Saturday, March 23, 2019

तीन नेत्रहीन शिशुओं की बदनशीब माँ को है किसी फरिश्ते का इन्तेज़ार !

                                                                         

रांची ၊     अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव के आवेदन पर डी एल एस ए ने लिया संज्ञान।                                       डीएलएसए के सचिव ने रिम्स डायरेक्टर को पत्र लिख कर बच्चों का  समुचित इलाज हेतु  दिया निर्देश।रिम्स परिसर में पिछले पांच दिन से देवघर की एक  महिला जिसने एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया वो भटक रही थी क्योंकि उस महिला के तीनों नवजात बच्चे का आंख ख़राब था।                      .                             इस खबर के बाद अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव ने सिविल कोर्ट स्थित  डी एल एस ए के सचिव के  नाम एक पत्र लिखा और मांग किया कि उस महिला के तीनों बच्चों का  समुचित इलाज हो ।इस पत्र पर डी एल एस ए के सचिव ने संज्ञान लेते हुए रिम्स अधीक्षक को तत्काल एक पत्र लिख कर बच्चों के समुचित इलाज का इंतजाम का निर्देश दिया।साथ ही रिम्स स्थित महिला पी एल वी अनीता देवी को रिम्स पहुँच कर पीड़ित से बात कर इलाज हेतु मदद करने का आदेश दिया।                                                 देवघर में 8 फरवरी को तीन बच्चों को जन्म देने के बाद एक लाचार मां लगातार अस्पताल के चक्कर लगा रही थी। जन्म के बाद से ही तीनों बच्चों को अस्पताल में शारीरिक कमजोरी के कारण भर्ती कराना पड़ा। लगभग 20 दिनों तक देवघर के डॉ. सतीश ठाकुर की देखरेख में अस्पताल में रखने के बाद मां को बताया गया कि तीनों बच्चों की आंखें खराब हो चुकी हैं। उन्हें आंख के डॉक्टर के पास ले जाने की आवश्यकता है। इसके बाद परिजन बच्चों को डॉ. डीएन मिश्रा के पास ले गए, जहां तीनों को बेहतर इलाज के लिए रांची या पटना ले जाने की सलाह दी गई। 

 पैसे के अभाव में नहीं हो पा रहा है इलाज

तीनों बच्चों के लेकर उसके परिजन 5 दिन पहले कश्यप आई हॉस्पिटल पहुंचे। वहां तीनों बच्चों के इलाज पर लगभग 90 हजार रुपए खर्च हाेने की बात बताई गई। इतना ज्यादा पैसा नहीं होने की वजह से परिजन निराश होकर वहां से लौट आए। इसके बाद बच्चों को रिम्स में ले जाने का फैसला किया, लेकिन वहां भी निराशा ही हाथ लगी। रिम्स में बताया गया कि तीनों बच्चों की आंखों को लेजर ऑपरेशन से ठीक किया जा सकता है। हालांकि यहां बच्चों को लेजर ऑपरेशन करने वाली मशीन नहीं है। ऐसे में यहां इनका ऑपरेशन नहीं किया जा सकता है। इसके बाद तो परिजन परेशान हो गए। उनको समझ में नहीं आ रहा है कि वे तीनों बच्चों का इलाज कैसे कराएं। बच्चों के मामा विष्णु कुमार ने बताया कि फिलहाल उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हंै। बीच में पर्व होने की वजह से भी थोड़ी परेशानी हुई। अभी तक पैसे की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। 

तीनों बच्चों को लेकर मां-दादी मदद की जोह रही बाट

तीनों बच्चों को लेकर उसके मां-दादी रिम्स में ही है। मां-दादी को अभी भी भरोसा है कि उनके बच्चे का रिम्स में इलाज हाेगा। इलाज की आस में वे लोग रिम्स में बैठे हुए हैं। वहां से आने-जाने वाले लोगों को एक-टक देखते हुए सहायता करने की आस लगाए हुए हैं। हालांकि शुक्रवार की देर रात तक पीड़ित परिवार की सहायता के लिए कोई आगे नहीं आया था। 

सवा माह के तीन बच्चे को लेकर रिम्स के बरामदे में पड़ी है मां

सवा माह के तीन बच्चों को लेकर पिछले पांच दिनों से एक मां रिम्स के बरामदे में पड़ी हुई है। क्योंकि एक साथ जन्म लिए तीनों बच्चों की आंखें खराब हो गई हैं। बच्चों की आंखों के इलाज के लिए परिवार के पास पैसे नहीं हैं, ऐसे में उन्हें कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा है। राज्य के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान में बच्चों की आंखों में रोशनी आ जाएगी, इस भरोसे में मां इंदू देवी रिम्स के बरामदा से हटने का नाम नहीं ले रही है। जबकि रिम्स के कर्मचारियों ने उसे बता दिया है कि लेजर ऑपरेशन करने की मशीन यहां नहीं है। बच्चे को बाहर ले जाना पड़ेगा, तभी आंखों की रोशनी लौट सकती है। इसके बावजूद इंदू देवी रिम्स से टस से मस नहीं हुई। पूछने पर एक ही रट लगाती है कि मेरे बच्चों की आंखों की रोशनी लौटा दो, ताकि वे दुनिया देख सकंे। उसके परिजनों ने रिम्स के कई कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन डॉक्टर तक पहुंचाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। ऐसे में अब मां के साथ पूरे परिवार का भरोसा सिस्टम से उठ रहा है। इंदू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना से गरीबों का इलाज कराने का वादा किया था, लेकिन जब रिम्स में ऑपरेशन करने की मशीन नहीं है तो ऐसी योजना का क्या फायदा है।

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