#झामुमो के संस्थापक सदस्य अजीत का शव का कोई दावेदार नहीं धनबाद । झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सदस्य हीरापुर ज्ञान मुखर्जी रोड निवासी 66 वर्षीय अजीत सेनगुप्ता ने अपने घर में रविवार की मध्य रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अजीत ने अपने छोटे भाई गौतम सेनगुप्ता पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते हुए दीवार पर ही सुसाइड नोट लिखा था।तीन दिनों से पड़ा था शव ၊ पोस्टमार्टम के बाद अजीत का शव पीएमसीएच में पड़ा हुआ था। शव को लेने के लिए कोई दावेदार सामने नहीं आ रहा है। गिरफ्तारी के डर के अजीत के भाई गाैतम सेनगुप्ता फरार हो गए हैं। उन पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है।झामुमो के धनबाद नगर अध्यक्ष देबू महतो ने धनबाद थाना में लिखित शिकायत कर अजीत के तीन भाई-बहनों पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि पैतृक संपत्ति के लिए सब मिलकर प्रताड़ित करते थे। अजीत अविवाहित थे। पोस्टमार्टम के बाद परिवार का कोई सदस्य शव लेने पीएमसीएच नहीं पहुंचा। इसलिए शव पीएमसीएच में ही पड़ा था। नियमानुसार अगर कोई शव लेने सामने नहीं आता है तो तीन दिन बाद ही उसका दाह-संस्कार किया जा सकता है। देबू महतो ने बताया कि झामुमो नियमानुसार अजीत का दाह-संस्कार करेगा।
अजीत ने दीवारों पर लिखे सुसाइड नोट में कहा है- वे अपने घर के दो कमरे झामुमो कार्यालय के लिए दे रहे हैं। घर के पीछे उनके हिस्से की चार कट्ठा जमीन बांग्ला उन्नयन समाज को दे दी जाए। 6 सितंबर को उन्होंने अपने कमरे की दीवार पर लिखकर यह इच्छा जाहिर की थी। धनबाद थाना प्रभारी नवीन कुमार राय ने बताया कि मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा लग रहा है। भाई-बहन पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है। अजीत के भाई फरार हैं। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
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