर्य ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को इस प्रकार की घटनाओं में कानून क्या कहता है, कौन सी धाराएं लगती हैं,  पुलिस की क्या जिम्मेदारी- जवाबदेही होती है, इस बारे में विस्तार पूर्वक बताया।


आश्रयणी फाउंडेशन और इसकी मुहिम पालोना के बारे में उन्होंने बताया कि यह एकमात्र संगठन व अभियान है, जो इस मुद्दे पर सक्रिय है और इस अपराध पर रोक लगाने और नवजातों के जीवन को बचाने के प्रयासरत है। सेंसेटाइजेशन, सेंसिटिव जर्नलिज़्म, रिसर्च, एडवोकेसी और अवेयरनेस के माध्यम से लगातार इसे उठा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मोनिका आर्य द्वारा बीते 04 सालों का डेटा और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से उसकी तुलनात्मक विवेचना भी प्रस्तुत की गई।  इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि उक्त समय सीमा के अंदर झारखंड में कितने बच्चों के शव मिले हैं और कितने नवजात जिंदा मिले हैं।

कार्यक्रम के दौरान झारखण्ड में लग रहे क्रेडल्स की जानकारी भी दी गई और एक बच्चे के मिलने के बाद पुलिस को त्वरित गति से क्या-क्या करना चाहिए, ये भी बताया गया, जैसे बच्चे को सबसे पहले फर्स्ट एड, इलाज दिलवाना, फिर cwc को सूचित करना और एफआईआर दर्ज करना, मृत शिशु का पोस्टमार्टम करवाना, उसके अंतिम संस्कार की व्यवस्था, क्षेत्र की गैर सरकारी संस्थाओं की मदद से उपलब्ध करवाना आदि।

ट्रेनिंग सेशन को डीएसपी श्री राजकुमार महता ने भी सम्बोधित किया और ये विश्वास दिलवाया कि नवजात शिशुओं के मामले में झारखण्ड पुलिस पूरी संवेदनशीलता से काम करेगी और देश के सामने नई इबारत पेश करेगी।कार्यक्रम में पुलिस विभाग की ओर से डीएसपी श्री अजय कुमार झा, डीएसपी श्री रतिभान सिंह, डीएसपी श्री नवीन चन्द्र दास, डीएसपी श्री केदार नाथ व  पालोना की ओर से श्री प्रोजेश दास व श्री अमित कुमार भी मौजूद थे।

No comments:

Post a Comment

बांग्लादेश सरकार ने इस्कॉन संतों को भारत में प्रवेश से रोका

चौंकाने वाली खबर 🚨  बांग्लादेश ने 63 इस्कॉन भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोका सभी के पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा थे। आव्रज...