Wednesday, March 20, 2019

यमन में मानवीय और राजनीतिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित किया

यूरोपीय संघ की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में आया है कि यमन में मानवीय और राजनीतिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान को कमज़ोर करने के लिए नित नये प्रयास करते रहते हैं, ईरानोफोबिया को हवा देते रहते हैं इसी प्रकार वह ईरान के खिलाफ क्षेत्रीय देशों की सम्मिलिती से गठबंधन बनाने की बात करते हैं और उन्होंने ईरान के खिलाफ सबसे कड़ा प्रतिबंध भी लगा दिया है परंतु उनके इन समस्त प्रयासों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने मध्यपूर्व में ईरान की रचनात्मक भूमिका को स्वीकार किया है।

यूरोपीय संघ अमेरिका का बड़ा व महत्वपूर्ण भागीदार है और उसके तीन महत्वपूर्ण सदस्यों जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी क्षेत्र के महत्वपूर्ण मामलों के संबंध में तेहरान से विचार- विमर्श के जारी रहने पर बल दिया है।

इसी परिप्रेक्ष्य में यूरोपीय संघ ने एक विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की है कि ईरान और यूरोपीय संघ के चार देशों ने सोमवार को ब्रसल्ज़ में मध्यपूर्व के मामलों के संबंध में एक दूसरे से विचार- विमर्श किया है।

यूरोपीय संघ क्षेत्र में अपने हितों के दृष्टिगत सीरिया, इराक और यमन जैसे देशों में ईरान की रचनात्मक भूमिका से भली- भांति अवगत है और वह अच्छी तरह जानता है कि ईरान के ध्यान को आकर्षित किये बिना क्षेत्र में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकता।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति आयुक्त की सहायक हेलगा शिमिद की अध्यक्षता में ब्रसल्ज में यह बैठक हुई। इस बैठक में ईरानी प्रतिनिधिमंडल विदेशमंत्री के सहायक हुसैन जाबिरी अंसारी की अध्यक्षता में मौजूद था।

इस बैठक की समाप्ति पर यूरोपीय संघ की ओर से जो विज्ञप्ति जारी की गयी उसमें आया है कि इस बैठक में यमन में मानवीय और राजनीतिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इसी प्रकार इस बैठक में भाग लेने वालों ने निकट भविष्य में इस प्रकार की दूसरी बैठक करने पर सहमति की है।

यमन संकट के समाधान के संबंध में ईरान का दृष्टिकोण यह है कि राजनीतिक मार्ग से यमन संकट का समाधान किया जाये।

इसी प्रकार ईरान का मानना है कि इसके लिए यमन पर सऊदी अरब के हमलों को तुरंत बंद किया जाना चाहिये।

ब्रसल्ज़ में जो बैठक हुई यूरोपीय पक्ष ने भी इस बैठक में यमन संकट के समाधान के संबंध में ईरान जैसा दृष्टिकोण अपनाया है। इसी प्रकार इस बैठक में भाग लेने वाले समस्त पक्षों ने बल देकर कहा है कि यमन संकट का समाधान राष्ट्रसंघ की निगरानी में होना चाहिये। 

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