धनबाद।
दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के कमांड क्षेत्र हजारीबाग, चतरा, धनबाद, कोडरमा, रामगढ़, बोकारो और गिरिडीह में हर दिन 18 घंटे का पावर कट से जनता त्राहि-त्राहि है। बिजली कटौती के मद्देनजर डीवीसी के कमांड क्षेत्र वाले इन सात जिलों में हाहाकार मचा है। डीवीसी ने राज्य सरकार पर लगभग 4995 करोड़ रुपये की बकाया राशि के भुगतान को लेकर झारखंड के अपने कमांड एरिया में चरणबद्ध तरीके से 18 घंटे बिजली कटौती करनी शुरू कर दी है।
18 घंटे बिजली कटौती की समस्या को लेकर आज बैंक मोड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स ने कार्यकारिणी समिति की आपातकालीन बैठक की।
बैठक में चेंबर के अध्यक्ष प्रभात सुरोलिया ने कहा कि दिन में 18 - 18 घंटे बिजली कटौती से उद्योग, व्यापार के साथ साथ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा यहां के कोयला और पानी से दूसरे शहर और राज्य रोशन हो रहे हैं और यहां की जनता की घोर उपेक्षा का सामना कर रही है। उन्होंने कहा बिजली विभाग के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है और समस्या का तत्काल निवारण करने का आग्रह किया है।
सचिव प्रमोद गोयल ने कहा कि बिजली समस्या की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उपभोक्ता नियमित रुप से बिजली विपत्र का भुगतान करती है। डीवीसी और सरकार के बीच भुगतान के संबंध में जो भी पेंच है, उसका हल सरकार को शीघ्र निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि चेंबर हमेशा जनहित के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ा है। इस गंभीर मुद्दे पर भी चेंबर शांत नहीं रहेगा। समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो चेंबर आंदोलन करने को बाध्य होगा।
चेंबर के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि डीवीसी द्वारा 18 घंटे का पावर कट सुनियोजित साजीश के तहत किया जा रहा है। इस विकट परिस्थिति का ठिकरा सरकार और डीवीसी एक दूसरे पर फोड़ रहे हैं। इस समस्या से उपभोक्ताओं का लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा बिजली कटौती से जहां उद्योग धंधे चौपट हो रहे हैं वहीं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि डीवीसी को स्पष्ट रूप से संदेश देना होगा कि झारखंड में प्लांट है तो झारखंड की जनता की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
बैठक में लोकेश अग्रवाल, सुदर्शन जोशी, संजय लोधा, सुशील नारनोली, संदीप मुखर्जी, नितीन पटेल सहित अन्य सदस्यों ने अपने अपने विचार प्रकट किए।

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